- रासायनिक समीकरण कैसे लिखें और हिट-एंड-ट्रायल विधि से उसे संतुलित कैसे करें
- समीकरण में भौतिक अवस्था (s, l, g, aq) और अभिक्रिया की परिस्थितियाँ कैसे दिखाएँ
- रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन तथा उपचयन-अपचयन) को उदाहरणों से पहचानना
- ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रिया में अंतर करना
- उपचयन और अपचयन को ऑक्सीजन/हाइड्रोजन के आधार पर समझना
- दैनिक जीवन में संक्षारण और विकृतगंधिता को पहचानना, और विकृतगंधिता को धीमा करने के उपाय
वियोजन अभिक्रियाविस्थापन अभिक्रियाद्विविस्थापन अभिक्रिया
अवक्षेपणउपचयनअपचयनऊष्माक्षेपीऊष्माशोषी
संक्षारणविकृतगंधिता
1रासायनिक अभिक्रिया क्या है?
दूध का गर्मियों में खराब होना, लोहे के तवे पर जंग लगना, अंगूर का किण्वन (fermentation) होना,
भोजन का पकना, भोजन का शरीर में पचना, हमारा साँस लेना: इन सभी में शुरुआती पदार्थ की प्रकृति
और पहचान कुछ न कुछ बदल जाती है। जब भी कोई रासायनिक परिवर्तन होता है, हम कहते हैं कि एक
रासायनिक अभिक्रिया हुई है।
मैग्नीशियम रिबन को रेगमाल से रगड़कर साफ करके स्पिरिट लैंप पर जलाएँ और उससे बनी राख को वॉच-ग्लास
में इकट्ठा करें। मैग्नीशियम हवा की ऑक्सीजन से मिलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड (सफेद राख) बनाता है :
यही एक रासायनिक अभिक्रिया का उदाहरण है।
लेड नाइट्रेट के विलयन में पोटैशियम आयोडाइड का विलयन मिलाने पर पीले रंग का ठोस बनता है (क्रियाकलाप 1.2)। दानेदार जिंक पर तनु हाइड्रोक्लोरिक या सल्फ़्यूरिक अम्ल डालने पर जस्ते के दानों के आस-पास हाइड्रोजन गैस के बुलबुले बनते हैं और फ्लास्क गर्म हो जाता है (क्रियाकलाप 1.3)।

इन तीनों क्रियाकलापों के आधार पर, निम्न में से किसी भी प्रेक्षण की सहायता से हम निर्धारित कर सकते हैं कि एक रासायनिक अभिक्रिया हुई है:
- अवस्था में परिवर्तन
- रंग में परिवर्तन
- गैस का निकास अथवा उत्सर्जन
- तापमान में परिवर्तन
2रासायनिक समीकरण
किसी अभिक्रिया को वाक्य में लिखना लंबा पड़ता है, इसलिए इसे संक्षेप में शब्द-समीकरण (word-equation)
के रूप में लिखा जाता है:
उत्पाद (product) कहलाता है। तीर उत्पाद की दिशा दिखाता है।
रासायनिक समीकरण (Chemical Equation) किसी रासायनिक अभिक्रिया को शब्दों के बजाय रासायनिक
सूत्रों (formulae) के रूप में दर्शाने का संक्षिप्त तरीका है: जैसे ।
जब समीकरण के दोनों ओर परमाणुओं की संख्या बराबर न हो, तो उसे ढाँचा (कंकाली) रासायनिक समीकरण
(skeletal chemical equation) कहते हैं: जैसे ऊपर लिखा स्वयं असंतुलित है
(बाईं ओर 2 O परमाणु हैं, दाईं ओर सिर्फ 1)।
2.1 समीकरण संतुलित क्यों होना चाहिए
द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): किसी रासायनिक अभिक्रिया में
द्रव्यमान न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। इसलिए अभिकारकों में मौजूद प्रत्येक
तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या, उत्पादों में भी उतनी ही होनी चाहिए: तभी समीकरण संतुलित (balanced)
कहलाता है।
“रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?”: यह इस अध्याय के अभ्यास का प्रश्न 4 है। उत्तर में
द्रव्यमान संरक्षण के नियम का नाम अवश्य लिखें, केवल “बराबर परमाणु” कहना पर्याप्त नहीं है।
क्रियाकलाप 1.3 की अभिक्रिया को जाँचिए: Zn 1 = 1, H 2 = 2, S 1 = 1, O 4 = 4। दोनों ओर हर तत्व के परमाणुओं की संख्या समान है, इसलिए यह समीकरण पहले से ही संतुलित है।
