कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण के नोट्स हिंदी में

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इस अध्याय में आप सीखेंगे
  • सूचकों (लिटमस, हल्दी, फीनॉल्फथेलिन, मेथिल ऑरेंज, गंधीय सूचक) से अम्ल और क्षारक की पहचान कैसे करते हैं
  • अम्ल और क्षारक धातु, धातु कार्बोनेट, ऑक्साइड और एक-दूसरे के साथ कैसे अभिक्रिया करते हैं, हर अभिक्रिया का संतुलित समीकरण
  • सभी अम्लों में H⁺(aq) और सभी क्षारकों में OH⁻(aq) क्यों होते हैं, और अम्ल को जल में ही क्यों मिलाते हैं
  • pH स्केल क्या बताता है, और पाचन, दंत-क्षय, मिट्टी, अम्लीय वर्षा और डंक में pH की भूमिका
  • साधारण नमक से बनने वाले रसायन: सोडियम हाइड्रॉक्साइड, विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा
  • क्रिस्टलन का जल क्या है, और प्लास्टर ऑफ पेरिस कैसे बनता और जमता है
सूचकगंधीय सूचकसार्वत्रिक सूचकउदासीनीकरणहाइड्रोनियम आयनक्षारतनुकरणpH स्केलप्रबल अम्लदुर्बल अम्ललवण परिवारक्लोर-क्षार प्रक्रियाविरंजक चूर्णक्रिस्टलन का जलप्लास्टर ऑफ पेरिस

1 अम्ल, क्षारक और सूचक

खाने का खट्टा स्वाद उसमें मौजूद अम्ल के कारण होता है और कड़वा स्वाद क्षारक के कारण। अम्ल और क्षारक एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं। यही इस पूरे अध्याय की पहली मुख्य बात है।

1.1 अम्ल और क्षारक की पहचान

अम्ल

  • स्वाद खट्टा
  • नीले लिटमस को लाल कर देते हैं
  • जल में विद्युत का चालन करते हैं
  • HCl, H₂SO₄, HNO₃, ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH)

क्षारक

  • स्वाद कड़वा
  • लाल लिटमस को नीला कर देते हैं
  • घुलनशील क्षारक (क्षार) छूने में साबुन जैसे और प्रकृति में संक्षारक (त्वचा को नुकसान पहुँचाने वाले)
  • जल में विद्युत का चालन करते हैं
  • NaOH, KOH, Ca(OH)₂, Mg(OH)₂, NH₄OH
आम भूल

प्रयोगशाला के अम्ल या क्षारक को कभी चखकर या छूकर नहीं परखते। ये हानिकारक होते हैं। इसीलिए पहचान सूचकों से की जाती है।

शब्द इस अध्याय में मतलब
तनु (dilute) जिस विलयन में पानी अधिक और अम्ल/क्षारक कम हो, यानी हल्का
सांद्र (concentrated) जिसमें अम्ल/क्षारक की मात्रा अधिक और पानी कम हो
सांद्रता विलयन की एक निश्चित मात्रा में घुले पदार्थ या आयनों की मात्रा
आयन आवेशित कण; धन आवेश वाला धनायन, ऋण आवेश वाला ऋणायन
उदासीन न अम्लीय, न क्षारकीय (जैसे शुद्ध जल)
(s), (l), (g), (aq) समीकरण में ठोस, द्रव, गैस और जलीय विलयन (जल में घुला हुआ)
परीक्षा संकेत

पुस्तक अध्याय की शुरुआत इस प्रश्न से करती है: अत्यधिक भोजन से अम्लता (अपच) हो जाए तो उपचार के लिए क्या देंगे: नींबू पानी, सिरका या बेकिंग सोडा का विलयन? उत्तर है बेकिंग सोडा का विलयन, क्योंकि यह क्षारक है और पेट के अधिक अम्ल को उदासीन कर देता है। नींबू पानी और सिरका तो स्वयं अम्लीय हैं।

1.2 सूचक: रंग बदलकर पहचान

कंठस्थ करेंपरिभाषा 1

अम्ल-क्षारक सूचक (या केवल सूचक) वे रंजक (रंग देने वाले पदार्थ) या रंजकों के मिश्रण हैं जो रंग बदलकर बताते हैं कि कोई पदार्थ अम्ल है या क्षारक।

  • लिटमस एक प्राकृतिक सूचक है
  • लिटमस विलयन बैंगनी रंग का रंजक है
  • इसे थैलोफ़ाइटा समूह के लिचेन (lichen) पौधे से निकाला जाता है
  • जब विलयन न अम्लीय हो, न क्षारकीय, तब लिटमस बैंगनी ही रहता है
  • हल्दी (turmeric) भी एक प्राकृतिक सूचक है
  • सफ़ेद कपड़े पर लगे सब्जी के दाग पर क्षारकीय साबुन रगड़ें तो दाग भूरा-लाल हो जाता है
  • कपड़े को अधिक जल से धोने पर वही दाग फिर से पीला हो जाता है
  • अन्य प्राकृतिक सूचक: लाल पत्ता गोभी, और हाइड्रेंजिया, पिटूनिया तथा जेरानियम के फूलों की रंगीन पंखुड़ियाँ
  • प्रयोगशाला में संश्लेषित (synthetic) सूचक भी काम आते हैं: मेथिल ऑरेंज और फीनॉल्फथेलिन

क्रियाकलाप 2.1 में HCl, H₂SO₄, HNO₃, CH₃COOH, NaOH, Ca(OH)₂, KOH, Mg(OH)₂ और NH₄OH के विलयनों को चार सूचकों (लाल लिटमस, नीला लिटमस, फीनॉल्फथेलिन, मेथिल ऑरेंज) से परखकर सारणी 2.1 भरी जाती है। प्रयोगशाला में दिखने वाले रंग ये हैं:

सूचक अम्ल में उदासीन में क्षारक में
नीला लिटमस लाल हो जाता है नहीं बदलता नीला ही रहता है
लाल लिटमस लाल ही रहता है नहीं बदलता नीला हो जाता है
हल्दी पीली पीली भूरा-लाल
फीनॉल्फथेलिन रंगहीन रंगहीन गुलाबी
मेथिल ऑरेंज लाल पीला पीला

1.3 गंधीय सूचक: गंध से पहचान

परिभाषा 2

जिन पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में भिन्न हो जाती है, उन्हें गंधीय (Olfactory) सूचक कहते हैं।

चरण 1बारीक कटी प्याज और साफ़ कपड़े के टुकड़े को प्लास्टिक के थैले में कसकर बाँधकर पूरी रात फ्रिज में रखते हैं
↓
चरण 2कपड़े के दो टुकड़ों की गंध पहले सूँघ लेते हैं, फिर एक पर तनु HCl और दूसरे पर तनु NaOH की कुछ बूँदें डालते हैं
↓
चरण 3दोनों को जल से धोकर गंध दोबारा सूँघते हैं; यही परीक्षण तनु वैनिला एसेंस और लौंग के तेल (clove oil) के साथ भी करते हैं

प्याज और वैनिला की गंध अम्ल (HCl) में बनी रहती है, पर क्षारक (NaOH) में चली जाती है। इसीलिए इन्हें गंधीय सूचक की तरह उपयोग किया जा सकता है। लौंग के तेल का प्रेक्षण पुस्तक आपसे स्वयं दर्ज करवाती है।

पाठ्य-प्रश्न (पृष्ठ 20)
  1. पाठ्य-प्रश्नआपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। इनमें से एक में आसवित जल एवं शेष दो में से एक में अम्लीय विलयन तथा दूसरे में क्षारीय विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिटमस पत्र दिया जाता है तो आप प्रत्येक परखनली में रखे गए पदार्थों की पहचान कैसे करेंगे?

