इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. मेसोपोटामिया शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर: यह यूनानी के मेसोस यानी बीच और पोटैमोस यानी नदी से बना है, और इसका अर्थ है दो नदियों, फ़रात और दज़ला, के बीच की भूमि।
प्र. कीलाकार लिपि क्या है और इसका अंग्रेज़ी नाम कहाँ से आया है?
उत्तर: यह कटी हुई नरकट से गीली मिट्टी पर दबाकर बनाई गई पच्चर के आकार की लिपि है, और अंग्रेज़ी नाम लैटिन के क्यूनियस यानी पच्चर और फ़ोर्मा यानी आकार से बना है।
प्र. ज़िगुरात क्या होता है?
उत्तर: ज़िगुरात प्राचीन मेसोपोटामियाई नगरों में बना एक सीढ़ीदार, मीनार जैसा मंदिर-चबूतरा है, और बेबीलोन के धार्मिक केंद्र में भी एक ज़िगुरात था।
प्र. बेलनाकार मुद्रा किसे कहते हैं?
उत्तर: यह पत्थर का एक छोटा छेदा हुआ बेलन है, जिसे डंडी पर लगाकर गीली मिट्टी पर लुढ़काया जाता था, जिससे एक लगातार चलता चित्र और कभी-कभी लेखन भी बन जाता था।
प्र. एकल परिवार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: एकल परिवार वह घर है जिसमें पति, पत्नी और उनके बच्चे रहते हैं, न कि कोई बड़ा संयुक्त परिवार।
प्र. हौज़ क्या होता है और उर में ये कहाँ बने थे?
उत्तर: हौज़ ज़मीन में खोदा गया ढका हुआ गड्ढा है जिसमें पानी और गंदा पानी जमा होता है, और उर में ये घरों के भीतरी आँगनों में बने थे।
प्र. पट्टलेख किसे कहते हैं?
उत्तर: पट्टलेख पत्थर की वह पट्टिका है जिस पर लेख या चित्र उकेरे गए हों, और नैबोनिडस ने ऐसे ही एक लेख की छवि से पुजारिन का पहनावा तय किया था।
प्र. काँसे का इस्तेमाल करने का मतलब लंबी दूरी का व्यापार क्यों था?
उत्तर: काँसा तांबे और टिन की मिश्रधातु है, और दक्षिणी मेसोपोटामिया में इनमें से कोई धातु नहीं मिलती थी, इसलिए दोनों दूर से मँगानी पड़ती थीं।
प्र. यूरोपीय विद्वानों का ध्यान सबसे पहले मेसोपोटामिया के खंडहरों की ओर किस वजह से गया?
उत्तर: बाईबल की वजह से, क्योंकि उत्पत्ति ग्रंथ में शिमार यानी सुमेर को पक्की ईंटों के नगरों वाली भूमि बताया गया है, और शुरुआती खोजी इन कथाओं को शब्दशः सच साबित करना चाहते थे।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. इतिहासकार यह क्यों कहते हैं कि सिर्फ़ उपजाऊ मिट्टी और भरपूर अनाज से पहले नगरों का बनना नहीं समझा जा सकता?
उत्तर: अच्छी फ़सल वाले गाँव हज़ारों साल तक बिना नगर बने चलते रहे। नगर के लिए खेती के ऊपर व्यापार, निर्माण और सेवाओं वाली अर्थव्यवस्था चाहिए, और भंडारण, विनिमय तथा हिसाब चलाने वाली सामाजिक व्यवस्था भी। अनाज की बहुतायत नगर को संभव बनाती है, बनाती नहीं।
प्र. श्रम विभाजन क्या है और इसे शहरी जीवन की पहचान क्यों माना जाता है?
उत्तर: इसका मतलब है कि लोग अलग-अलग काम में दक्ष हो जाते हैं और कोई भी अपने आप में पूरा नहीं रहता। मुद्रा गढ़ने वाले को काँसे के औज़ार और रंगीन पत्थर चाहिए जो वह ख़ुद नहीं जुटा सकता, और औज़ार बनाने वाला ख़ुद तांबा-टिन खोदने नहीं जाता। एक-दूसरे पर यही लगातार निर्भरता गाँव के जीवन में ज़रूरी नहीं होती।
प्र. मेसोपोटामिया में सामान ढोने का सबसे सस्ता तरीक़ा जल-परिवहन क्यों था?
उत्तर: भारवाहक पशुओं और बैलगाड़ियों को पूरे रास्ते चारा खिलाना पड़ता है, जिससे लंबी यात्रा महँगी पड़ जाती है। नावें और बजरे धारा या हवा के सहारे लगभग मुफ़्त चलते हैं, और मेसोपोटामिया की नहरें बस्तियों के बीच बहती थीं, इसलिए वे सिंचाई के साथ-साथ व्यापार के रास्ते भी थीं।
प्र. मेसोपोटामिया का सबसे पहला लेखन कहानियों की जगह सूचियों के रूप में क्यों मिलता है?