2.2 समीकरण संतुलित करने की हिट-एंड-ट्रायल विधि
उदाहरण: को संतुलित करना है।
परमाणु संतुलित करने के लिए यौगिक का सूत्र कभी न बदलें: जैसे ऑक्सीजन संतुलित करने के लिए
के आगे गुणांक “4” लिखें (), न कि सूत्र बदलकर या लिख दें।
स्वयं करके देखिए: पुस्तक इन्हीं चरणों से ढाँचा समीकरण को संतुलित करने को कहती है। पहले ऑक्सीजन: बाईं ओर O के 2 परमाणु हैं, इसलिए दाईं ओर लिखें। अब दाईं ओर Mg के 2 परमाणु हैं, इसलिए बाईं ओर लिखें: , संतुलित समीकरण।
2.3 भौतिक अवस्था और अभिक्रिया की परिस्थितियाँ
समीकरण को अधिक जानकारीपूर्ण बनाने के लिए पदार्थ की भौतिक अवस्था कोष्ठक में लिखी जाती है:
| संकेत | अवस्था |
|---|---|
| (s) | ठोस (solid) |
| (l) | द्रव (liquid) |
| (g) | गैस (gas) |
| (aq) | जलीय विलयन (aqueous: जल में घुला हुआ) |
(ताप, दाब, उत्प्रेरक) तीर के ऊपर/नीचे लिखी जाती हैं: जैसे
और प्रकाश-संश्लेषण: ।
3रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार
कक्षा 9 में हमने पढ़ा था कि किसी अभिक्रिया में एक तत्व के परमाणु दूसरे तत्व में नहीं बदलते: अभिक्रिया
में परमाणुओं के बीच के बंधन टूटते और नए बनते हैं। पुस्तक अभिक्रियाओं के प्रकार एक-एक करके पढ़ाती है:
संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन तथा उपचयन-अपचयन।
3.1 संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)
कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा चूना) में धीरे-धीरे जल मिलाने पर बीकर गर्म हो जाता है और बुझा चूना
(कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) बनता है: साथ में ऊष्मा भी निकलती है।
संयोजन अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ (तत्व या यौगिक) मिलकर एक ही
उत्पाद बनाते हैं।
क्रियाकलाप 1.1 में मैग्नीशियम का दहन () भी संयोजन अभिक्रिया है: इसमें एकल उत्पाद बनता है और उसके साथ ऊष्मा उत्पन्न होती है।
दीवारों की सफेदी (whitewashing) में बुझे चूने का घोल प्रयोग होता है। यह हवा की कार्बन डाइऑक्साइड से
धीरे-धीरे अभिक्रिया कर कैल्शियम कार्बोनेट की पतली परत बनाता है: .
यही परत दीवार को 2-3 दिन बाद चमकदार बनाती है। संगमरमर (marble) का रासायनिक सूत्र भी ही है।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) वह अभिक्रिया है जिसमें उत्पाद बनने के साथ-साथ ऊष्मा
भी निकलती है। उदाहरण: प्राकृतिक गैस का जलना (), श्वसन
( + ऊर्जा), वनस्पति पदार्थ का खाद (कम्पोस्ट) में बदलना।
3.2 वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)
वियोजन अभिक्रिया संयोजन अभिक्रिया के ठीक विपरीत है: इसमें एक ही अभिकारक टूटकर दो या अधिक
सरल उत्पाद बनाता है।
ऊष्मीय वियोजन (क्रियाकलाप 1.5)
हरे फेरस सल्फेट क्रिस्टल को गर्म करने पर रंग बदलता है और सल्फ़र के दहन जैसी अभिलाक्षणिक गंध आती है:
।
गर्म करने पर फेरस सल्फेट के क्रिस्टल () पहले जल त्याग देते हैं और उनका रंग बदल जाता है। इसके बाद यह फेरिक ऑक्साइड (), सल्फ़र डाइऑक्साइड () तथा सल्फ़र ट्राइऑक्साइड () में वियोजित हो जाता है। फेरिक ऑक्साइड ठोस है, जबकि तथा गैसें हैं।
चूना पत्थर का ऊष्मीय वियोजन
: यह एक प्रमुख वियोजन अभिक्रिया है, जिसका उपयोग विभिन्न उद्योगों में होता है। कैल्शियम ऑक्साइड को चूना या बिना बुझा हुआ चूना कहते हैं; इसके अनेक उपयोगों में से एक सीमेंट के निर्माण में है। गर्म