2 अम्ल एवं क्षारक के रासायनिक गुणधर्म

2.1 अम्ल और क्षारक धातु के साथ कैसे अभिक्रिया करते हैं? (पुस्तक 2.1.2)

क्रियाकलाप 2.3परखनली में लगभग 5 mL तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल लेकर उसमें दानेदार जिंक के टुकड़े डालते हैं
↓
प्रेक्षणजिंक की सतह पर गैस के बुलबुले बनते हैं; गैस को साबुन के विलयन से गुज़ारने पर बुलबुले बनते हैं
↓
जाँचजलती मोमबत्ती बुलबुले के पास लाने पर फट-फट की ध्वनि के साथ गैस जलती है: यह हाइड्रोजन है
चित्र 1: दानेदार जिंक के टुकड़ों के साथ तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया एवं ज्वलन द्वारा हाइड्रोजन गैस की जाँच: हाइड्रोजन से भरा साबुन का बुलबुला जलती मोमबत्ती के पास फट-फट की ध्वनि के साथ जलता है (क्रियाकलाप 2.3, पुस्तक का चित्र 2.1)
चित्र 1: दानेदार जिंक के टुकड़ों के साथ तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया एवं ज्वलन द्वारा हाइड्रोजन गैस की जाँच: हाइड्रोजन से भरा साबुन का बुलबुला जलती मोमबत्ती के पास फट-फट की ध्वनि के साथ जलता है (क्रियाकलाप 2.3, पुस्तक का चित्र 2.1)
  • HCl और CH₃COOH के साथ दोहराने पर भी हाइड्रोजन ही बनती है (नाइट्रिक अम्ल अपवाद है: वह प्रबल ऑक्सीकारक है, इसलिए धातुओं के साथ सामान्यतः हाइड्रोजन नहीं देता; यह अध्याय 3 में आता है)
  • धातु, अम्ल के हाइड्रोजन परमाणुओं को हाइड्रोजन गैस के रूप में विस्थापित कर देती है
  • धातु बचे हुए भाग से जुड़कर एक यौगिक बनाती है, जिसे लवण कहते हैं
सामान्य नियम
अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस
उदाहरण: HX2SOX4+Zn→ZnSOX4+HX2↑\ce{H2SO4 + Zn -> ZnSO4 + H2 ^}

क्षारक के साथ भी: क्रियाकलाप 2.4 में जिंक के दानों में 2 mL सोडियम हाइड्रॉक्साइड का घोल मिलाकर गर्म करते हैं। इसमें भी हाइड्रोजन बनती है:

2 NaOH(aq)+Zn(s)→NaX2ZnOX2(s)+HX2(g)\ce{2NaOH(aq) + Zn(s) -> Na2ZnO2(s) + H2(g)}

(सोडियम जिंकेट)

  • यहाँ बने लवण (सोडियम जिंकेट) का ऋण आयन धातु (जिंक) और ऑक्सीजन के परमाणुओं से मिलकर बना है
  • ऐसी अभिक्रियाएँ सभी धातुओं के साथ संभव नहीं हैं

2.2 धातु कार्बोनेट तथा धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट अम्ल के साथ कैसे अभिक्रिया करते हैं? (पुस्तक 2.1.3)

क्रियाकलाप 2.5 में परखनली ‘A’ में लगभग 0.5 g सोडियम कार्बोनेट और परखनली ‘B’ में 0.5 g सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट लेकर, दोनों में लगभग 2 mL तनु HCl मिलाते हैं। दोनों में बुदबुदाहट के साथ गैस निकलती है। इस गैस को चूने के पानी (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन) से गुज़ारते हैं।

चित्र 2: कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन (चूने का पानी) में से कार्बन डाइऑक्साइड गैस को गुज़ारना: चूने का पानी दूधिया हो जाता है (क्रियाकलाप 2.5, पुस्तक का चित्र 2.2)
चित्र 2: कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन (चूने का पानी) में से कार्बन डाइऑक्साइड गैस को गुज़ारना: चूने का पानी दूधिया हो जाता है (क्रियाकलाप 2.5, पुस्तक का चित्र 2.2)
NaX2COX3(s)+2 HCl(aq)→2 NaCl(aq)+HX2O(l)+COX2(g)\ce{Na2CO3(s) + 2HCl(aq) -> 2NaCl(aq) + H2O(l) + CO2(g)}परखनली ‘A’
NaHCOX3(s)+HCl(aq)→NaCl(aq)+HX2O(l)+COX2(g)\ce{NaHCO3(s) + HCl(aq) -> NaCl(aq) + H2O(l) + CO2(g)}परखनली ‘B’
Ca(OH)X2(aq)+COX2(g)→CaCOX3(s)+HX2O(l)\ce{Ca(OH)2(aq) + CO2(g) -> CaCO3(s) + H2O(l)}चूने का पानी दूधिया: CaCO₃ का श्वेत अवक्षेप (विलयन में बनने वाला न घुलने वाला ठोस)
CaCOX3(s)+HX2O(l)+COX2(g)→Ca(HCOX3)X2(aq)\ce{CaCO3(s) + H2O(l) + CO2(g) -> Ca(HCO3)2(aq)}अत्यधिक CO₂ प्रवाहित करने पर; Ca(HCO₃)₂ जल में विलयशील है, इसलिए दूधियापन चला जाता है
सामान्य नियम
धातु कार्बोनेट / धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट + अम्ल → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
ध्यान दें

चूना-पत्थर (limestone), खड़िया (chalk) और संगमरमर (marble), तीनों कैल्सियम कार्बोनेट के ही अलग-अलग रूप हैं।

2.3 अम्ल एवं क्षारक परस्पर कैसे अभिक्रिया करते हैं? (पुस्तक 2.1.4)

NaOH + फीनॉल्फथेलिनविलयन गुलाबी
→
तनु HCl बूँद-बूँदगुलाबी रंग गायब, विलयन रंगहीन
→
फिर कुछ बूँद NaOHगुलाबी रंग वापस

क्रियाकलाप 2.6 दिखाता है कि अम्ल, क्षारक के प्रभाव को और क्षारक, अम्ल के प्रभाव को समाप्त कर देता है:

NaOH(aq)+HCl(aq)→NaCl(aq)+HX2O(l)\ce{NaOH(aq) + HCl(aq) -> NaCl(aq) + H2O(l)}

कंठस्थ करेंपरिभाषा 3

अम्ल एवं क्षारक की अभिक्रिया के परिणामस्वरूप लवण तथा जल प्राप्त होते हैं। इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
क्षारक + अम्ल → लवण + जल

2.4 अम्लों के साथ धात्विक ऑक्साइडों की अभिक्रियाएँ (पुस्तक 2.1.5)

  • क्रियाकलाप 2.7: बीकर में थोड़ा कॉपर ऑक्साइड लेकर हिलाते हुए धीरे-धीरे तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाते हैं
  • कॉपर ऑक्साइड घुल जाता है और विलयन नील-हरित हो जाता है
  • यह रंग कॉपर (II) क्लोराइड बनने के कारण है
  • संतुलित समीकरण: CuO+2 HCl→CuClX2+HX2O\ce{CuO + 2HCl -> CuCl2 + H2O}
सामान्य नियम
धातु ऑक्साइड + अम्ल → लवण + जल
यह ठीक क्षारक + अम्ल जैसी अभिक्रिया है, इसलिए धात्विक ऑक्साइड को क्षारकीय ऑक्साइड भी कहते हैं।

