नोट: यह अध्याय CBSE कक्षा 12 समाजशास्त्र के 2026-27 पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है (CBSE ने इसे हटा दिया है)। अन्य बोर्डों के छात्र अपने बोर्ड का नवीनतम पाठ्यक्रम देखें।
इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. मास मीडिया क्या है?
उत्तर: वे संचार रूप, जैसे टेलीविज़न, समाचारपत्र, फ़िल्में, पत्रिकाएँ, रेडियो, विज्ञापन, विडियो खेल और सीडी, जो एक साथ बहुत बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचते हैं।
प्र. आधुनिक मुद्रण तकनीक किसने और कब विकसित की?
उत्तर: जोहान गुटनबर्ग ने, 1440 में।
प्र. बेनेडिक्ट ऐंडरसन के अनुसार ‘काल्पनिक समुदाय’ क्या है?
उत्तर: एक ऐसा राष्ट्र जिसके सदस्य एक-दूसरे को कभी नहीं जानते, फिर भी एक बड़े परिवार के हिस्से जैसा महसूस करते हैं।
प्र. भारत के पहले लंबे समय तक चलने वाले सोप ओपेरा का नाम बताइए।
उत्तर: हम लोग (1984-85)।
प्र. भारत में निजी स्वामित्व वाले एफ.एम. रेडियो स्टेशन किस वर्ष आए?
उत्तर: 2002 में।
प्र. सूचनारंजन (इनफोटेनमैंट) क्या है?
उत्तर: समाचार सामग्री में सूचना और मनोरंजन का मिश्रण, जिसे समाचारपत्रों ने अलग-अलग रुचि वाले पाठकों को बनाए रखने के लिए अपनाया।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. ब्रिटिश शासन में समाचारपत्रों का प्रभाव उनके प्रसार से कहीं ज़्यादा क्यों था?
उत्तर: साक्षरता कम होने से प्रसार खुद सीमित था। पर खबरें और सूचनाएँ बाज़ारों, व्यापारिक केंद्रों, न्यायालयों और कस्बों में मुँह-ज़बानी फैलती थीं, इसीलिए इनका असली प्रभाव बिकने वाली प्रतियों से कहीं ज़्यादा दूर तक पहुँचता था।
प्र. बॉक्स 7.1 में दिए गए किन्हीं चार प्रारंभिक भारतीय समाचारपत्रों के नाम, भाषा और वर्ष बताइए।
उत्तर: इनमें से कोई चार: संवाद-कौमुदी (बंगला, 1821); मिरात-उल-अखबार (फ़ारसी, 1822); बॉम्बे समाचार (गुजराती, 1822); शोम प्रकाश (बंगला, 1858); दि टाइम्स ऑफ़ इंडिया (अंग्रेज़ी, मुंबई, 1861); दि पायनियर (अंग्रेज़ी, इलाहाबाद, 1865); दि स्टेट्समैन (अंग्रेज़ी, कोलकाता, 1875)।
प्र. स्वतंत्र भारत के मीडिया के दृष्टिकोण में सरकार के फ़िल्म प्रभाग की क्या भूमिका थी?
उत्तर: सरकार के फ़िल्म प्रभाग ने समाचार और वृत्तचित्र बनाए, जो हर सिनेमाघर में हर फ़िल्म से पहले दिखाए जाते थे और दर्शकों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते थे।
प्र. स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में मीडिया को किन सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया, कोई दो बताइए।
उत्तर: इनमें से कोई दो: अस्पृश्यता, बाल विवाह, विधवा बहिष्कार, या जादू-टोना और विश्वास-चिकित्सा जैसे अंधविश्वास, ताकि आधुनिक औद्योगिक समाज के लिए तर्कसंगत और वैज्ञानिक स्वभाव बढ़े।
प्र. कार्यक्रमों के वाणिज्यिक होने पर भारतीय टेलीविज़न पर मनोरंजन कार्यक्रम क्यों बढ़े?
उत्तर: जब कार्यक्रमों में विज्ञापन शामिल किए जाने लगे, तो लक्ष्यगत दर्शक वर्ग नगरीय उपभोक्ता वर्ग की ओर झुक गया, इसीलिए इस वर्ग को आकर्षित करने के लिए मनोरंजन कार्यक्रम बढ़ा दिए गए।
प्र. बॉक्स 7.13 के अनुसार ‘सोप ओपेरा’ क्या है?
