अपने परिवेश में गति का वर्णन

अध्याय मानचित्र: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · स्थिति, विराम और गतिहर चीज़ एक निश्चित संदर्भ बिंदु से मापी जाती है
2 · चलित दूरी और विस्थापनआप कितना चले, और अंत में कितना खिसके
3 · चाल और वेगकितनी तेज़ी से, और किस दिशा में कितनी तेज़ी से
4 · त्वरणवेग खुद कितनी तेज़ी से बदल रहा है
अपने परिवेश में गति का वर्णन
5 · स्थिति-समय ग्राफरेखा की प्रवणता वेग बताती है
6 · वेग-समय ग्राफप्रवणता त्वरण, क्षेत्रफल विस्थापन बताता है
7 · गति के समीकरणतीन सूत्र जो लगभग हर संख्यात्मक हल कर देते हैं
8 · एकसमान वृत्तीय गतिचाल अचर, फिर भी त्वरित गति
संदर्भ बिंदुविस्थापनमाध्य वेगमाध्य त्वरणप्रवणतागतिक समीकरणएकसमान वृत्तीय गतिस्पर्श रेखा

1 स्थिति, विराम और गति

प्रकृति में हर चीज़ गतिशील है, विशाल आकाशगंगाओं से लेकर धूप में उड़ते धूल के कणों तक। यह गति इतनी जटिल होती है कि इसे एक साथ समझना मुश्किल है, इसलिए वैज्ञानिक पहले इसके सबसे सरल रूपों को समझते हैं। आप तीन रूप पहले से जानते हैं: रेखीय गति (सीधी रेखा में), वृत्तीय गति और दोलनी गति। इस अध्याय में रेखीय गति और वृत्तीय गति के एक विशेष रूप की बात होगी।

गति के बारे में कुछ भी कहने से पहले यह बताना ज़रूरी है कि वस्तु कहाँ है। और “कहाँ” का मतलब तभी बनता है जब मापने के लिए पहले एक बिंदु तय कर लिया जाए। इसी बिंदु को संदर्भ बिंदु कहते हैं।

याद रखेंपरिभाषा 1

किसी वस्तु की स्थिति किसी निश्चित समय पर एक तय संदर्भ बिंदु से उसकी दूरी और दिशा है।

ध्यान दीजिए कि केवल दूरी काफी नहीं है। 250 मीटर दूर एक दुकान आपके बाईं ओर भी हो सकती है और दाईं ओर भी। इसलिए संदर्भ बिंदु को एक सरल रेखा पर मूल बिंदु O के रूप में अंकित किया जाता है, और दोनों दिशाओं को धन (+) और ऋण (−) चिह्न से दिखाया जाता है। O के दाईं ओर की स्थितियाँ आमतौर पर धनात्मक और बाईं ओर की ऋणात्मक मानी जाती हैं।

चित्र 1 · स्थिति हमेशा मूल बिंदु O से मापी जाती है, और चिह्न दिशा बताता है
चित्र 1 · स्थिति हमेशा मूल बिंदु O से मापी जाती है, और चिह्न दिशा बताता है

स्थिति स्पष्ट होते ही विराम और गति समझना आसान हो जाता है। यदि संदर्भ बिंदु के सापेक्ष वस्तु की स्थिति समय के साथ बदलती है, तो वस्तु गति में है। यदि नहीं बदलती, तो वस्तु विराम अवस्था में है। आप कोई भी सुविधाजनक बिंदु मूल बिंदु चुन सकते हैं, और कोई भी दिशा धनात्मक ले सकते हैं, लेकिन एक बार चुनने के बाद उसे प्रश्न के बीच में बदलना नहीं है।

आम गलती

क्षण घड़ी की एक ही रीडिंग है, जैसे 4s। समय अंतराल दो रीडिंग के बीच का अंतर है, जैसे 4s और 10s के बीच का 6s। विद्यार्थी अक्सर इन दोनों को मिला देते हैं और गलत संख्या से भाग दे बैठते हैं।

2 चलित दूरी और विस्थापन

एक धाविका O से चलना शुरू करती है, 100 मी दौड़कर A तक जाती है, फिर मुड़कर 60 मी वापस B तक आती है। उसके पैरों की गिनती करें तो उसने 100 मी + 60 मी = 160 मी तय किया। लेकिन देखिए कि वह कहाँ से शुरू हुई और कहाँ रुकी: वह O से केवल 40 मी ही खिसकी। दो अलग सवाल, दो अलग राशियाँ।

