कक्षा 12 भूगोल अध्याय 21 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. ‘स्थानिक’ शब्द किस शब्द से बना है?

उत्तर: ‘स्थानिक’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘स्थान’ से हुई है।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. GIS का पूर्ण रूप एक पंक्ति में लिखिए।

उत्तर: GIS का पूर्ण रूप भौगोलिक सूचना तंत्र है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. GIS किन दो प्रणालियों का सम्मिश्रण है?

उत्तर: GIS कंप्यूटर सहायक मानचित्र कला और सूचनाधार प्रबंधन तंत्र (DBMS) का सम्मिश्रण है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. स्थानिक आंकड़ों को प्रदर्शित करने वाले दो फॉर्मेट कौन-से हैं?

उत्तर: स्थानिक आंकड़ों को चित्ररेखापुँज (रैस्टर) और सदिश (वेक्टर) फॉर्मेटों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. क्रमवीक्षक में प्रयुक्त CCD का पूर्ण रूप बताइए।

उत्तर: CCD का पूर्ण रूप आवेशित युग्मित साधन है।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. GIS में स्थानिक आंकड़ों के निवेश की दो सर्वाधिक साधारण विधियाँ बताइए।

उत्तर: अंकरूपण और क्रमवीक्षण, GIS में स्थानिक आंकड़ों के निवेश की दो सर्वाधिक साधारण विधियाँ हैं।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. बफ़र प्रचालन पर आधारित विश्लेषण को क्या कहा जाता है?

उत्तर: बफ़र प्रचालन पर आधारित विश्लेषण को सामीप्य विश्लेषण कहा जाता है।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. ‘वीडिंग’ एल्गोरिथ्म का प्रयोग किसलिए किया जाता है?

उत्तर: जहाँ अतिरिक्त निर्देशांक किसी रेखा को परिभाषित करते हैं, उन्हें हटाने के लिए ‘वीडिंग’ एल्गोरिथ्म का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 9 (1 अंक)

प्र. GIS के पाँच घटकों के नाम लिखिए।

उत्तर: GIS के पाँच घटक हैं: हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, आंकड़े, लोग और प्रक्रिया।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?

उत्तर: स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी का संबंध स्थानिक सूचना के संग्रहण, भंडारण, पुनर्प्राप्ति, प्रदर्शन, हेरफेर, प्रबंधन और विश्लेषण में प्रौद्योगिक निवेश के प्रयोग से है। यह सुदूर-संवेदन, वैश्विक स्थिति-निर्धारण तंत्र (GPS), भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS), आंकिक मानचित्र कला और सूचनाधार प्रबंध प्रणालियों का एक सम्मिश्रण है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. चित्ररेखापुँज (रैस्टर) और सदिश (वेक्टर) आंकड़ा मॉडल में मुख्य अंतर बताइए।

उत्तर: रैस्टर आंकड़े वस्तु का प्रदर्शन वर्गों (सेल) के जाल के रूप में करते हैं, जहाँ हर सेल को एक मूल्य दिया जाता है। वेक्टर आंकड़े वस्तु का प्रदर्शन विशिष्ट बिंदुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में करते हैं, जिनके निर्देशांक (X,Y अथवा X,Y,Z) भंडारित होते हैं।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. मानचित्रों की तुलना में GIS के दो लाभ बताइए।

उत्तर: GIS में आंकड़ा भंडारण और प्रदर्शन अलग-अलग होते हैं, इसलिए प्रयोक्ता प्रदर्शित स्थानिक लक्षणों के बारे में प्रश्न पूछकर संबंधित गुण न्यास निकाल सकते हैं। साथ ही, गुण न्यास की जाँच या विश्लेषण करके नए मानचित्र भी आलेखित किए जा सकते हैं।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. भौगोलिक सूचना तंत्र के महत्वपूर्ण घटक क्या हैं?

