- समूह क्या होता है, और यह भीड़, दर्शकगण या असंयत भीड़ से किस प्रकार भिन्न है
- लोग समूह में क्यों सम्मिलित होते हैं, समूह कैसे बनते हैं, और समूह विकास की टकमैन की पाँच अवस्थाएँ
- समूह संरचना के चार घटक: भूमिकाएँ, प्रतिमान, हैसियत और संसक्तता, तथा अत्यधिक संसक्तता समूहचिंतन में कैसे बदल सकती है
- समूहों के वर्गीकरण के तीन तरीके: प्राथमिक/द्वितीयक, औपचारिक/अनौपचारिक, अंतःसमूह/बाह्य समूह
- समूह व्यक्ति के व्यवहार को कैसे बदलता है: सामाजिक सुकरीकरण, सामाजिक स्वैराचार और समूह ध्रुवीकरण
CBSE की 2026-27 मनोविज्ञान परीक्षा (कोड 037) में 7 अध्यायों पर 70 अंक सिद्धांत के और 30 अंक प्रैक्टिकल (प्रैक्टिकल फ़ाइल एवं केस प्रोफ़ाइल, वर्ष भर में पाँच मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का प्रशासन एवं व्याख्या, प्रैक्टिकल परीक्षा में दो परीक्षण, तथा मौखिक परीक्षा) के होते हैं। यह अध्याय, इकाई VII, 6 अंक का है। ये नोट्स सिद्धांत भाग पूरा कवर करते हैं; प्रैक्टिकल फ़ाइल के बारे में अपने अध्यापक से अलग से पूछें।
CBSE के 2026-27 पाठ्यक्रम में इकाई VII के लिए ये विषय दिए गए हैं: परिचय; समूह की प्रकृति एवं निर्माण; समूह के प्रकार; व्यक्ति के व्यवहार पर समूह का प्रभाव (सामाजिक स्वैराचार, समूह ध्रुवीकरण)। ये नोट्स NCERT अध्याय के वर्तमान पुनर्मुद्रण पर आधारित हैं, जिसमें ठीक यही खंड हैं।
1परिचय
प्रतिदिन आप कई समूहों से गुज़रते हैं: सुबह अपने परिवार के साथ, विद्यालय में सहपाठियों और शिक्षकों के साथ, और उसके बाद मित्रों के साथ। हर समूह आपको सहायता और सुविधा देता है और साथ ही आपके व्यक्तित्व के विकास को भी आकार देता है। ज़रा सोचिए: यदि आप कभी अपने परिवार, विद्यालय और मित्रों, तीनों से दूर रहे हों, तो निश्चित रूप से कुछ महत्वपूर्ण चीज़ की कमी महसूस हुई होगी: यही भावना बताती है कि समूह सदस्यता आपके जीवन में कितनी केंद्रीय है।
चूँकि जिन समूहों के हम सदस्य होते हैं वे हमें प्रभावित करते हैं, इसलिए यह मायने रखता है कि हम किन समूहों में शामिल हों: अच्छे समूह हमें अच्छा नागरिक बनने में सहायता करते हैं। और यह प्रभाव एकतरफ़ा नहीं है: समूह हमें प्रभावित करते हैं, पर व्यक्ति के रूप में हम भी अपने आसपास के लोगों और समाज को उतनी ही सक्षमता से प्रभावित कर सकते हैं।
2समूह की प्रकृति एवं इसका निर्माण
2.1 समूह क्या है?
