- धरातल असमतल क्यों है, और अंतर्जनित तथा बहिर्जनित बलों में अंतर
- भू-आकृतिक प्रक्रिया और भू-आकृतिक कारक में सटीक अंतर
- अंतर्जनित प्रक्रियाओं की दो शाखाएँ: पटल विरूपण और ज्वालामुखीयता
- अपक्षय के तीन प्रकार, और अपशल्कन एक परिणाम है न कि प्रक्रिया, यह क्यों
- बृहत् संचलन के तीन रूप और भूस्खलन के पाँच प्रकार
- कौन-से अपरदन कारक जलवायु से नियंत्रित होते हैं, और कौन-से नहीं
- मृदा निर्माण को नियंत्रित करने वाले पाँच कारक
पटल विरूपणज्वालामुखीयताअपक्षयअपशल्कन
बृहत् संचलनभूस्खलनअपरदनकार्स्टमृदाजनन
1धरातल असमतल क्यों है?
पिछले अध्यायों में बताया गया था कि पृथ्वी की पर्पटी कैसे बनी और उसकी प्लेटें कैसे संचलित होती रही
हैं। यही संचलन आज धरातल के असमतल होने का कारण है: भू-पर्पटी गत्यात्मक है, यह क्षैतिज और
उर्ध्वाधर दोनों दिशाओं में संचलित होती है, और भूतकाल में यह वर्तमान से कुछ अधिक तेज़ गति से
संचलित होती थी। पर्पटी बनाने वाले आंतरिक बलों में जो अंतर रहा है, वही धरातल की बाहरी सतह में
दिखने वाले अंतर के लिए उत्तरदायी है।
साथ ही, धरातल बाहर से भी लगातार आक्रमण झेलता है, जो सूर्य की ऊर्जा से चलता है। इस तरह दो
विपरीत समूह के बल बनते हैं।
अंतर्जनित बल
- पृथ्वी के भीतर से उत्पन्न होते हैं
- मुख्यतः भू-निर्माणकारी बल
- धरातल के भागों को निरंतर ऊपर उठाते या बनाते हैं
बहिर्जनित बल
- पृथ्वी के बाहर से (सूर्य द्वारा प्रेरित) उत्पन्न होते हैं
- मुख्यतः भूमि-विघर्षक बल
- उच्चावच को घिसते (ह्रास) और द्रोणियों को भरते (अधिवृद्धि) हैं
तल संतुलन (Gradation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अपरदन धरातल के ऊँचे और नीचे भागों के
बीच उच्चावच के अंतर को कम करता है। अंतर्जनित बल लगातार उच्चावच बनाते रहते हैं, इसलिए बहिर्जनिक
प्रक्रियाएँ इसे कभी पूरी तरह सम नहीं कर पातीं, और यह अंतर तब तक बना रहता है जब तक दोनों विपरीत
बल कार्यरत रहते हैं।
लगभग हर जीव किसी न किसी रूप में धरातल के पर्यावरण को बनाए रखने में योगदान देता है। परंतु
मनुष्यों ने संसाधनों के अत्यधिक दोहन से भारी क्षति पहुँचाई है। अध्याय की अपनी बात व्यावहारिक है:
धरातल का उपयोग करें, परंतु भविष्य के लिए इसकी संभाव्यता को नष्ट न करें।
2भू-आकृतिक प्रक्रिया, कारक और अनाच्छादन
इस अध्याय में दो शब्द सुनने में एक जैसे लगते हैं परंतु उनका अर्थ भिन्न है, और परीक्षा में इन्हें
मिलाने पर अक्सर अंक कट जाते हैं।
एक भू-आकृतिक प्रक्रिया (Process) धरातल के पदार्थों पर लगने वाला एक बल है जो उन्हें
प्रभावित करता है। एक भू-आकृतिक कारक (Agent) एक गतिशील माध्यम है, जैसे प्रवाहित जल, हिमानी,
हवा, लहरें या धाराएँ, जो धरातल के पदार्थों को हटाता, ले जाता तथा निक्षेपित करता है। पटल विरूपण और
ज्वालामुखीयता अंतर्जनित भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ हैं; अपक्षय, बृहत् संचलन, अपरदन और निक्षेपण