उत्तर: GIS के पाँच महत्वपूर्ण घटक हैं: हार्डवेयर (प्रक्रमण-भंडार-प्रदर्शन-निवेश/बहिर्वेश उपतंत्र), सॉफ़्टवेयर (प्रविष्टि-विश्लेषण-प्रदर्शन के माड्यूल्स), आंकड़े (स्थानिक व तालिका रूपी, GIS की रीढ़), लोग (हार्डवेयर इंजीनियरों से नीति-निर्माताओं तक), और प्रक्रिया (प्रत्यानयन, निवेश, संचय, प्रबंध, रूपांतरण, विश्लेषण, बहिर्वेश)।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. GIS के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि क्या है?

उत्तर: GIS का कोर तीन विधियों से बनाया जा सकता है: आंकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक रूप में आंकड़े प्राप्त करके, विद्यमान अनुरूप (कागज़ी) आंकड़ों का अंकीकरण करके, या भौगोलिक सत्ताओं का स्वयं सर्वेक्षण करके।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. अधिचित्रण विश्लेषण क्या है?

उत्तर: अधिचित्रण विश्लेषण GIS का प्रमाण चिह्न (हॉलमार्क) है, जिसमें उसी क्षेत्र के मानचित्रों के दो या अधिक विषयक स्तरों को अधिचित्रित (एक-दूसरे पर रखकर) करके एक नया मानचित्र स्तर प्राप्त किया जाता है। यह चालनी मानचित्रण जैसा प्रचालन है।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. GIS में स्थानिक आंकड़ों के प्रग्रहण के दौरान होने वाली त्रुटियों के तीन प्रकार बताइए।

उत्तर: स्थानिक आंकड़ों में तीन प्रकार की त्रुटियाँ होती हैं: (1) आंकड़े अपूर्ण अथवा दोहरे होना, (2) आंकड़े ग़लत मापनी पर होना, और (3) आंकड़े विरूपित होना, जैसे लैंस-विरूपण या मानचित्र के मुड़ने से।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. क्रमवीक्षकों के दो आधारभूत प्रकार बताइए।

उत्तर: क्रमवीक्षकों के दो आधारभूत प्रकार हैं: वे जो आंकड़ों को क्रम-से-क्रम दर्ज़ करते हैं, और वे जो एक ही प्रचालन में संपूर्ण दस्तावेज़ का क्रमवीक्षण कर सकते हैं।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. बॉक्स 4-2 के अनुसार रैस्टर और वेक्टर मॉडल के लाभ और हानि बताइए।

उत्तर: रैस्टर के लाभ: सरल आंकड़ा संरचना, सहज-कुशल अधिचित्रण, उपग्रह चित्रों से संगति, उच्च स्थानिक विविधता का कुशल प्रदर्शन। रैस्टर की हानियाँ: कंप्यूटर भंडारण का अकुशल प्रयोग, परिमाप-आकृति में त्रुटियाँ, परिपथ जाल विश्लेषण कठिन, बड़े सेलों से सूचना का ह्रास। वेक्टर के लाभ: संहत आंकड़ा संरचना, परिपथ जाल विश्लेषण में दक्ष, प्रक्षेपण रूपांतरण में दक्ष, परिशुद्ध मानचित्र बहिर्वेश। वेक्टर की हानियाँ: जटिल आंकड़ा संरचना, अधिचित्रण कठिन, उपग्रह चित्रों से असंगति।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. भौगोलिक सूचना तंत्र से संबंधित कार्य में क्रियाओं का अनुक्रम बताइए।

उत्तर: GIS से संबंधित काम में पाँच क्रियाओं का अनुक्रम सम्मिलित होता है: (1) स्थानिक आंकड़ा निवेश, (2) गुण न्यास की प्रविष्टि, (3) आंकड़ों का सत्यापन और संपादन, (4) स्थानिक और गुण न्यास आंकड़ों की सहलग्नता, और (5) स्थानिक विश्लेषण, जो अंततः निर्णय-पोषित प्रणाली विकसित करने में सहायक होता है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. किसी GIS परियोजना में विभिन्न स्रोतों से आंकड़े जोड़ते समय किन विशेषताओं का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: प्रयोक्ता को आंकड़ों की मापनी, प्रयोग में लाई गई भौगोलिक संदर्भ प्रणाली, आंकड़ा संग्रहण की तकनीक व निदर्शन सामरिकी, एकत्रित आंकड़ों की गुणवत्ता, वर्गीकरण व अंतर्वेशन की विधियाँ, व्यक्तिगत मानचित्रण इकाइयों का आकार-आकृति, और रिकॉर्ड की लंबाई का ध्यान रखना चाहिए, विशेषकर जब अध्ययन क्षेत्र प्रशासकीय सीमाओं को लाँघता हो।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. GIS में आंकड़ों के सत्यापन और संपादन की प्रक्रिया समझाइए।