याद रखेंपरिभाषा 2

कुल चलित दूरी वस्तु द्वारा वास्तव में तय किए गए पूरे पथ की लंबाई है, चाहे वह जितनी बार मुड़ी हो।

याद रखेंपरिभाषा 3

विस्थापन दो दिए गए क्षणों के बीच वस्तु की स्थिति में हुआ शुद्ध परिवर्तन है। इसे परिमाण और दिशा दोनों के साथ बताया जाता है।

चित्र 2 · कुल चलित दूरी 160 मी है, लेकिन विस्थापन धनात्मक दिशा में केवल 40 मी है
चित्र 2 · कुल चलित दूरी 160 मी है, लेकिन विस्थापन धनात्मक दिशा में केवल 40 मी है
अंतर का बिंदु कुल चलित दूरी विस्थापन
यह क्या मापता है तय किया गया पूरा पथ शुरू से अंत तक स्थिति का बदलाव
दिशा ज़रूरी नहीं बताना ज़रूरी है
क्या यह शून्य हो सकता है जब वस्तु चली हो? नहीं हाँ, अगर वस्तु अपने शुरुआती बिंदु पर लौट आए
कौन बड़ा है दूरी हमेशा विस्थापन के परिमाण के बराबर या उससे अधिक होती है
SI मात्रक मीटर (m) मीटर (m)

ये दोनों केवल एक ही स्थिति में बराबर होते हैं: जब वस्तु एक ही दिशा में चले और कभी न मुड़े। बार-बार आने वाला शब्द परिमाण केवल इकाई सहित संख्यात्मक मान को कहते हैं, दिशा से अलग रखकर।

परीक्षा टिप

आपका स्कूटर जो पेट्रोल जलाता है वह चलित दूरी पर निर्भर करता है, विस्थापन पर कभी नहीं। 20 किमी बाहर जाकर 20 किमी वापस आइए, विस्थापन शून्य हो जाता है, लेकिन टंकी फिर से भरी नहीं मिलती। यही तर्क अक्सर 2 अंकों के प्रश्न में पूछा जाता है।

क्या आप जानते हैं?

जिन राशियों को बताने के लिए केवल संख्यात्मक मान चाहिए, जैसे दूरी, समय और चाल, उन्हें अदिश राशियाँ कहते हैं। जिन राशियों को दिशा भी चाहिए, जैसे विस्थापन, वेग और त्वरण, उन्हें सदिश राशियाँ कहते हैं। इनका पूरा अध्ययन आप ऊँची कक्षाओं में करेंगे, पर यह बँटवारा वही है जो अभी-अभी देखा।

3 माध्य चाल और माध्य वेग

दूरी और विस्थापन बताते हैं कि वस्तु कितनी दूर गई। वे यह नहीं बताते कि कितनी तेज़ी से गई। इसके लिए समय से भाग देना पड़ता है।

सूत्र
माध्य चाल=कुल चलित दूरीसमय अंतरालvav=st\text{माध्य चाल}=\frac{\text{कुल चलित दूरी}}{\text{समय अंतराल}}\qquad v_{av}=\frac{s}{t}
दूसरा सूत्र माध्य वेग का है, जहाँ ss विस्थापन है, दूरी नहीं

माध्य चाल दूरी से निकाली जाती है, इसलिए दूरी की तरह इसकी कोई दिशा नहीं होती। माध्य वेग विस्थापन से निकाला जाता है, इसलिए यह विस्थापन की दिशा साथ लेकर चलता है, जिसे धन या ऋण चिह्न से लिखा जाता है। दोनों का मात्रक मीटर प्रति सेकंड है, जिसे m s1\mathrm{m\ s^{-1}} या m/s लिखते हैं, और रोज़मर्रा में km h1\mathrm{km\ h^{-1}}

याद रखने की तरकीब

km/h से m/s: 5/18 से गुणा करें। m/s से km/h: 18/5 से गुणा करें।

तो 36 किमी/घं यानी 10 मी/से, 54 किमी/घं यानी 15 मी/से और 72 किमी/घं यानी 20 मी/से। ये तीनों जोड़े याद रखिए, क्योंकि इस अध्याय के अधिकांश संख्यात्मक इन्हीं का बार-बार उपयोग करते हैं।

याद रखेंपरिभाषा 4

यदि कोई वस्तु सरल रेखा में बराबर समय अंतरालों में बराबर दूरी तय करे, तो उसकी गति एकसमान गति कहलाती है। यदि बराबर समय अंतरालों में तय दूरी बराबर न हो, तो गति असमान कहलाती है।

