NCERT की पाठ्यपुस्तक विज्ञान के अध्याय 2 «अम्ल, क्षारक एवं लवण» के सभी 19 पाठ्यनिहित प्रश्नों, अभ्यास के सभी 15 प्रश्नों और दोनों सामूहिक क्रियाकलापों के पूरे हल, हिंदी संस्करण की अपनी शब्दावली में। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।
A पाठ्यनिहित प्रश्न
अध्याय के बीच में, संबंधित खंडों के बाद छपे प्रश्न-बॉक्स, पुस्तक के क्रम में पहले हल किए गए हैं। अध्याय के अंत के अभ्यास-प्रश्न इनके बाद दिए गए हैं।
अध्याय के आरंभ का प्रश्न
प्र. आपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। इनमें से एक में आसवित जल एवं शेष दो में से एक में अम्लीय विलयन तथा दूसरे में क्षारीय विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिटमस पत्र दिया जाता है तो आप प्रत्येक परखनली में रखे गए पदार्थों की पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर: लाल लिटमस पत्र को बारी-बारी से हर परखनली में डुबोइए। जो विलयन इसे नीला कर दे, वह क्षारीय विलयन है। अब इस नीले हुए लिटमस पत्र को बाकी दो परखनलियों में डुबोइए: जो विलयन इसे फिर से लाल कर दे, वह अम्लीय विलयन है, और जो विलयन लाल या नीले, किसी भी लिटमस का रंग न बदले, वह आसवित जल है।
खंड 2.1 के बाद के प्रश्न
प्र. पीतल एवं ताँबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?
उत्तर: दही एवं खट्टे पदार्थों में अम्ल होते हैं। ये अम्ल पीतल और ताँबे के बर्तनों की धातु से अभिक्रिया करके हानिकारक (विषैले) यौगिक बनाते हैं, जिससे भोजन ख़राब हो जाता है और उसे खाने से व्यक्ति बीमार पड़ सकता है; बर्तन भी संक्षारित होता है। इसलिए ऐसे पदार्थ पीतल या ताँबे के बर्तनों में नहीं रखने चाहिए।
प्र. धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन सी गैस निकलती है? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे?
उत्तर: सामान्यतः हाइड्रोजन गैस निकलती है। उदाहरण: दानेदार जिंक पर तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल: Zn(s) + H₂SO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + H₂(g)। जाँच: गैस के पास जलती हुई मोमबत्ती लाने पर गैस ‘पॉप’ की ध्वनि के साथ जलती है, इससे पता चलता है कि गैस हाइड्रोजन है।
प्र. कोई धातु यौगिक ‘A’ तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है तो बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे उत्पन्न गैस जलती मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में एक कैल्सियम क्लोराइड है, तो इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर: जलती मोमबत्ती को बुझाने वाली गैस कार्बन डाइऑक्साइड है और बना लवण कैल्सियम क्लोराइड है, इसलिए ‘A’ कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO₃) है:
CaCO₃(s) + 2HCl(aq) → CaCl₂(aq) + H₂O(l) + CO₂(g)
खंड 2.2 के बाद के प्रश्न
प्र. HCl, HNO₃ आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण क्यों प्रदर्शित करते हैं, जबकि एल्कोहल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों के विलयनों में अम्लीयता के अभिलक्षण नहीं प्रदर्शित होते हैं?
उत्तर: जल में HCl और HNO₃ हाइड्रोजन आयन, H⁺(aq) (अर्थात H₃O⁺) उत्पन्न करते हैं, और इन्हीं आयनों के कारण विलयन अम्लीय होता है। एल्कोहल और ग्लूकोज़ में भी हाइड्रोजन होता है, पर वे जल में H⁺ आयन उत्पन्न नहीं करते, इसलिए उनके विलयन अम्लीय अभिलक्षण नहीं दिखाते।
प्र. अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?
उत्तर: जल में अम्ल आयन बनाता है: H⁺(aq) (H₃O⁺) और ऋणायन (जैसे HCl से Cl⁻)। ये आवेशित आयन विलयन में गति करके विद्युत धारा का चालन करते हैं।
प्र. शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को क्यों नहीं बदलती है?
उत्तर: HCl से हाइड्रोजन आयन केवल जल की उपस्थिति में ही बनते हैं। शुष्क HCl गैस और शुष्क लिटमस पत्र, दोनों में जल नहीं है, इसलिए H⁺ आयन नहीं बनते और लिटमस पत्र का रंग नहीं बदलता।
प्र. अम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में?
