इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. प्राथमिक क्रियाओं की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: प्राथमिक क्रियाएँ वे आर्थिक क्रियाएँ हैं जो पर्यावरण पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं, क्योंकि इनमें पृथ्वी के संसाधनों जैसे भूमि, जल, वनस्पति, भवन निर्माण सामग्री व खनिजों का सीधे उपयोग होता है।
प्र. निर्वाह कृषि को परिभाषित करें।
उत्तर: निर्वाह कृषि वह कृषि है जिसमें कृषि क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोग उत्पादों का संपूर्ण अथवा लगभग संपूर्ण भाग स्वयं उपयोग कर लेते हैं।
प्र. ऋतु-प्रवास क्या है?
उत्तर: ऋतु-प्रवास पशुचारकों व उनके पशुओं का मैदानी व पर्वतीय चरागाहों के बीच मौसमी स्थानांतरण है: गर्मियों में मैदान से पहाड़ों की ओर, सर्दियों में वापस मैदान की ओर।
प्र. कर्तन-दहन कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर: आदिकालीन निर्वाह (स्थानांतरणशील) कृषि को कर्तन-दहन कृषि कहते हैं, क्योंकि इसमें वनस्पति को जलाकर साफ किया जाता है और राख से भूमि को उर्वर बनाया जाता है।
प्र. अंगूरोत्पादन क्या है?
उत्तर: अंगूरोत्पादन अंगूर की कृषि है, जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र की विशेषता है; अच्छे अंगूरों से उच्च गुणवत्ता की मदिरा और निम्न श्रेणी के अंगूरों से मुनक्का-किशमिश बनाई जाती है।
प्र. ट्रक कृषि नाम कैसे पड़ा?
उत्तर: फार्म व बाज़ार के बीच की दूरी उतनी ही रखी जाती है जितनी एक ट्रक रात भर में तय कर सके, इसी आधार पर इसका नाम ट्रक कृषि पड़ा।
प्र. कोलखोज़ क्या है?
उत्तर: कोलखोज़ पूर्व सोवियत संघ में शुरू हुई सामूहिक कृषि का मॉडल है, जिसमें उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सामाजिक व श्रम सामूहिक होता है।
प्र. विवृत (धरातलीय) खनन किसे कहते हैं?
उत्तर: जब खनिज धरातल के निकट हों तो सतह की परतें हटाकर सीधे खनिज तक पहुँचने की विधि को विवृत या धरातलीय खनन कहते हैं; यह खनन का सबसे सस्ता तरीका है।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. भोजन संग्रह के दो प्रमुख वैश्विक क्षेत्र बताएँ, उदाहरण सहित।
उत्तर: भोजन संग्रह दो प्रकार के अक्षांश क्षेत्रों में किया जाता है: (क) उच्च अक्षांश क्षेत्र, जैसे उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया व दक्षिणी चिली, और (ख) निम्न अक्षांश क्षेत्र, जैसे अमेजन बेसिन, उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया व दक्षिण-पूर्वी एशिया का आंतरिक भाग।
प्र. चलवासी पशुचारण की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर: यह एक प्राचीन जीवन-निर्वाह व्यवसाय है जिसमें पशुचारक भोजन, वस्त्र, शरण, औजार व यातायात के लिए पूरी तरह पशुओं पर निर्भर रहते हैं। हर समूह का एक निश्चित परंपरागत चरागाह क्षेत्र होता है, फिर भी वे पानी व चरागाह की उपलब्धता के अनुसार स्थान बदलते रहते हैं।
प्र. चलवासी पशुचारण के घटने के दो कारण बताएँ।
उत्तर: किताब के अनुसार दो कारण हैं: (क) विभिन्न देशों द्वारा राजनीतिक सीमाओं का अधिरोपण, जिससे पशुचारकों की परंपरागत आवाजाही सीमित हुई, और (ख) विभिन्न देशों द्वारा नई बस्तियों की योजना बनाना, जिससे चरागाह क्षेत्र कम हुए।