इसे समझने का एक सरल तरीका है। किसी राशि में हुए परिवर्तन का उसमें लगे समय से अनुपात परिवर्तन दर कहलाता है। माध्य वेग, इसी तरह, स्थिति के परिवर्तन की माध्य दर है।

दिया है

सारंग 25 मी लंबे तालाब में एक चक्कर तैरकर वापस आता है, कुल 50s में।

ज्ञात करना है

माध्य चाल और माध्य वेग

हल किया उदाहरण 1

चरण 1. कुल चलित दूरी = 25 मी + 25 मी = 50 मी। विस्थापन = 0 मी, क्योंकि वह वहीं लौट आता है जहाँ से शुरू किया था।
चरण 2. माध्य चाल =50 मी50 s==\dfrac{50\ \mathrm{मी}}{50\ \mathrm{s}}= 1 m s11\ \mathrm{m\ s^{-1}}
चरण 3. माध्य वेग =0 मी50 s==\dfrac{0\ \mathrm{मी}}{50\ \mathrm{s}}= 0 m s10\ \mathrm{m\ s^{-1}}

वह पूरे समय ज़ोर से तैर रहा था, फिर भी उसका माध्य वेग शून्य है। यही दोनों राशियों के बीच के अंतर का सबसे साफ उदाहरण है।

क्या आप जानते हैं?

चाल = दूरी ÷ समय, यह विचार भारत में नया नहीं है। यह आर्यभट की आर्यभटीय में 5वीं सदी ई. में मिलता है, और 14वीं सदी के ग्रंथ गणितकौमुदी में यह प्रश्न है: दो डाकिये 210 योजन की दूरी पर एक-दूसरे की ओर चलते हैं, एक 9 और दूसरा 5 योजन प्रतिदिन। मिलकर वे प्रतिदिन 14 योजन की दूरी कम करते हैं, इसलिए वे 210÷14=15210 \div 14 = 15 दिनों में मिलेंगे, तब तक 135 और 75 योजन चलकर।

4 माध्य त्वरण

जब कोई बस अचानक चलना शुरू करती है तो आपको झटका महसूस होता है, और जब वह अचानक रुकती है तब भी। आप जो महसूस कर रहे हैं वह है वेग का बदलना। जो राशि यह बताती है कि वेग कितनी तेज़ी से बदल रहा है, वह त्वरण है।

याद रखेंपरिभाषा 5

किसी समय अंतराल में वस्तु का माध्य त्वरण उस अंतराल में उसके वेग में हुए परिवर्तन को उस अंतराल से भाग देकर मिलता है।

सूत्र
a=अंतिम वेगआरंभिक वेगसमय अंतराल=vut2t1a=\frac{\text{अंतिम वेग}-\text{आरंभिक वेग}}{\text{समय अंतराल}}=\frac{v-u}{t_2-t_1}
SI मात्रक m s2\mathrm{m\ s^{-2}}। त्वरण को भी दिशा चाहिए, इसलिए इसका भी चिह्न होता है।
इन चिह्नों का मतलब
uuआरंभिक वेगm/s
vvअंतिम वेगm/s
aaत्वरणm/s²
ssविस्थापनm
ttसमय अंतरालs

वेग बढ़ रहा है

  • वेग का परिमाण बढ़ रहा है
  • त्वरण वेग की ही दिशा में है
  • सामान्य चिह्न परिपाटी में धनात्मक आता है

वेग घट रहा है

  • वेग का परिमाण घट रहा है
  • त्वरण वेग के विपरीत दिशा में है
  • ऋणात्मक आता है, जिसका अर्थ है उत्तर में ऋण चिह्न
हल किया उदाहरण 2

प्रश्न. एक बस 36 किमी/घं से चलती हुई 10s में 54 किमी/घं तक तेज़ हो जाती है। बाद में चालक ब्रेक लगाता है और बस 54 किमी/घं से 5s में रुक जाती है। दोनों स्थितियों में त्वरण ज्ञात कीजिए।

तेज़ होते समय: u=10 m/su = 10\ \mathrm{m/s}, v=15 m/sv = 15\ \mathrm{m/s}, t=10 st = 10\ \mathrm{s}
a=151010=a=\dfrac{15-10}{10}= +0.5 m s2+0.5\ \mathrm{m\ s^{-2}}, गति की दिशा में।