2.5 क्षारक के साथ अधात्विक ऑक्साइड की अभिक्रियाएँ (पुस्तक 2.1.6)

  • क्रियाकलाप 2.5 में कार्बन डाइऑक्साइड (अधात्विक ऑक्साइड) और कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (क्षारक) की अभिक्रिया देखी थी
  • इसमें भी लवण और जल बनते हैं: Ca(OH)X2+COX2→CaCOX3+HX2O\ce{Ca(OH)2 + CO2 -> CaCO3 + H2O}
  • यह क्षारक और अम्ल की अभिक्रिया जैसी है, इसलिए निष्कर्ष: अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं
किसके साथ सामान्य नियम पहचान / संकेत
अम्ल + धातु लवण + हाइड्रोजन गैस फट-फट की ध्वनि
क्षारक + धातु (जैसे Zn) लवण + हाइड्रोजन गैस सभी धातुओं के साथ नहीं
अम्ल + धातु कार्बोनेट / हाइड्रोजनकार्बोनेट लवण + CO₂ + जल चूने का पानी दूधिया
क्षारक + अम्ल लवण + जल उदासीनीकरण
अम्ल + धात्विक ऑक्साइड लवण + जल धात्विक ऑक्साइड क्षारकीय
क्षारक + अधात्विक ऑक्साइड लवण + जल अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय
आम भूल

धात्विक ऑक्साइड क्षारकीय और अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय होते हैं। परीक्षा में बहुत से विद्यार्थी इन्हें उलट देते हैं।

पाठ्य-प्रश्न (पृष्ठ 24)
  1. पाठ्य-प्रश्नपीतल एवं ताँबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?
  2. पाठ्य-प्रश्नधातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन सी गैस निकलती है? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे?
  3. पाठ्य-प्रश्नकोई धातु यौगिक ‘A’ तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है तो बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे उत्पन्न गैस जलती मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में एक कैल्सियम क्लोराइड है, तो इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

3 सभी अम्लों एवं क्षारकों में क्या समानताएँ हैं?

3.1 हाइड्रोजन होना ही अम्ल होने के लिए काफ़ी नहीं

सभी अम्ल धातु के साथ हाइड्रोजन गैस देते हैं, यानी सभी अम्लों में हाइड्रोजन है। तो क्या हाइड्रोजन वाला हर यौगिक अम्ल है? ग्लूकोज़ और एल्कोहल में भी हाइड्रोजन है। क्रियाकलाप 2.8 इसका उत्तर देता है।

व्यवस्थाकॉर्क पर दो कीलें लगाकर उसे 100 mL के बीकर में रखते हैं; कीलों को 6 वोल्ट की बैटरी से एक बल्ब और स्विच के माध्यम से जोड़ते हैं
↓
तनु HCl या तनु H₂SO₄बल्ब जलता है, यानी विलयन में विद्युत धारा बह रही है
↓
ग्लूकोज़ या एल्कोहल का विलयनबल्ब नहीं जलता, यानी विलयन विद्युत का चालन नहीं करता
चित्र 3: जल में अम्ल का विलयन विद्युत चालन करता है, इसलिए बल्ब जलता है (क्रियाकलाप 2.8, पुस्तक का चित्र 2.3)। ग्लूकोज़ और एल्कोहल के विलयन से बल्ब नहीं जलता
चित्र 3: जल में अम्ल का विलयन विद्युत चालन करता है, इसलिए बल्ब जलता है (क्रियाकलाप 2.8, पुस्तक का चित्र 2.3)। ग्लूकोज़ और एल्कोहल के विलयन से बल्ब नहीं जलता
  • अम्लीय विलयन में विद्युत धारा का प्रवाह आयनों (आवेशित कणों) द्वारा होता है
  • अम्लों में धनायन (धनावेशित आयन) H⁺ होता है
  • साथ में ऋणायन (ऋणावेशित आयन) होता है: HCl में ClX−\ce{Cl-}, HNO₃ में NOX3X−\ce{NO3-}, CH₃COOH में CHX3COOX−\ce{CH3COO-}, H₂SO₄ में SOX4X2−\ce{SO4^2-}
  • अम्ल विलयन में हाइड्रोजन आयन H⁺(aq) उत्पन्न करता है
  • इसी H⁺(aq) के कारण अम्लों का गुणधर्म अम्लीय होता है
  • ग्लूकोज़ और एल्कोहल जल में आयन नहीं देते, इसलिए हाइड्रोजन होते हुए भी अम्ल नहीं हैं
  • यही क्रियाकलाप NaOH, Ca(OH)₂ जैसे क्षारकों के विलयन से दोहराने पर भी बल्ब जलता है, क्योंकि क्षारक भी जल में आयन देते हैं

3.2 जलीय विलयन में अम्ल या क्षारक का क्या होता है?

क्रियाकलाप 2.9 में शुष्क परखनली में लगभग 1 g ठोस NaCl पर सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल डालकर HCl गैस बनाई जाती है। गैस को कैल्सियम क्लोराइड वाली रक्षक नली से गुज़ारकर सुखाया जाता है (मौसम बहुत नम हो तब)।

चित्र 4: HCl गैस का निर्माण: (a) ठोस सोडियम क्लोराइड पर सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल डाला जाता है; (b) निकास नली से निकली गैस आर्द्र नीले लिटमस पत्र को लाल कर देती है, शुष्क लिटमस पत्र का रंग नहीं बदलता। मौसम आर्द्र हो तो गैस को कैल्सियम क्लोराइड वाली रक्षक नली से गुज़ारकर सुखाया जाता है (क्रियाकलाप 2.9, पुस्तक का चित्र 2.4)
चित्र 4: HCl गैस का निर्माण: (a) ठोस सोडियम क्लोराइड पर सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल डाला जाता है; (b) निकास नली से निकली गैस आर्द्र नीले लिटमस पत्र को लाल कर देती है, शुष्क लिटमस पत्र का रंग नहीं बदलता। मौसम आर्द्र हो तो गैस को कैल्सियम क्लोराइड वाली रक्षक नली से गुज़ारकर सुखाया जाता है (क्रियाकलाप 2.9, पुस्तक का चित्र 2.4)

शुष्क नीला लिटमस पत्र

  • शुष्क HCl गैस से रंग नहीं बदलता
  • जल नहीं है, तो H⁺ आयन नहीं बनते

नम (आर्द्र) नीला लिटमस पत्र

  • HCl गैस से रंग लाल हो जाता है
  • जल की उपस्थिति में H⁺ आयन बनते हैं
  • जल की अनुपस्थिति में HCl अणुओं से H⁺ आयन अलग नहीं हो सकते
  • जल में: HCl+HX2O→HX3OX++ClX−\ce{HCl + H2O -> H3O+ + Cl-}
  • हाइड्रोजन आयन स्वतंत्र रूप में नहीं रह सकते, ये जल के अणुओं से मिलकर रहते हैं: HX++HX2O→HX3OX+\ce{H+ + H2O -> H3O+}
कंठस्थ करेंपरिभाषा 4

हाइड्रोजन आयन जल के अणु से मिलकर जो आयन बनाता है, उसे हाइड्रोनियम आयन (HX3OX+\ce{H3O+}) कहते हैं। इसीलिए हाइड्रोजन आयन को सदैव H⁺(aq) या हाइड्रोनियम आयन (HX3OX+\ce{H3O+}) से दर्शाना चाहिए।

क्षारक जल में हाइड्रॉक्साइड (OHX−\ce{OH-}) आयन उत्पन्न करते हैं:

NaOH(s)→HX2ONaX+(aq)+OHX−(aq)\ce{NaOH(s) ->[H2O] Na+(aq) + OH-(aq)}सोडियम हाइड्रॉक्साइड
KOH(s)→HX2OKX+(aq)+OHX−(aq)\ce{KOH(s) ->[H2O] K+(aq) + OH-(aq)}पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड
Mg(OH)X2(s)→HX2OMgX2+(aq)+2 OHX−(aq)\ce{Mg(OH)2(s) ->[H2O] Mg^2+(aq) + 2OH-(aq)}मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड

3.3 क्षार: जल में घुलने वाले क्षारक

कंठस्थ करेंपरिभाषा 5

जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं।

  • सभी क्षारक जल में घुलनशील नहीं होते, इसलिए हर क्षारक क्षार नहीं है; पर हर क्षार एक क्षारक है
  • क्षार छूने में साबुन जैसे चिकने लगते हैं
  • क्षार का स्वाद कड़वा होता है
  • क्षार की प्रकृति संक्षारक होती है
  • इन्हें कभी भी छूना या चखना नहीं चाहिए, क्योंकि ये हानिकारक होते हैं

3.4 उदासीनीकरण, आयनों की भाषा में

अब हम जानते हैं कि सभी अम्ल H⁺(aq) और सभी क्षारक OH⁻(aq) देते हैं। इसलिए उदासीनीकरण असल में H⁺ और OH⁻ का मिलकर जल बनाना है:

अम्ल + क्षारक → लवण + जलशब्दों में
HX+MOH→MX+HOH\ce{HX + MOH -> MX + HOH}X = अम्ल का ऋणायन, M = क्षारक का धनायन
HX+(aq)+OHX−(aq)→HX2O(l)\ce{H+(aq) + OH-(aq) -> H2O(l)}आयनों में: यही असली अभिक्रिया है

3.5 अम्ल या क्षारक में जल मिलाने पर क्या होता है?

क्रियाकलाप 2.10 में बीकर के 10 mL जल में सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल की कुछ बूँदें डालकर बीकर घुमाते हैं। बीकर का आधार छूने पर गर्म लगता है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ भी यही होता है।

  • जल में अम्ल या क्षारक के घुलने की प्रक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी (ऊष्मा छोड़ने वाली) होती है
  • जल में सांद्र नाइट्रिक अम्ल या सल्फ़्यूरिक अम्ल मिलाते समय बहुत सावधानी चाहिए
  • अम्ल को सदैव धीरे-धीरे, जल को लगातार हिलाते हुए, जल में मिलाना चाहिए
  • सांद्र अम्ल में जल मिलाने पर इतनी ऊष्मा बनती है कि मिश्रण आस्फलित होकर (उछलकर) बाहर आ सकता है और आप जल सकते हैं
  • अत्यधिक स्थानीय ताप से प्रयोग में लिया जा रहा काँच का पात्र भी टूट सकता है
  • इसीलिए सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल के कैन और सोडियम हाइड्रॉक्साइड की बोतल पर चेतावनी के चिह्न बने होते हैं (पुस्तक का चित्र 2.5)

✓ ऐसा करें

  • सांद्र अम्ल को धीरे-धीरे जल में डालें
  • डालते समय जल को लगातार हिलाते रहें

✗ ऐसा कभी न करें

  • सांद्र अम्ल में जल डालना
  • अम्ल या क्षार को छूना या चखना
कंठस्थ करेंपरिभाषा 6

जल में अम्ल या क्षारक मिलाने पर प्रति इकाई आयतन में आयनों (HX3OX+\ce{H3O+} / OHX−\ce{OH-}) की सांद्रता में कमी हो जाती है। इस प्रक्रिया को तनुकरण कहते हैं, और अम्ल या क्षारक तनुकृत हो जाते हैं।

इसे गाढ़े शरबत में पानी मिलाने जैसा समझिए: मिठास उतनी ही है, पर अब ज़्यादा पानी में फैल गई है, इसलिए हर घूँट कम मीठा लगता है।

परीक्षा संकेत

“अम्ल को जल में क्यों मिलाते हैं, जल को अम्ल में क्यों नहीं?” पुस्तक का पाठ्य-प्रश्न है (पृष्ठ 27, प्रश्न 4)। उत्तर में तीनों बातें लिखें: प्रक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी है, मिश्रण उछलकर जला सकता है, और काँच का पात्र टूट सकता है।

पाठ्य-प्रश्न (पृष्ठ 27)
  1. पाठ्य-प्रश्नHCl, HNO₃ आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण क्यों प्रदर्शित करते हैं, जबकि एल्कोहल एवं ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों के विलयनों में अम्लीयता के अभिलक्षण नहीं प्रदर्शित होते हैं?
  2. पाठ्य-प्रश्नअम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?
  3. पाठ्य-प्रश्नशुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को क्यों नहीं बदलती है?
  4. पाठ्य-प्रश्नअम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में?
  5. पाठ्य-प्रश्नअम्ल के विलयन को तनुकृत करते समय हाइड्रोनियम आयन (HX3OX+\ce{H3O+}) की सांद्रता कैसे प्रभावित हो जाती है?
  6. पाठ्य-प्रश्नजब सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाते हैं तो हाइड्रॉक्साइड आयन (OHX−\ce{OH-}) की सांद्रता कैसे प्रभावित होती है?

4 अम्ल एवं क्षारक के विलयन कितने प्रबल होते हैं?

सूचक केवल इतना बताते हैं कि पदार्थ अम्ल है या क्षारक। पर कोई अम्ल या क्षारक कितना प्रबल है, यह जानने के लिए विलयन में आयनों की मात्रा जाननी होती है।

4.1 सार्वत्रिक सूचक

कंठस्थ करेंपरिभाषा 7

सार्वत्रिक सूचक अनेक सूचकों का मिश्रण होता है। यह किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन की विभिन्न सांद्रता को विभिन्न रंगों में प्रदर्शित करता है।

सामान्यतः pH, सार्वत्रिक सूचक में भिगोए (अंतर्भारित) गए पेपर से ज्ञात किया जाता है।

4.2 pH स्केल

कंठस्थ करेंपरिभाषा 8

किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए विकसित स्केल को pH स्केल कहते हैं। इससे सामान्यतः शून्य (अधिक अम्लता) से चौदह (अधिक क्षारीय) तक pH ज्ञात कर सकते हैं।

  • pH का p जर्मन शब्द ‘पुसांस’ (Potenz) से आया है, जिसका अर्थ है ‘शक्ति’
  • साधारण भाषा में pH एक ऐसी संख्या है जो विलयन की अम्लता या क्षारकीयता बताती है
  • हाइड्रोनियम आयन की सांद्रता जितनी अधिक, pH उतना ही कम
  • उदासीन विलयन का pH = 7
  • pH 7 से कम = अम्लीय विलयन
  • pH 7 से 14 तक बढ़ने का अर्थ है OHX−\ce{OH-} की सांद्रता बढ़ना, यानी क्षार की शक्ति बढ़ना
चित्र 5: pH स्केल (0-14), अम्लीय, उदासीन और क्षारकीय विलयन, और पुस्तक के चित्र 2.7 के सामान्य पदार्थों के pH
चित्र 5: pH स्केल (0-14), अम्लीय, उदासीन और क्षारकीय विलयन, और पुस्तक के चित्र 2.7 के सामान्य पदार्थों के pH

पुस्तक का चित्र 2.7 (pH पत्र पर रंग केवल मोटे मार्गदर्शन के लिए हैं) इन पदार्थों के pH देता है:

पदार्थ pH प्रकृति
जठर रस लगभग 1.2 अत्यधिक अम्लीय
नींबू का रस लगभग 2.2 अम्लीय
शुद्ध जल 7 उदासीन
रक्त 7.4 हल्का क्षारकीय
मिल्क ऑफ मैग्नीशिया 10 क्षारकीय
सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन लगभग 14 अत्यधिक क्षारकीय