प्र. आदिकालीन निर्वाह कृषि और गहन निर्वाह कृषि में कोई दो अंतर बताएँ।
उत्तर: आदिकालीन निर्वाह कृषि में बहुत छोटे खेत व पुराने औजार (लकड़ी, कुदाली) प्रयोग होते हैं तथा उर्वरता घटने पर किसान नए क्षेत्र में स्थानांतरित हो जाता है; जबकि गहन निर्वाह कृषि घनी बसी मानसून एशिया में स्थायी छोटे खेतों पर होती है, जहाँ गोबर/हरी खाद से भूमि की उर्वरता निरंतर बनाए रखी जाती है और प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादन कहीं अधिक होता है।
प्र. रोपण कृषि की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर: इसमें कृषि क्षेत्र का आकार बहुत विस्तृत होता है और अधिक पूँजी निवेश, उच्च प्रबंध व वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग होता है। यह एक-फसली (एकल फसल) कृषि है, जिसमें सस्ते श्रम व विकसित परिवहन तंत्र से बागान को बाज़ार से सुचारु रूप से जोड़ा जाता है।
प्र. सहकारी कृषि और सामूहिक कृषि में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: सहकारी कृषि में किसान स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाते हैं, पर हर किसान का व्यक्तिगत फार्म अक्षुण्ण (बरकरार) रहता है; जबकि सामूहिक कृषि (कोलखोज़) में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सामाजिक होता है और किसान अपनी भूमि, पशुधन व श्रम मिला देते हैं, केवल दैनिक आवश्यकता के लिए छोटा निजी भूखंड रख सकते हैं।
प्र. खनन को प्रभावित करने वाले भौतिक कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: खनन की लाभप्रदता तय करने वाले भौतिक कारकों में खनिज निक्षेप का आकार, उसकी श्रेणी (शुद्धता) और निक्षेप की उपस्थिति की अवस्था (यानी वह कितना गहरा या सुलभ है) शामिल हैं।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. चावल-प्रधान और चावल-रहित गहन निर्वाह कृषि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर: चावल-प्रधान गहन निर्वाह कृषि: (क) चावल मुख्य फसल है, (ख) उच्च जनसंख्या घनत्व के कारण खेत छोटे होते हैं, (ग) परिवार का हर सदस्य कार्य करता है, यंत्रों के बजाय मानव श्रम का अधिक महत्व है, (घ) गोबर व हरी खाद से उर्वरता बनी रहती है, प्रति इकाई उत्पादन अधिक पर प्रति कृषक उत्पादन कम है।
चावल-रहित गहन निर्वाह कृषि: (क) उच्चावच, जलवायु व मृदा की भिन्नता के कारण धान संभव नहीं, (ख) उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरी कोरिया-जापान में गेहूँ, सोयाबीन, जौ व सोरगम बोए जाते हैं, (ग) भारत में सिंधु-गंगा मैदान के पश्चिमी भाग में गेहूँ व शुष्क भागों में ज्वार-बाजरा, (घ) अधिकतर विशेषताएँ चावल-प्रधान कृषि जैसी ही हैं, केवल अंतर यह कि इसमें सिंचाई का प्रयोग किया जाता है।
प्र. रोपण कृषि में विभिन्न यूरोपीय उपनिवेशवादियों द्वारा लगाई गई फसलों का वर्णन करें (देश-फसल जोड़े सहित)।