ब्रेक लगाते समय: u=15 m/su = 15\ \mathrm{m/s}, v=0 m/sv = 0\ \mathrm{m/s}, t=5 st = 5\ \mathrm{s}
a=0155=a=\dfrac{0-15}{5}= 3 m s2-3\ \mathrm{m\ s^{-2}}। ऋण चिह्न बताता है कि त्वरण गति के विपरीत दिशा में है।

त्वरण को नियत (constant) तब कहते हैं जब वेग बराबर समय अंतरालों में बराबर मात्रा से बदले। गिरती हुई वस्तु इसका मानक उदाहरण है: हर सेकंड के अंत में उसका वेग 0, 9.8, 19.6, 29.4, 39.2 मी/से पढ़ा जाता है, यानी हर सेकंड ठीक 9.8 m/s9.8\ \mathrm{m/s} बढ़ता है। यह नियत मान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से उत्पन्न त्वरण है और इसे g से लिखा जाता है।

आम गलती

“तेज़” और “त्वरित” एक बात नहीं है। सीधी सड़क पर स्थिर 80 किमी/घं से चलती बस का त्वरण शून्य है, क्योंकि उसका वेग बिल्कुल नहीं बदल रहा। त्वरण इस बात पर निर्भर करता है कि वेग कितनी तेज़ी से बदल रहा है, वह कितना बड़ा है इस पर नहीं।

5 स्थिति-समय ग्राफ

शब्द और संख्याएँ गति बताने का एक तरीका हैं। ग्राफ अक्सर बेहतर होता है, क्योंकि रेखा का आकार एक नज़र में गति की प्रकृति बता देता है। ग्राफ बनाने के लिए X-अक्ष पर समय, Y-अक्ष पर दूसरी राशि अंकित करें, पृष्ठ का अच्छा उपयोग करने वाला पैमाना चुनें, बिंदु आलेखित करें और उन्हें जोड़ें।

ग्राफ़ 1 · स्थिति-समय ग्राफ पर सरल रेखा का अर्थ है वेग अचर है
ग्राफ़ 1 · स्थिति-समय ग्राफ पर सरल रेखा का अर्थ है वेग अचर है
ग्राफ़ 2 · स्थिति-समय ग्राफ पर वक्र का अर्थ है वेग बदल रहा है, यानी वस्तु त्वरित है
ग्राफ़ 2 · स्थिति-समय ग्राफ पर वक्र का अर्थ है वेग बदल रहा है, यानी वस्तु त्वरित है

दोनों की तुलना कीजिए। ग्राफ़ 1 में वस्तु हर सेकंड 20 मी तय करती है, इसलिए बराबर समय अंतरालों में विस्थापन बराबर हैं और वेग अचर है। ग्राफ़ 2 में हर अगले अंतराल में विस्थापन पिछले से बड़ा है, इसलिए वेग बढ़ रहा है।

याद रखेंपरिभाषा 6

ग्राफ पर किसी रेखा की प्रवणता (ढाल) उसकी तीव्रता है। यह Y-अक्ष की राशि के, X-अक्ष की राशि के सापेक्ष, परिवर्तन की दर बताती है।

यही एक विचार ग्राफ को शक्तिशाली बनाता है। स्थिति-समय ग्राफ में Y-अक्ष स्थिति है और X-अक्ष समय, इसलिए प्रवणता ठीक स्थिति में परिवर्तन ÷ समय है, यानी वेग। ग्राफ़ 1 को 2s और 4s के बीच पढ़ते हुए:

हल किया उदाहरण 3

v=s2s1t2t1=80 मी40 मी4 s2 s=40 मी2 s=v=\dfrac{s_2-s_1}{t_2-t_1}=\dfrac{80\ \mathrm{मी}-40\ \mathrm{मी}}{4\ \mathrm{s}-2\ \mathrm{s}}=\dfrac{40\ \mathrm{मी}}{2\ \mathrm{s}}= 20 m s120\ \mathrm{m\ s^{-1}}

✓ स्थिति-समय ग्राफ ऐसे पढ़ें

  • सीधी ढालू रेखा: वेग अचर
  • वक्र: वेग बदल रहा है, यानी त्वरण है
  • समय-अक्ष के समानांतर रेखा: वस्तु विराम में है
  • अधिक तीव्र रेखा: अधिक वेग

✗ ऐसे न पढ़ें

  • यह मार्ग-चित्र नहीं है, यह पथ नहीं दिखाता
  • ऊपर जाती रेखा का मतलब चढ़ाई नहीं है
  • अलग-अलग पैमाने वाले दो ग्राफ की तीव्रता की तुलना न करें