करके किया गया वियोजन ऊष्मीय वियोजन (thermal decomposition) कहलाता है।
क्रियाकलाप 1.6
लेड नाइट्रेट को गर्म करने पर भूरे रंग का धुआँ (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) निकलता है:
वैद्युत अपघटन (क्रियाकलाप 1.7)
अम्लीय जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस बनती हैं: हाइड्रोजन का
आयतन ऑक्सीजन से ठीक दोगुना इकट्ठा होता है ()।
प्रकाश-अपघटन (क्रियाकलाप 1.8)
सफेद सिल्वर क्लोराइड को धूप में रखने पर वह धूसर (grey) हो जाता है: ।
सिल्वर ब्रोमाइड भी इसी प्रकार अभिक्रिया करता है: ।
यही सिद्धांत श्वेत-श्याम फोटोग्राफी में प्रयुक्त होता है।


ऊपर की सभी वियोजन अभिक्रियाओं में अभिकारकों को तोड़ने के लिए ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
जिन अभिक्रियाओं में ऊर्जा अवशोषित होती है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction) कहते हैं।
एक परखनली में लगभग 2 g बेरियम हाइड्रॉक्साइड लेकर उसमें 1 g अमोनियम क्लोराइड डालिए और काँच की छड़ से मिलाइए। अपनी हथेली से परखनली के निचले सिरे को छुइए: यह ठंडी लगती है। अभिक्रिया आसपास से (आपकी हथेली से भी) ऊष्मा अवशोषित करती है, इसलिए यह ऊष्माशोषी अभिक्रिया है।
3.3 विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)
लोहे की कीलों को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोने पर कीलें भूरी हो जाती हैं और विलयन का नीला रंग
फीका पड़ जाता है: लोहे ने कॉपर को उसके यौगिक से हटा (विस्थापित) दिया है।

विस्थापन अभिक्रिया वह अभिक्रिया है जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक में से एक कम
क्रियाशील तत्व को हटा देता है।
जिंक और लेड, कॉपर से अधिक क्रियाशील (reactive) हैं, इसलिए वे कॉपर को उसके यौगिकों से विस्थापित
कर देते हैं।
3.4 द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)
सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के विलयनों को मिलाने पर तुरंत एक सफेद अवक्षेप (precipitate)
बनता है।
बना हुआ श्वेत पदार्थ जल में अविलेय है; इस अविलेय पदार्थ को अवक्षेप कहते हैं। तथा की अभिक्रिया से के अवक्षेप का निर्माण होता है; दूसरा उत्पाद सोडियम क्लोराइड विलयन में ही रहता है। जिस अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण होता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया (precipitation reaction) कहते हैं।
वे अभिक्रियाएँ, जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
क्रियाकलाप 1.2 (लेड (II) नाइट्रेट तथा पोटैशियम आयोडाइड के विलयनों को मिलाना) भी द्विविस्थापन अभिक्रिया है: इसमें लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप बनता है, ।
3.5 उपचयन और अपचयन (Oxidation and Reduction)
कॉपर चूर्ण को हवा में गर्म करने पर उस पर काली परत (कॉपर(II) ऑक्साइड) जम जाती है: कॉपर ने
ऑक्सीजन ग्रहण की। इसी काले चूर्ण के ऊपर से हाइड्रोजन गैस गुजारने पर वह फिर से लाल-भूरा कॉपर बन
जाता है: यहाँ कॉपर ऑक्साइड ने ऑक्सीजन खो दी।

उपचयन (Oxidation)
- ऑक्सीजन का योग (gain)
- या हाइड्रोजन का ह्रास (loss)
- : कॉपर उपचयित हुआ
अपचयन (Reduction)
- ऑक्सीजन का ह्रास (loss)
- या हाइड्रोजन का योग (gain)
- : कॉपर ऑक्साइड अपचयित हुआ
उपचयन (Oxidation) = ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का ह्रास। अपचयन (Reduction) = ऑक्सीजन
