Class 12 Sociology Chapter 7 परियोजना कार्य के लिए सुझाव NCERT Solutions

इस पृष्ठ पर आमतौर पर NCERT पाठ्यपुस्तक की अपनी प्रश्नावली के पूरे हल दिए जाते हैं। अध्याय 7, ‘परियोजना कार्य के लिए सुझाव’, में कोई औपचारिक प्रश्नावली है ही नहीं। यह पुस्तक की अपनी बात है, इस पृष्ठ की कोई कमी नहीं: अध्याय विषय × पद्धति तालिका के बाद, छात्र के लिए एक ख़ाली “टिप्पणी” पृष्ठ के साथ समाप्‍त होता है।

इस अध्याय में प्रश्नावली क्यों नहीं है

NCERT की भारतीय समाज पाठ्यपुस्तक (Reprint 2026-27) अध्याय 7 को परियोजना कार्य की एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में छापती है, संख्याबद्ध प्रश्नों वाली परीक्षा-सामग्री के रूप में नहीं। पुस्तक स्वयं कहती है: “यह सिर्फ़ सुझाव मात्र है”। CBSE समाजशास्त्र पाठ्यक्रम (2026-27) इस इकाई को थ्योरी प्रश्नपत्र में “Non-evaluative” (गैर-मूल्यांकित) बताता है, और परियोजना कार्य के लिए अलग से 20 अंक (परियोजना 15, मौखिकी 5) देता है। अन्य बोर्डों के लिए अपने बोर्ड का पाठ्यक्रम देखें।

1अध्याय पर आधारित अभ्यास-प्रश्न

इस अध्याय में कोई औपचारिक प्रश्नावली नहीं है। नीचे दिए प्रश्न अध्याय की सामग्री से बनाए गए अभ्यास-प्रश्न हैं, आधिकारिक प्रश्नावली नहीं, और हर उत्तर पुस्तक की बातों पर आधारित है।

प्रश्‍न 1

प्र. अध्याय के अनुसार शोध पद्धति को शोध प्रश्‍न से पहले क्यों नहीं चुना जा सकता?

उत्तर: क्योंकि यह आवश्यक नहीं है कि एक अनुसंधान पद्धति सभी प्रश्‍नों के लिए उपयुक्‍त हो। अधिकांश शोध प्रश्‍नों के लिए पद्धति चुनने की स्वतंत्रता होती है, लेकिन यह चुनाव आमतौर पर सीमित होता है। इसलिए शोधकर्ता पहले शोध प्रश्‍न का सावधानीपूर्वक निर्धारण करता है, और उसके बाद उसके लिए उपयुक्‍त पद्धति का चयन करता है।

प्रश्‍न 2

प्र. अध्याय के अनुसार, वे कौन-सी दो बातें मिलकर तय करती हैं कि शोधकर्ता को कौन-सी पद्धति चुननी चाहिए?

उत्तर: तकनीकी कसौटियाँ, यानी पद्धति और प्रश्‍न के बीच कितनी संगति है, और व्यावहारिकता, यानी उपलब्ध समय, संसाधन (लोग और सामग्री) और शोध की परिस्थितियाँ।

प्रश्‍न 3

प्र. सर्वेक्षण पद्धति की परिभाषा दें और अध्याय में दी गई एक ताक़त व एक कमज़ोरी बताएँ।

उत्तर: सर्वेक्षण में अपेक्षाकृत बड़ी संख्या में लोगों से एक जैसे तय प्रश्‍न पूछे जाते हैं, या तो अन्वेषक द्वारा या फिर प्रश्‍नावली भरवाकर। ताक़त: यह बहुत सारे लोगों तक पहुँच सकता है, इसलिए परिणाम समूह या जनसंख्या का सही प्रतिनिधित्व करते हैं। कमज़ोरी: प्रश्‍न पहले से तय होते हैं, बीच में फेरबदल नहीं हो सकता, और प्रश्‍नावलियाँ एक विशेष समय पर खींची गई फ़ोटो की तरह एक निश्‍चित स्थिति का ही चित्र प्रस्तुत करती हैं, इसलिए पहले या बाद की बदली हुई स्थिति सर्वेक्षण में शामिल नहीं होती।

प्रश्‍न 4

प्र. अध्याय के अनुसार साक्षात्कार सर्वेक्षण से किस तरह अलग है?