समूह ऐसे दो या दो से अधिक व्यक्तियों की एक संगठित व्यवस्था है जो एक दूसरे से अंतःक्रिया करते हैं तथा परस्पर-निर्भर होते हैं, जिनकी एक जैसी अभिप्रेरणाएँ होती हैं, सदस्यों के बीच निर्धारित भूमिकाएँ (यानी हर सदस्य से जुड़ी तय ज़िम्मेदारी) होती हैं, और सदस्यों के व्यवहार को नियमित करने के लिए प्रतिमान (यानी समूह के अपने व्यवहार-नियम, विस्तार से 2.7 में) होते हैं।
एक स्थान पर उपस्थित लोगों का हर समूहन एक समूह नहीं होता। क्रिकेट मैच या विद्यालय का समारोह देखने के लिए एकत्र लोग एक ही स्थान पर हैं, पर वे परस्पर-निर्भर नहीं हैं, उनकी कोई निर्धारित भूमिका या हैसियत (सामाजिक स्थिति) नहीं है, और एक दूसरे से कोई प्रत्याशा नहीं है, इसलिए वे समूह नहीं हैं। आपका परिवार, कक्षा और क्रीड़ा-समूह समूह इसलिए हैं क्योंकि इनमें पारस्परिक निर्भरता, निर्धारित भूमिकाएँ, हैसियत में अंतर, और एक दूसरे से प्रत्याशाएँ होती हैं।
साझा अनन्यता (पहचान)
≥2 व्यक्तियों की एक सामाजिक इकाई जो स्वयं को समूह से संबद्ध समझते हैं: अनन्यता यानी समूह को मिलने वाली अपनी अलग पहचान।
समान अभिप्रेरणा/लक्ष्य
सदस्य किसी साझा लक्ष्य की दिशा में या किसी साझा खतरे से दूर कार्य करते हैं।
पारस्परिक निर्भरता
एक सदस्य का कार्य दूसरों को प्रभावित करता है, जैसे क्रिकेट में फ़ील्डर का कैच छोड़ना पूरी टीम को प्रभावित करता है।
परस्पर प्रभाव
व्यक्ति जब मिलकर (संयुक्त रूप से) अपनी आवश्यकता पूरी करते हैं, तो वे एक दूसरे को भी प्रभावित करते हैं।
अंतःक्रिया
सदस्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एकत्रित होकर अंतःक्रिया करते हैं।
भूमिकाओं एवं प्रतिमानों से संरचित
सदस्य हर बार एक जैसे कार्य करते हैं और समूह के प्रतिमानों का पालन करते हैं।


2.2 समूह, भीड़, दर्शकगण और असंयत भीड़
| प्रकार | यह क्या है |
|---|---|
| भीड़ | ऐसे व्यक्तियों का समूहन जो किसी स्थान पर संयोगवश उपस्थित होते हैं (जैसे सड़क दुर्घटना के बाद)। कोई संरचना नहीं, आत्मीयता की भावना नहीं; व्यवहार अविवेकी होता है; सदस्यों में कोई पारस्परिक निर्भरता नहीं। |
| दर्शकगण | किसी विशेष उद्देश्य से एकत्र लोग, जैसे क्रिकेट मैच या फ़िल्म देखने के लिए। सामान्यतः निष्क्रिय। |
| असंयत भीड़ | दर्शकगण का उत्तेजित जनसमूह में बदल जाना, जिसमें एक सुस्पष्ट प्रयोजन होता है: सबका ध्यान एक ही दिशा में केंद्रित हो जाता है, और सब एक ही तरह से कार्य करने लगते हैं। इसमें सब एक जैसा सोचते-व्यवहार करते हैं (समजातीयता) और बिना सोचे-समझे, आवेश में आकर काम करते हैं (आवेगशीलता)। |
| टीम या दल | समूह का एक विशेष प्रकार। सदस्यों में पूरक कौशल होते हैं, वे एक समान लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं, और परस्पर उत्तरदायी होते हैं: समन्वित प्रयासों से सकारात्मक सहक्रिया प्राप्त होती है। |
2.3 समूह बनाम टीम: पुस्तक के दो अंतर
समूह
- निष्पादन सदस्यों के व्यक्तिगत योगदान पर निर्भर करता है
- नेता या समूह का मुखिया कार्य की ज़िम्मेदारी लेता है
टीम
- व्यक्तिगत योगदान एवं दल-कार्य दोनों महत्त्व रखते हैं
- नेता होने पर भी सदस्य स्वयं अपनी ज़िम्मेदारी लेते हैं
2.4 लोग समूह में क्यों सम्मिलित होते हैं?