उत्तर: आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए, त्रुटियों की जाँच का सर्वश्रेष्ठ तरीका कंप्यूटर आलेख या पारभासी कागज़ पर मुद्रण लेकर, मूल मानचित्र के साथ प्रकाशीय मेज़ पर ऊपर रखकर, बाएँ-से-दाएँ तथा ऊपर-से-नीचे क्रमबद्ध रूप से तुलना करना है। अप्राप्त आंकड़ों और स्थितिजन्य त्रुटियों को प्रिंट-आउट पर चिह्नित कर, सॉफ़्टवेयर के माध्यम से कीपैड, माउस-नियंत्रित स्क्रीन प्रसंकेतक या डिजिटाइज़र टेबलेट का प्रयोग करते हुए संशोधित किया जाता है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. सुमेलन के तीन प्रकार बताइए, उदाहरण सहित।

उत्तर: यथार्थ सुमेलन: दो फाइलों की समान कुंजी (जैसे कस्बों के नाम) से रिकॉर्ड मिलाना। पदानुक्रमिक सुमेलन: छोटे क्षेत्रों के आंकड़े जोड़ते-जोड़ते बड़े क्षेत्र से मिलाना (जैसे भूमि उपयोग बनाम भूमि रूपांतरण आंकड़े)। अस्पष्ट सुमेलन: जब छोटी और बड़ी सीमाएँ मेल नहीं खातीं (जैसे फ़सल-सीमा बनाम मृदा-प्रकार सीमा), तब दोनों को अधिचित्रित कर संयुक्त मान (जैसे फ़सल उत्पादकता) निकाला जाता है।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. बफ़र प्रचालन के अनुप्रयोग उदाहरण सहित बताइए।