उत्तर: एक धारावाहिक, लगातार चलने वाली कहानी, जिसका कोई निश्चित अंत नहीं होता जब तक इसे प्रसारण से पूरी तरह हटा न लिया जाए; अलग-अलग कहानियाँ खत्म हो सकती हैं और पात्र आते-जाते रह सकते हैं, पर नियमित दर्शक पात्रों के व्यक्तित्व और जीवन-अनुभवों से परिचित हो जाते हैं।
प्र. पुस्तक के अनुसार भारत के निजी एफ.एम. चैनल किसी ख़ास तरह के लोकप्रिय संगीत में विशेषज्ञता क्यों रखते हैं?
उत्तर: क्योंकि निजी एफ.एम. चैनलों को कोई भी राजनीतिक समाचार बुलेटिन प्रसारित करने की अनुमति नहीं है, इसीलिए अपने श्रोताओं को बनाए रखने के लिए वे किसी ख़ास तरह के लोकप्रिय संगीत में विशेषज्ञता रखते हैं।
प्र. पुस्तक वृद्ध और युवा समाचारपत्र पाठकों की पढ़ने की आदतों में क्या अंतर बताती है?
उत्तर: वृद्ध पाठक पूरा समाचारपत्र पढ़ते हैं, जबकि युवा पाठकों की अक्सर ख़ास रुचियाँ होती हैं, जैसे खेल, मनोरंजन या सामाजिक गपशप, और वे सीधे उन्हीं पन्नों पर चले जाते हैं।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. पुस्तक के अपने किन्हीं दो कारणों से समझाइए कि समाजशास्त्र के छात्रों को मास मीडिया की वृद्धि का अध्ययन क्यों दिलचस्प लगता है।
उत्तर: नीचे दिए चार में से कोई दो, समझाकर: (1) ऐतिहासिक वृद्धि: मीडिया की संरचना और विषय-वस्तु आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों से तय होती है, जैसे स्वतंत्रता के बाद राज्य की प्रमुख भूमिका और 1990 के बाद भूमंडलीकरण में बाज़ार की बढ़ती भूमिका। (2) द्वंद्वात्मक संबंध: मीडिया और समाज दोनों दिशाओं में एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। (3) औपचारिक संगठन: जनसंचार को बड़े पैमाने की पूँजी, उत्पादन और प्रबंधन के लिए औपचारिक संगठन चाहिए, इसीलिए राज्य और/या बाज़ार की प्रमुख भूमिका रहती है। (4) असमान पहुँच: अलग-अलग वर्ग के लोग मीडिया का प्रयोग अलग-अलग आसानी से कर पाते हैं, जो डिजिटल अंतर की अवधारणा से जुड़ा है।
प्र. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन में भारत की मास मीडिया की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर: समाचारपत्र, पत्रिकाएँ, फ़िल्में और रेडियो ही मास मीडिया का पूरा दायरा थे। रेडियो पूरी तरह राज्य के स्वामित्व में था, इसलिए उस पर राष्ट्रीय विचार व्यक्त नहीं किए जा सकते थे। समाचारपत्र और फ़िल्में स्वायत्त तो थीं, पर ब्रिटिश राज उन पर कड़ी नज़र रखता था। साक्षरता कम होने से अंग्रेज़ी और देशी भाषाओं के समाचारपत्रों का प्रसार सीमित था, पर उनका प्रभाव मुँह-ज़बानी फैलने से कहीं ज़्यादा था। प्रिंट मीडिया में ‘स्वतंत्र भारत’ को लेकर कई तरह की राय थीं, जो स्वतंत्र भारत में भी जारी रहीं।
प्र. स्वतंत्रता से आज तक आकाशवाणी के अपने ढाँचे की वृद्धि को पुस्तक के आंकड़ों के साथ बताइए।
उत्तर: स्वतंत्रता (1947) के समय आकाशवाणी के पास केवल 6 रेडियो स्टेशन थे, महानगरों में, और 35 करोड़ की जनसंख्या के लिए 2,80,000 रेडियो रिसीवर सेट थे। 1950 तक 5,46,200 रेडियो लाइसेंस हो गए। स्वतंत्रता के बाद सरकार ने रेडियो के विस्तार को प्राथमिकता दी, ख़ासकर राज्यों की राजधानियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में, और राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व स्थानीय तीन स्तरों की संरचना बनाई। आज आकाशवाणी 480 स्टेशन और 681 ट्रांसमीटर तक पहुँच गई है, जो 92% क्षेत्र में फैली 99% जनसंख्या को कवर करती है।