उत्तर: लेखन उरुक के मंदिरों में आने-जाने वाले सामान का हिसाब रखने के लिए शुरू हुआ। सबसे पुरानी लगभग 5,000 पट्टिकाएँ बची हैं और वे बैलों, मछलियों और रोटियों की सूचियाँ हैं। कहानियाँ याद रखकर दोहराई जा सकती थीं, पर रोज़ के सैकड़ों सौदों की मात्राएँ नहीं।
प्र. मिट्टी की पट्टिका कैसे बनती थी और हर सौदे के लिए नई पट्टिका क्यों चाहिए होती थी?
उत्तर: लेखक गीली मिट्टी को थपथपाकर इतना चपटा कर लेता था कि वह एक हाथ में आ जाए, दोनों सतहें चिकनी करता, और नरकट के तिरछे कटे सिरे से पच्चरनुमा चिह्न दबा देता। धूप में सूखने पर वह बर्तन जैसी कड़ी हो जाती और उस पर नया चिह्न नहीं बनता, इसलिए हर नए सौदे के लिए नई पट्टिका चाहिए होती थी।
प्र. सबसे पुराने मंदिर बहुत कुछ आम घर जैसे ही क्यों रहे होंगे?
उत्तर: मंदिर को किसी देवता का निवास माना जाता था, और घर उसी के लिए बनाया जाता है जिसे उसमें रहना हो। इसलिए सबसे पुराना मंदिर कच्ची ईंट का एक छोटा-सा पूजा-स्थल था, जिसके कमरे खुले आँगन के चारों ओर बने थे। बस उसकी बाहरी दीवार अलग थी, जो नियमित अंतराल पर भीतर-बाहर जाती थी।
प्र. मंदिर मेसोपोटामियाई नगर की सबसे बड़ी संस्था कैसे बन गया?
उत्तर: उसे बार-बार और बड़ा बनाया गया, और वह आस-पास के खेतों, मछलीघरों तथा पशुओं का सैद्धांतिक स्वामी बन गया। वहाँ तेल पेरने, अनाज पीसने, सूत कातने और बुनने का काम भी होता था, और समुदाय के लिखित अभिलेख भी वहीं रखे जाते थे, इसलिए आर्थिक और धार्मिक दोनों जीवन उसी से होकर गुज़रते थे।
प्र. एनमर्कर वाली कविता मेसोपोटामिया के लोगों को अपने अतीत के बारे में क्या बताती थी?
उत्तर: यह बताती थी कि व्यापार और लेखन दोनों को राजपद ने संगठित किया: एनमर्कर ने लाजवर्द और धातुओं के लिए अरट्टा दूत भेजे, और मौखिक संदेश जब चूकने लगे तो मिट्टी पर लिख दिया। इससे वे लेखन को अपने शहरी जीवन की श्रेष्ठता का प्रमाण भी मान सके।
प्र. मुद्रा को शहरी जीवन की चीज़ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: गठरी की गाँठ पर या मर्तबान के मुँह पर लुढ़का देने से वह सामान को छेड़छाड़ से बचाती थी, और मिट्टी की चिट्ठी पर लुढ़काने से यह प्रमाण बन जाती थी कि भेजने वाला कौन है। ये दोनों काम वहीं मायने रखते हैं जहाँ अनजान लोग बार-बार लेन-देन करते हैं, यानी नगर में।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. मेसोपोटामिया के अलग-अलग भू-भागों का वर्णन कीजिए और बताइए कि सबसे पहले नगर दक्षिण में ही क्यों बने।
उत्तर: 1. उत्तर-पूर्व हरे लहरदार मैदान हैं जो पेड़ों से ढके पहाड़ों तक उठते हैं, जहाँ धाराएँ हैं और 7000 से 6000 ई.पू. जितनी पुरानी वर्षा-आधारित खेती होती रही है।
2. उत्तर में स्टेपी नाम का ऊँचा मैदानी इलाक़ा है, जो खेती से ज़्यादा भेड़-बकरी चराने लायक़ है।
3. पूर्व में दज़ला की सहायक धाराएँ ईरान के पहाड़ों तक जाने के रास्ते खोलती हैं।
4. दक्षिण मरुस्थल है, फिर भी पहला नगर और पहला लेखन वहीं आया।
5. यह इसलिए हो सका क्योंकि फ़रात और दज़ला उत्तर के पहाड़ों से महीन गाद बहाकर लाती हैं और बाढ़ के समय बिछा देती हैं, और नदियाँ कई धाराओं में बँटकर सिंचाई के काम आ जाती थीं।
6. नतीजा यह हुआ कि पुस्तक के शब्दों में यह खेती किसी भी प्राचीन सभ्यता से, यहाँ तक कि रोमन साम्राज्य से भी, ज़्यादा उपजाऊ थी।
प्र. मेसोपोटामिया में लेखन का विकास कैसे हुआ और आगे चलकर वह किन-किन कामों में आने लगा?
