कक्षा 12 भूगोल अध्याय 20 शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: तीन सामान्य रचना-नियम, हर आरेख/मानचित्र का एक-वाक्य परिचय, तीनों ज़रूरी सूत्र (वृत्त आरेख का कोण, वर्णमात्री मानचित्र का अंतराल, क्षेपक), और चारों हल किए उदाहरण एक-नज़र में। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 तीन सामान्य रचना-नियम

  • उपयुक्त विधि का चयन: समय-क्रम आंकड़े (तापमान/जनसंख्या वृद्धि) → रेखा ग्राफ़; वर्षा/उत्पादन → दंड आरेख; वितरण (मानव/पशुधन) → बिंदु मानचित्र; घनत्व → वर्णमात्री मानचित्र।
  • उपयुक्त मापनी का चयन: न बहुत बड़ी, न बहुत छोटी, पूरे आंकड़ा-समूह को ध्यान में रखकर।
  • अभिकल्पना: शीर्षक/उपशीर्षक/संदर्भ-वर्ष सबसे ऊपर बीच में; निर्देशिका नीचे बाईं या दाईं ओर; दिशा-प्रतीक (उत्तर) मानचित्र पर उचित स्थान पर।
याद कर लेंआरेखों का त्रि-स्तरीय वर्गीकरण

एक-आयामी: रेखा ग्राफ़, बहुरेखाचित्र, दंड आरेख, आयत चित्र, आयु-लिंग पिरामिड। द्वि-आयामी: वृत्त आरेख, आयताकार आरेख। त्रि-आयामी: घन और गोलाकार आरेख।

किताब की अपनी सीमा, ध्यान दें

अध्याय की भूमिका पाँच मुख्य प्रकार सूचीबद्ध करती है: रेखा ग्राफ़, दंड आरेख, वृत्त आरेख, पवन आरेख और तारा आरेख, प्रवाह संचित्र। परंतु आगे केवल चार (रेखा ग्राफ़, दंड आरेख, वृत्त आरेख, प्रवाह संचित्र) और तीन थिमैटिक मानचित्रों (बिंदुकित, वर्णमात्री, सममान रेखा) की रचना-विधि दी गई है। पवन आरेख और तारा आरेख को दोनों संस्करणों में केवल नामित किया गया है, इसकी रचना-विधि अध्याय में कहीं नहीं दी गई, इसलिए इसे बनाने का तरीका मत ढूँढिए, किताब में है ही नहीं।

2 रेखा ग्राफ़ और बहुरेखाचित्र

रेखा ग्राफ़ समय-क्रम आंकड़ों (तापमान, वर्षा, जनसंख्या वृद्धि, जन्म-मृत्यु दर) के लिए बनता है। रचना: आंकड़े पूर्णांक में बदलना → X-Y अक्ष खींचना (समय X पर, मूल्य Y पर) → उपयुक्त मापनी चुनना (ऋणात्मक मान भी दिखाना) → बिंदु अंकित कर हाथ से रेखा जोड़ना। बहुरेखाचित्र इसी का विस्तार है, जिसमें 2+ चरों की तुलना अलग-अलग रेखा-प्रतिरूप (सीधी/टूटी/बिंदु रेखा या रंग) से की जाती है।

तालिका 3.1 (भारत जनसंख्या वृद्धि दर, %) 1911 1931 1961 1991 2011
वृद्धि दर 0.56 1.04 1.96 2.14 1.79

3 दंड आरेख: साधारण, संयुक्त, बहुदंड, मिश्रित

तीन नियम: सभी दंडों की चौड़ाई बराबर; बराबर अंतराल पर; रंग/प्रतिरूप से छायांकित। साधारण दंड आरेख एक चर की तत्काल तुलना के लिए (उदाहरण 3.3, थिरुवनंतपुरम वर्षा)। रेखा+दंड संयुक्त आरेख दो निकट-संबंधित आंकड़ों (तापमान+वर्षा, तालिका 3.4) के लिए, Y अक्ष के दोनों तरफ़ अलग मापनी से। बहुदंड आरेख कई चर एक साथ, अलग-अलग सटे दंडों में (तालिका 3.5, साक्षरता दर)। मिश्रित/यौगिक दंड आरेख में विभिन्न चर एक ही दंड में अलग-अलग आयतों में बँटते हैं (तालिका 3.6, बिजली उत्पादन)।