बहिर्जनिक भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ हैं।
| प्रक्रिया | कारक | |
|---|---|---|
| क्या है | धरातल के पदार्थ पर लगने वाला बल | पदार्थ को ढोने वाला गतिशील माध्यम |
| उदाहरण | अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण | प्रवाहित जल, भूमिगत जल, हिमानी, हवा, लहरें और धाराएँ |
| किससे चलता है | प्रवणता: ऊँचे से नीचे स्तर की ओर, उच्च दाब से निम्न दाब की ओर | गुरुत्वाकर्षण, जो पदार्थों के हर ढाल-गामी संचलन को सक्रिय करता है |
सभी बहिर्जनिक भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ मिलकर एक सामान्य शब्दावली के अंतर्गत आती हैं।
अनाच्छादन (Denudation) (“निरावृत्त करना” या “आवरण हटाना”) के अंतर्गत अपक्षय, बृहत् संचलन,
अपरदन और परिवहन आते हैं। इन प्रत्येक प्रक्रिया का अपना विशिष्ट प्रेरक बल होता है, परंतु
गुरुत्वाकर्षण और गतिज ऊर्जा पूरी शृंखला को चलाते हैं।

और निक्षेपण, प्रत्येक का अपना प्रेरक बल है परंतु समग्र रूप से गुरुत्वाकर्षण ही इसे चलाता है। यह एक
प्रारेखीय चित्र है, किसी वास्तविक भू-दृश्य का चित्र नहीं।
3अंतर्जनित प्रक्रियाएँ: पटल विरूपण और ज्वालामुखीयता
अंतर्जनित प्रक्रियाओं की ऊर्जा मुख्यतः रेडियोधर्मी क्रियाओं, घूर्णन तथा ज्वारीय घर्षण और पृथ्वी की
उत्पत्ति से बची प्रारंभिक ऊष्मा से मिलती है। यह ऊर्जा दो समूहों की प्रक्रियाएँ चलाती है, दोनों पिछली
इकाई और अध्याय में परिचित कराई जा चुकी हैं, इसलिए यहाँ केवल परीक्षा-उपयोगी तथ्य ही दोहराए गए हैं।
| पटल विरूपण का प्रकार | इसमें क्या होता है |
|---|---|
| पर्वतनी (Orogenic) | तीक्ष्ण वलयन से पर्वत निर्माण, पर्पटी की लंबी और संकीर्ण पट्टियों को प्रभावित करती है |
| महाद्वीप रचना (Epeirogenic) | महाद्वीप-निर्माण; पर्पटी के बड़े भागों का उत्थान या विकृति |
| भूकंप | स्थानीय, अपेक्षाकृत मामूली संचलन |
| प्लेट विवर्तनिकी | पर्पटी प्लेटों का क्षैतिज संचलन |
पर्वतनी पर्वत-निर्माण प्रक्रिया है और पर्पटी को वलयन के रूप में तीक्ष्णता से विकृत करती
है। महाद्वीप रचना महाद्वीप-निर्माण प्रक्रिया है और इसमें केवल साधारण विकृति होती है। पर्वतनी,
महाद्वीप रचना, भूकंप और प्लेट विवर्तनिकी, इन सभी से पर्पटी में भ्रंश तथा विभंग हो सकता है, और चारों
से दाब-आयतन-तापक्रम (PVT) में परिवर्तन होता है, जिससे शैलों का कायांतरण होता है।
ज्वालामुखीयता में पिघली शैल (मैग्मा) का धरातल की ओर या धरातल पर संचलन, और अनेक अंतर्वेधी
तथा बहिर्वेधी ज्वालामुखी स्वरूपों का निर्माण सम्मिलित है। इसका विस्तृत विवरण इस इकाई के पूर्व
अध्यायों में ज्वालामुखी और आग्नेय शैलों के अंतर्गत दिया जा चुका है; यहाँ यह केवल अंतर्जनित भू-आकृतिक
प्रक्रियाओं की दूसरी शाखा के रूप में महत्त्वपूर्ण है।
4बहिर्जनिक प्रक्रियाओं को कौन नियंत्रित करता है
बहिर्जनिक प्रक्रियाओं को ऊर्जा वायुमंडल से (अंततः सूर्य से) तथा विवर्तनिक कारकों द्वारा बने ढाल