प्र. ‘साइट’ प्रयोग और दूरदर्शन के शुरुआती विस्तार का वर्णन कीजिए।
उत्तर: साइट ने अगस्त 1975 से जुलाई 1976 के बीच छह राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक दर्शकों को सीधे प्रसारण किया, जो प्रतिदिन चार घंटे तक 2,400 टीवी सेटों पर सीधे प्रसारित होता था। इसी दौरान दूरदर्शन ने 1975 तक दिल्ली, मुंबई, श्रीनगर और अमृतसर में केंद्र स्थापित किए, और एक ही वर्ष में कोलकाता, चेन्नई और जालंधर में तीन और केंद्र जोड़े। हर केंद्र में समाचार, बच्चों और महिलाओं के कार्यक्रम, किसानों के कार्यक्रम और मनोरंजन का अपना मिश्रण होता था।
प्र. पुस्तक के अनुसार टेलीविज़न और इंटरनेट के बढ़ने के बावजूद भारत में प्रिंट मीडिया क्यों नहीं घटा? दो कारण बताइए।
उत्तर: बहुत लोगों को डर था कि टेलीविज़न और इंटरनेट के बढ़ने से प्रिंट मीडिया पीछे छूट जाएगा, पर भारत में प्रसार बल्कि बढ़ ही गया। दो कारण: (1) शहरों में बसने वाले साक्षर लोगों की संख्या बढ़ना; (2) छोटे शहरों और गाँवों के पाठकों की ज़रूरतें शहरी पाठकों से अलग होना, जिन्हें मलयाला मनोरमा, ईनाडु और दैनिक भास्कर जैसे भारतीय भाषा के समाचारपत्रों ने ज़िला और ब्लॉक संस्करणों से पूरा किया।
प्र. बॉक्स 7.10 के अनुसार तकनीक ने समाचारपत्र उत्पादन और संवाददाता के काम को कैसे बदला?
उत्तर: 1980 के दशक के अंत से समाचारपत्र संवाददाता की डेस्क से अंतिम पेज़-प्रूफ तक पूरी तरह स्वचालित हो गए, जिससे कागज़ का प्रयोग समाप्त हुआ, यह लैन से जुड़े पीसी और ‘न्यूज़मेकर’ जैसे सॉफ़्टवेयरों से संभव हुआ। संवाददाता के पुराने औज़ार, यानी आशुलिपि पुस्तिका, पेन, टाइपराइटर और पुराना टेलीफ़ोन, अब डिजिटल रिकॉर्डर, लैपटॉप या पीसी, मोबाइल या सेटेलाइट फ़ोन, मॉडेम, डिश और एंटीना से बदल गए, जैसा अमर उजाला के लगभग 100 संवाददाताओं और फ़ोटोग्राफरों के नेटवर्क में दिखता है, जो उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल के 13 संस्करणों को सामग्री देते हैं।
प्र. स्टार टीवी ने भारतीय बाज़ार के लिए अपने कार्यक्रमों का स्थानीयकरण कैसे किया?
उत्तर: स्टार प्लस, जो पहले हांगकांग से चलने वाला पूरी तरह अंग्रेज़ी मनोरंजन चैनल था, ने अक्तूबर 1996 से शाम 7 से 9 बजे तक हिंदी कार्यक्रमों की पट्टी शुरू की। फ़रवरी 1999 तक यह पूरी तरह हिंदी चैनल बन गया, और अपने अंग्रेज़ी धारावाहिक स्टार वर्ल्ड को दे दिए, जो नेटवर्क का अंग्रेज़ी अंतरराष्ट्रीय चैनल है। इस बदलाव को बढ़ावा देने वाला हिंग्लिश नारा था ‘आपकी बोली। आपका प्लस प्वाइंट’ (बूचर, 2003)। स्टार स्पोर्ट्स और ईएसपीएन ने भी हिंदी ऑडियो ट्रैक दिए, और बड़ी कंपनियों ने बंगला, पंजाबी, मराठी और गुजराती में क्षेत्रीय चैनल शुरू किए।
प्र. भारत में एफ.एम. रेडियो के भविष्य को लेकर पुस्तक क्या संभावना देखती है, और क्यों?