क्रियाकलाप 2.11 (सारणी 2.2) में आप स्वयं pH पत्र से इनका pH जाँचते हैं: लार (खाना खाने से पहले और बाद), नींबू का रस, रंगरहित वातित पेय, गाजर का रस, कॉफी, टमाटर का रस, नल का जल, 1M NaOH और 1M HCl।

4.3 प्रबल और दुर्बल अम्ल

अम्ल तथा क्षारक की शक्ति, विलयन (जल) में क्रमशः H⁺ आयन तथा OH⁻ आयन की संख्या पर निर्भर करती है। समान सांद्रता (जैसे दोनों एक मोलर, यानी दोनों में अम्ल की मात्रा बराबर) के हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और ऐसीटिक अम्ल अलग-अलग मात्रा में H⁺ आयन उत्पन्न करते हैं।

परिभाषा 9

अधिक संख्या में H⁺ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं, जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।

परिभाषा 10

कम H⁺ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलाते हैं, जैसे ऐसीटिक अम्ल।

ध्यान दें: पुस्तक के अभ्यास में “प्रबल अम्लीय विलयन” का अर्थ बहुत कम pH वाला और “प्रबल क्षारीय विलयन” का अर्थ बहुत अधिक pH वाला विलयन है। यही विचार क्षारकों पर लागू होता है: अधिक OH⁻ आयन देने वाला क्षारक प्रबल क्षारक, कम OH⁻ आयन देने वाला दुर्बल क्षारक।

आम भूल

“प्रबल” का अर्थ “सांद्र” नहीं है। प्रबल या दुर्बल की तुलना समान सांद्रता पर होती है: एक जैसी सांद्रता के दो अम्लों में जो अधिक H⁺ आयन दे, वह प्रबल है।

4.4 दैनिक जीवन में pH का महत्त्व

pH कहाँ-कहाँ मायने रखता है
शरीरpH 7.0 से 7.8 के बीच काम करता है
वर्षाpH 5.6 से कम: अम्लीय वर्षा
मिट्टीहर पौधे को विशिष्ट pH परास चाहिए
पाचनअपच में ऐन्टैसिड
दाँतpH 5.5 से कम पर क्षय
डंकअम्ल का दर्द, क्षारक से आराम

क्या पौधे एवं पशु pH के प्रति संवेदनशील होते हैं?

  • हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है
  • जीवित प्राणी केवल संकीर्ण pH परास (परिसर) में ही जीवित रह सकते हैं
  • सभी जीवों में उपापचय (शरीर के अंदर होने वाली रासायनिक क्रियाएँ) pH की एक इष्टतम (सबसे उपयुक्त) सीमा में होता है
कंठस्थ करेंपरिभाषा 11

वर्षा के जल का pH मान जब 5.6 से कम हो जाता है तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है।

  • अम्लीय वर्षा का जल नदी में बहता है तो नदी के जल का pH कम हो जाता है
  • ऐसी नदी में जलीय जीवधारियों की उत्तरजीविता (जीवित बचे रहना) कठिन हो जाती है
दूसरे ग्रहों में अम्ल पदार्थ

शुक्र (Venus) का वायुमंडल सल्फ़्यूरिक अम्ल के मोटे श्वेत एवं पीले बादलों से बना है। क्या आपको लगता है कि इस ग्रह पर जीवन संभव है?

आपके बागीचे की मिट्टी का pH क्या है?

  • अच्छी उपज के लिए पौधों को एक विशिष्ट pH परास चाहिए
  • क्रियाकलाप 2.12: परखनली में लगभग 2 g मिट्टी और 5 mL जल लेकर हिलाते हैं
  • मिश्रण को छानकर निस्यंद (छना हुआ द्रव) इकट्ठा करते हैं
  • निस्यंद का pH सार्वत्रिक सूचक पत्र से जाँचते हैं
  • मिट्टी बहुत अम्लीय हो तो किसान उसमें क्षारकीय पदार्थ डालता है, जो मिट्टी की अम्लता को उदासीन करते हैं: बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट)

हमारे पाचन तंत्र का pH

  • हमारा उदर (पेट) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न करता है
  • यह अम्ल उदर को हानि पहुँचाए बिना भोजन के पाचन में सहायक होता है
  • अपच में उदर अत्यधिक अम्ल बनाता है, जिससे दर्द एवं जलन होती है
  • इससे राहत के लिए ऐन्टैसिड (antacid) जैसे क्षारक लेते हैं, जो अम्ल की आधिक्य मात्रा को उदासीन करते हैं
  • इसके लिए मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) जैसा दुर्बल क्षारक उपयोग होता है

pH परिवर्तन के कारण दंत-क्षय

  • मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय शुरू हो जाता है
  • दाँतों का इनैमल (दन्तवल्क) कैल्सियम हाइड्रॉक्सीएपेटाइट से बना है, जो कैल्सियम फॉस्फेट का क्रिस्टलीय रूप है
  • इनैमल शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है
  • यह जल में नहीं घुलता, पर मुँह का pH 5.5 से कम होने पर संक्षारित हो जाता है
  • मुँह के बैक्टीरिया भोजन के बाद बची शर्करा और खाद्य पदार्थों को तोड़कर (निम्नीकरण करके) अम्ल बनाते हैं
  • बचाव: भोजन के बाद मुँह साफ़ करना, और क्षारकीय दंत-मंजन से आधिक्य अम्ल को उदासीन करना

पशुओं एवं पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा

  • मधुमक्खी का डंक एक अम्ल छोड़ता है, जिससे दर्द एवं जलन होती है
  • डंक वाली जगह पर बेकिंग सोडा जैसे दुर्बल क्षारक से आराम मिलता है
  • नेटल (nettle) के डंक वाले बाल मेथैनॉइक अम्ल छोड़ जाते हैं, जिससे जलन वाला दर्द होता है
प्रकृति उदासीनीकरण के विकल्प देती है

नेटल जंगलों में उगने वाला एक शाकीय पादप है, जिसके पत्तों पर डंक जैसे बाल होते हैं। पारंपरिक रूप से इसका इलाज डंक वाली जगह पर डॉक पौधे की पत्ती रगड़कर किया जाता है। डॉक के पौधे अधिकतर नेटल के पास ही उगते हैं। पुस्तक पूछती है: क्या आप डॉक पौधे की प्रकृति का अनुमान लगा सकते हैं?

पुस्तक की सारणी 2.3 में कुछ प्राकृतिक अम्ल:

प्राकृतिक स्रोत अम्ल प्राकृतिक स्रोत अम्ल
सिरका ऐसीटिक अम्ल खट्टा दूध (दही) लैक्टिक अम्ल
संतरा सिट्रिक अम्ल नींबू सिट्रिक अम्ल
इमली टार्टरिक अम्ल चींटी का डंक मेथैनॉइक अम्ल
टमाटर ऑक्सैलिक अम्ल नेटल का डंक मेथैनॉइक अम्ल
7.0-7.8हमारे शरीर का pH परास
5.6इससे कम pH की वर्षा अम्लीय वर्षा
5.5मुँह का pH इससे कम हो तो दंत-क्षय
पाठ्य-प्रश्न (पृष्ठ 31)
  1. पाठ्य-प्रश्नआपके पास दो विलयन ‘A’ एवं ‘B’ हैं। विलयन ‘A’ के pH का मान 6 है एवं विलयन ‘B’ के pH का मान 8 है। किस विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है? इनमें से कौन अम्लीय है तथा कौन क्षारकीय?
  2. पाठ्य-प्रश्नH⁺(aq) आयन की सांद्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
  3. पाठ्य-प्रश्नक्या क्षारकीय विलयन में H⁺(aq) आयन होते हैं? अगर हाँ, तो यह क्षारकीय क्यों होते हैं?
  4. पाठ्य-प्रश्नकोई किसान खेत की मृदा की किस परिस्थिति में बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट) का उपयोग करेगा?

