इस अध्याय का संक्षिप्त सार, अंतिम समय के रिवीज़न के लिए: परिभाषाएँ, तुलना-सारणियाँ और मुख्य उद्धरण। पूरे नोट्स अलग से पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं।
1 अधिकार की परिभाषा और दो आधार
अधिकार : अधिकार मूल रूप से हकदारी अथवा ऐसा दावा है जिसका औचित्य सिद्ध हो। यह बताता है कि नागरिक, व्यक्ति और मनुष्य होने के नाते हम किसके हकदार हैं, ऐसी चीज़ जिसे शेष समाज एक वैध दावे के रूप में स्वीकार करे। हर वह चीज़ जिसे मैं ज़रूरी और वांछनीय समझूँ, अधिकार नहीं है।
| आधार | तर्क | उदाहरण |
|---|---|---|
| गरिमा-सम्मान की ज़िंदगी | समाज के तमाम लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण, इसलिए विश्वजनीन | आजीविका का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता |
| हमारी बेहतरी | दक्षता-प्रतिभा विकसित करने में मदद | शिक्षा का अधिकार (सार्वभौम माना गया) |
याद रखने लायक़ शब्दावली
प्राकृतिक अधिकार (17-18वीं सदी)प्रकृति/ईश्वर प्रदत्त, अपरिहार्य : जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति
मानवाधिकार (आज का शब्द)मनुष्य होने मात्र से मिलने वाले अधिकार, मनुष्य द्वारा स्वयं खोजे-पाए गए
कांट का तर्कहर मनुष्य की गरिमा है, चाहे वह अशिक्षित/ग़रीब/शक्तिहीन ही क्यों न हो; लोगों को साधन नहीं, साध्य माना जाए
मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा10 दिसंबर 1948, संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा द्वारा स्वीकृत
3 कांट का उद्धरण, शब्दशः
“हर चीज़ की या तो कीमत होती है या गरिमा। जिसकी कीमत होती है, उसकी जगह उसके समतुल्य कोई दूसरी चीज़ भी रखी जा सकती है। इसके विपरीत, जो तमाम कीमतों से ऊपर हो और जिसका कोई समतुल्य न हो, उसकी गरिमा होती है।”
4 क़ानूनी अधिकार बनाम अधिकार का आधार
4.1 दो बातें, मत मिलाएँ
क़ानूनी मान्यता
- अधिकार को समाज में ख़ास दर्जा देती है
- मौलिक अधिकार = भारत का संवैधानिक नाम
- यह अधिकार का “आधार” नहीं है
अधिकार का असली आधार
- गरिमा-सम्मान की ज़िंदगी और हमारी बेहतरी
- अधिकार धीरे-धीरे विस्तारित और पुनर्व्याख्यायित होते रहते हैं
- पहले अलग रखे गए समूहों को शामिल करने के लिए
5 तीन प्रकार के अधिकार
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| राजनीतिक + नागरिक स्वतंत्रता | वोट, चुनाव लड़ना, निष्पक्ष सुनवाई, विरोध जताना |
| आर्थिक | आवास, चिकित्सा, न्यूनतम भत्ता, ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना |
| सांस्कृतिक | मातृभाषा शिक्षा, भाषा-संस्कृति की संस्थाएँ |
6 चार ज़िम्मेदारियाँ, क्रम से
अधिकार के साथ आने वाले दायित्व
1. आम भलाईओज़ोन परत, प्रदूषण, वृक्षारोपण, भावी पीढ़ियों के लिए
2. दूसरों का सम्मानअपने लिए चाहा गया अधिकार दूसरों को भी देना होगा
3. टकराव में संतुलनअभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम किसी की गोपनीयता
4. चौकसीराष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बढ़ते प्रतिबंधों पर नज़र
“किसी व्यक्ति के अधिकार वहाँ ख़त्म हो जाते हैं, जहाँ दूसरे व्यक्ति की नाक शुरू होती है।”
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