और प्रवणता से मिलती है।
प्रतिबल (Stress) किसी ठोस पर प्रति इकाई क्षेत्र लगने वाला बल है, जो धक्का या खिंचाव से
उत्पन्न होता है और विकृति उत्पन्न करता है। अपरूपण प्रतिबल (Shear stress) धरातल के पदार्थों
के फलकों के साथ कार्य करने वाला एक विलगकारी बल है, जो कोणीय विस्थापन या फिसलन उत्पन्न करता है,
यही प्रतिबल शैलों को तोड़ता है।
गुरुत्वाकर्षक प्रतिबल के अतिरिक्त, धरातल के पदार्थ तापमान परिवर्तन, क्रिस्टलन और पिघलन से उत्पन्न
आण्विक प्रतिबलों से भी प्रभावित होते हैं। इन सबका मिलकर बनना ही अपक्षय, बृहत् संचलन और अपरदन के
घटित होने का मूल कारण है।
जलवायु
तापमान और वर्षण दो मुख्य जलवायवीय तत्त्व हैं। अक्षांश, ऋतु और जल-थल के वितरण से बने भिन्न-भिन्न
जलवायु प्रदेश भिन्न-भिन्न बहिर्जनिक प्रक्रियाएँ उत्पन्न करते हैं। ऊँचाई, ढाल की दिशा (उत्तर-मुखी
ढाल को दक्षिण-मुखी से भिन्न सूर्यातप मिलता है, तथा पूर्व-मुखी को पश्चिम-मुखी से), पवन की गति और
दिशा, तथा वर्षण-वाष्पीकरण संबंध, तापक्रम परिसर और तुषार गहराई से स्थानीय भिन्नता भी आती है।
शैल का प्रकार और संरचना
संरचना में वलन, भ्रंश, संस्तरों का उन्मुखीकरण और झुकाव, जोड़ों की उपस्थिति, संस्तरण तल,
खनिजों की कठोरता या कोमलता, रासायनिक संवेदनशीलता और पारगम्यता सम्मिलित हैं। एक शैल एक प्रक्रिया
के प्रति प्रतिरोधी हो सकती है और दूसरी के प्रति नहीं, और वही शैल भिन्न जलवायु में भिन्न व्यवहार
कर सकती है।
इन दो नियंत्रणों के कारण बहिर्जनिक प्रक्रियाएँ अलग-अलग स्थानों पर भिन्न दर से कार्य करती हैं, और
यही दर-भिन्नता स्थलाकृति में विविधता उत्पन्न करती है। इसके प्रभाव सामान्यतः छोटे और मंद होते हैं,
अल्पावधि में अनुभवगम्य नहीं होते, परंतु दीर्घावधि में निरंतर “श्रांति” के कारण गंभीर परिणाम देते हैं।
अपक्षय मैंटल की गहराई एक जलवायु प्रदेश से दूसरे में भिन्न होती है (स्ट्राखोव, 1967 के अनुसार)। यही कारण है कि एक ही शैल विश्व के अलग-अलग भागों में बहुत भिन्न गहराई तक अपक्षयित होती है।
5अपक्षय
अपक्षय (Weathering) मौसम और जलवायु के तत्त्वों की क्रिया द्वारा शैलों का यांत्रिक विखंडन
तथा रासायनिक अपघटन है। चूँकि इसमें पदार्थों का बहुत कम या नगण्य संचलन होता है, यह एक
स्वस्थाने (in-situ) प्रक्रिया है, यही कारण है कि अपक्षय परिवहन के समान नहीं है।
अपक्षय प्रक्रियाओं के तीन प्रमुख समूह हैं। बहुत कम ही कोई एक अकेले काम करता है, प्रायः एक की
प्रधानता देखी जाती है।
| प्रकार | कैसे कार्य करता है | आवश्यकता / उदाहरण |
|---|---|---|
| रासायनिक | रासायनिक क्रिया द्वारा शैल का अपघटन, विलयन या सूक्ष्म अवस्था में परिवर्तन | विलयन, कार्बोनेटीकरण, जलयोजन, ऑक्सीकरण, न्यूनीकरण। जल और वायु (ऑक्सीजन, CO₂) तथा ऊष्मा आवश्यक; पौधों-पशुओं का अपघटन भूमिगत CO₂ बढ़ाता है |