उत्तर: बफ़र प्रचालन किसी बिंदु, रेखा या क्षेत्र लक्षण के चारों ओर निश्चित दूरी का क्षेत्र रचता है। इसका उपयोग अस्पताल, दवा स्टोर, डामर सड़क, पार्क जैसी सुविधाओं से लाभान्वित/वंचित क्षेत्रों या जनसंख्या का पता लगाने में होता है; और वायु-ध्वनि-जल प्रदूषण के बिंदुक स्रोतों के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव के अध्ययन में भी। उदाहरण: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 6 नगरों (सहारनपुर, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, ग़ाज़ियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, अलीगढ़) के अस्पतालों के चारों ओर 2 से 10 किमी तक के बफ़र बनाकर सेवा-वंचित क्षेत्र पहचाने गए।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. चित्ररेखापुँज (रैस्टर) और सदिश (वेक्टर) आंकड़ा फॉर्मेट को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: रैस्टर फॉर्मेट: रैस्टर आंकड़े किसी लक्षण को वर्गों (सेल) के जाल के प्रारूप में दर्शाते हैं; हर सेल को उसके स्थान के गुण के आधार पर एक मूल्य दिया जाता है, और पंक्ति-स्तंभ निर्देशांक किसी भी पिक्सेल की पहचान कर सकते हैं। सेल आकार व संख्या के अनुपात को विभेदन कहते हैं। उदाहरण: 50 मीटर पिक्सेल के जाल (20×16) की तुलना में 25 मीटर पिक्सेल का जाल (40×36) चार गुना अधिक पिक्सेल देता है (चित्र 4-4)। रैस्टर वायव फ़ोटो/उपग्रह चित्रों के आंकिक प्रदर्शन, लागत कम रखने और ‘बैकड्राप’ मानचित्रों के लिए उपयुक्त है।
वेक्टर फॉर्मेट: वेक्टर आंकड़े किसी वस्तु को विशिष्ट बिंदुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में दर्शाते हैं; प्रत्येक बिंदु को द्वि-आयामी (X,Y) अथवा त्रि-आयामी (X,Y,Z) निर्देशांकों से व्यक्त किया जाता है। रेखाओं और बहुभुजों का निर्माण बिंदुओं के अनुक्रम से होता है, और हस्तेन अंकीकरण इसकी सर्वोत्तम निवेश-विधि है। वेक्टर उच्च परिशुद्ध अनुप्रयोगों, छोटी फ़ाइलों और व्यक्तिगत लक्षण-विश्लेषण के लिए उपयुक्त है।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. भौगोलिक सूचना तंत्र से संबंधित कार्यों को क्रमबद्ध रूप में किस प्रकार किया जाता है, एक व्याख्यात्मक लेख प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: 1. स्थानिक आंकड़ा निवेश: यह आंकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक आंकड़े प्राप्त करके, या हस्तेन निवेश (डिजिटाइज़र/स्कैनर द्वारा अंकरूपण-क्रमवीक्षण) से किया जाता है।
2. गुण न्यास की प्रविष्टि: प्रकाशित रिकार्ड, सरकारी जनगणना, प्राथमिक सर्वेक्षण या स्प्रैडशीट जैसे स्रोतों से गुण न्यास को हस्तेन या मानक स्थानांतरण फॉर्मेट से निवेशित किया जाता है।
3. आंकड़ों का सत्यापन और संपादन: कंप्यूटर आलेख/मुद्रण की मूल मानचित्र से तुलना कर त्रुटियाँ (अपूर्ण/दोहरे आंकड़े, ग़लत मापनी, विरूपण) चिह्नित और सॉफ़्टवेयर द्वारा संशोधित की जाती हैं।
4. स्थानिक और गुण न्यास आंकड़ों की सहलग्नता: विभिन्न आंकड़ा समुच्चयों को यथार्थ, पदानुक्रमिक या अस्पष्ट सुमेलन विधियों से आपस में जोड़ा जाता है।
5. स्थानिक विश्लेषण: अधिचित्रण, बफ़र (और नामित किंतु इस अध्याय में विस्तार से न दिए गए परिपथ जाल विश्लेषण व अंकिक भू-भाग मॉडल) जैसे प्रचालनों से आंकड़ों को नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी सूचना में बदला जाता है, जो अंततः एक निर्णय-पोषित प्रणाली को संभव बनाता है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. स्थानिक विश्लेषण के अंतर्गत अधिचित्रण और बफ़र प्रचालनों को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: अधिचित्रण विश्लेषण: यह GIS का प्रमाण चिह्न (हॉलमार्क) है, जिसमें उसी क्षेत्र के मानचित्रों के दो या अधिक विषयक स्तरों को अधिचित्रित कर एक नया मानचित्र स्तर प्राप्त किया जाता है, जैसे सड़क मानचित्र और रेल मानचित्र को अधिचित्रित कर परिवहन मानचित्र (चित्र 4-7)। यह चालनी मानचित्रण जैसा प्रचालन है। उदाहरण: अलीगढ़ नगर (उत्तर प्रदेश) के 1974 और 2001 के भूमि उपयोग मानचित्रों को अधिचित्रित करने पर नगरीय भूमि उपयोग परिवर्तन और नगरीय प्रसार मापा गया।
बफ़र विश्लेषण: यह किसी बिंदु, रेखा अथवा क्षेत्र लक्षण के चारों ओर एक निश्चित दूरी का क्षेत्र (बहुभुज) रचता है, चाहे मूल लक्षण कोई भी हो। इसे सामीप्य विश्लेषण भी कहा जाता है, और यह अस्पताल-दवा स्टोर जैसी सुविधाओं से लाभान्वित/वंचित क्षेत्रों, या प्रदूषण के बिंदुक स्रोतों से प्रभावित जनसंख्या के अध्ययन में उपयोगी है। उदाहरण: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह नगरों (सहारनपुर, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, ग़ाज़ियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, अलीगढ़) के प्रमुख अस्पतालों के चारों ओर 2, 4, 6, 8 और 10 किमी के बफ़र बनाकर पाया गया कि नगर के निकट क्षेत्र बेहतर सेवित हैं, जबकि दूर के क्षेत्र अल्पतम लाभान्वित हैं।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
कल्पना कीजिए कि किसी राज्य में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण के कारण होने वाली मृत्युदर ज्ञात करनी है। एक आंकड़ा फाइल में इस आयु वर्ग के बच्चों की कुल संख्या है, और दूसरी फाइल में कुपोषण से होने वाली मृत्युदर दर्ज है। सबसे पहले इन दोनों आंकड़ा फाइलों को जोड़ना आवश्यक है। एक बार यह हो जाने पर, एक संख्या को दूसरी संख्या से भाग देकर वांछित उत्तर प्राप्त किया जा सकता है।