6 वेग-समय ग्राफ

अब Y-अक्ष पर वेग रखिए, वही पढ़ने का कौशल दो नई जानकारियाँ देता है।

ग्राफ़ 3 · तीन मानक वेग-समय आकार: अचर वेग, तेज़ होना और धीमा होना, तीनों में त्वरण नियत है
ग्राफ़ 3 · तीन मानक वेग-समय आकार: अचर वेग, तेज़ होना और धीमा होना, तीनों में त्वरण नियत है

अब Y-अक्ष वेग है, इसलिए वेग-समय ग्राफ की प्रवणता त्वरण देती है। सपाट रेखा की प्रवणता शून्य है, इसलिए त्वरण शून्य है। बढ़ती रेखा 10s में 5 मी/से चढ़ती है, इसलिए +0.5 m s2+0.5\ \mathrm{m\ s^{-2}}; घटती रेखा 0.5 m s2-0.5\ \mathrm{m\ s^{-2}} देती है।

दूसरी जानकारी नई है और अकेले पूरा अंक दिला सकती है: रेखा और समय-अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल विस्थापन देता है। 6s तक 20 मी/से पर सपाट रेखा के लिए वह क्षेत्रफल एक आयत है, इसलिए विस्थापन 20×6=12020 \times 6 = 120 मी है। जब रेखा ढालू हो, क्षेत्रफल एक आयत और एक त्रिभुज में बँट जाता है।

चित्र 3 · 10s और 20s के बीच रंगा हुआ क्षेत्रफल 50 मी और 25 मी है, इसलिए इस अंतराल में विस्थापन 75 मी है
चित्र 3 · 10s और 20s के बीच रंगा हुआ क्षेत्रफल 50 मी और 25 मी है, इसलिए इस अंतराल में विस्थापन 75 मी है

7 गति के तीन समीकरण

जब त्वरण नियत हो, तो ऊपर का ग्राफ वाला काम तीन सूत्रों में बदला जा सकता है, जो इस अध्याय के लगभग हर संख्यात्मक को हल कर देते हैं। इन्हें गतिक समीकरण कहते हैं।

a=vuta=\dfrac{v-u}{t}माध्य त्वरण की परिभाषा, t1=0t_1 = 0 लेकर
v=u+atv = u + atपुनर्व्यवस्थित करने पर, यह पहला समीकरण है
s=ut+12t(vu)s = ut + \tfrac{1}{2}\,t\,(v-u)ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल: आयत और त्रिभुज
s=ut+12at2s = ut + \tfrac{1}{2}at^2पहले समीकरण से vu=atv-u = at रखने पर
v2=u2+2asv^2 = u^2 + 2asपहले दो समीकरणों से tt हटाने पर
तीनों समीकरण
v=u+ats=ut+12at2v2=u2+2asv = u + at \qquad s = ut + \tfrac{1}{2}at^2 \qquad v^2 = u^2 + 2as
केवल तभी मान्य जब त्वरण नियत हो। यह देखकर चुनें कि प्रश्न में कौन-सी राशि नहीं दी गई है।
दिया है

ब्रेक से a=4 m s2a=-4\ \mathrm{m\ s^{-2}} मिलता है, कार रुक जाती है इसलिए v=0v = 0, आरंभिक वेग 54 किमी/घं = 15 मी/से

ज्ञात करना है

रुकने से पहले तय की गई दूरी ss

हल किया उदाहरण 4

समय नहीं दिया गया, इसलिए v2=u2+2asv^2 = u^2 + 2as का प्रयोग करें।
0=152+2(4)ss=2258=0 = 15^2 + 2(-4)s \Rightarrow s = \dfrac{225}{8} = 28.1 मी

अब चाल दोगुनी करके 108 किमी/घं = 30 मी/से लें: s=9008=s = \dfrac{900}{8} = 112.5 मी

चाल दोगुनी करने से रुकने की दूरी दोगुनी नहीं हुई, बल्कि चार गुना हो गई, क्योंकि ss, u2u^2 पर निर्भर करता है। यही एक पंक्ति का बीजगणित गति सीमा के पीछे का पूरा तर्क है।

परीक्षा टिप

वास्तविक रुकने की दूरी इससे भी अधिक होती है, क्योंकि चालक को ब्रेक दबाने से पहले लगभग आधे सेकंड की प्रतिक्रिया लगती है। गीली सड़क, घिसे हुए टायर और भारी वाहन पर भी यह बढ़ जाती है। “सुरक्षित दूरी” वाला प्रश्न इन चार कारणों और ऊपर के u2u^2 वाले तर्क से हल होता है।