उत्तर: अम्ल का जल में घुलना अत्यंत ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है। यदि सांद्र अम्ल में जल मिलाया जाए तो उत्पन्न ऊष्मा के कारण मिश्रण आस्फलित होकर बाहर आ सकता है और जला सकता है; अत्यधिक स्थानीय ताप के कारण काँच का पात्र भी टूट सकता है। इसलिए अम्ल को धीरे-धीरे तथा लगातार हिलाते हुए जल में मिलाना चाहिए।
प्र. अम्ल के विलयन को तनुकृत करते समय हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) की सांद्रता कैसे प्रभावित हो जाती है?
उत्तर: तनुकरण में H₃O⁺ आयनों की लगभग उतनी ही संख्या अधिक आयतन में फैल जाती है, इसलिए प्रति इकाई आयतन हाइड्रोनियम आयन की सांद्रता घट जाती है।
प्र. जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाते हैं तो हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) की सांद्रता कैसे प्रभावित होती है?
उत्तर: अतिरिक्त क्षारक भी जल में OH⁻ आयन उत्पन्न करता है, इसलिए विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयन की सांद्रता बढ़ जाती है।
खंड 2.3 के बाद के प्रश्न
प्र. आपके पास दो विलयन ‘A’ एवं ‘B’ हैं। विलयन ‘A’ के pH का मान 6 है एवं विलयन ‘B’ के pH का मान 8 है। किस विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है? इनमें से कौन अम्लीय है तथा कौन क्षारकीय?
उत्तर: विलयन ‘A’ (pH 6) में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है, क्योंकि pH जितना कम होता है, H⁺ आयन उतने अधिक होते हैं। ‘A’ (pH 7 से कम) अम्लीय है और ‘B’ (pH 7 से अधिक) क्षारकीय है।
प्र. H⁺(aq) आयन की सांद्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: H⁺(aq) आयन की सांद्रता जितनी अधिक होगी, विलयन उतना अधिक अम्लीय होगा और उसका pH उतना ही कम होगा। H⁺(aq) की सांद्रता घटने पर विलयन कम अम्लीय, फिर उदासीन और फिर क्षारकीय होता जाता है।
प्र. क्या क्षारकीय विलयन में H⁺(aq) आयन होते हैं? अगर हाँ, तो यह क्षारकीय क्यों होते हैं?
उत्तर: हाँ, क्षारकीय विलयन में भी कुछ H⁺(aq) आयन (जल से) होते हैं। ये क्षारकीय इसलिए होते हैं क्योंकि इनमें OH⁻(aq) आयनों की सांद्रता H⁺(aq) आयनों की सांद्रता से अधिक होती है।
प्र. कोई किसान खेत की मृदा की किस परिस्थिति में बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट) का उपयोग करेगा?
उत्तर: जब मृदा अधिक अम्लीय हो (उसका pH फ़सल के लिए बहुत कम हो)। बिना बुझा चूना, बुझा हुआ चूना और चॉक क्षारकीय हैं, इसलिए ये मृदा के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके pH को पौधों के लिए उपयुक्त परास में ले आते हैं।
खंड 2.4 के बाद के प्रश्न
प्र. Ca(ClO)₂ यौगिक का प्रचलित नाम क्या है?
उत्तर: विरंजक चूर्ण।
प्र. उस पदार्थ का नाम बताइए जो क्लोरीन से क्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है।
उत्तर: शुष्क बुझा हुआ चूना, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)₂]: 2Ca(OH)₂ + 2Cl₂ → Ca(ClO)₂ + CaCl₂ + 2H₂O
प्र. कठोर जल को मृदु करने के लिए किस सोडियम यौगिक का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट, Na₂CO₃·10H₂O)। इसका उपयोग जल की स्थायी कठोरता को हटाने के लिए किया जाता है।
प्र. सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर: गर्म करने पर सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट वियोजित होकर सोडियम कार्बोनेट, जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस देता है:
2NaHCO₃ →(ऊष्मा) Na₂CO₃ + H₂O + CO₂
प्र. प्लास्टर ऑफ पेरिस की जल के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर: CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O → CaSO₄·2H₂O
प्लास्टर ऑफ पेरिस (कैल्सियम सल्फ़ेट अर्धहाइड्रेट) जल ग्रहण करके पुनः जिप्सम बन जाता है, जो कठोर ठोस पदार्थ के रूप में जम जाता है।
B अभ्यास के प्रश्न
1 कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH संभवतः क्या होगा?