5 लवण के संबंध में अधिक जानकारी

पिछले भागों में लवण कई अभिक्रियाओं से बनते दिखे: अम्ल + धातु, अम्ल + कार्बोनेट, अम्ल + क्षारक। अब इनके परिवार, pH, निर्माण और उपयोग देखते हैं।

5.1 लवण परिवार

कंठस्थ करेंपरिभाषा 12

समान धन मूलक (धनायन) या समान ऋण मूलक (ऋणायन) वाले लवणों को एक ही परिवार का कहा जाता है।

सोडियम लवण परिवारNaCl · Na₂SO₄
(समान धनायन Na⁺)
क्लोराइड लवण परिवारNaCl · KCl
(समान ऋणायन Cl⁻)
NaCl दोनों परिवारों में

क्रियाकलाप 2.13 में पोटैशियम सल्फ़ेट, सोडियम सल्फ़ेट, कैल्सियम सल्फ़ेट, मैग्नीशियम सल्फ़ेट, कॉपर सल्फ़ेट, सोडियम क्लोराइड, सोडियम नाइट्रेट, सोडियम कार्बोनेट और अमोनियम क्लोराइड के सूत्र लिखकर, उन्हें बनाने वाले अम्ल-क्षारक पहचानकर परिवार ढूँढे जाते हैं।

5.2 लवणों का pH

क्रियाकलाप 2.14 में सोडियम क्लोराइड, पोटैशियम नाइट्रेट, एल्युमिनियम क्लोराइड, जिंक सल्फ़ेट, कॉपर सल्फ़ेट, सोडियम ऐसीटेट, सोडियम कार्बोनेट और सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट को केवल आसवित जल में घोलकर उनका pH जाँचा जाता है (सारणी 2.4)। निष्कर्ष:

लवण किससे बना pH प्रकृति उदाहरण
प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक 7 उदासीन NaCl (HCl + NaOH से)
प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक 7 से कम अम्लीय NH₄Cl
प्रबल क्षारक + दुर्बल अम्ल 7 से अधिक क्षारकीय Na₂CO₃, CH₃COONa

उदाहरण के लिए HCl प्रबल अम्ल और NaOH प्रबल क्षारक हैं, जबकि NH₄OH दुर्बल क्षारक और ऐसीटिक अम्ल दुर्बल अम्ल हैं। सीधा नियम: जो साथी प्रबल है, लवण उसी का स्वभाव दिखाता है। दोनों प्रबल हों तो कोई नहीं जीतता और लवण उदासीन रहता है।

5.3 साधारण नमक से रसायन

  • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया से बना लवण सोडियम क्लोराइड है
  • यही हमारे भोजन का नमक है, और यह एक उदासीन लवण है
  • समुद्री जल में कई लवण घुले होते हैं; इनसे सोडियम क्लोराइड को अलग किया जाता है
  • विश्व के कई भागों में ठोस लवण का निक्षेप (जमाव) भी मिलता है
परिभाषा 13

ठोस लवण के निक्षेप के बड़े क्रिस्टल, जो प्रायः अपद्रव्यों (अशुद्धियों) के कारण भूरे रंग के होते हैं, खनिज नमक कहलाते हैं।

  • खनिज नमक तब बना जब युगों के बीतने के साथ समुद्र का कोई हिस्सा सूख गया
  • खनिज नमक का खनन भी कोयले की तरह होता है
  • महात्मा गांधी की दांडी यात्रा: हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नमक एक महत्वपूर्ण प्रतीक था

साधारण नमक, रसायनों का कच्चा पदार्थ: इससे रोज़ काम आने वाले कई पदार्थ बनते हैं।

1 · सोडियम हाइड्रॉक्साइडलवण जल के विद्युत अपघटन से (क्लोर-क्षार प्रक्रिया)
→
2 · विरंजक चूर्णउसी प्रक्रिया की क्लोरीन से
↓
साधारण नमक (NaCl)
↓
4 · धोने का सोडाबेकिंग सोडा गर्म करके, फिर पुनः क्रिस्टलीकरण
←
3 · बेकिंग सोडाNaCl को मूल पदार्थ लेकर

5.4 सोडियम हाइड्रॉक्साइड: क्लोर-क्षार प्रक्रिया

कंठस्थ करेंपरिभाषा 14

सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (लवण जल) से विद्युत प्रवाहित करने (विद्युत अपघटन, यानी विद्युत धारा से यौगिक को तोड़ना) पर यह वियोजित होकर (टूटकर) सोडियम हाइड्रॉक्साइड उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहते हैं, क्योंकि इसके उत्पाद क्लोरीन (क्लोर) एवं सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार) होते हैं।

2 NaCl(aq)+2 HX2O(l)→2 NaOH(aq)+ClX2(g)+HX2(g)\ce{2NaCl(aq) + 2H2O(l) -> 2NaOH(aq) + Cl2(g) + H2(g)}

  • क्लोरीन गैस ऐनोड (धन इलेक्ट्रोड, यानी बैटरी के धन सिरे से जुड़ी छड़) पर मुक्त होती है
  • हाइड्रोजन गैस कैथोड (ऋण इलेक्ट्रोड) पर मुक्त होती है
  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन भी कैथोड पर बनता है
  • इस प्रक्रिया के तीनों उत्पाद उपयोगी हैं
चित्र 6: क्लोर-क्षार प्रक्रिया: लवण जल का विद्युत अपघटन, ऐनोड पर क्लोरीन और कैथोड पर हाइड्रोजन (पुस्तक का चित्र 2.8)
चित्र 6: क्लोर-क्षार प्रक्रिया: लवण जल का विद्युत अपघटन, ऐनोड पर क्लोरीन और कैथोड पर हाइड्रोजन (पुस्तक का चित्र 2.8)

पुस्तक का चित्र 2.8 तीनों उत्पादों के उपयोग दिखाता है:

उत्पाद कहाँ बनता है उपयोग
हाइड्रोजन (H₂) कैथोड ईंधन, मार्गरीन, खाद के लिए अमोनिया
क्लोरीन (Cl₂) ऐनोड जल की स्वच्छता, स्वीमिंग पूल, पीवीसी, रोगाणुनाशक, सीएफसी, कीटनाशक
सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) कैथोड पर विलयन में धातुओं से ग्रीज़ हटाने, साबुन तथा अपमार्जक, कागज़ बनाने, कृत्रिम फाइबर के लिए

5.5 विरंजक चूर्ण

  • विरंजक चूर्ण का काम है विरंजन, यानी रंग उड़ाकर चीज़ों को सफ़ेद करना
  • लवण जल के विद्युत अपघटन से बनी क्लोरीन से विरंजक चूर्ण बनाया जाता है
  • शुष्क बुझे हुए चूने [Ca(OH)₂] पर क्लोरीन की क्रिया से विरंजक चूर्ण बनता है
  • विरंजक चूर्ण को Ca(ClO)₂ से दर्शाया जाता है, यद्यपि इसका वास्तविक संगठन काफ़ी जटिल होता है
विरंजक चूर्ण का निर्माण
2 Ca(OH)X2+2 ClX2→Ca(ClO)X2+CaClX2+2 HX2O\ce{2Ca(OH)2 + 2Cl2 -> Ca(ClO)2 + CaCl2 + 2H2O}
बुझा हुआ चूना + क्लोरीन → विरंजक चूर्ण + कैल्सियम क्लोराइड + जल
1