4 वृत्त आरेख (विभाजित वृत्त आरेख): कोण-सूत्र याद रखें

सूत्र, ज़रूर याद करेंवृत्त आरेख का कोण

कोण = (दिए हुए राज्य/प्रदेश का मान ÷ सभी राज्यों/प्रदेशों का कुल मान) × 360। प्रतिशत रूप में हो तो: कोण = प्रतिशत × 360/100 = प्रतिशत × 3.6।

तालिका 3.7 (भारतीय निर्यात 2010-11) % गणना कोण
यूरोप 20.2 20.2×3.6 73°
अफ्रीका 6.5 6.5×3.6 23°
अमेरिका 14.8 14.8×3.6 53°
एशिया व ASEAN 56.2 56.2×3.6=202.32 203°*
अन्य 2.3 2.3×3.6 8°
कुल 100 360°

*202.32 सामान्य नियम से 202° बनता, पर किताब इसे 203° पूर्णांकित करती है ताकि पाँचों कोणों का योग ठीक 360° हो, यह किताब का अपना समायोजन है, सामान्य पूर्णांकन-भूल नहीं।

रचना: उपयुक्त त्रिज्या (3, 4 या 5 सेमी) चुनना → केंद्र से चाप तक त्रिज्या-रेखा खींचना → सबसे छोटे कोण से दक्षिणावर्त चढ़ते क्रम में कोण मापना (बड़े कोण से शुरू करने पर त्रुटि-संचयन होता है) → शीर्षक-उपशीर्षक-सूचिका से पूर्ण करना।

5 प्रवाह संचित्र (गतिक मानचित्र)

वस्तुओं/लोगों के उत्पत्ति व उद्देश्य स्थानों के बीच प्रवाह दर्शाने वाला, आलेख और मानचित्र का मिश्रण। समानुपाती चौड़ाई की रेखाओं (पट्टियों) से बनता है। तीन आवश्यकताएँ: मार्ग मानचित्र, उत्पत्ति-बिंदु व दिशा सहित आंकड़ा, उपयुक्त मापनी।

ध्यान दें

NCERT की तालिका 3.8 (दिल्ली रेलमार्ग, उदाहरण 3.10) में पंक्ति 10 और पंक्ति 11 दोनों का नाम ‘पुरानी दिल्ली-सीलमपुर’ छपा है (क्रमशः 33 और 12 रेलगाड़ियाँ) और पंक्ति 12 का ‘सीलमपुर-नंदनगरी’ (21)। तालिका को पुस्तक में जैसा छपा है वैसा ही पढ़िए। मापनी उदाहरण: 1 सेमी = 50 रेलगाड़ी चुनने पर अधिकतम (50) = 10 मिमी पट्टी और न्यूनतम (6) = 1.2 मिमी पट्टी (6/50×10)।

6 थिमैटिक मानचित्र: तीन मात्रात्मक (सांख्यिकीय) मानचित्र

मात्रात्मक (सांख्यिकीय) मानचित्र मापनीय विविधता दर्शाते हैं; अमात्रात्मक (विश्लेषणात्मक) मानचित्र अपरिमेय विशेषताएँ। इस अध्याय में तीन मात्रात्मक (सांख्यिकीय) मानचित्रों की रचना-विधि पढ़ाई गई है (पुस्तक इन्हें यहाँ “विश्लेषणात्मक मानचित्र” भी कहती है):

बिंदुकित मानचित्र

  • वितरण दर्शाने हेतु (जनसंख्या, पशु, फ़सल)
  • हर बिंदु का आकार समान
  • महाराष्ट्र: 9,67,52,247÷1,00,000=967.52→968 बिंदु (भिन्नात्मक भाग >0.5)