अलग-अलग समूह अलग-अलग आवश्यकताएँ पूरी करते हैं, इसलिए हम एक साथ कई समूहों के सदस्य होते हैं। इससे कभी-कभी प्रतिस्पर्धी माँगें बनती हैं, पर अधिकांश समय हम इन्हें संभाल लेते हैं। पुस्तक लोगों के समूह में सम्मिलित होने के छह कारण बताती है:
सुरक्षा
अकेले रहने पर असुरक्षा महसूस होती है; समूह इसे कम करता है, आराम और संरक्षण देता है: व्यक्ति स्वयं को अधिक शक्तिशाली और कम असुरक्षित महसूस करते हैं।
प्रतिष्ठा या हैसियत
महत्वपूर्ण समझे जाने वाले समूह की सदस्यता से सम्मान और शक्ति-बोध मिलता है, जैसे अंतर-विद्यालयी वाद-विवाद प्रतियोगिता जीतना।
आत्म-सम्मान
समूह आत्म-मूल्य की अनुभूति और सकारात्मक सामाजिक अनन्यता देते हैं; प्रतिष्ठित समूहों की सदस्यता आत्म-संप्रत्यय को बढ़ाती है।
मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक आवश्यकताओं की संतुष्टि
समूह आत्मीयता-भावना, ध्यान देना-पाना, प्रेम और शक्ति-बोध जैसी आवश्यकताएँ पूरी करते हैं।
लक्ष्य प्राप्ति
समूह वह लक्ष्य प्राप्त कराते हैं जो अकेले संभव नहीं: कई लोग मिलकर वह कर सकते हैं जो एक व्यक्ति अकेले नहीं कर सकता। बहुमत में शक्ति होती है।
ज्ञान और जानकारी
समूह सदस्यता हमारे दृष्टिकोण को विस्तृत करती है: जो जानकारी अकेले नहीं मिल सकती, समूह उसे पूरा करता है।
2.5 समूह निर्माण: लोग एक साथ क्यों आते हैं
समूह निर्माण का आधार व्यक्तियों के बीच संपर्क और अंतःक्रिया है। यह अंतःक्रिया तीन दशाओं से सुकर या सुगम हो जाती है: सान्निध्य, समानता, तथा समान अभिप्रेरक एवं लक्ष्य।
| दशा | यह कैसे काम करती है |
|---|---|
| सान्निध्य | एक ही कॉलोनी, विद्यालय या खेल-मैदान में एक ही लोगों से बार-बार अंतःक्रिया होने पर हम उनकी अभिरुचियाँ और अभिवृत्तियाँ जान पाते हैं। समान अभिरुचि, अभिवृत्ति और पृष्ठभूमि समूह के सदस्यों के प्रति आपकी पसंद के मुख्य निर्धारक हैं। |
| समानता | दो व्याख्याएँ हैं। (1) व्यक्ति संगति पसंद करता है और ऐसे संबंधों को पसंद करता है जो संगत हों; जब दो व्यक्ति एक जैसे होते हैं तो वहाँ संगति होती है और दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगते हैं (जैसे फुटबाल पसंद करने वाले दो छात्र मित्र बन जाते हैं)। (2) अपने जैसे व्यक्ति से मिलने पर हमारे मत और मूल्यों को मान्यता मिलती है, हमें लगता है हम सही हैं, और हम उस व्यक्ति को पसंद करने लगते हैं (जैसे टेलीविज़न पर अधिक हिंसा दिखाने के विरुद्ध एक जैसा मत रखने वाले दो व्यक्ति)। |
| समान अभिप्रेरक एवं लक्ष्य | समान अभिप्रेरक या लक्ष्य वाले व्यक्ति मिलकर वह कार्य करते हैं जो अकेले संभव नहीं (जैसे विद्यालय न जा पाने वाले मलिन बस्ती के बच्चों को पढ़ाने के लिए मित्रों का समूह बनाना)। |
2.6 समूह निर्माण की अवस्थाएँ: टकमैन का मॉडल