उत्तर: 1. लगभग 3200 ई.पू. की पहली पट्टिकाओं पर चित्र जैसे चिह्न और अंक थे, और उन पर उरुक के मंदिरों में आने-जाने वाले सामान का हिसाब दर्ज था।
2. लेखन इसलिए ज़रूरी हुआ क्योंकि नगर के लेन-देन बहुत सारे लोगों के बीच, बहुत सारी चीज़ों के और बार-बार होते थे, जिन्हें याददाश्त नहीं संभाल सकती थी।
3. चिह्न गीली मिट्टी पर कटी नरकट से दबाकर बनाए जाते थे, और सूखी पट्टिका लगभग बर्तन जैसी कड़ी हो जाती थी।
4. लगभग 2600 ई.पू. तक चिह्न पूरी तरह कीलाकार हो चुके थे और लिखी जाने वाली भाषा सुमेरियन थी।
5. इसके बाद लेखन सिर्फ़ हिसाब तक नहीं रहा: उससे शब्दकोश बने, ज़मीन के हस्तांतरण को क़ानूनी मान्यता मिली, राजाओं के कारनामे लिखे गए, और राजा द्वारा प्रचलित क़ानूनों में किए बदलावों की घोषणा हुई।
6. अक्कदी भाषा में कीलाकार लेखन पहली शताब्दी ईसवी तक, यानी दो हज़ार साल से भी ज़्यादा, चलता रहा।
प्र. दक्षिणी मेसोपोटामिया में योद्धा नेता राजा कैसे बन गए, और उरुक इस प्रक्रिया के बारे में क्या दिखाता है?
उत्तर: 1. दक्षिण की खेती कभी सुरक्षित नहीं रही: फ़रात की धाराएँ कभी बाढ़ ला देतीं या रास्ता बदल लेतीं, ऊपर के गाँव ज़्यादा पानी ले लेते या गाद से धारा बंद कर देते, इसलिए ज़मीन और पानी के झगड़े लगातार चलते थे।
2. इन झगड़ों में जीतने वाले नेता अपने साथियों को लूट बाँटते और हारे हुए लोगों को बंदी बनाकर पहरेदार या सेवक रख लेते, जिससे उनका अपना जत्था बनता गया।
3. समझदार नेता अपनी लूट देवताओं को चढ़ा देते और समुदाय का मंदिर सजा देते, जिससे उनकी ताक़त सबकी सेवा जैसी दिखने लगती।
4. इससे उन्हें मंदिर की संपत्ति बाँटने और पूरे समुदाय को आदेश देने की हैसियत मिली, और यही पद आगे चलकर स्थायी राजपद बन गया।
5. उरुक इसका नतीजा दिखाता है: उसकी कला में हथियारबंद वीर और उनके शिकार बने लोग हैं, उसने बहुत जल्दी रक्षा-दीवार बनवाई, और लगभग 3000 ई.पू. तक वह 250 हैक्टेयर का हो गया जबकि पास के दर्जनों गाँव उजड़ गए।
6. मंदिर या शासक के लिए श्रम कर नहीं, अनिवार्य सेवा था और उसका भुगतान राशन में होता था, और अनुमान है कि एक ही मंदिर बनाने में 1,500 आदमी रोज़ दस घंटे पाँच साल तक लगे।
प्र. उर की खुदाई से आम घरों और रोज़मर्रा के जीवन के बारे में क्या पता चला?
उत्तर: 1. उर की खुदाई 1930 के दशक में व्यवस्थित ढंग से हुई, और उसकी सँकरी टेढ़ी-मेढ़ी गलियों से साफ़ है कि कोई नगर-योजना नहीं थी और पहियों वाली गाड़ी के लिए जगह भी नहीं थी, इसलिए अनाज और जलावन गधों पर आता था।
2. उसी दौर के मोहनजोदड़ो के उलट उर की गलियों के नीचे नालियाँ नहीं थीं। नालियाँ और मिट्टी के पाइप घरों के आँगन में थे, और छतें भीतर की ओर ढलवाँ थीं ताकि बारिश का पानी ढके हौज़ों में चला जाए।
3. लोग घर का कूड़ा गली में ही फेंक देते थे, इसलिए गली का तल लगातार ऊँचा होता गया और बारिश का कीचड़ रोकने के लिए देहरी बार-बार ऊँची करनी पड़ी।
4. कमरों में खिड़कियाँ नहीं थीं, रोशनी भीतरी आँगन में खुलने वाले दरवाज़ों से आती थी, जिससे परिवार को एकांत भी मिलता था।
5. शकुन-पट्टिकाओं पर घरों से जुड़े विश्वास दर्ज हैं: ऊँची देहरी धन लाती है, दूसरे घर के सामने न पड़ने वाला मुख्य द्वार शुभ है, और बाहर की ओर खुलने वाला मुख्य द्वार बताता है कि पत्नी पति के लिए दुख का कारण बनेगी।
6. नगर के क़ब्रिस्तान में राजपरिवार और आम लोगों, दोनों की क़ब्रें थीं, और कुछ लोगों को उनके अपने घर के फ़र्श के नीचे भी दफ़नाया गया।
प्र. चलते-फिरते पशुचारक मारी जैसे नगर के लिए ज़रूरी तौर पर ख़तरा क्यों नहीं थे?