8 तल में गति: एकसमान वृत्तीय गति

एक कार का दूसरी को ओवरटेक करना, किक मारी गई फुटबॉल, या पृथ्वी के चक्कर लगाता उपग्रह: इनमें से कोई भी एक सीधी रेखा पर नहीं रहता। किसी समतल सतह पर फैली इस तरह की गति को द्विविमीय गति या तल में गति कहते हैं।

घूमते हुए झूले पर बैठे एक बच्चे को लीजिए। त्रिज्या RR के वृत्त का एक पूरा चक्कर लगाने में तय दूरी पूरी परिधि 2πR2\pi R है, लेकिन विस्थापन शून्य है, क्योंकि बच्चा ठीक वहीं लौट आता है जहाँ से शुरू हुआ था। तो समय TT में एक पूरे चक्कर के लिए:

सूत्र
vav=2πRTएक चक्कर में माध्य वेग=0v_{av}=\frac{2\pi R}{T}\qquad\text{एक चक्कर में माध्य वेग}=0
RR = वृत्तीय पथ की त्रिज्या, TT = एक चक्कर में लगा समय
याद रखेंपरिभाषा 7

जब कोई वस्तु नियत चाल से वृत्तीय पथ पर चलती है, तो उसकी गति एकसमान वृत्तीय गति कहलाती है।

अब आश्चर्य वाली बात। एक आयताकार ट्रैक पर दौड़ते धावक को देखिए: वह दिशा 4 बार बदलता है। षट्भुजाकार ट्रैक पर, 6 बार। भुजाएँ बढ़ाते जाइए और ट्रैक एक वृत्त बन जाता है, और वेग की दिशा हर एक क्षण पर बदल रही होती है। किसी भी बिंदु पर वह वेग स्पर्श रेखा की दिशा में होता है, जो उस एक बिंदु पर वृत्त को छूने वाली सरल रेखा है।

चित्र 4 · एकसमान वृत्तीय गति में वेग हमेशा स्पर्श रेखा की दिशा में होता है, इसलिए उसकी दिशा हर क्षण बदलती है
चित्र 4 · एकसमान वृत्तीय गति में वेग हमेशा स्पर्श रेखा की दिशा में होता है, इसलिए उसकी दिशा हर क्षण बदलती है

वेग तब बदलता है जब उसका परिमाण बदले, या उसकी दिशा बदले, या दोनों बदलें। एकसमान वृत्तीय गति में परिमाण कभी नहीं बदलता लेकिन दिशा हमेशा बदलती है। इसलिए यह गति त्वरित है, भले ही स्पीडोमीटर की रीडिंग कभी न हिले। आप इसे खुद देख सकते हैं: चिपकने वाले टेप की एक अंगूठी के अंदर एक कंचा घुमाइए, फिर अंगूठी उठा लीजिए। कंचा मुड़ता नहीं रहता। वह सीधी रेखा में उसी स्पर्श रेखा की दिशा में उड़ जाता है जिस पर वह उस पल था।

कोई वस्तु बिना तेज़ हुए भी त्वरित हो सकती है। सिर्फ दिशा बदलना काफी है।

इस अध्याय से ले जाने वाला एक विचार

असल दुनिया में पूर्ण वृत्त और बिल्कुल स्थिर चाल लगभग कभी नहीं मिलती, इसलिए एकसमान वृत्तीय गति एक आदर्श प्रतिरूप है। फिर भी इसे सीखना ज़रूरी है, क्योंकि यह सूर्य के चारों ओर घूमते ग्रहों और चौराहे पर मुड़ती बस को समझने की शुरुआत है। ऊपर-नीचे भी होने वाली गति, जैसे पहाड़ी सड़क पर चढ़ती कार या उड़ता हुआ पक्षी, त्रिविमीय गति कहलाती है।