समूह भी जीवन की अन्य चीज़ों की तरह विकसित होते हैं: लोगों के संपर्क में आते ही आप समूह के सदस्य नहीं बन जाते। समूह सामान्यतः निर्माण, द्वंद्व, स्थायीकरण, निष्पादन और निष्कासन/अस्वीकरण की अवस्थाओं से गुज़रते हैं, पर हमेशा इसी क्रम में नहीं: कई अवस्थाएँ एक साथ चल सकती हैं, समूह आगे-पीछे भी जा सकता है, या कुछ अवस्थाएँ छूट भी सकती हैं। टकमैन ने इन्हें पाँच विकासात्मक अवस्थाओं के रूप में विस्तार से बताया:
पाँचों अवस्थाओं के नाम क्रम में अवश्य लिखें: निर्माण, विप्लवन/झंझावात, प्रतिमान निर्माण, निष्पादन, समापन: और पुस्तक की यह बात भी जोड़ें: समूह हमेशा इसी क्रम में आगे नहीं बढ़ते; अवस्थाएँ एक साथ चल सकती हैं, उलट सकती हैं, या छूट सकती हैं।
क्रियाकलाप 7.1 (पुस्तक): अपनी कक्षा से दस सदस्यों का यादृच्छिक चयन करके मुक्त-सदन की योजना बनाने के लिए समिति गठित कीजिए और उसे पूर्ण स्वायत्तता दीजिए; कक्षा के दूसरे सदस्य प्रेक्षण करें। कौन-सी अवस्थाएँ उभरीं, किस क्रम में, और कौन-सी छूट गईं? कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए।
2.7 समूह संरचना: चार घटक
समय के साथ, जैसे-जैसे सदस्य आपस में अंतःक्रिया करते हैं, समूह की एक संरचना बन जाती है: यह दिखने लगता है कि कार्य किसे मिलता है, ज़िम्मेदारियाँ किसकी हैं, और किस सदस्य की हैसियत (सामाजिक स्थिति) क्या है।
भूमिकाएँ
किसी दी हुई स्थिति में व्यक्ति से अपेक्षित सामाजिक रूप से परिभाषित व्यवहार, जैसे पुत्र/पुत्री के रूप में बड़ों का आदर करना, उनकी बात सुनना, और पढ़ाई के प्रति ज़िम्मेदार रहना।
प्रतिमान या मानक
समूह के सदस्यों द्वारा स्थापित, समर्थित एवं प्रवर्तित व्यवहार एवं विश्वास के मानदंड: समूह के “अकथनीय नियम”।
हैसियत या प्रतिष्ठा
दूसरों द्वारा दी गई सापेक्ष सामाजिक स्थिति: प्रदत्त (जैसे वरिष्ठता के कारण) या उपार्जित (विशेषज्ञता/कठिन परिश्रम से)। क्रिकेट कप्तान की हैसियत अन्य सदस्यों से ऊँची होती है, फिर भी टीम की सफलता में सभी समान महत्व रखते हैं।
संसक्तता
सदस्यों के बीच एकता, बद्धता और परस्पर आकर्षण; सदस्य एक सामाजिक इकाई के रूप में सोचना, अनुभव करना और कार्य करना शुरू करते हैं। अत्यधिक संसक्तता कभी-कभी समूह के हित के विरुद्ध भी जा सकती है।
सामान्यतः टीम-कार्य लाभप्रद होता है, पर इरविंग जेनिस ने दिखाया कि अत्यधिक संसक्तता प्रभावी नेतृत्व में बाधा डाल सकती है और अनर्थकारी निर्णयों को जन्म दे सकती है: इसे समूहचिंतन कहा जाता है, जिसमें समूह की एकमत्य की चिंता कार्य योजना के वास्तविक मूल्यांकन की अभिप्रेरणा को दबा देती है, जिससे तर्कहीन और अविवेचनात्मक निर्णय बनते हैं।
समूहचिंतन में सर्वसम्मति का आभास होता है: हर सदस्य मानता है कि सब सहमत हैं, और कोई भी असहमति व्यक्त नहीं करता क्योंकि इससे समूह की संसक्तता कम होने और स्वयं अलोकप्रिय होने का भय रहता है। ऐसे समूहों में घटनाओं को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता की अतिरंजित भावना होती है और वे आंतरिक सामंजस्य बचाए रखने के लिए वास्तविक ख़तरे के संकेतों को नकार या कम कर देते हैं।