विरंजन

वस्त्र उद्योग में सूती एवं लिनेन का, कागज़ की फैक्ट्री में लकड़ी की मज्जा (लुगदी) का, और लाउंड्री में साफ़ कपड़ों का विरंजन

2

उपचायक

कई रासायनिक उद्योगों में एक उपचायक (ऑक्सीकारक, यानी दूसरे पदार्थ में ऑक्सीजन जोड़ने वाला) के रूप में

3

पेयजल

पीने वाले जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए

आम भूल

विरंजक चूर्ण का सूत्र पुस्तक के अनुसार Ca(ClO)₂ लिखें। इसे बनाने वाला पदार्थ बुझा हुआ चूना [Ca(OH)₂] है, बिना बुझा चूना (CaO) नहीं।

5.6 बेकिंग सोडा

  • रसोई में स्वादिष्ट खस्ता पकौड़े बनाने और कभी-कभी खाना जल्दी पकाने में इसका उपयोग होता है
  • रासायनिक नाम: सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO₃)
  • इसे बनाने में सोडियम क्लोराइड का उपयोग मूल पदार्थ के रूप में होता है
  • यह एक दुर्बल, असंक्षारक क्षारीय लवण है, इसीलिए अम्ल को उदासीन करने में काम आता है
NaCl+HX2O+COX2+NHX3→NHX4Cl+NaHCOX3\ce{NaCl + H2O + CO2 + NH3 -> NH4Cl + NaHCO3}निर्माण; उत्पाद अमोनियम क्लोराइड और सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट
2 NaHCOX3→ΔNaX2COX3+HX2O+COX2\ce{2NaHCO3 ->[\Delta] Na2CO3 + H2O + CO2}खाना पकाते समय गर्म करने (ऊष्मा) पर; सोडियम कार्बोनेट बनता है
1

बेकिंग पाउडर

बेकिंग पाउडर = बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल (एक मंद खाद्य अम्ल)। गर्म करने या जल में मिलाने पर: NaHCOX3+HX+→COX2+HX2O\ce{NaHCO3 + H+ -> CO2 + H2O} + अम्ल का सोडियम लवण। यह CO₂ पावरोटी या केक में खमीर उठाती है, जिससे ये मुलायम एवं स्पंजी हो जाते हैं।

2

ऐन्टैसिड

सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट ऐन्टैसिड का एक संघटक है। क्षारीय होने के कारण यह पेट में अम्ल की अधिकता को उदासीन करके राहत देता है।

3

सोडा-अम्ल अग्निशामक

इसका उपयोग सोडा-अम्ल अग्निशामक में भी होता है।

आम भूल

बेकिंग पाउडर और बेकिंग सोडा एक नहीं हैं। बेकिंग सोडा केवल NaHCO₃ है; बेकिंग पाउडर उसमें टार्टरिक अम्ल मिलाकर बनता है।

5.7 धोने का सोडा

  • धोने का सोडा (वाशिंग सोडा) Na₂CO₃·10H₂O भी सोडियम क्लोराइड से प्राप्त होने वाला रसायन है
  • बेकिंग सोडा को गर्म करके सोडियम कार्बोनेट मिलता है
  • सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलीकरण (घोलकर दोबारा क्रिस्टल बनाना) से धोने का सोडा प्राप्त होता है
  • यह भी एक क्षारकीय लवण है
  • सोडियम कार्बोनेट और सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में भी उपयोगी हैं

NaX2COX3+10 HX2O→NaX2COX3 ⋅ 10 HX2O\ce{Na2CO3 + 10H2O -> Na2CO3.10H2O}

1

उद्योग

काँच, साबुन एवं कागज़ उद्योगों में

2

सोडियम यौगिक

बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिकों के उत्पादन में

3

सफ़ाई

घरों में साफ़-सफ़ाई के लिए

4

कठोर जल

जल की स्थायी कठोरता हटाने के लिए (कठोर जल में साबुन ठीक से झाग नहीं देता)

परीक्षा संकेत

“धोने का सोडा एवं बेकिंग सोडा के दो-दो प्रमुख उपयोग” अभ्यास का सीधा प्रश्न है (प्रश्न 15)। “कठोर जल को मृदु करने के लिए किस सोडियम यौगिक का उपयोग होता है?” का उत्तर धोने का सोडा है।

6 क्या लवण के क्रिस्टल वास्तव में शुष्क हैं?

Na₂CO₃·10H₂O में लिखा 10H₂O क्या है? क्या इससे धोने का सोडा गीला हो जाता है? इसका उत्तर क्रियाकलाप 2.15 देता है।

1 · नीले क्रिस्टलकॉपर सल्फ़ेट शुष्क दिखता है
→
2 · गर्म करेंक्वथन नली में जल की बूँदें दिखती हैं
↓
क्रिस्टलन का जल
↓
4 · 2-3 बूँद जलनीला रंग वापस आ जाता है
←
3 · रंग श्वेतक्रिस्टलन का जल निकल गया

6.1 क्रिस्टलन का जल

कंठस्थ करेंपरिभाषा 15

लवण की एक सूत्र इकाई में जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन का जल कहते हैं।

लवण सूत्र क्रिस्टलन के जल के अणु
कॉपर सल्फ़ेट (नीले क्रिस्टल) CuSO₄·5H₂O 5
धोने का सोडा Na₂CO₃·10H₂O 10
जिप्सम CaSO₄·2H₂O 2

यहाँ सूत्र इकाई का अर्थ है लवण के सूत्र (जैसे CuSO₄) से दर्शाई गई एक इकाई। इसलिए Na₂CO₃·10H₂O आर्द्र (गीला) नहीं है। उसके 10 जल-अणु क्रिस्टलन का जल हैं, जो क्रिस्टल की बनावट का हिस्सा हैं।

6.2 प्लास्टर ऑफ पेरिस

कंठस्थ करेंपरिभाषा 16

जिप्सम को 373 K पर गर्म करने पर यह जल के अणुओं का त्याग करके कैल्सियम सल्फ़ेट अर्धहाइड्रेट या हेमिहाइड्रेट (CaSO₄·½H₂O) बनाता है। इसे प्लास्टर ऑफ पेरिस कहते हैं।

CaSOX4 ⋅ 2 HX2O→373 KCaSOX4 ⋅ 12 HX2O+32 HX2O\ce{CaSO4.2H2O ->[373\ K] CaSO4.1/2H2O + 3/2H2O}बनना: जिप्सम गर्म करने पर
CaSOX4 ⋅ 12 HX2O+32 HX2O→CaSOX4 ⋅ 2 HX2O\ce{CaSO4.1/2H2O + 3/2H2O -> CaSO4.2H2O}जमना: जल मिलाने पर फिर जिप्सम, कठोर ठोस पदार्थ
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस एक सफ़ेद चूर्ण है
  • जल मिलाने पर यह पुनः जिप्सम बनकर कठोर ठोस बन जाता है
  • डॉक्टर इसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को सही जगह पर स्थिर रखने के लिए करते हैं
  • इसका उपयोग खिलौने बनाने, सजावट का सामान बनाने और सतह को चिकना बनाने में भी होता है
  • पुस्तक का प्रश्न: पता करें कि कैल्सियम सल्फ़ेट अर्धहाइड्रेट को प्लास्टर ऑफ पेरिस क्यों कहा जाता है?
जल का आधा अणु कैसे? क्रिस्टलन के जल के रूप में केवल आधा अणु जुड़ा होता है, क्योंकि CaSO₄ की दो सूत्र इकाइयाँ जल के एक अणु की साझेदारी करती हैं।
भंडारण की सावधानी