| भौतिक / यांत्रिक | रासायनिक संरचना बदले बिना, भौतिक बलों से शैल को तोड़ता है | गुरुत्वाकर्षक बल (उफर भार दबाव, अपरूपण प्रतिबल); विस्तारण बल (तापक्रम परिवर्तन, क्रिस्टल वृद्धि, पशु क्रियाकलाप); जल का दबाव (शुष्कन-आर्द्रन चक्र) |
| जैविक | जीवों की वृद्धि या संचलन से खनिजों/आयनों का योगदान या हटाव | केंचुओं, दीमकों, कृंतकों द्वारा बिल खोदना; मानव द्वारा जुताई; सड़ते पौधे-पशु ह्यूमिक व कार्बनिक अम्ल बनाते हैं; जड़ों का यांत्रिक दबाव |
यह न लिखें कि भौतिक अपक्षय केवल तापमान परिवर्तन से होता है। शुष्कन-आर्द्रन चक्रों से जल का दबाव
और गुरुत्वाकर्षक बल (उफर भार दबाव, अपरूपण प्रतिबल) भी भौतिक अपक्षय का उतना ही हिस्सा हैं, तापीय
विस्तारण और दबाव-मुक्ति केवल सबसे सामान्य कारण हैं, अकेले कारण नहीं।
6अपक्षय के प्रभाव और महत्त्व
भौतिक अपक्षय का एक विशेष, नामित प्रभाव अपने आप में सीखने योग्य है।
अपशल्कन (Exfoliation) एक परिणाम है, प्रक्रिया नहीं: शैल या आधार-शैल से मोटे-मोटे
घुमावदार खोलों का उतरना, जिससे चिकनी, गोल सतह बनती है। यह अभारितकरण और तापीय विस्तारण-संकुचन (तथा
लवण अपक्षय) के कारण होता है। अपशल्कित गुंबद अभारितकरण से, और टार्स तापीय विस्तारण से
बनते हैं।

अभारितकरण और बार-बार होने वाले तापीय विस्तारण-संकुचन से होता है। यह एक प्रारेखीय चित्र है, किसी
वास्तविक शैल-रूप का चित्र नहीं।
अपक्षय का महत्त्व केवल शैल तोड़ने तक सीमित नहीं है:
भूमि को तैयार करता है
शैल को टुकड़ों में तोड़कर आवरण प्रस्तर और मृदा-निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है। यदि शैल
अपक्षयित न हो तो अपरदन का कोई महत्त्व नहीं रहता।
जैव-विविधता को सहारा देता है
वन और जैव-मंडल अपने नीचे के अपक्षयी प्रावार की गहराई पर निर्भर करते हैं।
मूल्यवान अयस्कों का समृद्धीकरण
भूमिगत जल रासायनिक या भौतिक निक्षालन द्वारा विलेय पदार्थ हटाकर शेष को संकेंद्रित करता है, इसे
समृद्धीकरण कहते हैं, यह लोहा, मैंगनीज़, एल्युमिनियम और ताँबे के अयस्कों पर लागू होता है,
जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए वास्तव में महत्त्वपूर्ण हैं।
7बृहत् संचलन
बृहत् संचलन (Mass movement) शैल-मलवे को केवल गुरुत्वाकर्षण के प्रत्यक्ष प्रभाव से ढाल पर
नीचे स्थानांतरित करता है। कोई भू-आकृतिक कारक (प्रवाहित जल, हिमानी, हवा, लहरें, धाराएँ) सीधे भाग
नहीं लेता, वायु, जल या हिम मलवे को नहीं ढोते, बल्कि मलवा ही अपने साथ वायु, जल या हिम ले जाता है।
यही कारण है कि बृहत् संचलन अपरदन के अंतर्गत नहीं आता, यद्यपि पदार्थ एक स्थान से दूसरे स्थान को
शिफ्ट अवश्य होता है।
अपक्षय बृहत् संचलन के लिए अनिवार्य नहीं है, परंतु इसे बहुत बढ़ावा देता है, अनपक्षयित ढालों की
अपेक्षा अपक्षयित ढालों पर बृहत् संचलन कहीं अधिक सक्रिय रहता है। संचलन मंद से तीव्र तक हो सकता है और
तीन रूप लेता है।
अनुप्रस्थ विस्थापन (Heave)
प्रायः तुषार वृद्धि जैसे कारणों से मृदा का धीमा, ऊपर की ओर विस्थापन।
प्रवाह (Flow)
पदार्थ श्यान द्रव्यमान की भाँति ढाल पर बहता है।