उत्तर: 1. दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत थी। पशुचारक छोटे जानवर, पनीर, चमड़ा और मांस देते थे और बदले में अनाज तथा धातु के औज़ार लेते थे।
2. कटी हुई फ़सल के खेत में बाँधे गए रेवड़ का गोबर खेत को उपजाऊ बनाता था, यानी चरवाहे के जानवर किसान की अगली फ़सल सुधारते थे।
3. पशुचारक बसे हुए समाज की असली कमियाँ भी भरते थे, फ़सल काटने के मज़दूर और भाड़े के सैनिक बनकर।
4. टकराव सचमुच था, पर सीमित: पानी तक जाते हुए रेवड़ बोए खेत को उजाड़ सकता था, चलते-फिरते चरवाहे गाँव का जमा अनाज लूट सकते थे, और गाँव वाले उन्हें नहर के पानी तक जाने से रोक सकते थे।
5. मारी ने इसे लड़ाई के बजाय प्रबंध से संभाला। क़बीलों को राज्य में आने-जाने की छूट थी पर उन पर नज़र रखी जाती थी, और अधिकारियों की चिट्ठियों में रात के समय एक शिविर से दूसरे शिविर तक जाने वाले आग के संकेतों का ज़िक्र है।
6. खुलापन इससे भी आगे था: मारी के अपने राजा एमोराइट थे, यानी पश्चिमी मरुस्थल से आए लोग, जो इस भूमि के परंपरागत देवताओं का सम्मान करते थे और साथ ही स्टेपी के देवता डैगन के लिए मारी में मंदिर भी बनवाते थे।
प्र. अबू सलाबिख की खुदाई किस तरीक़े से हुई और उससे क्या सामने आया?
उत्तर: 1. आज की टोलियों के पास सौ साल पहले जैसी बड़ी खुदाई के लिए पैसा कम है, इसलिए खुदाई छोटी और कहीं ज़्यादा सावधान होती है। लगभग 2500 ई.पू. का अबू सलाबिख, 10 हैक्टेयर का और 10,000 से कम आबादी वाला क़स्बा, इसी तरीक़े से खोदा गया।
2. पुरातत्वविदों ने टीले की ऊपरी कुछ मिलीमीटर मिट्टी तब खुरची जब नीचे की मिट्टी अब भी हल्की नम थी, जिससे दबी हुई ईंट की दीवारों के रंग और बनावट पहचान में आ गए।
3. फिर टनों मिट्टी को छानकर पौधों और जानवरों के छोटे-छोटे अवशेष निकाले गए, जिनमें गलियों में फेंकी गई मछलियों की जली हड्डियाँ बड़ी मात्रा में मिलीं।
4. रसोई की पहचान वहाँ बचे बीजों और रेशों से हुई जहाँ ईंधन के रूप में गोबर के उपले जलाए जाते थे, और रहने के कमरों की पहचान इसी तरह के निशान बहुत कम होने से हुई।
5. गलियों में बिखरे सूअर के बच्चों के दाँत बताते हैं कि सूअर खुले घूमते थे, और एक घर की क़ब्र में सूअर की हड्डियाँ मिलीं, शायद मरे हुए व्यक्ति के परलोक के लिए भोजन।
6. फ़र्श की सतहों की सूक्ष्मदर्शी जाँच से छत वाले कमरे, जहाँ चिनार के लट्ठों, खजूर के पत्तों और पुआल के निशान थे, खुले आसमान वाले कमरों से अलग पहचाने गए।
प्र. गणित और समय की गिनती में मेसोपोटामिया ने दुनिया को क्या दिया?