समूहचिंतन को बढ़ावा देने वाली दशाएँ: सामाजिक रूप से समजातीय, संसक्त, बाहरी लोगों से पृथक् समूह, जिनमें विकल्पों पर विचार करने की परंपरा नहीं होती और जिन्हें निर्णय लेने में असफलता का सामना करना पड़ता है अथवा निर्णय के लिए उच्च कीमत चुकानी पड़ती है।
पुस्तक का उदाहरण: वियतनाम युद्ध। 1964 से 1967 तक राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन और उनके सलाहकारों ने यह सोचकर युद्ध को बढ़ाया कि इससे उत्तरी वियतनाम शांति-वार्ता के लिए तैयार होगा, और चेतावनियों के बावजूद ये निर्णय लिए गए। इस घोर गलत-आकलित निर्णय से 56,000 अमरीकियों तथा 10 लाख से अधिक वियतनामियों की जान गई और बड़े बजट घाटे उत्पन्न हुए।
समूहचिंतन रोकने के चार उपाय: (i) आलोचनात्मक चिंतन एवं असहमति को प्रोत्साहित व पुरस्कृत करना (ii) समूह को वैकल्पिक कार्य-योजनाएँ प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना (iii) समूह के निर्णयों का मूल्यांकन करने के लिए बाहरी विशेषज्ञों को आमंत्रित करना (iv) सदस्यों को विश्वासपात्र लोगों से प्रतिक्रिया लेने के लिए प्रोत्साहित करना।
3समूह के प्रकार
समूह कई प्रकार से भिन्न होते हैं: आकार में (देश बनाम परिवार), अवधि में (अल्पकालिक समिति बनाम वर्षों चलने वाला धार्मिक समूह), और संगठन में (सेना/पुलिस जैसे अत्यधिक संगठित बनाम मैच के दर्शकों जैसे अनौपचारिक रूप से संगठित)। पुस्तक इन भिन्नताओं को तीन वर्गीकरणों में बाँटती है।
3.1 प्राथमिक एवं द्वितीयक समूह
प्राथमिक समूह
- पूर्व-विद्यमान, प्रायः व्यक्ति को प्रदत्त (परिवार, जाति, धर्म)
- मुखोन्मुख अंतःक्रिया, घनिष्ठ शारीरिक सामीप्य, उत्साहपूर्ण सांवेगिक बंधन
- व्यक्ति के प्रकार्यों के लिए महत्वपूर्ण; विकास के आरंभिक चरण में मूल्यों/आदर्शों के निर्माण में बड़ी भूमिका
- सीमाएँ कम पारगम्य, सदस्यता चुनने का विकल्प कम
द्वितीयक समूह
- व्यक्ति अपनी पसंद से जुड़ता है (जैसे किसी राजनीतिक दल की सदस्यता)
- संबंध अधिक निर्वैयक्तिक, अप्रत्यक्ष और कम आवृत्ति वाले
- छोड़ना और दूसरे समूह से जुड़ना आसान
3.2 औपचारिक एवं अनौपचारिक समूह
औपचारिक समूह
- प्रकार्य और भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से घोषित
- विशिष्ट नियमों या विधि पर आधारित; प्रतिमान व्यवस्था स्थापित करते हैं
- पुस्तक का उदाहरण: विश्वविद्यालय
अनौपचारिक समूह
- नियमों या विधि पर आधारित नहीं (जैसे एक मैच के दर्शक)
- सदस्यों में घनिष्ठ संबंध
3.3 अंतःसमूह एवं बाह्य समूह
अंतःसमूह स्वयं के समूह को कहते हैं (“हमलोग”); बाह्य समूह दूसरे समूह को कहते हैं (“वे”)। अंतःसमूह के सदस्यों को सामान्यतः समान, अनुकूल दृष्टि से देखा जाता है और उनमें वांछनीय विशेषक माने जाते हैं; बाह्य समूह के सदस्यों को अलग तरीके से देखा जाता है और अक्सर नकारात्मक रूप से देखा जाता है।