उत्तर: पुस्तक एफ.एम. चैनलों के प्रयोग की संभावना को बहुत बड़ा मानती है। रेडियो स्टेशनों के और अधिक निजीकरण और समुदाय-स्वामित्व वाले रेडियो स्टेशनों के उदय से इसकी वृद्धि होने की उम्मीद है। स्थानीय समाचारों की माँग बढ़ रही है, और भारत में एफ.एम. सुनने वाले घरों की बढ़ती संख्या बड़े नेटवर्कों की जगह स्थानीय रेडियो के विश्वव्यापी रुझान से मेल खाती है, जैसा राघव एफ.एम. मंसूरपुर 1 (बॉक्स 7.14) की कहानी असल में दिखाती है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. अध्याय चार कारण बताता है कि समाजशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए मास मीडिया की वृद्धि क्यों बहुत रुचिकर है। चारों को समझाइए।
उत्तर: ऐतिहासिक वृद्धि: मीडिया की संरचना और विषय-वस्तु आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों से तय होती है; स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशकों में राज्य हावी रहा, और 1990 के बाद भूमंडलीकरण में बाज़ार की भूमिका बढ़ी।
द्वंद्वात्मक संबंध: मीडिया और समाज एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं; मीडिया की प्रकृति उस समाज से तय होती है जिसमें यह स्थित है, और साथ ही समाज पर मीडिया का दूरगामी प्रभाव भी पड़ता है।
औपचारिक संगठन: सामान्य संचार के विपरीत, जनसंचार को बड़े पैमाने की पूँजी, उत्पादन और प्रबंधन के लिए एक औपचारिक संरचनात्मक संगठन की ज़रूरत होती है, इसीलिए राज्य और/या बाज़ार की प्रमुख भूमिका रहती है, और मास मीडिया बहुत बड़े संगठनों और भारी निवेश से चलता है।
असमान पहुँच: अलग-अलग वर्ग के लोग मास मीडिया का प्रयोग अलग-अलग आसानी से कर पाते हैं, जो डिजिटल अंतर की अवधारणा से जुड़ा है।
प्र. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और आपातकाल की घोषणा तक, स्वतंत्र भारत के प्रिंट मीडिया की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान: 19वीं सदी के समाज सुधारक समाचारपत्रों और पत्रिकाओं में लिखते और वाद-विवाद करते थे; राष्ट्रवादी प्रेस ने उपनिवेश-विरोधी जनमत को जागृत किया, जिससे औपनिवेशिक सेंसरशिप आई (जैसे इलबर्ट बिल आंदोलन, 1883, के बाद)। केसरी, मातृभूमि और अमृतबाज़ार पत्रिका जैसे पत्र राष्ट्रीय आंदोलन के समर्थन के कारण उत्पीड़ित हुए, पर उन्होंने समर्थन जारी रखा।
स्वतंत्रता के बाद: प्रिंट मीडिया राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बना रहा, विकासात्मक मुद्दों को उठाता और बड़े वर्ग की आवाज़ बुलंद करता रहा; पत्रकारिता, जो पहले कम पैसे वाला एक ‘अंतरात्मा से प्रेरित कार्य’ थी, धीरे-धीरे एक व्यवसाय बन गई (बॉक्स 7.6, दि हिंदू के अपने रूपांतरण के उदाहरण के साथ)।
आपातकाल (1975-77): मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती 1975 में आपातकाल की घोषणा और उसके बाद की सेंसरशिप थी; यह दौर समाप्त हुआ और 1977 में लोकतंत्र तथा स्वतंत्र मीडिया दोनों बहाल हुए।
प्र. पुस्तक के अपने आंकड़ों के साथ भूमंडलीकरण के दौर में भारतीय भाषा के समाचारपत्रों की वृद्धि का वर्णन कीजिए।
उत्तर: कुल प्रसार वृद्धि: औसत दैनिक प्रसार 2006 के 39.1 मिलियन प्रतियों से बढ़कर 2016 में 62.8 मिलियन हो गया, जो 4.87% की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर है; उत्तर क्षेत्र में सबसे तेज़ वृद्धि (7.83%) रही, इसके बाद दक्षिण (4.95%), पश्चिम (2.81%) और पूर्व (2.63%)।
अग्रणी दैनिक: जुलाई-दिसंबर 2016 की औसत बिक्री के अनुसार दैनिक जागरण (3.92 मिलियन) और दैनिक भास्कर (3.81 मिलियन) शीर्ष हिंदी दैनिक रहे (स्रोत: ऑडिट ब्यूरो सर्कुलेशन, 2016-17)।
