पाठ्यक्रम संबंधी सूचना
नोट: यह अध्याय CBSE कक्षा 12 समाजशास्त्र के 2026-27 पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है (CBSE ने इसे हटा दिया है)। अन्य बोर्डों के छात्र अपने बोर्ड का नवीनतम पाठ्यक्रम देखें।
1परिभाषाएँ
सभी परिभाषाएँ एक जगह
मास मीडियाएक साथ बहुत बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचने वाले रूप, जैसे टीवी, समाचारपत्र, फ़िल्में, पत्रिकाएँ, रेडियो, विज्ञापन, विडियो खेल, सीडी
काल्पनिक समुदायबेनेडिक्ट ऐंडरसन का शब्द, ऐसे राष्ट्र के लिए जिसके सदस्य कभी नहीं मिलेंगे फिर भी जुड़ाव महसूस करते हैं
सूचनारंजनसमाचार सामग्री में सूचना और मनोरंजन का मिश्रण, अलग-अलग पाठकों की रुचि बनाए रखने के लिए
सोप ओपेराएक धारावाहिक, लगातार चलने वाली कहानी जिसका कोई निश्चित अंत नहीं होता, जो जाने-पहचाने पात्रों से चलती है
2मुख्य तिथियाँ और आँकड़े
1440जोहान गुटनबर्ग ने आधुनिक मुद्रण तकनीक विकसित की (यूरोप)
1821-76प्रारंभिक भारतीय समाचारपत्र: संवाद-कौमुदी (1821), बॉम्बे समाचार (1822), शोम प्रकाश (1858), टाइम्स ऑफ़ इंडिया (1861), स्टेट्समैन (1875)
1883इलबर्ट बिल आंदोलन: राष्ट्रवादी प्रेस पर औपनिवेशिक सेंसरशिप
1920 का दशकरेडियो हैम क्लबों से शुरू, कोलकाता और चेन्नई
1947स्वतंत्रता: आकाशवाणी के 6 स्टेशन, 2,80,000 सेट, जनसंख्या 35 करोड़
1950भारत में 5,46,200 रेडियो लाइसेंस
1957आकाशवाणी ने विविध भारती अपने में शामिल किया
1959टीवी का प्रायोगिक प्रारंभ, ग्रामीण विकास के लिए
1975आपातकाल की घोषणा; साइट शुरू (-1976); दूरदर्शन के पहले 4 शहर
1977लोकतंत्र और स्वतंत्र मीडिया बहाल
1982रंगीन टीवी, दिल्ली एशियाई खेल
1984-90हम लोग, बुनियाद, रामायण, महाभारत
1991खाड़ी युद्ध से सीएनएन लोकप्रिय; स्टार-टीवी शुरू; भारत में 1 राज्य चैनल
1992ज़ी टीवी की शुरुआत
1996-99स्टार प्लस का हिंदीकरण (“आपकी बोली। आपका प्लस प्वाइंट”)
2002निजी एफ.एम. रेडियो आया, राजनीतिक समाचार की अनुमति नहीं
2006-16समाचारपत्र प्रसार: 39.1 मिलियन → 62.8 मिलियन प्रतियाँ/दिन
2020दूरदर्शन 35 से अधिक चैनल; लगभग 900 गैर सरकारी टीवी नेटवर्क
आजआकाशवाणी: 480 स्टेशन, 681 ट्रांसमीटर; भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा टीवी बाज़ार (ट्राई, 2015-16)
3नामी लोग, पत्र और चैनल
| श्रेणी | याद रखने योग्य नाम |
|---|---|
| विद्वान/नेता | बेनेडिक्ट ऐंडरसन (काल्पनिक समुदाय); जवाहरलाल नेहरू (“लोकतंत्र का पहरेदार”) |
| उत्पीड़ित राष्ट्रवादी पत्र | केसरी (मराठी), मातृभूमि (मलयालम), अमृतबाज़ार पत्रिका (अंग्रेज़ी) |
| शीर्ष हिंदी दैनिक (2016) | दैनिक जागरण (3.92 मिलियन), दैनिक भास्कर (3.81 मिलियन) |
| ईनाडु | संस्थापक रामोजी राव; 1974 में शुरू; ज़िला दैनिक 1989 से |
| एफ.एम. चैनल और स्वामी | रेडियो मिर्ची (टाइम्स ऑफ़ इंडिया), रेड एफ.एम. (लिविंग मीडिया), रेडियो सिटी (स्टार नेटवर्क) |
| गाँव का एफ.एम. उदाहरण | राघव एफ.एम. मंसूरपुर 1: राघव महतो, बिहार |
| रियलिटी शो | कौन बनेगा करोड़पति, इंडियन आइडल, बिग बॉस |
| रेडियो का प्रयोग करने वाली फ़िल्में | रंग दे बसंती, लगे रहो मुन्ना भाई |
4पुनरावृत्ति
त्वरित पुनरावृत्ति
- मीडिया की वृद्धि समाजशास्त्रियों के लिए 4 कारणों से दिलचस्प है: इतिहास, समाज से द्वंद्वात्मक संबंध, औपचारिक संगठन की ज़रूरत, और असमान पहुँच (डिजिटल अंतर)
- औपनिवेशिक काल: रेडियो राज्य के स्वामित्व में, प्रेस निगरानी में; इलबर्ट बिल (1883) से सेंसरशिप
- स्वतंत्र भारत: नेहरू का “पहरेदार” आह्वान; रेडियो और टीवी दोनों राज्य के विकास-साधन के रूप में शुरू हुए
- आपातकाल (1975-77) स्वतंत्र भारत की प्रेस की सबसे बड़ी परीक्षा थी
- भूमंडलीकरण: राष्ट्रीय बाज़ार से एक भूमंडलीय बाज़ार बना; मीडिया रूप आपस में मिले; भारत में प्रिंट मीडिया घटा नहीं, बढ़ा
- टीवी का स्थानीयकरण (स्टार प्लस) और सामुदायिक रेडियो (राघव एफ.एम.), दोनों याद रखने योग्य “स्थानीय तक पहुँच” के उदाहरण हैं
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