उत्तर: (क) फ्रांसीसियों ने पश्चिम अफ्रीका में कॉफी व कोको के बागान लगाए। (ख) ब्रिटिशों ने भारत व श्रीलंका में चाय, मलेशिया में रबड़ तथा वेस्ट इंडीज में गन्ना व केले के बाग विकसित किए। (ग) स्पेन व अमेरिकावासियों ने फिलीपींस में नारियल व गन्ने के बागान लगाए। (घ) डचों (हॉलैंडवासियों) का इंडोनेशिया में गन्ने की कृषि पर एक समय एकाधिकार था। ब्राजील में कुछ कॉफी के बागान (फेज़ेंडा) अब भी यूरोपीय नियंत्रण में हैं, यद्यपि आज अधिकतर बागानों का स्वामित्व संबंधित देशों की सरकार या नागरिकों के पास है।
प्र. विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि की मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर: (क) यह मध्य अक्षांशों के अर्ध-शुष्क आंतरिक भागों में की जाती है। (ख) मुख्य फसल गेहूँ है, यद्यपि मक्का, जौ, राई व जई भी बोई जाती हैं। (ग) खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है, इसलिए जुताई से कटाई तक सभी कार्य यंत्रों द्वारा होते हैं। (घ) इसमें प्रति एकड़ उत्पादन कम पर यंत्रीकरण के कारण प्रति व्यक्ति उत्पादन अधिक होता है। क्षेत्र: यूरेशियाई स्टेपीज़, प्रेयरीज़ (कनाडा-अमेरिका), पंपास (अर्जेंटीना), वेल्ड्स (दक्षिण अफ्रीका), डाउंस (ऑस्ट्रेलिया), केंटरबरी मैदान (न्यूजीलैंड)।
प्र. मिश्रित कृषि की विशेषताएँ स्पष्ट करें।
उत्तर: (क) यह विश्व के अत्यधिक विकसित भागों में होती है: उत्तर-पश्चिमी यूरोप, पूर्वी उत्तरी अमेरिका, यूरेशिया के कुछ भाग व दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण क्षेत्र। (ख) खेत मध्यम आकार के होते हैं; फसलें गेहूँ, जौ, राई, जई, मक्का, चारा फसलें व कंद-मूल हैं, जिनमें चारा फसलें अहम हैं। (ग) फसल उत्पादन व पशुपालन (मवेशी, भेड़, सुअर, कुक्कुट) को समान महत्व दिया जाता है। (घ) शस्यावर्तन व अंतःफसली कृषि से उर्वरता बनी रहती है, और इसमें यंत्र, भवन, रासायनिक व हरी खाद पर भारी पूँजी व कृषक-कौशल दोनों चाहिए।
प्र. डेरी कृषि नगरीय व औद्योगिक केंद्रों के समीप क्यों की जाती है? डेरी कृषि की विशेषताएँ भी बताइए।
उत्तर: (क) डेरी कृषि का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केंद्रों के समीप किया जाता है, क्योंकि ये क्षेत्र ताज़ा दूध एवं अन्य डेरी उत्पादों के अच्छे बाज़ार होते हैं। (ख) विकसित यातायात के साधन, प्रशीतकों का उपयोग और पास्तेरीकरण की सुविधा के कारण अब विभिन्न डेरी उत्पादों को अधिक समय तक रखा जा सकता है। (ग) डेरी व्यवसाय दुधारु पशुओं के पालन-पोषण का सर्वाधिक उन्नत एवं दक्ष प्रकार है; इसमें पूँजी की अधिक आवश्यकता होती है (पशुओं के लिए छप्पर, घास के भंडार, दुग्ध उत्पादन के यंत्र)। (घ) इसमें गहन श्रम की आवश्यकता होती है, क्योंकि फसलों की तरह इसमें कोई अंतराल नहीं होता; पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन एवं पशु चिकित्सा पर भी अधिक ध्यान दिया जाता है।
प्र. भूमध्यसागरीय कृषि क्षेत्र व उसके प्रमुख उत्पादों का वर्णन करें।
उत्तर: (क) यह भूमध्यसागर के दोनों ओर, दक्षिणी यूरोप व उत्तरी अफ्रीका (ट्यूनीशिया से अटलांटिक तट तक), तथा दक्षिणी कैलिफोर्निया, मध्यवर्ती चिली, दक्षिण-पश्चिमी दक्षिण अफ्रीका व दक्षिणी-दक्षिण-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में फैली है। (ख) खट्टे फलों की एक महत्वपूर्ण आपूर्ति करती है। (ग) अंगूर की कृषि इस क्षेत्र की विशेषता है: उच्च गुणवत्ता की मदिरा तथा निम्न श्रेणी के अंगूरों से मुनक्का-किशमिश बनती है; अंजीर व जैतून भी होते हैं। (घ) इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि शीत ऋतु में, जब यूरोप व अमेरिका में फल-सब्जियों की माँग सबसे अधिक होती है, तब इसी क्षेत्र से आपूर्ति की जाती है।
