औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास (पुस्तक 2, अध्याय 5) का त्वरित सार, परीक्षा से ठीक पहले रिवीज़न के लिए, हर परिभाषा, नामित तथ्य और मुख्य आँकड़े सहित। विस्तृत व्याख्या और उदाहरणों के लिए संपूर्ण नोट्स अलग से पढ़ें।
1 औद्योगिक समाज की कल्पना
2 भारत में औद्योगीकरण: मुख्य आँकड़े
| आँकड़ा (2018-19) | मान |
|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्र रोज़गार हिस्सा | लगभग 43% |
| द्वितीयक क्षेत्र रोज़गार हिस्सा | लगभग 25% |
| तृतीयक क्षेत्र रोज़गार हिस्सा | लगभग 32% |
| स्व-रोज़गार कामगार | 52% से अधिक |
| नियमित वेतनभोगी कामगार | लगभग 24% |
| अनियमित मज़दूर | लगभग 24% |
| असंगठित/अनौपचारिक क्षेत्र में कार्य | 90% से अधिक |
| संगठित क्षेत्र (एक परिभाषा) | इकाई में 10 या अधिक लोग पूरे वर्ष रोज़गार में; सरकारी पंजीकरण होना चाहिए |
3 उदारीकरण: याद रखने योग्य तथ्य
4 लोग काम कैसे पाते हैं
स्व-रोज़गार
निजी संपर्कों पर निर्भर, मोबाइल फ़ोन से ग्राहकों तक पहुँच बढ़ी
फ़ैक्ट्री का रास्ता
पहले कानपुर में रोज़गार दिलाने वाले मिस्त्री; आजकल उनका महत्त्व कम, कार्यकारिणी और यूनियन भर्ती में भूमिका निभाते हैं; बदली कामगारों को सबके समान स्थायी पद और सुरक्षा नहीं
सरकारी योजनाएँ
मुद्रा योजना, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया: रोज़गार और स्व-रोज़गार दोनों बढ़ाना
5 काम को किस तरह किया जाता है
| उदाहरण | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| रामचंद्र (कानपुर बुनकर) | कपड़ा मिल के कामगार अपने आप को मशीन के विस्तार की तरह वर्णित करते हैं; “जब चार मशीनें चल रही हों तो चारों को चलना चाहिए, उन्हें रुकना नहीं चाहिए” (जोशी, 2003) |
| गांधी (1924, क्रियाकलाप 5.2 में उद्धृत) | “मशीनों के प्रति पागलपन” का विरोध; 1934: चर्खा अपनाने से बेरोज़गारी का समाधान और शोषण का अंत |
| मारुति उद्योग लिमिटेड | 2 कार/मिनट; कुल 45 मिनट विश्राम; 40 वर्ष तक थककर स्वैच्छिक अवकाश |
| बॉक्स 5.1, “समय की चाकरी” (केरोल उपाध्या, 2005) | 10-12 घंटे आईटी कार्यदिवस, “नाइट आउट”, “फ्लैक्सी-टाइम” |
| हैरी ब्रेवरमैन | दक्षता ह्रास: ब्रेवरमैन का तर्क है कि मशीनों का प्रयोग कार्यकर्ताओं की दक्षता को कम करता है (पहले वास्तुकार नक्काशी में भी दक्ष थे, अब कंप्यूटर उनके बहुत से काम कर देता है) |
6 कार्यावस्थाएँ और घरेलू काम
7 सभी परिभाषाएँ एक जगह
8 1982 की बंबई टैक्सटाइल स्ट्राइक
मैनेजर
मैनेजर दो तरीकों से अधिक काम कराता है: कार्य के घंटों में वृद्धि, या निर्धारित समय में उत्पादन बढ़ाना
अभिसरण (क्लार्क कैर)
21वीं शताब्दी का भारत, 19वीं शताब्दी के भारत के बजाय 21वीं शताब्दी के चीन या संयुक्त राज्य जैसा अधिक होगा? (क्रियाकलाप 5.1)
प्रश्न 1 की चार पंक्तियाँ
(क) सामाजिक संघटन: जाति, जेंडर, आयु, क्षेत्र; (ख) मज़दूर प्रक्रिया; (ग) वेतन एवं अन्य सुविधाएँ; (घ) कार्यावस्था: सुरक्षा, आराम का समय, कार्य के घंटे
- मार्क्स, वेबर, दुर्खाइम: उद्योग नगरीकरण और अनजान व्यावसायिक संबंध लाता है; ‘अलगाव’ मार्क्स का शब्द
- सामाजिक असमानता घटने पर भी आय-असमानता बढ़ रही है
- भारत 2018-19: लगभग 43% प्राथमिक, 25% द्वितीयक, 32% तृतीयक; 90% से अधिक कार्य असंगठित
- उदारीकरण (1990 से): पारले-कोका कोला, मॉडर्न फूड का विनिवेश, बाह्यस्रोतीकरण
- बदली कामगार, मिस्त्री, मुद्रा योजना/आत्मनिर्भर भारत/मेक इन इंडिया योजनाएँ
- मारुति उद्योग लिमिटेड मशीनी गति का काम दिखाता है; बॉक्स 5.1 आई.टी. में टायलरिज्म लेबर प्रक्रिया दिखाता है; ब्रेवरमैन का दक्षता-ह्रास तर्क
- खनन: 5.5 लाख कोयला कामगार, खदान एक्ट 1952/व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति कोड 2020
- बीड़ी उद्योग: तेंदु पत्ते से ठेकेदार, घरेलू कामगार, उत्पादक, वितरक और थोक विक्रेता होते हुए पान की दुकान तक
- 1982 की बंबई टैक्सटाइल स्ट्राइक: डॉ. दत्ता सामंत, ~ढाई लाख मज़दूर, ~2 वर्ष, ~1 लाख की नौकरी गई