का ह्रास या हाइड्रोजन का योग।
अभिक्रिया में कॉपर (II) ऑक्साइड में ऑक्सीजन का ह्रास हो रहा है, इसलिए यह अपचयित हुआ है; हाइड्रोजन में ऑक्सीजन की वृद्धि हो रही है, इसलिए यह उपचयित हुआ है। अर्थात् इस अभिक्रिया में एक अभिकारक उपचयित तथा दूसरा अभिकारक अपचयित होता है। इन अभिक्रियाओं को उपचयन-अपचयन अथवा रेडॉक्स अभिक्रियाएँ कहते हैं। कुछ अन्य उदाहरण:
(HCl उपचयित होकर बना, अपचयित होकर बना)
क्रियाकलाप 1.1 में मैग्नीशियम ऑक्सीजन ग्रहण करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है, इसलिए मैग्नीशियम का उपचयन होता है।
4दैनिक जीवन में उपचयन के प्रभाव
4.1 संक्षारण (Corrosion)
जब कोई धातु अपने आस-पास अम्ल, आर्द्रता आदि के संपर्क में आती है तब वह संक्षारित होती है और इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। उदाहरण: लोहे पर लालिमायुक्त भूरे रंग की परत (जंग लगना), चाँदी के ऊपर काली परत और ताँबे के ऊपर हरी परत।

संक्षारण के कारण कार के ढाँचे, पुल, लोहे की रेलिंग, जहाज तथा धातु, विशेषकर लोहे से बनी वस्तुओं की बहुत क्षति होती है; क्षतिग्रस्त लोहे को बदलने में हर वर्ष अधिक पैसा खर्च होता है। लोहे की वस्तुओं को पेंट करने से लोहे की सतह नमी और हवा के संपर्क में नहीं आती, जिससे जंग लगना रुकता है। (संक्षारण के बारे में अधिक जानकारी अध्याय 3 में है।)
4.2 विकृतगंधिता (Rancidity)
विकृतगंधिता वह प्रक्रिया है जिसमें वसा और तेलयुक्त खाद्य पदार्थ हवा में ऑक्सीजन से उपचयित होकर
अपना स्वाद व गंध बदल देते हैं (“बासी” हो जाना)।
प्रति ऑक्सीकारक मिलाना
उपचयन रोकने वाले पदार्थ (प्रति ऑक्सीकारक) तैलीय तथा वसायुक्त खाद्य सामग्रियों में मिलाए जाते हैं।
वायुरोधी डिब्बे
खाद्य पदार्थ को हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क से दूर रखना।
नाइट्रोजन भरना
चिप्स बनाने वाले चिप्स की थैली से ऑक्सीजन हटाकर उसमें नाइट्रोजन जैसी कम सक्रिय गैस भर देते हैं, ताकि चिप्स का उपचयन न हो सके।
हर रासायनिक अभिक्रिया या तो कुछ जोड़ती है (संयोजन), कुछ तोड़ती है (वियोजन), या किसी का स्थान
बदल देती है (विस्थापन/द्विविस्थापन): और लगभग हर अभिक्रिया में ऊर्जा या तो निकलती है या सोखी जाती है।
इस अध्याय की एक पंक्ति में सीख
- क्या मैं बिना देखे संतुलित समीकरण लिखने की हिट-एंड-ट्रायल विधि के सभी चरण बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं हर प्रकार की अभिक्रिया (संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन, रेडॉक्स) को एक उदाहरण समीकरण के साथ पहचान सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं उपचयन और अपचयन को बिना उलझे परिभाषित कर सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं बता सकता/सकती हूँ कि लोहे की वस्तुओं को पेंट क्यों करते हैं, और विकृतगंधिता धीमी करने के तीनों उपाय?
- संतुलित समीकरण = दोनों ओर हर तत्व के परमाणु बराबर (द्रव्यमान संरक्षण का नियम)
- प्रकार: संयोजन (A+B→AB), वियोजन (AB→A+B), विस्थापन (A+BC→AC+B), द्विविस्थापन (आयनों का आदान-प्रदान), रेडॉक्स (एक अभिकारक उपचयित, दूसरा अपचयित)
- उपचयन = ऑक्सीजन योग/H ह्रास; अपचयन = ऑक्सीजन ह्रास/H योग
- ऊष्माक्षेपी = ऊर्जा निकलती है; ऊष्माशोषी = ऊर्जा सोखी जाती है
- संक्षारण (जंग, काला पड़ना) और विकृतगंधिता (बासी भोजन) दोनों उपचयन के दैनिक जीवन में उदाहरण हैं