उत्तर: 1. कहानियाँ मुँह-ज़बानी चल जाती हैं, पर विद्वत्ता की परंपरा के लिए लिखित ग्रंथ चाहिए जिन्हें बाद के विद्वान पढ़कर आगे बढ़ा सकें, इसलिए यह पूरी देन लेखन पर ही टिकी है।
2. लगभग 1800 ई.पू. की पट्टिकाओं पर गुणा और भाग की सारणियाँ, वर्ग और वर्गमूल की सारणियाँ, यहाँ तक कि चक्रवृद्धि ब्याज की सारणियाँ भी मिलती हैं।
3. एक पट्टिका 2 का वर्गमूल 1 + 24/60 + 51/60 का वर्ग + 10/60 का घन बताती है, जो 1.41421296 बनता है, जबकि असली मान 1.41421356 है।
4. विद्यार्थियों को व्यावहारिक सवाल भी दिए जाते थे, जैसे किसी दिए गए क्षेत्रफल के खेत में एक उँगली गहरा पानी भर जाए तो पानी का आयतन निकालना।
5. साल के 12 महीने, महीने के चार सप्ताह, दिन के 24 घंटे और घंटे के 60 मिनट, ये सब मेसोपोटामियाई खगोलशास्त्र से आए हैं, जिसने महीना पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की परिक्रमा से लिया।
6. यह ज्ञान सिकंदर के उत्तराधिकारियों तक, फिर रोमन दुनिया तक, फिर इस्लामी दुनिया तक और अंत में मध्यकालीन यूरोप तक पहुँचा, और इसी रास्ते हम तक आया।
प्र. ज़िमरीलिम के राजमहल का वर्णन कीजिए और बताइए कि मारी किस वजह से समृद्ध हुआ।
उत्तर: 1. ज़िमरीलिम ने मारी में 1810 से 1760 ई.पू. तक शासन किया, और उसका राजमहल एक साथ राजपरिवार का निवास, राज्य के प्रशासन का केंद्र और उत्पादन का ठिकाना भी था, ख़ासकर बहुमूल्य धातुओं के आभूषणों का।
2. उसमें 2.4 हैक्टेयर में फैले 260 कमरे थे और भीतर आने का सिर्फ़ एक रास्ता था, उत्तर की तरफ़।
3. वह इतना प्रसिद्ध था कि उत्तरी सीरिया का एक छोटा राजा सिर्फ़ उसे देखने के लिए, ज़िमरीलिम के एक मित्र की परिचय-चिट्ठी लेकर, वहाँ तक आया।
4. रोज़ की सूचियों से पता चलता है कि राजा की मेज़ पर कितनी भारी मात्रा में भोजन परोसा जाता था, और लेखकों के कमरे में बैठने की चौकियाँ तथा पट्टिकाएँ रखने के मिट्टी के बक्से थे।
5. मारी की समृद्धि ताक़त से नहीं, स्थिति से आई। वह फ़रात पर दक्षिण के नगरों और तुर्की, सीरिया तथा लेबनान के खनिज-समृद्ध ऊपरी इलाक़ों के बीच पड़ता था, इसलिए लकड़ी, तांबा, टिन, तेल और शराब सब वहीं से गुज़रते थे।
6. अधिकारी हर माल की जाँच करते थे, एक नाव में 300 मर्तबान शराब तक आ जाती थी, और वे मूल्य का लगभग दसवाँ हिस्सा कर के रूप में लेते थे, इसी से एक सैन्य रूप से कमज़ोर राज्य असाधारण रूप से धनी बन गया।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. शहरी जीवन शुरू होने के बाद जो नयी संस्थाएँ अस्तित्व में आईं, उनमें से कौन-सी राजा की पहल पर निर्भर थीं? कारण सहित लिखिए।
उत्तर: जो साफ़ तौर पर राजा ने चलाईं
1. राशन पर अनिवार्य श्रम। युद्ध-बंदियों और स्थानीय लोगों को सीधे मंदिर या शासक के लिए काम पर लगाया जाता था, और उन्हें मिलने वाले अनाज, कपड़े और तेल की सैकड़ों राशन-सूचियाँ बची हैं। ऐसा दबाव सैन्य ताक़त वाला ही डाल सकता था, और इसके बिना 1,500 आदमियों को पाँच साल तक लगाने वाला मंदिर कभी न बनता।
2. संगठित लंबी दूरी का व्यापार। एनमर्कर वाली कविता साफ़ कहती है कि उरुक के इस शासक ने सुमेर का पहला व्यापार संगठित किया और लाजवर्द तथा धातुओं के लिए अरट्टा तक दूत भेजे। इतने बड़े अभियानों के लिए अधिकार और साधन किसी एक परिवार के पास नहीं थे।
3. नगर की सुरक्षा और विशाल निर्माण। उरुक ने बहुत जल्दी रक्षा-दीवार बनाई, और गिल्गोमिश पक्की ईंट की नींव वाली जिस दीवार के लिए याद किया जाता है वह भी इसी तरह का काम है, जो सिर्फ़ राजाज्ञा से ही संभव था।
4. ख़ुद लेखन, उनकी अपनी परंपरा के अनुसार। मिट्टी पर पहली बार शब्द लिखने का श्रेय एनमर्कर को दिया जाता है, जिससे पता चलता है कि वे हिसाब रखने को भी राजपद की देन मानते थे।
जो राजा के बिना, या उसके साथ-साथ बढ़ीं
5. मंदिर पहले आया। लगभग 5000 ई.पू. में वह कच्ची ईंट का छोटा-सा पूजा-स्थल था, राजाओं से बहुत पहले, और आगे चलकर खेतों, मछलीघरों तथा पशुओं का स्वामी बना। राजाओं ने उसे लूट से सजाया ज़रूर, पर बनाया नहीं।
6. श्रम विभाजन और मुद्राओं का प्रयोग शहरी अर्थव्यवस्था के अपने कामकाज से निकले, किसी राजाज्ञा से नहीं।
निष्कर्ष
7. राजा की पहल पर वही संस्थाएँ टिकी थीं जिनमें बल या बड़े पैमाने का तालमेल चाहिए, यानी अनिवार्य श्रम, संगठित व्यापार और नगर की सुरक्षा, जबकि मंदिर और दस्तकारी समुदाय के जीवन से उपजे और बाद में राजाओं ने उन्हें अपनाकर और बड़ा किया।
प्र. पुरानी मेसोपोटामियाई कहानियों से हमें उस सभ्यता की कौन-सी झलक मिलती है?