(क) 1 (ख) 4 (ग) 5 (घ) 10
उत्तर: (घ) 10। लाल लिटमस को नीला करना क्षारकीय स्वभाव दर्शाता है, अतः pH 7 से अधिक होना चाहिए। केवल विकल्प (घ) 10 यह शर्त पूरी करता है।
2 कोई विलयन अंडे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया कर एक गैस उत्पन्न करता है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। इस विलयन में क्या होगा?
(क) NaCl (ख) HCl (ग) LiCl (घ) KCl
उत्तर: (ख) HCl। अंडे के कवच में कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) होता है, जो अम्ल से अभिक्रिया कर CO₂ गैस मुक्त करता है (जो चूने के पानी को दूधिया करती है): CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂↑। विकल्पों में केवल HCl एक अम्ल है।
3 NaOH का 10 mL विलयन, HCl के 8 mL विलयन से पूर्णतः उदासीन हो जाता है। यदि हम NaOH के उसी विलयन का 20 mL लें तो इसे उदासीन करने के लिए HCl के उसी विलयन की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
(क) 4 mL (ख) 8 mL (ग) 12 mL (घ) 16 mL
उत्तर: (घ) 16 mL। 10 mL NaOH को उदासीन करने के लिए 8 mL HCl चाहिए, अतः अनुपात 10:8 है। 20 mL NaOH (यानी दोगुना) को उदासीन करने के लिए HCl भी दोगुनी अर्थात् 16 mL चाहिए।
4 अपच का उपचार करने के लिए निम्नलिखित में से किस औषधि का उपयोग होता है?
(क) एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक) (ख) ऐनालजेसिक (पीड़ाहरी) (ग) ऐन्टैसिड (घ) एंटीसेप्टिक (प्रतिरोधी)
उत्तर: (ग) ऐन्टैसिड। अपच पेट में अधिक अम्ल बनने से होता है; ऐन्टैसिड (जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) एक हल्का क्षारक है जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर राहत देता है।
5 निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए पहले शब्द-समीकरण लिखिए तथा उसके बाद संतुलित समीकरण लिखिए: (a) तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है। (b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है। (c) तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल एल्युमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है। (d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लौह के रेतन के साथ अभिक्रिया करता है।
उत्तर (क) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल + दानेदार जिंक: जिंक + सल्फ्यूरिक अम्ल → जिंक सल्फेट + हाइड्रोजन; Zn(s) + H₂SO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + H₂(g)↑
उत्तर (ख) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + मैग्नीशियम पट्टी: मैग्नीशियम + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन; Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl₂(aq) + H₂(g)↑
उत्तर (ग) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल + एल्युमिनियम चूर्ण: एल्युमिनियम + सल्फ्यूरिक अम्ल → एल्युमिनियम सल्फेट + हाइड्रोजन; 2Al(s) + 3H₂SO₄(aq) → Al₂(SO₄)₃(aq) + 3H₂(g)↑
उत्तर (घ) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल + लौह रेतन: लौह + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन(II) क्लोराइड + हाइड्रोजन; Fe(s) + 2HCl(aq) → FeCl₂(aq) + H₂(g)↑
6 एल्कोहल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं, लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे साबित कीजिए।
उत्तर: (पुस्तक का क्रियाकलाप 2.8) एक कॉर्क पर दो कीलें लगाकर कॉर्क को 100 mL के बीकर में रख दीजिए। कीलों को एक बल्ब तथा स्विच के माध्यम से 6 वोल्ट की बैटरी के दोनों टर्मिनलों से जोड़ दीजिए। अब बीकर में थोड़ा तनु HCl डालकर विद्युत धारा प्रवाहित कीजिए: बल्ब जलता है, यानी विलयन विद्युत का चालन करता है। यही प्रयोग तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल के साथ दोहराने पर भी बल्ब जलता है। अब इन परीक्षणों को ग्लूकोज़ एवं एल्कोहल के विलयनों के साथ अलग-अलग दोहराइए: बल्ब नहीं जलता। इससे सिद्ध होता है कि HCl जल में आयनित होकर H⁺ आयन देता है (चालक), जबकि ग्लूकोज़/ऐल्कोहॉल में हाइड्रोजन होते हुए भी वे जल में आयनित होकर H⁺ आयन नहीं देते। इसलिए इन्हें अम्ल नहीं माना जाता।
7 आसवित जल विद्युत का चालक क्यों नहीं होता, जबकि वर्षा जल होता है?