झटपट दोहराव: परीक्षा से पहली रात यही पढ़ें
  • स्थिति के लिए एक संदर्भ बिंदु, एक दूरी और एक दिशा चाहिए। गति का मतलब है स्थिति समय के साथ बदलना।
  • दूरी पूरे तय किए पथ को कहते हैं; विस्थापन शुरू से अंत तक का सीधा खिसकाव है, और यह शून्य भी हो सकता है।
  • माध्य चाल दूरी से निकलती है; माध्य वेग विस्थापन से, इसलिए केवल वेग की दिशा होती है।
  • त्वरण बताता है कि वेग कितनी तेज़ी से बदल रहा है। ऋणात्मक त्वरण का मतलब है वह गति के विपरीत काम कर रहा है।
  • स्थिति-समय ग्राफ पर प्रवणता = वेग। सीधी रेखा = अचर वेग, वक्र = त्वरण, सपाट रेखा = विराम।
  • वेग-समय ग्राफ पर प्रवणता = त्वरण और रेखा के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन।
  • नियत त्वरण के लिए: v=u+atv = u + at, s=ut+12at2s = ut + \tfrac{1}{2}at^2, v2=u2+2asv^2 = u^2 + 2as
  • रुकने की दूरी u2u^2 के अनुसार बढ़ती है, इसलिए चाल दोगुनी करने पर यह चार गुना हो जाती है।
  • वृत्त के एक चक्कर में दूरी = 2πR2\pi R और विस्थापन = 0।
  • एकसमान वृत्तीय गति में चाल अचर पर दिशा बदलती रहती है, इसलिए यह त्वरित गति है।
अभ्यास प्रश्न: 1 अंक
  1. 1 अंकविस्थापन को परिभाषित कीजिए।
  2. 1 अंकत्वरण का SI मात्रक लिखिए।
  3. 1 अंकवेग-समय ग्राफ की प्रवणता क्या दर्शाती है?
  4. 1 अंक72 किमी/घं को मी/से में बदलिए।
  5. 1 अंकस्थिति-समय ग्राफ पर समय-अक्ष के समानांतर रेखा क्या बताती है?
  6. 1 अंकत्रिज्या RR वाले वृत्त के एक पूरे चक्कर में वस्तु द्वारा तय दूरी बताइए।
  7. 1 अंकउस राशि का नाम बताइए जो स्थिति के परिवर्तन की माध्य दर है।
  8. 1 अंकऐसी वस्तु का एक उदाहरण दीजिए जिसकी चाल अधिक हो पर त्वरण शून्य हो।
अभ्यास प्रश्न: 2 और 3 अंक
  1. 3 अंककुल चलित दूरी और विस्थापन में तीन अंतर बताइए।
  2. 2 अंकस्कूटर चलाती एक लड़की देखती है कि उसका स्पीडोमीटर स्थिर रीडिंग दे रहा है। क्या उसका स्कूटर फिर भी त्वरित हो सकता है? समझाइए।
  3. 2 अंकवाहन में जलने वाला ईंधन चलित दूरी पर निर्भर करता है या विस्थापन पर? कारण सहित बताइए।
  4. 3 अंकमेरे पिताजी घर से 250 मी दूर एक दुकान तक चलते हैं, थैला लेने घर वापस आते हैं, फिर दुकान जाकर सामान खरीदकर घर लौटते हैं। कुल चलित दूरी और उनका विस्थापन ज्ञात कीजिए।
  5. 3 अंकएक विद्यार्थी स्कूल की भूतल से चौथी मंज़िल तक दौड़कर जाता है, फिर दूसरी मंज़िल तक नीचे आता है। हर मंज़िल 3 मी ऊँची है। कुल ऊर्ध्वाधर दूरी और विस्थापन ज्ञात कीजिए।
  6. 3 अंकएक कार विराम अवस्था से चलकर 6s में 24 मी/से का वेग प्राप्त करती है। इन 6s में माध्य त्वरण और तय दूरी ज्ञात कीजिए।
  7. 3 अंक28 मी/से से चलती एक मोटरबाइक नियत त्वरण के साथ 98 मी चलकर रुक जाती है। त्वरण और लगा समय ज्ञात कीजिए।
  8. 3 अंकआप 3 घंटे में 200 किमी उत्तर की ओर, फिर 2 घंटे में 200 किमी दक्षिण की ओर चलते हैं। पूरी यात्रा की माध्य चाल और माध्य वेग ज्ञात कीजिए।
  9. 2 अंकमाध्य वेग का परिमाण माध्य चाल के बराबर कब होता है?
  10. 3 अंक54 किमी/घं से चलता एक ट्रक चालक 36s में अपनी चाल घटाकर 36 किमी/घं करता है। त्वरण नियत मानकर इस दौरान तय दूरी ज्ञात कीजिए।
अभ्यास प्रश्न: 5 अंक
  1. 5 अंकनियत त्वरण से चलती वस्तु के वेग-समय ग्राफ से समीकरण s=ut+12at2s = ut + \tfrac{1}{2}at^2 व्युत्पन्न कीजिए।