उत्तर: साक्षात्कार हमेशा आमने-सामने लिया जाता है और सर्वेक्षण से कहीं कम लोगों को शामिल करता है (जैसे 5, 20 या 40, आमतौर पर इससे अधिक नहीं)। यह संरचित (पहले से तय प्रश्‍नों के क्रम में) या असंरचित (सिर्फ़ विषय पहले से तय, प्रश्‍न बातचीत में उभरते हैं) हो सकता है, यह सर्वेक्षण से ज़्यादा लचीला है पर बड़ी संख्या में लोगों तक नहीं पहुँच सकता।

प्रश्‍न 5

प्र. पुस्तक के अपने सार्वजनिक-स्थान उदाहरण का उपयोग करते हुए बताएँ कि प्रेक्षण में अनुपस्थिति भी उपस्थिति जितनी ही महत्त्वपूर्ण क्यों हो सकती है।

उत्तर: अगर कोई शोधकर्ता यह देख रहा हो कि अलग-अलग वर्ग के लोग किसी सार्वजनिक स्थान का उपयोग कैसे करते हैं, तो यह जानना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण होता है कि कोई एक वर्ग या समूह, जैसे ग़रीब या मध्य वर्ग के लोग, उस जगह कभी न गए हों या उसे कभी देखा न हो। पुस्तक के अनुसार, कभी-कभी जो घटित नहीं हो रहा है वह वास्तव में जो घटित हो रहा है उतना ही महत्त्वपूर्ण या दिलचस्प होता है। इसे पकड़ने के लिए प्रासंगिकता का पूर्वनिर्णय किए बिना सावधानीपूर्वक प्रेक्षण करना होता है।

प्रश्‍न 6

प्र. अध्याय के उदाहरण के साथ बताएँ कि कोई शोधकर्ता एक से अधिक पद्धतियाँ क्यों मिला सकता है।

उत्तर: पद्धतियाँ मिलाने से एक ही प्रश्‍न को अलग-अलग नज़रिए से देखा जा सकता है। पुस्तक का अपना उदाहरण: सामाजिक जीवन में जनसंचार माध्यमों की बदलती जगह पर शोध करते समय सर्वेक्षण (जो आज की स्थिति बताता है) को ऐतिहासिक पद्धति (पुराने समाचारपत्र, पत्रिकाएँ और टेलीविज़न कार्यक्रम, जो बताती है कि पहले चीज़ें कैसी थीं) के साथ मिलाना।

प्रश्‍न 7

प्र. इस अध्याय के छह सुझाए गए परियोजना विषयों के नाम बताएँ।

उत्तर: (1) सार्वजनिक परिवहन, (2) सामाजिक जीवन में संचार माध्यमों की भूमिका, (3) घर-परिवार में काम आने वाले उपकरण एवं घरेलू कार्य, (4) सार्वजनिक स्थान का उपयोग, (5) विभिन्न आयु वर्गों की बदलती हुई आकांक्षाएँ, और (6) एक वस्तु की जीवनी।

प्रश्‍न 8

प्र. ‘सार्वजनिक परिवहन’ विषय चुनकर एक ऐसा विशेष शोध प्रश्‍न बनाएँ जिस पर कोई छात्र वास्तव में शोध कर सके।

उत्तर: एक विशेष प्रश्‍न हो सकता है: ‘क्या ऐप-आधारित कैब आने से पिछले पाँच वर्षों में मेरे मोहल्ले में लोगों के स्थानीय बस सेवा इस्तेमाल करने की आदत बदली है?’ यह प्रश्‍न (व्यापक ‘सामान्य रूप से सार्वजनिक परिवहन’ के उलट) पर्याप्‍त विशेष है कि इस पर शोध किया जा सके, और इसका उत्तर स्थानीय यात्रियों के एक छोटे सर्वेक्षण और नियमित बस यात्रियों के कुछ साक्षात्कारों को मिलाकर दिया जा सकता है।

भाग 7.2 के खुले प्रश्‍न

अध्याय का भाग 7.2 छहों विषयों के लिए खुले प्रश्‍न भी देता है, जैसे सार्वजनिक परिवहन के अंतर्गत “लोगों के जीवन में इसकी क्या भूमिका है? इसकी आवश्यकता किन्हें होती है?”, या दिल्ली मेट्रो पर 50 साल बाद की विज्ञान-कथा। इनके कोई तय उत्तर नहीं हैं: इनका उपयोग प्रश्‍न 8 की तरह अपना विशेष शोध प्रश्‍न बनाने के लिए करें।