उत्तर: वे बताती हैं कि मेसोपोटामियावासी किसे बड़ा मानते थे
1. बारह पट्टिकाओं पर लिखा गिल्गोमिश महाकाव्य वहाँ ख़त्म होता है जहाँ नायक अमरता की खोज में हारकर उरुक लौट आता है। उसे सांत्वना अपने ही बनवाए नगर की दीवार पर टहलते हुए, उसकी पक्की ईंट की नींव निहारते हुए मिलती है।
2. क़बीलाई समाज का नायक इस बात से संतोष पाता कि उसके बेटे उसके बाद जीवित रहेंगे। गिल्गोमिश को संतोष उस नगर से मिलता है जो उसके लोगों ने मिलकर बनाया, यानी असली विरासत नगर थी, वंश नहीं।
वे व्यापार और लेखन के बारे में उनकी समझ दिखाती हैं
3. एनमर्कर वाली कविता में उरुक का यह प्राचीन शासक सुमेर का पहला व्यापार संगठित करता है और फिर, जब दूत लंबे मौखिक संदेश ठीक-ठीक नहीं पहुँचा पाता, मिट्टी की पट्टिका बनाकर लिख देता है। इसलिए उनके लिए व्यापार और लेखन दोनों राजपद की देन थे।
4. उसी कविता में लेखन को अरट्टा जैसे पड़ोसी देश पर मेसोपोटामियाई श्रेष्ठता का चिह्न बताया गया है, जिससे पता चलता है कि वे ख़ुद को कहाँ रखते थे।
वे सच्ची घटनाओं की याद सहेजती हैं
5. जलप्रलय की कथा, जिसका नायक ज़िउसूद्र या उतनापिष्टिम है, बाईबल की नूह वाली कथा से इतनी मिलती है कि 1873 में एक ब्रिटिश अख़बार ने वह पट्टिका ढूँढ़ने के लिए ब्रिटिश म्यूज़ियम के अभियान का ख़र्च उठाया। 1960 के दशक तक विद्वान मान चुके थे कि ऐसी कथाएँ शब्दशः सच नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बदलावों को याद रखने का तरीक़ा हैं।
वे शहरी जीवन के प्रति गर्व दिखाती हैं
6. मेसोपोटामियावासियों को अलग-अलग समुदायों और संस्कृतियों के लोगों के साथ रहने पर गर्व था, और जब कोई नगर युद्ध में उजड़ता तो वे उस पर शोक-कविता लिखते थे, इसीलिए उजड़े नगरों का विलाप उनके साहित्य का एक विषय है।
निष्कर्ष
7. हिसाब की पट्टिकाएँ बताती हैं कि उनके पास क्या था और वे क्या बेचते-ख़रीदते थे। कहानियाँ बताती हैं कि वे क्या सोचते और किसे बड़ा मानते थे: उनका राजपद, उनके नगरों का गर्व, लेखन की उनकी व्याख्या, और आपदा की उनकी स्मृति।
प्र. अत्यंत उत्पादक खेती, जल-परिवहन, धातु और पत्थर की कमी, श्रम विभाजन, मुद्राओं का प्रयोग तथा राजाओं की सैन्य-शक्ति को आवश्यक दशाओं, कारणों और शहरों के विकास के परिणामों में बाँटिए और हर वर्गीकरण का कारण दीजिए।
उत्तर: आवश्यक दशाएँ
1. अत्यंत उत्पादक खेती। नगर में ऐसे बहुत से लोग रहते हैं जो अपना अनाज ख़ुद नहीं उगाते, इसलिए भरोसे लायक़ अतिरिक्त उपज पहले से होनी चाहिए। फिर भी यह कारण नहीं है, क्योंकि गाँवों में सदियों तक अतिरिक्त उपज रही और नगर नहीं बने।
2. जल-परिवहन। नावें और बजरे धारा या हवा से लगभग मुफ़्त चलते हैं, जबकि भारवाहक पशु रास्ते भर का चारा खा जाते। इस सस्ती ढुलाई के बिना नगर जिस व्यापार पर जीता है वह टिक ही नहीं सकता था।
कारण