प्र. धरातलीय (विवृत) व भूमिगत (कूपकी) खनन में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर: (क) धरातलीय (विवृत) खनन तब होता है जब खनिज सतह के निकट हो; ऊपर की परतें हटाकर सीधे खनिज तक पहुँचा जाता है। (ख) यह सबसे सस्ता तरीका है: सुरक्षा व उपकरणों पर खर्च अपेक्षाकृत कम है और उत्पादन शीघ्र व अधिक होता है। (ग) भूमिगत (कूपकी) खनन तब प्रयोग होता है जब अयस्क धरातल से बहुत नीचे हो; इसमें लंबवत् कूपक बनाकर भूमिगत गैलरियों से खनिज तक पहुँचा जाता है, जिसके लिए विशेष लिफ्ट, बेधक, ढुलाई वाहन व वायु संचार प्रणाली चाहिए। (घ) यह विधि जोखिम भरी है: जहरीली गैसों, आग व बाढ़ से दुर्घटना का भय रहता है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में विस्तार से अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर: चलवासी पशुचारण:
– एक प्राचीन जीवन-निर्वाह व्यवसाय है, जिसमें पशुचारक भोजन, वस्त्र, शरण, औजार व यातायात के लिए पशुओं पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं।
– पशुचारक अपने पशुओं के साथ पानी व चरागाह की उपलब्धता के अनुसार स्थान बदलते रहते हैं; हर समूह का अपना परंपरागत चरागाह क्षेत्र होता है।
– क्षेत्रीय पशु भिन्न होते हैं: उष्णकटिबंधीय अफ्रीका में गाय-बैल, सहारा-एशियाई मरुस्थलों में भेड़-बकरी-ऊँट, तिब्बत-एंडीज में यॉक-लामा, आर्कटिक में रेंडियर।
– राजनीतिक सीमाओं के अधिरोपण व नई बस्तियों की योजना से इसकी संख्या व क्षेत्र घट रहे हैं।
वाणिज्य पशुधन पालन:
– अधिक व्यवस्थित व पूँजी-प्रधान है, पश्चिमी संस्कृति से जुड़ा है, और स्थायी बाड़े लगे फार्मों पर होता है।
– एक विशिष्ट गतिविधि है: प्रायः एक ही प्रकार का पशु (भेड़, बकरी, गाय-बैल, घोड़ा) पाला जाता है, और पशुओं की संख्या चरागाह की वहन क्षमता के अनुसार रखी जाती है।
– उत्पाद (मांस, ऊन, खाल) वैज्ञानिक ढंग से संसाधित व निर्यात किए जाते हैं; प्रजनन, जननिक सुधार व रोग नियंत्रण पर ज़ोर रहता है।
– प्रमुख देश: न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, उरुग्वे व संयुक्त राज्य अमेरिका।
प्र. निर्वाह कृषि के प्रकारों (आदिकालीन व गहन) का वर्णन उदाहरण सहित करें।
उत्तर: आदिकालीन निर्वाह कृषि (स्थानांतरणशील/कर्तन-दहन कृषि):
– उष्णकटिबंधीय जनजातियाँ अफ्रीका, दक्षिण व मध्य अमेरिका तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया में करती हैं।
– वनस्पति जलाकर साफ की जाती है, राख उर्वरक का कार्य करती है; छोटे खेत, पुराने औजार (लकड़ी, कुदाली)।
– 3-5 वर्ष बाद उर्वरता घटने पर किसान नया क्षेत्र चुनता है; झूम-चक्र छोटा होना समस्या है।
– क्षेत्रीय नाम: झूमिंग (पूर्वोत्तर भारत), मिल्पा (मध्य अमेरिका-मैक्सिको), लादांग (मलेशिया-इंडोनेशिया)।
गहन निर्वाह कृषि (दो प्रकार):
– मानसून एशिया के घने बसे क्षेत्रों में होती है।