ये श्रेणियाँ वास्तविक नहीं हैं: ये हमलोगों के द्वारा बनाई गई हैं। यद्यपि इस प्रकार का संवर्गीकरण करना एक सामान्य बात है, फिर भी ये संवर्ग वास्तविक नहीं हैं। कुछ संस्कृतियों में, जैसे भारत में, बहुविधता (कई तरह के लोगों और विचारों) का सम्मान किया जाता है। भारत की अपनी मिली-जुली (सामासिक) संस्कृति हमारे जीवन में, और हमारी कला, भवन-निर्माण (स्थापत्य) एवं संगीत में भी दिखाई देती है।

क्रियाकलाप 7.2 (पुस्तक): हाल की किसी अंतःसांस्थानिक प्रतियोगिता के बारे में सोचिए। मित्रों से अपने विद्यालय और उसके विद्यार्थियों तथा दूसरे विद्यालय और उसके विद्यार्थियों के बारे में एक-एक अनुच्छेद लिखवाइए, दोनों के व्यवहार एवं विशेषताओं की सूची बनाइए, भिन्नताओं का प्रेक्षण कीजिए और समानताओं पर भी परिचर्चा कीजिए।
ताजफेल और उनके सहयोगियों को अंतःसमूह व्यवहार की न्यूनतम शर्तें जानने में रुचि थी। ब्रिटिश स्कूली बच्चों को बताया गया कि यह निर्णयन का प्रयोग है, और उन्होंने दो चित्रकारों, वैसिली वैंकडिन्सकी और पाल क्ली, की पेंटिंग के प्रति अपनी पसंद बताई; इसी आधार पर उन्हें “वैंकडिन्सकी समूह” या “क्ली समूह” में बाँटा गया। अन्य सदस्यों की पहचान कोड संख्या से छिपाई गई थी। बच्चों ने केवल कोड संख्या और समूह सदस्यता के आधार पर प्राप्तकर्ताओं में धन बाँटा:
| प्राप्तकर्ता | बाँटी गई राशि |
|---|---|
| अंतःसमूह सदस्य | 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19 |
| बाह्य समूह सदस्य | 1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21, 23, 25 |
पुस्तक की प्रतिदर्श वितरण सारणी के हर स्तंभ में अंतःसमूह सदस्य की एक राशि, बाह्य समूह सदस्य की एक राशि के साथ जोड़ी गई है।
निष्कर्ष: ये समूह एक कमज़ोर कसौटी (पेंटिंग की पसंद) पर बनाए गए थे, जिनका न कोई पुराना इतिहास था न भविष्य, फिर भी बच्चों ने अपने ही समूह का पक्ष लिया।
4व्यक्ति के व्यवहार पर समूह का प्रभाव
समूह शक्तिशाली होते हैं क्योंकि वे व्यक्ति के व्यवहार को बदल सकते हैं। पुस्तक दो स्थितियों की चर्चा करती है: दूसरों की उपस्थिति में व्यक्ति का अकेले कोई कार्य करना (सामाजिक सुकरीकरण: दूसरों की उपस्थिति से भाव-प्रबोधन (उत्तेजना) उत्पन्न होता है, जो उन कार्यों में प्रदर्शन बढ़ा सकती है जिनमें व्यक्ति पहले से अच्छा है, बशर्ते उसके प्रयास का अलग-अलग मूल्यांकन हो रहा हो), और एक बड़े समूह के अंग के रूप में व्यक्ति का कार्य करना, जहाँ प्रयास मिला दिए जाते हैं (सामाजिक स्वैराचार)। दूसरा प्रभाव, समूह ध्रुवीकरण, समूह के निर्णय लेने से जुड़ा है।
4.1 सामाजिक स्वैराचार
सामाजिक स्वैराचार एक सामूहिक कार्य पर कार्य करते समय व्यक्तिगत प्रयास में आई कमी है: ऐसा कार्य जिसमें परिणाम समूह के अन्य सदस्यों के साथ मिला दिए जाते हैं।