  2. 5 अंकएक कार विराम से चलकर 5s में 20 मी/से तक एकसमान रूप से त्वरित होती है, फिर 10s तक 20 मी/से से चलती है, फिर एकसमान रूप से ब्रेक लगाकर 6s में रुक जाती है। कुल तय दूरी ज्ञात कीजिए।
  3. 5 अंक36 किमी/घं से चलती एक बस 30 मी आगे एक बाधा देखती है। चालक प्रतिक्रिया में 0.5s लेता है, फिर 2.5 मी/से² के परिमाण वाले नियत त्वरण से ब्रेक लगाता है। क्या बस समय रहते रुक जाएगी? गणना करके दिखाइए।
  4. 5 अंकचाल नियत होने पर भी एकसमान वृत्तीय गति त्वरित गति क्यों है, समझाइए। कंचे और अंगूठी वाली क्रिया के आधार पर अपना उत्तर स्पष्ट कीजिए।
  5. 5 अंकरोहन शाम 6:00 बजे से 7:30 बजे तक घर पर विज्ञान पढ़ता है। दीवार घड़ी की मिनट सुई की नोक के लिए, इस अंतराल में तय दूरी, विस्थापन, चाल और वेग ज्ञात कीजिए। मिनट सुई की लंबाई 7 सेमी है।
केस स्टडी
राजमार्ग पर प्रवेश करते ही एक कार 2 मिनट तक नियत 6 मी/से से चलती है। फिर वह अगले 6 सेकंड तक 1 मी/से² के नियत त्वरण से त्वरित होती है। कार में लगा एक वाहन-से-वाहन (V2V) तंत्र चालक को आगे धीमे वाहनों की चेतावनी देता है।
  1. 1 अंकपहले 2 मिनट में कार का त्वरण कितना है?
  2. 2 अंकपहले 2 मिनट में कार का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
  3. 2 अंकवेग-समय ग्राफ को एक आयत और एक समलंब मानकर, पूरे 2 मिनट 6 सेकंड में कुल विस्थापन ज्ञात कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंककिसी गतिशील वस्तु के विस्थापन का परिमाण:
    (a) हमेशा दूरी के बराबर होता है(b) हमेशा दूरी से अधिक होता है
    (c) दूरी के बराबर या उससे कम होता है(d) कभी शून्य नहीं होता
  2. 1 अंकवेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल देता है:
    (a) त्वरण(b) विस्थापन(c) चाल(d) प्रति इकाई समय दूरी
  3. 1 अंकएक वस्तु 4 मी पूर्व, फिर 3 मी उत्तर चलती है। उसका विस्थापन है:
    (a) 7 मी(b) 1 मी(c) 5 मी(d) 12 मी
  4. 1 अंकजब समय नहीं दिया गया हो, कौन-सा समीकरण उपयोग करना चाहिए?
    (a) v=u+atv = u+at(b) s=ut+12at2s = ut+\tfrac{1}{2}at^2(c) v2=u2+2asv^2 = u^2+2as(d) vav=s/tv_{av} = s/t
  5. 1 अंकएकसमान वृत्तीय गति में कौन-सी राशि अचर रहती है?
    (a) वेग(b) चाल(c) विस्थापन(d) त्वरण की दिशा
  6. 1 अंकवक्र स्थिति-समय ग्राफ बताता है कि वस्तु:
    (a) विराम में है(b) अचर वेग से चल रही है(c) त्वरित हो रही है(d) पीछे जा रही है
  7. 1 अंक54 किमी/घं को मी/से में बदलने पर मिलता है:
    (a) 10(b) 15(c) 18(d) 20
अभिकथन और कारण

चुनिए: (a) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या करता है; (b) दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता; (c) A सही, R गलत; (d) A गलत, R सही।

अभिकथन (A): एकसमान वृत्तीय गति में वस्तु त्वरित होती है।
कारण (R): उसके वेग की दिशा हर क्षण बदलती है।
अभिकथन (A): किसी वस्तु का विस्थापन शून्य हो सकता है जबकि उसकी तय की गई दूरी शून्य न हो।
कारण (R): विस्थापन केवल आरंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है।
अभिकथन (A): स्थिर 80 किमी/घं से चलती बस का त्वरण बहुत अधिक होता है।
कारण (R): त्वरण समय के साथ वेग के परिवर्तन की दर है।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 27 से 33(c) · (b) · (c) · (c) · (b) · (c) · (b)
अभिकथन-कारण1. (a) · 2. (a) · 3. (d), क्योंकि वेग बिल्कुल नहीं बदल रहा
केस स्टडी24. शून्य · 25. 720 मी · 26. 720 + 54 = 774 मी
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