स्खलन (Slide)
तीव्र, अवगम्य संचलन, नीचे दिए पाँच भूस्खलन प्रकारों का आधार।
असंबद्ध कमज़ोर पदार्थ, छिछली संस्तर वाली शैलें, भ्रंश, तीव्रता से झुके संस्तर, खड़ी भृगु, मूसलाधार
वर्षा और वनस्पति का अभाव, ये सभी बृहत् संचलन को बढ़ावा देते हैं।
भूस्खलन अपेक्षाकृत तीव्र और अवगम्य होते हैं, और इनमें सम्मिलित पदार्थ अपेक्षाकृत शुष्क
होता है।
| भूस्खलन प्रकार | क्या होता है |
|---|---|
| अवसर्पण (Slump) | शैल-मलवे की एक या कई इकाइयों का ढाल के सापेक्ष पश्च-आवर्तन सहित फिसलना |
| मलवा स्खलन (Debris slide) | मलवे का तीव्र लोटन या फिसलन, पश्च-आवर्तन के बिना |
| मलवा पतन (Debris fall) | खड़ी या प्रलंबी फलक से मृदा-मलवे का लगभग स्वतंत्र पतन |
| शैल स्खलन (Rockslide) | संस्तर, जोड़ या भ्रंश तल के सहारे शैल-खंडों का सरकना; तीव्र ढाल पर बहुत तेज़ व विध्वंसक; तीव्र नति वाले असांतत्यों के सहारे समतलीय पात के रूप में होता है |
| शैल पतन (Rock fall) | तीव्र ढाल से, ढाल-फलक से दूर, शैल-खंडों का स्वतंत्र पतन; यह केवल उथले संस्तर से होता है, यही इसे शैल स्खलन से अलग करता है, जो काफी गहराई तक के पदार्थ को प्रभावित करता है |

फिसलते हुए पीछे घूमता है, मलवा स्खलन बिना घूमे फिसलता है, और शैल पतन प्रलंबी फलक से स्वतंत्र
गिरता है। यह किसी वास्तविक पहाड़ी का चित्र नहीं है।
हिमालय
- विवर्तनिक दृष्टि से सक्रिय
- अधिकांशतः परतदार, असंघटित से अर्ध-संघटित पदार्थ
- बहुत तीव्र ढाल
- मलवा अवधाव और भूस्खलन बहुत बारंबार होते हैं
नीलगिरि और पश्चिमी घाट
- विवर्तनिक दृष्टि से अधिक स्थिर, बहुत कठोर शैलें
- फिर भी खड़ी भृगु और कगार मौजूद
- तापक्रम परिसर से स्पष्ट यांत्रिक अपक्षय; लघु अवधि में भारी वर्षा
- मलवा अवधाव, भूस्खलन और सीधे शैल पतन होते हैं, बस हिमालय से कम बारंबार
8अपरदन और निक्षेपण
अपरदन (Erosion) में शैल-मलवे का अधिग्रहण और परिवहन सम्मिलित है। जब अपक्षय (या कोई अन्य
प्रक्रिया) बड़ी शैल को टुकड़ों में तोड़ती है, तब अपरदन के कारक, जैसे प्रवाहित जल, भूमिगत जल, हिमानी,
हवा और लहरें, उसे हटाकर अन्यत्र ले जाते हैं। इन कारकों द्वारा ढोए गए मलवे से होने वाला अपघर्षण भी
अपरदन में सहायक है। अपरदन उच्चावच को घिसकर भू-दृश्य को नीचा करता है, अपक्षय अपरदन में सहायक है
परंतु इसके लिए अनिवार्य नहीं है।
पाँच अपरदन कारकों में से तीन सीधे जलवायु से नियंत्रित होते हैं, और पदार्थ की तीन अवस्थाओं को
दर्शाते हैं: हवा (गैसीय), प्रवाहित जल (द्रव) और हिमानी (ठोस)।
शेष दो कारक जलवायु से नियंत्रित नहीं होते। लहरों का कार्य स्थलमंडल-जलमंडल के
अंतरापृष्ठ, अर्थात् तटीय प्रदेश की स्थिति से नियंत्रित होता है। भूमिगत जल का कार्य क्षेत्र की
शैल-प्रकृति पर अधिक निर्भर करता है: यदि शैलें पारगम्य और घुलनशील हों तथा जल उपलब्ध हो, तो
कार्स्ट स्थलाकृति विकसित होती है। इन कारकों से बनने वाली भू-आकृतियों का वर्णन अगले अध्याय में
है, इस अध्याय में नहीं।