उदाहरण: रस्साकशी। यह पहचानना संभव नहीं होता कि हर सदस्य कितना बल लगा रहा है, इसलिए ऐसी स्थितियाँ सदस्यों को आराम करने और मुफ़्तखोर बनने का अवसर देती हैं।
लताने और सहयोगियों ने छात्रों के समूहों को जितना संभव हो उतनी ज़ोर से ताली बजाने या वाहवाही करने को कहा, क्योंकि प्रयोगकर्ता यह जानने में अभिरुचि रखते थे कि लोग सामाजिक स्थितियों में कितना शोरगुल करते हैं। समूह का आकार बदला गया: व्यक्ति अकेले थे, या 2, 4 और 6 के समूह में। परिणाम: समूह का आकार बढ़ने पर कुल शोर बढ़ा, पर प्रत्येक सहभागी द्वारा उत्पन्न शोर घट गया: समूह बड़ा होने पर हर व्यक्ति ने कम प्रयास किया।
सामाजिक स्वैराचार क्यों होता है
- सदस्य संपूर्ण कार्य के प्रति कम उत्तरदायित्व महसूस करते हैं
- अभिप्रेरणा घटती है, क्योंकि व्यक्तिगत योगदान का अलग मूल्यांकन नहीं होगा
- समूह के निष्पादन की तुलना दूसरे समूह से नहीं की जाती
- सदस्यों के बीच अनुपयुक्त समन्वय (या समन्वय का अभाव)
- सदस्यों के लिए उसी समूह की सदस्यता आवश्यक नहीं, यह मात्र एक समूहन है, वास्तविक समूह नहीं
इसे कैसे कम करें
- हर सदस्य के प्रयास को पहचानने योग्य बनाना
- कठोर परिश्रम का दबाव बढ़ाना (सफल कार्य के लिए सदस्यों को प्रतिबद्ध करना)
- कार्य के प्रकट महत्त्व या मूल्य को बढ़ाना
- लोगों को यह अनुभव कराना कि उनका व्यक्तिगत योगदान महत्वपूर्ण है
- समूह संसक्तता को प्रबल करना: इससे सफल परिणाम की अभिप्रेरणा बढ़ती है
4.2 समूह ध्रुवीकरण
समूह ध्रुवीकरण समूह में अंतःक्रिया और विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप समूह की प्रारंभिक स्थिति का और मज़बूत होना है: समूह अकेले व्यक्तियों की तुलना में चरम निर्णय लेने की अधिक संभावना रखते हैं।
महत्वपूर्ण निर्णय (जैसे गाँव में विद्यालय स्थापित करना है या नहीं) प्रायः समूह द्वारा लिए जाते हैं, व्यक्तियों द्वारा अकेले नहीं। पुस्तक का उदाहरण: घूस लेते पकड़े गए एक कर्मचारी को कैसा दंड दिया जाए, यह उसके सहयोगी तय करते हैं: वे उसे पूरी तरह अपराध-मुक्त कर सकते हैं या सेवा-समाप्ति का निर्णय ले सकते हैं, न कि अनैतिक कार्य के अनुरूप दंड। दूसरा उदाहरण मृत्युदंड का है: यदि आप पहले से इसके पक्ष में हैं और समान विचार वाले लोगों से चर्चा करते हैं, तो इस अंतःक्रिया के बाद आपका मत और अधिक दृढ़ हो सकता है।
क्रियाकलाप 7.3 (पुस्तक): अध्यापक द्वारा बनाई गई 5-एकांशीय मृत्युदंड अभिवृत्ति मापनी से कक्षा को मृत्युदंड समर्थक और विरोधी दो समूहों में बाँटिए; दोनों समूह अलग कमरों में हाल के किसी ऐसे मुकदमे पर परिचर्चा करें जिसमें मृत्युदंड सुनाया गया हो, फिर मापनी पुनः दीजिए और देखिए कि क्या दोनों समूहों की स्थिति प्रारंभिक स्थिति से अधिक दृढ़ हुई है।
भारत द्वारा हाल में खेली गई किसी टेस्ट क्रिकेट श्रृंखला को लीजिए। उस अवधि के समाचारपत्र एकत्र कीजिए और भारतीय तथा प्रतिद्वंद्वी विवरणकारों (कॉमेंटेटर) की टिप्पणियों की तुलना कीजिए। क्या उनमें अंतर है?