उत्तर: आसवित (शुद्ध) जल में कोई आयन उपस्थित नहीं होते, इसलिए यह विद्युत का चालन नहीं करता। वर्षा जल हवा से गुजरते समय वायुमंडलीय CO₂ को अवशोषित कर कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) बनाता है, जो आयनित होकर H⁺ व CO₃²⁻/HCO₃⁻ आयन देता है। इन्हीं आयनों की उपस्थिति के कारण वर्षा जल विद्युत का चालन करता है।
8 जल की अनुपस्थिति में शुष्क HCl गैस का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है?
उत्तर: अम्ल का अम्लीय व्यवहार (H⁺ आयन देना) जल की उपस्थिति में ही संभव है, क्योंकि H⁺ आयन जल के अणु से संयोग कर हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) बनाते हैं जो अम्लीय गुण दर्शाता है: HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻। जल की अनुपस्थिति में यह आयनन संभव नहीं होता, इसीलिए शुष्क HCl गैस अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित नहीं करती।
9 पाँच विलयनों A, B, C, D, व E की जब सार्वत्रिक सूचक से जाँच की जाती है तो pH के मान क्रमशः 4, 1, 11, 7 एवं 9 प्राप्त होते हैं। कौन सा विलयन: (a) उदासीन है? (b) प्रबल क्षारीय है? (c) प्रबल अम्लीय है? (d) दुर्बल अम्लीय है? (e) दुर्बल क्षारीय है? pH के मानों को हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
(क) उदासीन: D (pH 7)
(ख) प्रबल क्षारीय: C (pH 11)
(ग) प्रबल अम्लीय: B (pH 1)
(घ) दुर्बल अम्लीय: A (pH 4)
(ङ) दुर्बल क्षारीय: E (pH 9)
pH जितना कम, H⁺ सांद्रता उतनी अधिक, अतः H⁺ सांद्रता का आरोही क्रम (कम से ज्यादा): C (11) < E (9) < D (7) < A (4) < B (1)।
10 परखनली ‘A’ एवं ‘B’ में समान लंबाई की मैग्नीशियम की पट्टी लीजिए। परखनली ‘A’ में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) तथा परखनली ‘B’ में ऐसिटिक अम्ल (CH₃COOH) डालिए। दोनों अम्लों की मात्रा तथा सांद्रता समान हैं। किस परखनली में अधिक तेज़ी से बुदबुदाहट होगी तथा क्यों?
उत्तर: परखनली ‘A’ (HCl) में अधिक तेज़ी से बुदबुदाहट होगी। HCl एक प्रबल अम्ल है जो जल में लगभग पूर्णतः आयनित होकर अधिक H⁺ आयन सांद्रता देता है, जबकि CH₃COOH एक दुर्बल अम्ल है जो आंशिक रूप से ही आयनित होता है। अधिक H⁺ सांद्रता के कारण HCl, मैग्नीशियम के साथ अधिक तेज़ी से अभिक्रिया कर H₂ गैस मुक्त करता है।
11 ताज़े दूध के pH का मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा? अपना उत्तर समझाइए।
उत्तर: दही बनने पर pH का मान 6 से घटकर और अधिक अम्लीय हो जाएगा। दही जमने की प्रक्रिया में उपस्थित जीवाणु (बैक्टीरिया) दूध की शर्करा (लैक्टोज़) को लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित करते हैं, जिससे विलयन की अम्लता बढ़ जाती है और pH मान घट जाता है।
12 एक ग्वाला ताज़े दूध में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाता है। (a) ताज़ा दूध के pH के मान को 6 से बदलकर थोड़ा क्षारीय क्यों बना देता है? (b) इस दूध को दही बनने में अधिक समय क्यों लगता है?