– चावल-प्रधान: छोटे खेत, पारिवारिक श्रम, गोबर-हरी खाद से उर्वरता, प्रति इकाई उत्पादन अधिक पर प्रति कृषक कम।
– चावल-रहित: जहाँ धान संभव नहीं (उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तर कोरिया-जापान; भारत में सिंधु-गंगा के पश्चिमी भाग व शुष्क भाग), वहाँ गेहूँ, सोयाबीन, जौ, सोरगम व ज्वार-बाजरा बोए जाते हैं, केवल सिंचाई का अतिरिक्त प्रयोग होता है।
प्र. बाज़ारीय सब्जी कृषि, ट्रक कृषि व कारखाना कृषि में अंतर स्पष्ट करते हुए इनकी विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर: बाज़ारीय सब्जी कृषि व उद्यान कृषि:
– उच्च मूल्य वाली फसलें (सब्जी, फल, फूल) केवल नगरीय बाज़ार के लिए उगाई जाती हैं।
– खेत छोटे होते हैं, उच्च आय वाले नगरीय उपभोक्ताओं तक अच्छे परिवहन साधन चाहिए।
– सिंचाई, उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशी, ग्रीन हाउस व कृत्रिम ताप के प्रयोग से यह श्रम व पूँजी दोनों की दृष्टि से भारी है।
– नीदरलैंड पुष्प कृषि (विशेषतः ट्यूलिप) में विशेषज्ञता रखता है।
ट्रक कृषि: बाज़ारीय सब्जी कृषि का वह रूप है जिसमें किसान केवल सब्जियाँ उगाते हैं; नाम फार्म-बाज़ार दूरी (एक ट्रक द्वारा रात भर में तय दूरी) से पड़ा।
कारखाना कृषि: पश्चिमी यूरोप व उत्तरी अमेरिका के औद्योगिक क्षेत्रों में होती है; कुक्कुट व मवेशी जैसे पशुधन को बाड़ों में रखकर तैयार भोजन दिया जाता है व रोग पर निगरानी रखी जाती है। भवन, यंत्र, पशु चिकित्सा व ताप-प्रकाश पर भारी पूँजी चाहिए, तथा नस्ल चयन व वैज्ञानिक प्रजनन पर ज़ोर रहता है।
प्र. कृषि संगठन के आधार पर सहकारी व सामूहिक कृषि की उत्पत्ति, उद्देश्य व कार्यप्रणाली की विवेचना करें।
उत्तर: सहकारी कृषि:
– कृषकों का एक समूह स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर अधिक लाभ के लिए कृषि करता है; प्रत्येक किसान का व्यक्तिगत फार्म अक्षुण्ण रहता है।
– सहकारी संस्था निवेश खरीदने, उचित मूल्य पर उपज बेचने व सस्ती दरों पर प्रसंस्करण में सहायता करती है।
– यह आंदोलन लगभग एक सदी पूर्व शुरू हुआ और डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन व इटली में सफल रहा; सर्वाधिक सफलता डेनमार्क में मिली, जहाँ लगभग हर किसान इसका सदस्य है।
सामूहिक कृषि (कोलखोज़):
– इसका आधारभूत सिद्धांत उत्पादन के साधनों का सामाजिक स्वामित्व व सामूहिक श्रम है।
– यह पूर्व सोवियत संघ में शुरू हुई, जिसका उद्देश्य कृषि की पुरानी अकुशल विधियों को सुधारना, उत्पादन बढ़ाना व आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था।
– किसान अपनी भूमि, पशुधन व श्रम मिला देते थे, यद्यपि दैनिक आवश्यकताओं के लिए एक छोटा निजी भूखंड रखने की अनुमति थी। इस प्रकार यह सहकारी कृषि से मौलिक रूप से भिन्न है, जहाँ व्यक्तिगत स्वामित्व बना रहता है।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक गद्यांश के अनुसार आर्थिक क्रियाओं को कितने वर्गों में बाँटा गया है, नाम सहित बताएँ।
उत्तर: चार वर्गों में: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुर्थ क्रियाएँ।
(ख) 1 अंक गद्यांश के अनुसार प्राथमिक कार्यकलाप करने वाले लोगों को क्या कहा जाता है?