प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्र-रोधी (नमी-रोधी) बर्तन में रखना चाहिए। हवा की नमी से भी यह धीरे-धीरे जिप्सम बनकर कठोर हो जाता है और फिर काम का नहीं रहता।

आम भूल

प्लास्टर ऑफ पेरिस के बनने (जिप्सम गर्म करना) और जमने (जल मिलाना) की अभिक्रियाएँ एक-दूसरे की उलटी हैं। परीक्षा में दोनों को आपस में न बदलें।

पाठ्य-प्रश्न (पृष्ठ 36)
  1. पाठ्य-प्रश्नCa(ClO)₂ यौगिक का प्रचलित नाम क्या है?
  2. पाठ्य-प्रश्नउस पदार्थ का नाम बताइए जो क्लोरीन से क्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है।
  3. पाठ्य-प्रश्नकठोर जल को मृदु करने के लिए किस सोडियम यौगिक का उपयोग किया जाता है?
  4. पाठ्य-प्रश्नसोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
  5. पाठ्य-प्रश्नप्लास्टर ऑफ पेरिस की जल के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।

7 सामूहिक क्रियाकलाप

7.1 अपना सूचक तैयार करें

  • खरल में चुकंदर की जड़ पीसकर, पर्याप्त जल मिलाकर उसका रस (पुस्तक इसे निष्कर्ष कहती है) छान लेते हैं
  • चार परखनलियों A, B, C, D में क्रमशः नींबू रस का विलयन, सोडा-जल, सिरका और बेकिंग सोडा का 2 mL विलयन लेते हैं
  • हर परखनली में चुकंदर के निचोड़ की 2-3 बूँदें डालकर रंग का बदलाव सारणी में लिखते हैं
  • लाल पत्ता गोभी की पत्तियों और पेटुनिया, हाइड्रेंजिया तथा जेरानियम की पंखुड़ियों के निचोड़ से भी सूचक बनता है

7.2 सोडा-अम्ल अग्निशामक तैयार करना

चरण 1धावन बोतल में 20 mL सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO₃) विलयन लेते हैं
↓
चरण 2तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल वाली ज्वलन नली धागे से बोतल में लटकाकर मुँह बंद करते हैं
↓
चरण 3बोतल झुकाने पर अम्ल हाइड्रोजनकार्बोनेट से मिलता है और नोज़ल (तुंड) से बुदबुदाहट (CO₂) निकलती है, जो जलती मोमबत्ती बुझा देती है

कार्बन डाइऑक्साइड बनाने वाले ऐसे अग्निशामक में धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अम्ल की अभिक्रिया का उपयोग होता है (पुस्तक का चित्र 2.10)।

परीक्षा से पहले स्वयं जाँचें
  • क्या मैं अम्ल + धातु, अम्ल + कार्बोनेट, अम्ल + क्षारक और अम्ल + धात्विक ऑक्साइड के संतुलित समीकरण बिना देखे लिख सकता हूँ?
  • क्या मैं बता सकता हूँ कि शुष्क HCl गैस शुष्क लिटमस को क्यों नहीं बदलती?
  • क्या मैं pH 6 और pH 8 वाले विलयनों में से अधिक H⁺ वाला विलयन पहचान सकता हूँ?
  • क्या मैं क्लोर-क्षार प्रक्रिया के तीनों उत्पाद, उनके इलेक्ट्रोड और एक-एक उपयोग लिख सकता हूँ?
  • क्या मैं प्लास्टर ऑफ पेरिस के बनने और जमने के दोनों समीकरण अलग-अलग लिख सकता हूँ?
सभी परिभाषाएँ एक ही जगह
सूचकरंजक या रंजकों के मिश्रण जो रंग बदलकर अम्ल या क्षारक बताते हैं
गंधीय सूचकजिनकी गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में भिन्न हो जाती है, जैसे प्याज, वैनिला
उदासीनीकरण अभिक्रियाअम्ल और क्षारक की अभिक्रिया जिससे लवण तथा जल बनते हैं
हाइड्रोनियम आयनH⁺ और जल के अणु से बना आयन, H₃O⁺
क्षारजल में घुलनशील क्षारक
तनुकरणजल मिलाने पर प्रति इकाई आयतन आयनों (H₃O⁺/OH⁻) की सांद्रता में कमी
सार्वत्रिक सूचकअनेक सूचकों का मिश्रण, H⁺ की विभिन्न सांद्रता पर विभिन्न रंग
pH स्केलH⁺ आयन की सांद्रता ज्ञात करने का स्केल, 0 (अधिक अम्लता) से 14 (अधिक क्षारीय); p = पुसांस (Potenz) = शक्ति
प्रबल अम्लअधिक संख्या में H⁺ आयन देने वाला अम्ल, जैसे HCl
दुर्बल अम्लकम H⁺ आयन देने वाला अम्ल, जैसे ऐसीटिक अम्ल
अम्लीय वर्षाजिस वर्षा के जल का pH 5.6 से कम हो
लवण परिवारसमान धन मूलक या समान ऋण मूलक वाले लवण
खनिज नमकठोस लवण के निक्षेप के बड़े, अपद्रव्यों से भूरे क्रिस्टल
क्लोर-क्षार प्रक्रियालवण जल का विद्युत अपघटन, उत्पाद NaOH, Cl₂ और H₂
क्रिस्टलन का जललवण की एक सूत्र इकाई में जल के निश्चित अणुओं की संख्या
प्लास्टर ऑफ पेरिसCaSO₄·½H₂O, जिप्सम को 373 K पर गर्म करके बना कैल्सियम सल्फ़ेट अर्धहाइड्रेट
त्वरित पुनरीक्षण: परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें
  • अम्ल नीले लिटमस को लाल और क्षारक लाल लिटमस को नीला करते हैं; प्याज और वैनिला गंधीय सूचक हैं
  • अम्ल + धातु → लवण + H₂; क्षारक + धातु (जैसे Zn) → ऐसा लवण जिसके ऋण आयन में धातु और ऑक्सीजन हों + H₂
  • अम्ल + कार्बोनेट/हाइड्रोजनकार्बोनेट → लवण + CO₂ + जल; CO₂ चूने के पानी को दूधिया करती है
  • क्षारक + अम्ल → लवण + जल (उदासीनीकरण); आयनों में H⁺ + OH⁻ → H₂O
  • धात्विक ऑक्साइड क्षारकीय, अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय
  • अम्ल जल की उपस्थिति में ही H⁺(aq) / H₃O⁺ देते हैं; क्षारक जल में OH⁻ देते हैं; जल में घुलनशील क्षारक = क्षार
  • अम्ल को सदैव जल में मिलाएँ, क्योंकि घुलना अत्यंत ऊष्माक्षेपी है
  • pH: 7 से कम अम्लीय, 7 उदासीन, 7 से अधिक क्षारकीय; H₃O⁺ अधिक तो pH कम
  • शरीर 7.0-7.8; अम्लीय वर्षा 5.6 से कम; दंत-क्षय 5.5 से कम; अपच में ऐन्टैसिड
  • क्लोर-क्षार प्रक्रिया: ऐनोड पर Cl₂, कैथोड पर H₂ और NaOH
  • विरंजक चूर्ण Ca(ClO)₂, बेकिंग सोडा NaHCO₃, धोने का सोडा Na₂CO₃·10H₂O
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस CaSO₄·½H₂O: जिप्सम को 373 K पर गर्म करके; आर्द्र-रोधी बर्तन में रखें