3. धातु और पत्थर की कमी। दक्षिण में न अच्छा पत्थर था, न धातु और न मज़बूत लकड़ी, इसलिए उसे अपने कपड़े और खेती की उपज देकर तुर्की, ईरान और खाड़ी पार से लकड़ी, तांबा, टिन, चाँदी, सोना, सीपी और पत्थर लेने पड़े। इतने बड़े व्यापार के लिए भंडारण, तालमेल और लिखित हिसाब चाहिए, और यही लोगों को नगर में इकट्ठा करता है।
4. श्रम विभाजन। जैसे ही मुद्रा गढ़ने वाला काँसे के औज़ार बनाने वाले पर और वह तांबा-टिन मँगाने वाले पर निर्भर हुआ, सबका पास-पास रहना मजबूरी बन गया। यही आपसी निर्भरता शहरीकरण को आगे बढ़ाती है।
परिणाम
5. मुद्राओं का प्रयोग। बेलनाकार मुद्रा गठरी को छेड़छाड़ से बचाती है और चिट्ठी को असली साबित करती है, और ये दोनों काम वहीं ज़रूरी हैं जहाँ अनजान लोग बार-बार लेन-देन करते हों। यानी मुद्रा नगर के होने के बाद आती है।
6. राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया। राजपद पहले से बसे और भरे-पूरे इलाक़े में ज़मीन-पानी के बार-बार के झगड़ों से निकला, और राशन पर अनिवार्य श्रम उसी ताक़त की उपज है।
निष्कर्ष
7. क्रम इस तरह बनता है: खेती और सस्ती ढुलाई ने नगर को संभव बनाया, कमी और विशेषज्ञता ने उसे सचमुच बनाया, और मुद्राएँ तथा राजसत्ता वह हैं जो शहरी जीवन ने आगे चलकर पैदा कीं।
प्र. मेसोपोटामिया के लोग ख़ुद अपने अतीत को कैसे सहेजते और पढ़ते थे? निनवै के असुरबनिपाल और बेबीलोन के नैबोनिडस के उदाहरण से उत्तर दीजिए।
उत्तर: पृष्ठभूमि
1. लौहयुग में उत्तर के असीरियाई लोगों ने ऐसा साम्राज्य खड़ा किया जो अपने चरम पर, 720 से 610 ई.पू. के बीच, मिस्र तक फैला था, और जो अनाज, पशु, धातु और दस्तकारी की वस्तुओं की वसूली पर टिकी एक शिकारी अर्थव्यवस्था से चलता था।
2. फिर भी असीरियाई राजा दक्षिण की बेबीलोनिया को ही उच्च संस्कृति का केंद्र मानते थे, इसीलिए उनकी विद्वत्ता का मुँह दक्षिण की ओर था।
असुरबनिपाल का पुस्तकालय
3. असुरबनिपाल, जिसने 668 से 627 ई.पू. तक शासन किया और जो बड़े असीरियाई राजाओं में आख़िरी था, ने निनवै में पुस्तकालय बनवाया और इतिहास, महाकाव्य, शकुन, ज्योतिष, स्तुतियों और गीतों की पुरानी पट्टिकाएँ ढुँढ़वाने अपने लेखक दक्षिण भेजे।
4. उसमें लगभग 1,000 मूलग्रंथ और क़रीब 30,000 पट्टिकाएँ थीं, विषय के अनुसार बँटी हुई, और पट्टिकाओं की टोकरियों पर मिट्टी के लेबल लगे थे जिन पर विषय और लिखने वाले का नाम रहता था, यानी यह नाम के अलावा हर तरह से सूचीकरण था।
5. यह इसलिए हो सका क्योंकि बेबीलोनियाई पाठशालाएँ विद्यार्थियों को दर्जनों पट्टिकाएँ नक़ल करना सिखाती थीं, और क्योंकि सुमेरियन, लगभग 1800 ई.पू. में बोली जानी बंद हो जाने के बाद भी, शब्द-सूचियों, चिह्न-सूचियों और दो भाषाओं वाली पट्टिकाओं से पढ़ाई जाती रही। इसलिए लगभग 650 ई.पू. में भी कोई लेखक 2000 ई.पू. की पट्टिका पढ़ सकता था।
नैबोनिडस, एक शुरुआती पुरातत्वविद
6. नैबोपोलास्सर ने 625 ई.पू. में बेबीलोनिया को असीरियाई सत्ता से आज़ाद कराया, और बेबीलोन दुनिया का सबसे बड़ा नगर बन गया, 850 हैक्टेयर से भी बड़ा, तिहरी दीवार, बड़े महल-मंदिर, एक ज़िगुरात और धार्मिक केंद्र तक जाने वाले जुलूस-मार्ग के साथ।