ईनाडु का उदाहरण: संस्थापक रामोजी राव ने 1974 में तेलुगु पत्र शुरू करने से पहले एक चिट-फंड चलाया था; मध्य-1980 के दशक के अरक-विरोधी आंदोलन से जुड़कर यह देहातों तक पहुँचा, और 1989 में ‘ज़िला दैनिक’ शुरू किए; 1998 तक यह आंध्र प्रदेश के 10 शहरों से छपता था और तेलुगु दैनिक प्रसार का 70% इसी का था।
वृद्धि के कारण: शहरों में बसने वाले साक्षर लोगों की बढ़ती संख्या (जैसे दिल्ली का हिंदुस्तान संस्करण, जो 2003 के 64,000 से बढ़कर 2005 में 4,25,000 हुआ), और भारतीय भाषा के पत्रों के ज़िला/ब्लॉक संस्करण जो स्थानीय पाठकों की ज़रूरतें अंग्रेज़ी राष्ट्रीय दैनिकों से अलग तरीके से पूरी करते थे।
प्र. ‘भारत में टेलीविज़न, दूरदर्शन के शुरुआती दौर से भूमंडलीकरण के युग तक बहुत बदल गया है।’ दोनों दौर के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
उत्तर: दूरदर्शन का शुरुआती दौर: टीवी 1959 में ग्रामीण विकास के लिए प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ; साइट (1975-76) ने छह राज्यों के ग्रामीण दर्शकों तक पहुँच बनाई; दूरदर्शन ने 1975 तक चार शहरों में केंद्र स्थापित किए और एक साल में तीन और जोड़े; रंगीन प्रसारण 1982 के एशियाई खेलों में शुरू हुआ; हम लोग और बुनियाद जैसे सोप ओपेरा, तथा रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्य, 1980 के दशक के मध्य-अंत में भारी दर्शक संख्या और विज्ञापन राजस्व लेकर आए।
भूमंडलीकरण का युग: भारत 1991 के एक राज्य-नियंत्रित चैनल से 1998 तक लगभग 70 चैनलों तक पहुँच गया; 1991 के खाड़ी युद्ध (जिसने सीएनएन को लोकप्रिय बनाया) और उसी वर्ष स्टार-टीवी की शुरुआत, इसके बाद ज़ी टीवी (1992), ने निजी उपग्रह टेलीविज़न के आगमन का संकेत दिया; 2000 तक 40 निजी केबल/उपग्रह चैनल थे, जिनमें क्षेत्रीय चैनल भी शामिल थे; केबल ऑपरेटर 1984 के 100 से बढ़कर 1999 तक लगभग 60,000 हो गए।
स्थानीयकरण और आज: विदेशी चैनलों ने सामग्री का स्थानीयकरण किया (जैसे स्टार प्लस का 1996-99 का हिंदीकरण); पुस्तक के अनुसार (ट्राई, 2015-16), भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा टीवी बाज़ार बन गया, और मनोरंजन टेलीविज़न ने रियलिटी शो जैसे नए प्रारूपों के साथ नए सुपरस्टार पैदा किए।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक यह बचाव अभियान किस राज्य में हुआ?
उत्तर: हरियाणा में।
(ख) 2 अंक पुस्तक इस कवरेज के संदर्भ में ‘ताक-झाँक’ (वॉयरिज़्म) का विचार क्यों उठाती है?
उत्तर: क्योंकि दो समाचार चैनलों ने एक बच्चे के निजी संकट की लगातार, विशेष सीधी कवरेज दो दिनों तक दिखाई, जिसमें उसकी परेशानी की तस्वीरें और लोगों के साक्षात्कार शामिल थे, यह सब ऊँची दर्शक संख्या पाने के लिए किया गया, जिसे पुस्तक किसी और के निजी, आत्मीय क्षणों में झाँकने जैसा बताती है।
(ग) 3 अंक यह घटना टेलीविज़न और भारत के सार्वजनिक जीवन के संबंध के बारे में क्या दिखाती है?
उत्तर: यह टेलीविज़न की पूरे देश में तुरंत भावनात्मक जुड़ाव पैदा करने की ताक़त दिखाती है, यानी हज़ारों लोगों का जुटना, मुफ़्त सामुदायिक भोजन चलना, और अलग-अलग धर्मों के लोगों का साथ प्रार्थना करना, पर साथ ही यह भी दिखाती है कि चैनलों के बीच विशेष कवरेज पाने की होड़ किसी परिवार के संकट को मनोरंजन में बदल सकती है, जिससे यह सवाल उठता है कि टेलीविज़न की सकारात्मक भूमिका कहाँ खत्म होती है और निजी जीवन में दखल कहाँ से शुरू होता है।