उत्तर: लाल कॉलर श्रमिक, क्योंकि उनका कार्यक्षेत्र घर से बाहर होता है।
(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर स्पष्ट करें कि प्राथमिक क्रियाएँ पर्यावरण पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर क्यों मानी जाती हैं।
उत्तर: क्योंकि इनमें पृथ्वी के संसाधनों जैसे भूमि, जल, वनस्पति, भवन निर्माण सामग्री और खनिजों का सीधे उपयोग होता है, इसीलिए आखेट, भोजन संग्रह, पशुचारण, मत्स्यन, वानिकी, कृषि व खनन जैसी सभी क्रियाएँ प्राथमिक क्रियाएँ मानी जाती हैं।
(क) 1 अंक गद्यांश के अनुसार खनिजों की खोज के इतिहास में मानव विकास के कौन-कौन से युग बताए गए हैं?
उत्तर: ताम्र युग, कांस्य युग और लौह युग।
(ख) 1 अंक गद्यांश के अनुसार खनन के वास्तविक विकास के लिए कौन सी घटना उत्तरदायी रही?
उत्तर: औद्योगिक क्रांति।
(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर खनन कार्य की लाभप्रदता तय करने वाले दो प्रकार के कारकों का वर्णन करें।
उत्तर: भौतिक कारक (खनिज निक्षेप का आकार, श्रेणी व उपस्थिति की अवस्था) और आर्थिक कारक (खनिज की माँग, तकनीकी ज्ञान व उसका उपयोग, अवसंरचना हेतु उपलब्ध पूँजी, तथा यातायात व श्रम पर होने वाला व्यय)।
6 मानचित्र कार्य
दिए गए रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित को उपयुक्त चिह्नों से अंकित कीजिए और उनके नाम लिखिए:
- भोजन संग्रह का एक क्षेत्र 1 अंक
- चलवासी पशुचारण का एक क्षेत्र 1 अंक
- वाणिज्य पशुधन पालन का एक क्षेत्र 1 अंक
- विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि का एक क्षेत्र 1 अंक
- मिश्रित कृषि का एक क्षेत्र 1 अंक
उत्तर-संकेत:
- भोजन संग्रह का एक क्षेत्र: इनमें से कोई एक: उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया, दक्षिणी चिली (उच्च अक्षांश); अमेजन बेसिन, उष्णकटिबंधीय अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया का आंतरिक भाग (निम्न अक्षांश)। किताब का चित्र 4.2।
- चलवासी पशुचारण का एक क्षेत्र: इनमें से कोई एक: उत्तरी अफ्रीका के अटलांटिक तट से अरब प्रायद्वीप होते हुए मंगोलिया एवं मध्य चीन तक का प्रमुख क्षेत्र; यूरोप तथा एशिया का टुंड्रा प्रदेश; दक्षिणी-पश्चिमी अफ्रीका; मेडागास्कर द्वीप। किताब का चित्र 4.4। (दृष्टिबाधित परीक्षार्थी: एशिया का चलवासी पशुचारण का एक क्षेत्र, जैसे मंगोलिया।)
- वाणिज्य पशुधन पालन का एक क्षेत्र: इनमें से कोई एक: न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, उरुग्वे, संयुक्त राज्य अमेरिका। किताब का चित्र 4.6।
- विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि का एक क्षेत्र: इनमें से कोई एक: यूरेशिया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेंटीना के पंपास, दक्षिण अफ्रीका के वेल्ड्स, ऑस्ट्रेलिया के डाउंस, न्यूजीलैंड का केंटरबरी मैदान। किताब का चित्र 4.12।
- मिश्रित कृषि का एक क्षेत्र: इनमें से कोई एक: उत्तर-पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका का पूर्वी भाग, यूरेशिया के कुछ भाग, दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश वाले भाग। किताब का चित्र 4.14।