(क) 1 अंक गद्यांश में किस आयु वर्ग के बच्चों की बात की गई है?
उत्तर: 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों की।

(ख) 1 अंक इस उदाहरण में कितनी आंकड़ा फाइलों का उल्लेख है?
उत्तर: दो आंकड़ा फाइलों का: एक बच्चों की संख्या की, दूसरी कुपोषण-मृत्युदर की।

(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि इस उदाहरण से GIS की किस अवधारणा का पता चलता है, और यह प्रचालन किस क्रम में होता है।
उत्तर: यह उदाहरण GIS की ‘सहलग्नता’ अवधारणा को दर्शाता है, जिसमें विभिन्न आंकड़ा समुच्चयों को जोड़ा जाता है। प्रचालन का क्रम: पहले दोनों आंकड़ा फाइलों को जोड़ना, फिर एक संख्या को दूसरी से भाग देकर वांछित उत्तर (मृत्युदर) प्राप्त करना।

केस स्टडी
अलीगढ़ नगर (उत्तर प्रदेश) के 1974 और 2001 के नगरीय भूमि उपयोग मानचित्रों को अधिचित्रित करने पर नगरीय भूमि उपयोग में हुए परिवर्तन ज्ञात हुए, और दी गई समय अवधि में नगरीय प्रसार का मापन संभव हुआ। इसी प्रकार यह अधिचित्रण विश्लेषण दिए गए भूमि उपयोग की, प्रस्तावित भूमि उपयोगों के लिए, उपयुक्तता जाँचने में भी सहायक है। इसी प्रकार अध्याय में सहारनपुर, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, ग़ाज़ियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और अलीगढ़ के प्रमुख अस्पतालों के चारों ओर 2, 4, 6, 8 और 10 किमी के बफ़र बनाकर देखा गया कि नगर के निकट क्षेत्र बेहतर सेवित हैं, जबकि दूर के क्षेत्रों के लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

(क) 1 अंक गद्यांश में वर्णित पहला प्रचालन (अलीगढ़ के मानचित्रों पर) किस विश्लेषण का उदाहरण है?
उत्तर: अधिचित्रण विश्लेषण का।

(ख) 1 अंक बफ़र केस स्टडी में कितने नगरों को सम्मिलित किया गया है?
उत्तर: छह नगरों को: सहारनपुर, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, ग़ाज़ियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और अलीगढ़।

(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि बफ़र विश्लेषण से नगरों के निकट और दूर के क्षेत्रों में क्या अंतर पाया गया, और इसे किस नाम से जाना जाता है।
उत्तर: बफ़र विश्लेषण से पता चला कि नगर के निकट अवस्थित क्षेत्र चिकित्सा सुविधाओं से बेहतर सेवित हैं, जबकि नगरों से दूर रहने वाले लोगों को सुविधाओं तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और वे क्षेत्र अल्पतम लाभान्वित हैं। इस प्रकार के विश्लेषण को सामीप्य विश्लेषण कहा जाता है।