परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: लेखक-परिचय, पात्र, कथासार और अंतिम रिकैप। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 लेखक और पाठ
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| लेखक | डॉ. आनंद यादव, मराठी के प्रख्यात कथाकार |
| विधा | आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश (पाठ्यपुस्तक की भूमिका); “जूझ” इस अंश का शीर्षक है |
| पुस्तक | वितान भाग 2 (NCERT), अध्याय 2 |
| अनुवादक | केशव प्रथम वीर (मूल मराठी से) |
| केंद्रीय विषय | शिक्षा के प्रति ललक, कविता के माध्यम से आत्म-खोज |
2 पात्र, एक नज़र में
| पात्र | पहचान |
|---|---|
| नायक (आनंद) | कथा-वाचक, पढ़ाई और कविता के लिए संघर्षरत किशोर |
| दादा (देसाई उसे “रतनाप्पा” कहते हैं) | नायक के पिता, आरंभ में पढ़ाई का विरोधी |
| माँ | पढ़ाई की पक्षधर (सातवीं तक पढ़ाने की तैयारी), नायक के साथ देसाई के यहाँ जाकर बात पहुँचाती है |
| दत्ता जी राव देसाई | गाँव के प्रतिष्ठित व्यक्ति, दादा को डाँटकर पढ़ाई सुनिश्चित कराते हैं |
| रणनवरे मास्टर | पहले दिन कक्षा में आए मास्टर (नायक उन्हें नहीं जानता था), गमछे की घटना में ग़लत डाँट |
| मंत्री मास्टर | गणित अध्यापक, अनुशासन से प्रभाव डालने वाले |
| वसंत पाटील | कक्षा मॉनीटर, नायक का घनिष्ठ मित्र |
| न.वा. सौंदलगेकर मास्टर | मराठी अध्यापक, स्वयं कवि, नायक में कविता जगाने वाले |
3 कथासार, संक्षेप में
तड़पनायक पढ़ना चाहता है पर दादा के डर से कह नहीं पाता, माँ से बात छेड़ता है
सिफ़ारिशमाँ-बेटे रात दत्ता जी राव देसाई के यहाँ जाकर बात कहते हैं; नायक स्वयं भी साल बचाने का तर्क रखता है; दादा से कहा जाता है कि माँ साग-भाजी देने गई थी
डाँट और शर्तेंदेसाई दादा को बुलाकर डाँटते हैं; दादा शर्तों के साथ पाठशाला भेजने को राज़ी होता है
पहला दिनचव्हाण के लड़के का मज़ाक और मास्टर की ग़लत डाँट से नायक आहत होता है
मित्रता और अनुशासनमंत्री मास्टर के अनुशासन और वसंत पाटील की दोस्ती से पढ़ाई में मन लगता है
कविता का जन्मसौंदलगेकर मास्टर के प्रभाव से नायक में कविता के प्रति गहरा अनुराग जगता है
4 परिभाषाएँ और मुहावरे, ठीक जैसी लिखनी हैं
जूझसंघर्ष करना; पाठ का शीर्षक, जिसे नायक की संघर्षशीलता से जोड़कर पढ़ा जाता है
दादा (इस पाठ में)नायक के पिता (दादाजी नहीं), इस बोली का विशेष प्रयोग
दत्ता जी राव देसाईगाँव के प्रतिष्ठित व्यक्ति जिनकी डाँट से दादा नायक को पाठशाला भेजने को राज़ी होता है
यति-गतिकविता में रुकने एवं आगे बढ़ने के नियम (पाद-टिप्पणी)
जीमनेभोजन ग्रहण करना (पाद-टिप्पणी)
गमछापतले कपड़े का तौलिया (पाद-टिप्पणी)
हजामत बनानामुहावरा: खूब डाँटना-फटकारना
मन मारकरमुहावरा: इच्छा दबाकर, बेमन से
5 याद रखने लायक़ तथ्य
6अभ्यास प्रश्न, इस अध्याय के प्रश्नावली खंड में
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| देसाई द्वारा दादा का संबोधन | रतनाप्पा (“क्यों रतनाप्पा?”) |
| मास्टर द्वारा दिया गया नाम | आनंदा |
| नायक का कक्षा-परिचय | “मैं जकाते। पिछले साल फ़ेल होकर इसी कक्षा में बैठा हूँ।” |
| नई चाल में गाई गई कविता | अनंत काणेकर की (“चाँद रात पसरिते पाँढरी गाया धरणीवरी”); जिस सिनेमा-गीत की चाल ली गई, वह “केशव करणी जाति” छंद में था |
6 प्रमुख विषय, एक नज़र में
खेत / दादा का पक्ष
- तुरंत की कमाई (कोल्हू जल्दी चलाकर अच्छा भाव पाना)
- खेती के काम पर निर्भरता (“खेतों में पानी लगाने वाला कोई नहीं है”)
पाठशाला / कविता का पक्ष
- मन की तड़प, नौकरी और धंधा-कारोबार की आशा
- आत्म-खोज, कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास
अंतिम रिकैप
- नायक की पढ़ाई की तड़प, दादा के विरोध, देसाई की सिफ़ारिश से दोबारा पाठशाला जाना, यही कहानी की मूल घटना है
- पहले दिन के अपमान पर भी नायक हार नहीं मानता; मंत्री मास्टर और वसंत पाटील से अनुशासन सीखता है
- सौंदलगेकर मास्टर के प्रभाव से कविता के प्रति गहरा अनुराग जन्मता है, अकेलापन अब बोझ नहीं रहता
- शीर्षक “जूझ” को नायक की संघर्षशीलता से जोड़कर पढ़ा जा सकता है
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री