निक्षेपण (Deposition) अपरदन का परिणाम है, यह किसी कारक का सीधा “कार्य” नहीं है। जैसे-जैसे
अपरदन कारक मंद ढाल पर अपना वेग (और इसलिए ऊर्जा) खोते हैं, वे जो पदार्थ ढो रहे थे वह जमने लगता है।
पहले स्थूल पदार्थ, बाद में सूक्ष्म पदार्थ निक्षेपित होता है, और इससे निम्न भूभाग भर जाते हैं। यही
पाँचों अपरदन कारक निक्षेपण (अधिवृद्धि) कारक के रूप में भी कार्य करते हैं।
9मृदा निर्माण
मृदाजनन (Pedogenesis) यानी मृदा-निर्माण सबसे पहले अपक्षय पर निर्भर करता है, अपक्षयी
मैंटल की गहराई ही मृदा-निर्माण का मूल निवेश है। मृदा विज्ञान (Pedology) मृदा का विज्ञान है;
मृदा वैज्ञानिक (Pedologist) मृदा का जानकार है।
मृदा निर्माण को नियंत्रित करने वाले पाँच कारक हैं, जो अलग-अलग नहीं बल्कि संयुक्त रूप से कार्य
करते हैं।
| कारक | भूमिका | क्या तय करता है |
|---|---|---|
| मूल पदार्थ | निष्क्रिय नियंत्रक | स्वस्थाने अपक्षयित (अवशिष्ट) बनाम परिवहनकृत मृदा; युवा मृदा मूल शैल से मिलती-जुलती है; चूना क्षेत्रों में परिपक्व मृदा भी मूल शैल दर्शाती है |
| स्थलाकृति | निष्क्रिय नियंत्रक | सूर्यातप और अपवाह को नियंत्रित करती है। तीव्र ढाल पर मृदा छिछली, सपाट उच्च क्षेत्र में मोटी। मंद ढाल, जहाँ अपरदन धीमा और परिश्रवण अच्छा हो, वहाँ मृदा निर्माण सबसे अनुकूल |
| जलवायु | सक्रिय नियंत्रक | नमी और तापक्रम। अधिक जल से अपक्षालन (नीचे परिवहन) और नीचे निक्षेपण होता है; आर्द्र जलवायु में सिलिका निष्कासन; शुष्क जलवायु में कठोर लवण-परत बनती है; उष्ण/मध्यम वर्षण क्षेत्रों में कंकर (कैल्शियम कार्बोनेट पिंड) बनते हैं |
| जैविक क्रियाएँ | सक्रिय नियंत्रक | वनस्पति व जीव ह्यूमस, नमी-धारण और नाइट्रोजन जोड़ते हैं। ठंडी जलवायु में ह्यूमस या पीट जमा होती है (धीमी बैक्टीरिया-क्रिया); आर्द्र उष्णकटिबंधीय में वनस्पति तेज़ी से ऑक्सीकृत होकर ह्यूमस कम छोड़ती है। नाइट्रोजन-निर्धारण राइज़ोबियम जैसे बैक्टीरिया द्वारा दलहनी पौधों की मूल-ग्रंथिकाओं में होता है |
| कालावधि | तीसरा महत्त्वपूर्ण कारक | परिपक्वता और परिच्छेदिका-विकास तय करता है। हाल में निक्षेपित जलोढ़ या हिमानी टिल से बनी मृदा युवा होती है, संस्तर कम या अविकसित होते हैं; परिपक्वता के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं |
यदि “मृदा-निर्माण की प्रक्रिया” और “मृदा-निर्माण कारकों” में अंतर पूछा जाए: प्रक्रिया
ऊपर बताई गई उपनिवेशन, ह्यूमस-संचय और परिपक्वता की क्रमबद्ध शृंखला है; कारक (मूल पदार्थ,
स्थलाकृति, जलवायु, जैविक क्रियाएँ, कालावधि) यह नियंत्रित करते हैं कि यह प्रक्रिया कैसे और कितनी
तेज़ी से चलती है। मूल पदार्थ और स्थलाकृति को निष्क्रिय नियंत्रक कहा जाता है; जलवायु और
जैविक क्रियाएँ सक्रिय नियंत्रक हैं; कालावधि तीसरा महत्त्वपूर्ण कारक है जो परिपक्वता तय
करता है।
- क्या मैं भू-आकृतिक प्रक्रिया और भू-आकृतिक कारक में सटीक अंतर बता सकता हूँ?