वर्णमात्री मानचित्र

  • प्रशासकीय इकाई के आंकड़े (घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात)
  • 5 श्रेणियाँ: अति उच्च से अति निम्न
  • अंतराल = परास/5
सूत्र, ज़रूर याद करेंवर्णमात्री मानचित्र का अंतराल

अंतराल = परास ÷ 5, जहाँ परास = अधिकतम मान − न्यूनतम मान। उदाहरण 3.13 (साक्षरता दर 2001): न्यूनतम बिहार 47.0, अधिकतम केरल (पूर्णांकित) 91.0 → परास = 44.0 → अंतराल = 44.0/5 = 8.8 → पूर्णांकित 9.0। पाँच श्रेणियाँ: 47-56 अति निम्न, 56-65 निम्न, 65-74 मध्यम, 74-83 उच्च, 83-92 अति उच्च।

7 सममान रेखा मानचित्र और क्षेपक

आइसोप्लेथ = आइसो (बराबर) + प्लेथ (रेखाएँ)। समान मान के स्थानों को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा। नामित उदाहरण: समताप, समवायुदाब, समवर्षा, सममेघ, आइसोहेल, समोच्च, सम गहराई, समलवणता रेखा। नियम: सममान रेखाएँ कभी नहीं कटतीं; अंतराल 5/10/20 आदर्श; मान रेखा पर या तोड़कर लिखा जाता है।

सूत्र, ज़रूर याद करेंक्षेपक

सममान रेखा का ठीक बिंदु = (दो बिंदुओं के बीच की दूरी ÷ दोनों मानों के बीच अंतर) × अंतराल। उदाहरण: 28°C व 33°C (10 मिमी दूरी, अंतर 5) के बीच 30°C रेखा: 28°C से (10/5)×2=4 मिमी दूर, 33°C से (10/5)×3=6 मिमी पहले।

परीक्षा से पहले स्वयं जाँचें
  • क्या मैं तीनों सूत्र (वृत्त आरेख का कोण, वर्णमात्री का अंतराल, क्षेपक) बिना देखे लिख सकता हूँ?
  • क्या मैं बता सकता हूँ कि किस प्रकार के आंकड़े के लिए कौन-सा आरेख/मानचित्र सबसे उपयुक्त है?
  • क्या मैं तालिका 3.7 के सभी पाँच कोण दोबारा परिकलित कर सकता हूँ, 203° के समायोजन सहित?
  • क्या मैं महाराष्ट्र के 968 बिंदु और साक्षरता की पाँच श्रेणियाँ फिर से निकाल सकता हूँ?
  • क्या मैं याद रख सकता हूँ कि पवन/तारा आरेख की रचना-विधि इस अध्याय में नहीं दी गई है?
त्वरित पुनरावलोकन, परीक्षा की रात यह जरूर पढ़ें
  • तीन सामान्य नियम: उपयुक्त विधि, उपयुक्त मापनी, अभिकल्पना (शीर्षक/निर्देशिका/दिशा)
  • आरेख वर्गीकरण: एक-आयामी (रेखा ग्राफ़, दंड, पिरामिड), द्वि-आयामी (वृत्त, आयत), त्रि-आयामी (घन, गोला)
  • रेखा ग्राफ़ = समय-क्रम; दंड आरेख (साधारण/संयुक्त/बहुदंड/मिश्रित) = वर्षा-उत्पादन-तुलना
  • वृत्त आरेख कोण = मान/कुल×360 (% होने पर ×3.6); छोटे कोण से चढ़ते क्रम में मापना
  • प्रवाह संचित्र = गतिक मानचित्र, समानुपाती पट्टी-चौड़ाई से बनता है
  • बिंदुकित (वितरण), वर्णमात्री (घनत्व/दर, अंतराल=परास/5), सममान रेखा (प्राकृतिक निरंतरता, क्षेपक सूत्र)
  • पवन आरेख और तारा आरेख, नाम है पर रचना-विधि नहीं