- समूह = ≥2 परस्पर-निर्भर व्यक्तियों की संगठित व्यवस्था, समान अभिप्रेरणा, भूमिकाएँ, प्रतिमान; भीड़/दर्शकगण/असंयत भीड़ से भिन्न (चित्र 1अ: फुटबाल टीम = समूह, चित्र 1ब: उसके दर्शक = मात्र समूहन)
- समूह बनाम टीम: टीम में व्यक्तिगत + दल-कार्य दोनों महत्वपूर्ण, सदस्य स्वयं ज़िम्मेदारी लेते हैं (केवल नेता नहीं)
- समूह में सम्मिलित होने के 6 कारण: सुरक्षा, प्रतिष्ठा, आत्म-सम्मान, मनोवैज्ञानिक/सामाजिक आवश्यकताएँ, लक्ष्य प्राप्ति, ज्ञान और जानकारी
- समूह-निर्माण की 3 दशाएँ: सान्निध्य, समानता (2 व्याख्याएँ), समान अभिप्रेरक/लक्ष्य
- टकमैन की 5 अवस्थाएँ क्रम में: निर्माण → विप्लवन/झंझावात → प्रतिमान निर्माण → निष्पादन → समापन (हमेशा इसी क्रम में नहीं)
- समूह संरचना के 4 घटक: भूमिकाएँ, प्रतिमान, हैसियत (प्रदत्त/उपार्जित), संसक्तता
- समूहचिंतन (इरविंग जेनिस): अत्यधिक संसक्तता → तर्कहीन निर्णय; वियतनाम युद्ध 1964-67, लिंडन जॉनसन, 56,000 अमरीकी + 10 लाख से अधिक वियतनामी मृत्यु; 4 उपाय
- प्राथमिक/द्वितीयक, औपचारिक/अनौपचारिक, अंतःसमूह/बाह्य समूह; ताजफेल का न्यूनतम समूह प्रतिमान प्रयोग: कमज़ोर कसौटी पर भी अंतःसमूह-पक्षपात
- सामाजिक सुकरीकरण एवं सामाजिक स्वैराचार: समूह के दो मुख्य प्रभाव
- सामाजिक स्वैराचार: सामूहिक कार्य में प्रयास घटता है (रस्साकशी; लताने का प्रयोग, समूह आकार 2/4/6); 5 कारण, 5 उपाय
- समूह ध्रुवीकरण: विचार-विमर्श के बाद प्रारंभिक स्थिति और मज़बूत; 3 कारण: नए समर्थक तर्क, सार्वजनिक मान्यता जैसा “अनुरूपता प्रभाव”, अंतःसमूह पहचान/अनुरूपता
- क्या मैं पुस्तक की समूह की परिभाषा और उसकी सभी 6 विशेषताएँ बता सकता हूँ?
- क्या मैं समूह को भीड़, दर्शकगण और असंयत भीड़ से अलग कर सकता हूँ?
- क्या मैं टकमैन की सभी 5 अवस्थाएँ क्रम में और उनका एक अपवाद बता सकता हूँ?
- क्या मैं समूह संरचना के सभी 4 घटक उदाहरण सहित बता सकता हूँ?
- क्या मैं समूहचिंतन को वियतनाम युद्ध के आँकड़ों और सभी 4 उपायों सहित समझा सकता हूँ?
- क्या मैं प्राथमिक/द्वितीयक, औपचारिक/अनौपचारिक और अंतःसमूह/बाह्य समूह की तुलना कर सकता हूँ?
- क्या मैं ताजफेल का न्यूनतम समूह प्रतिमान प्रयोग और उसका निष्कर्ष बता सकता हूँ?
- क्या मैं सामाजिक स्वैराचार और समूह ध्रुवीकरण को पुस्तक के उदाहरण सहित परिभाषित कर सकता हूँ, और उनके कारण/कारक सूचीबद्ध कर सकता हूँ?