- क्या मैं पटल विरूपण के चार प्रकार और पर्वतनी-महाद्वीप रचना का अंतर सूचीबद्ध कर सकता हूँ?
- क्या मैं अपक्षय के तीन प्रकार और हर एक का एक उदाहरण दे सकता हूँ?
- क्या मैं भूस्खलन के सभी पाँच प्रकार एक-एक पंक्ति में बता सकता हूँ?
- क्या मैं तीन जलवायु-नियंत्रित अपरदन कारक और दो अनियंत्रित कारक नाम बता सकता हूँ?
- क्या मैं मृदा-निर्माण के पाँच कारक सूचीबद्ध कर सकता हूँ, और कौन-से निष्क्रिय व कौन-से सक्रिय हैं?
- अंतर्जनित बल धरातल को ऊपर उठाते हैं; बहिर्जनित बल इसे घिसते हैं; तल संतुलन अपरदन द्वारा उस उच्चावच-अंतर को कम करना है
- प्रक्रिया = पदार्थ पर लगने वाला बल; कारक = उसे ढोने वाला माध्यम; अनाच्छादन सभी बहिर्जनिक प्रक्रियाओं को समेटता है
- पटल विरूपण के 4 प्रकार: पर्वतनी, महाद्वीप रचना, भूकंप, प्लेट विवर्तनिकी; ज्वालामुखीयता दूसरी अंतर्जनित प्रक्रिया है
- बहिर्जनिक प्रक्रियाएँ जलवायु (तापमान, वर्षण) और शैल के प्रकार/संरचना से नियंत्रित होती हैं
- अपक्षय: रासायनिक, भौतिक/यांत्रिक, जैविक, यह एक स्वस्थाने प्रक्रिया है, परिवहन नहीं
- अपशल्कन एक परिणाम है (अभारितकरण + तापीय विस्तारण-संकुचन), प्रक्रिया नहीं; अपक्षय विलेय पदार्थ हटाकर अयस्कों को समृद्ध करता है
- बृहत् संचलन: अनुप्रस्थ विस्थापन, प्रवाह, स्खलन; भूस्खलन के 5 प्रकार: अवसर्पण, मलवा स्खलन, मलवा पतन, शैल स्खलन, शैल पतन
- अपरदन कारक: प्रवाहित जल, भूमिगत जल, हिमानी, हवा, लहरें; हवा/जल/हिमानी जलवायु-नियंत्रित (गैसीय/द्रव/ठोस); लहरें और भूमिगत जल नहीं
- निक्षेपण अपरदन का परिणाम है, पहले स्थूल फिर सूक्ष्म पदार्थ जमता है
- मृदा-निर्माण 5 कारकों पर निर्भर: मूल पदार्थ व स्थलाकृति (निष्क्रिय), जलवायु व जैविक क्रियाएँ (सक्रिय), और कालावधि
- 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सी एक तल-संतुलन (ग्रेडेशनल) प्रक्रिया है?
(क) निक्षेपण(ख) पटल विरूपण
(ग) ज्वालामुखीयता(घ) अपरदन - 1 अंकजलयोजन प्रक्रिया निम्नलिखित में से किस पदार्थ को प्रभावित करती है?
(क) ग्रेनाइट(ख) चीका मिट्टी
(ग) क्वार्ट्ज़(घ) लवण - 1 अंकमलवा अवधाव को किस श्रेणी में सम्मिलित किया जा सकता है?
(क) भूस्खलन(ख) मंद प्रवाही बृहत् संचलन
(ग) तीव्र प्रवाही बृहत् संचलन(घ) अवतलन/धसकन - 1 अंकपटल विरूपण का कौन-सा प्रकार मुख्यतः पर्वत-निर्माण के लिए उत्तरदायी है?