7. स्वतंत्र बेबीलोन के आख़िरी शासक नैबोनिडस ने सपने के बाद उर की मुख्य पुजारिन का भुला दिया गया पद फिर शुरू किया, एक ऐसे राजा का पट्टलेख ढुँढ़वाया जिसे हम आज लगभग 1150 ई.पू. का मानते हैं, और उस पर उकेरी पुजारिन की छवि से अपनी बेटी का पहनावा और आभूषण तय किए। उसने लगभग 2370 ई.पू. में शासन करने वाले अक्कद के सारगोन की टूटी मूर्ति भी देवताओं के प्रति श्रद्धा और राजपद के प्रति सम्मान के कारण ठीक करवाई।
निष्कर्ष
8. दोनों ने अतीत को सहेजने और वापस पाने लायक़ माना: असुरबनिपाल ने ग्रंथ जुटाकर और सूचीबद्ध करके, नैबोनिडस ने चीज़ें ढूँढ़कर और उनसे साक्ष्य पढ़कर। इसीलिए कहा जा सकता है कि पहला पुस्तकालय और पहला पुरातत्वविद मेसोपोटामिया ने ही दिए।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक दक्षिणी मेसोपोटामिया को बाहर से मँगाई जाने वाली कोई दो चीज़ें बताइए।
उत्तर: इनमें से कोई दो: लकड़ी, तांबा, टिन, चाँदी, सोना, सीपी या अच्छा पत्थर।
(ख) 2 अंक मेसोपोटामिया बदले में क्या देता था, और वह ऐसा कर कैसे पाता था?
उत्तर: वह कपड़ा और खेती की उपज देता था। ऐसा वह इसलिए कर पाता था क्योंकि दक्षिण की सिंचित खेती असाधारण रूप से उपजाऊ थी, इसलिए अनाज और ऊन ही वे दो चीज़ें थीं जो उसके पास ज़रूरत से ज़्यादा थीं, जबकि बाक़ी लगभग सब कुछ उसके पास नहीं था।
(ग) 3 अंक समझाइए कि कच्चे माल की इस कमी ने मेसोपोटामिया को शहरी जीवन की ओर कैसे धकेला।
उत्तर: इतनी दूर का व्यापार कोई अकेला परिवार नहीं कर सकता था। किसी को अभियान तैयार करके भेजना पड़ता, लौटा हुआ माल संभालना पड़ता और यह हिसाब रखना पड़ता कि किसने क्या दिया, और इसके लिए विशेषज्ञ, संगठन तथा लिखित अभिलेख चाहिए थे। इस तरह पत्थर और धातु की कमी ने ठीक वही व्यापार, वही विशेषज्ञता और वही हिसाब-किताब पैदा किया जो मिलकर शहरी अर्थव्यवस्था कहलाते हैं, इसीलिए पुस्तक कमी को शहरीकरण की बाधा नहीं, कारण मानती है।
(क) 1 अंक गिल्गोमिश महाकाव्य कितनी पट्टिकाओं पर लिखा गया था?
उत्तर: बारह पट्टिकाओं पर।
(ख) 2 अंक महाकाव्य के अंत में गिल्गोमिश को सांत्वना कहाँ मिलती है, और यह चौंकाने वाला क्यों है?
उत्तर: उसे सांत्वना पक्की ईंट की उस नगर-दीवार से मिलती है जो उसने ख़ुद बनवाई थी। यह चौंकाने वाला इसलिए है कि क़बीलाई समाज का नायक इस विचार से संतोष पाता कि उसके बेटे उसके बाद जीवित रहेंगे, जबकि गिल्गोमिश को संतोष एक इमारत से मिलता है।
(ग) 3 अंक यह अंत बताता है कि मेसोपोटामिया के लोग अपने नगरों के बारे में क्या सोचते थे?
उत्तर: यह बताता है कि मेसोपोटामियावासी के लिए उसकी स्थायी उपलब्धि नगर थी, वंश नहीं। शहरी जीवन अपने आप में गर्व का विषय था, और यह अध्याय की बाक़ी बातों से भी मेल खाता है: उन्हें कई समुदायों और संस्कृतियों के लोगों के साथ रहने पर गर्व था, वे युद्ध में उजड़े नगरों पर शोक-कविताएँ लिखते थे, और उनके साहित्य में नगर, उसकी दीवार और उसका मंदिर ही वे काम हैं जिनसे कोई शासक याद रखा जाता है।