उत्तर (क): बेकिंग सोडा (NaHCO₃) एक क्षारकीय पदार्थ है, इसलिए दूध में मिलाने पर विलयन की pH 6 से बढ़कर हल्की क्षारीय हो जाती है।
उत्तर (ख): दही जमने के लिए दूध का माध्यम अम्लीय होना आवश्यक है (जीवाणुओं द्वारा लैक्टिक अम्ल बनने से)। चूँकि दूध पहले से हल्का क्षारीय बना दिया गया है, इसे पर्याप्त अम्लीय होने में सामान्य से अधिक समय लगता है, जिससे दही बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यही कारण है कि यह विधि दूध को अधिक समय तक ताज़ा रखने में सहायक है।
13 प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्र-रोधी बर्तन में क्यों रखा जाना चाहिए? इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर: प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO₄·½H₂O) वायुमंडल की नमी को सोखने की प्रबल प्रवृत्ति रखता है। नमी सोखने पर यह जल के साथ अभिक्रिया कर पुनः जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) में बदल जाता है: CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O → CaSO₄·2H₂O, और एक ठोस, कठोर पिंड बन जाता है, जो आगे उपयोग के योग्य नहीं रहता। इसीलिए इसे वायुरोधी (आर्द्रतारोधी) बर्तन में रखा जाता है ताकि यह नमी के संपर्क में न आए।
14 उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब कोई अम्ल किसी क्षारक से अभिक्रिया करके लवण व जल बनाता है, तो इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं: अम्ल + क्षारक → लवण + जल।
उदाहरण 1: HCl(aq) + NaOH(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l)
उदाहरण 2: H₂SO₄(aq) + Ca(OH)₂(aq) → CaSO₄(aq) + 2H₂O(l)
15 धोने का सोडा एवं बेकिंग सोडा के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए।
उत्तर, धोने का सोडा (Na₂CO₃·10H₂O): काँच, साबुन व कागज़ उद्योगों में कच्चे माल के रूप में; जल की स्थायी कठोरता दूर करने में।
उत्तर, बेकिंग सोडा (NaHCO₃): बेकिंग पाउडर के घटक के रूप में (केक/ब्रेड को फुलाने हेतु); ऐन्टैसिड के रूप में पेट की अतिरिक्त अम्लता उदासीन करने में।
C सामूहिक क्रियाकलाप
प्र. खरल में चुकंदर की जड़ को पीसिए, पर्याप्त जल मिलाकर निष्कर्ष प्राप्त कीजिए और छान लीजिए। चार परखनलियों A, B, C एवं D में क्रमशः नींबू रस का विलयन, सोडा-जल, सिरका एवं बेकिंग सोडा का 2 mL डालिए। प्रत्येक परखनली में चुकंदर जड़ के निचोड़ की 2-3 बूँदें मिलाइए एवं रंग में आए परिवर्तन पर ध्यान दीजिए। अपने प्रेक्षणों को सारणी में लिखिए।
उत्तर: नींबू रस, सोडा-जल और सिरका अम्लीय हैं, जबकि बेकिंग सोडा का विलयन क्षारकीय है। चुकंदर का निचोड़ तीनों अम्लीय द्रवों (A, B, C) में अपना लाल-गुलाबी रंग बनाए रखता है, पर क्षारकीय बेकिंग सोडा विलयन (D) में उसका रंग बदल जाता है। अम्ल और क्षारक में अलग-अलग रंग दिखाने के कारण चुकंदर का निचोड़ एक प्राकृतिक अम्ल-क्षारक सूचक की तरह काम करता है, जैसे लाल पत्ता गोभी की पत्तियों या पेटुनिया, हाइड्रेंजिया एवं जेरानियम की पंखुड़ियों के निचोड़।
प्र. एक धावन बोतल में सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO₃) का 20 mL विलयन लीजिए और उसमें तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल वाली ज्वलन नली लटकाइए। बोतल का मुँह बंद करके उसे झुकाइए, जिससे अम्ल सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के विलयन से मिल जाए। नोज़ल से निकलने वाली बुदबुदाहट को एक जलती हुई मोमबत्ती की ओर लाइए। क्या होता है?
उत्तर: अम्ल, सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है: 2NaHCO₃ + H₂SO₄ → Na₂SO₄ + 2H₂O + 2CO₂। गैस के दाब से द्रव नोज़ल से बाहर निकलता है। जलती मोमबत्ती पर डालने पर मोमबत्ती बुझ जाती है, क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड दहन में सहायक नहीं है और वायु की आपूर्ति रोक देती है।