(क) महाद्वीप रचना(ख) पर्वतनी
(ग) भूकंप(घ) ज्वालामुखीयता - 1 अंकशैल-मलवे के पश्च-आवर्तन सहित भूस्खलन को क्या कहते हैं?
(क) मलवा स्खलन(ख) शैल स्खलन
(ग) अवसर्पण(घ) शैल पतन - 1 अंककौन-सा अपरदन कारक जलवायु से नियंत्रित नहीं होता?
(क) हवा(ख) प्रवाहित जल
(ग) हिमानी(घ) भूमिगत जल - 1 अंककार्स्ट स्थलाकृति कब विकसित होती है?
(क) शैलें अपारगम्य और अघुलनशील हों(ख) शैलें पारगम्य, घुलनशील हों और जल उपलब्ध हो
(ग) क्षेत्र में भारी हिमानीकरण हो(घ) केवल हवा सक्रिय कारक हो - 1 अंकअपशल्कित गुंबद मुख्यतः किसका परिणाम हैं?
(क) अभारितकरण(ख) रासायनिक विलयन
(ग) जैविक वेजिंग(घ) कार्बोनेटीकरण - 1 अंकमृदा-निर्माण में निम्नलिखित में से कौन-सा निष्क्रिय नियंत्रक कारक है?
(क) जलवायु(ख) जैविक क्रियाएँ
(ग) मूल पदार्थ(घ) केवल कालावधि - 1 अंकनाइट्रोजन-निर्धारण के लिए महत्त्वपूर्ण राइज़ोबियम बैक्टीरिया कहाँ रहते हैं?
(क) रेतीली मरुस्थलीय मृदा(ख) दलहनी पौधों की मूल-ग्रंथिकाओं में
(ग) हिमानी टिल में(घ) महासागरीय तलछट में
कारण (R): अपक्षय अपरदन में बहुत सहायक है, परंतु अपरदन पूर्णतः इस पर निर्भर नहीं है कि पहले अपक्षय हो चुका हो।
कारण (R): प्रवाहित जल, हिमानी, हवा या लहरों जैसा कोई भू-आकृतिक कारक बृहत् संचलन में सीधे भाग नहीं लेता, केवल गुरुत्वाकर्षण ही मलवे को हिलाता है।
- 3 अंकअपक्षय पृथ्वी पर जैव-विविधता के लिए उत्तरदायी है। कैसे?
- 3 अंकवे कौन-से बृहत् संचलन हैं जो वास्तव में तीव्र और अवगम्य होते हैं? सूचीबद्ध कीजिए।
- 3 अंकविभिन्न गतिशील और शक्तिशाली बहिर्जनिक भू-आकृतिक कारक क्या हैं, और वे कौन-सा प्रधान कार्य करते हैं?
- 3 अंकक्या मृदा-निर्माण में अपक्षय एक आवश्यक पूर्व-शर्त है? क्यों?
- 5 अंक“हमारी पृथ्वी भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के दो विरोधात्मक वर्गों का खेल का मैदान है।” विवेचना कीजिए।
- 5 अंकबहिर्जनिक भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ अपनी अंतिम ऊर्जा सूर्य की ऊष्मा से प्राप्त करती हैं। व्याख्या कीजिए।
- 5 अंकक्या भौतिक और रासायनिक अपक्षय प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं? यदि नहीं, तो क्यों? उदाहरण सहित समझाइए।
- 5 अंकआप मृदा-निर्माण की प्रक्रिया और मृदा-निर्माण कारकों में अंतर कैसे करेंगे? मृदा-निर्माण में जलवायु और जैविक क्रियाओं की दो महत्त्वपूर्ण नियंत्रक कारकों के रूप में क्या भूमिका है?
तीव्र यांत्रिक अपक्षय है। पास ही हिमालय की एक ढाल में कमज़ोर, अर्ध-संघटित शैल तथा कहीं अधिक तीव्र
प्रवणता है।
- 1 अंकदोनों में से किस ढाल पर मलवा अवधाव और भूस्खलन अधिक बारंबार होंगे, और क्यों?
- 2 अंकशैल के प्रकार के अतिरिक्त, दो और कारक बताइए जो पश्चिमी घाट की ढाल को शैल पतन के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।