इस अध्याय का संक्षिप्त सार, अंतिम समय के रिवीज़न के लिए: परिभाषाएँ, तिथियाँ-उदाहरण, तुलना-सारणी और अंतिम दोहराव। पूरे नोट्स अलग से पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं।
1 नागरिकता : परिभाषा और अधिकारों के प्रकार
| अधिकार का प्रकार | मार्शल के अनुसार क्या देता है |
|---|---|
| नागरिक अधिकार | जीवन, आज़ादी, जायदाद की हिफ़ाज़त |
| राजनीतिक अधिकार | शासन प्रक्रिया में सहभागिता |
| सामाजिक अधिकार | शिक्षा और रोज़गार तक पहुँच |
2 महत्वपूर्ण तिथियाँ और उदाहरण, याद रखने लायक़
कब क्या हुआ
1789फ्रांसीसी क्रांति; राष्ट्र-राज्य की संप्रभुता का पहला दावा
1950 का दशकअमेरिका में मार्टिन लूथर किंग का नागरिक अधिकार आंदोलन, पृथक्करण कानूनों के ख़िलाफ़
1985ओल्गा टेलिस बनाम बंबई नगर निगम मुक़दमा, धारा-21 और आजीविका का अधिकार
जनवरी 2004फुटपाथी दुकानदारों के लिए राष्ट्रीय नीति
1990 का दशक-आरंभ / 1994दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद-विरोधी संघर्ष का अंत / नीतियों का ख़ात्मा
1947भारत का विभाजन, फिर भी धर्मनिरपेक्ष-समावेशी संकल्प मज़बूत
1959भारत द्वारा दलाई लामा और उनके अनुयायियों को शरण
1997ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे द्वारा 1500 फार्मों पर कब्ज़े की योजना
2004दक्षिण एशिया की सुनामी, वैश्विक सहानुभूति का उदाहरण
2014स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन अधिनियम)
3 टी.एच. मार्शल और ओल्गा टेलिस मुक़दमा
ब्रिटिश समाजशास्त्री टी.एच. मार्शल (1893-1981) ने अपनी पुस्तक नागरिकता और सामाजिक वर्ग (1950) में नागरिकता को “किसी समुदाय के पूर्ण सदस्यों को प्रदत्त प्रतिष्ठा” कहा। ओल्गा टेलिस मुक़दमे (1985) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा-21 का जीने का अधिकार आजीविका के अधिकार को भी शामिल करता है, इसलिए फुटपाथवासियों को बेदख़ल करने से पहले वैकल्पिक जगह देनी होगी।
3.1 राष्ट्रीय बनाम वैश्विक नागरिकता
राष्ट्रीय नागरिकता
- राज्य द्वारा दी गई पूर्ण और समान सदस्यता
- जन्म, वंश-परंपरा, पंजीकरण, देशीकरण, भू-क्षेत्र सम्मिलन से प्राप्त
- ठोस अधिकार व सुरक्षा देती है
वैश्विक नागरिकता
- राष्ट्रीय सीमाओं से परे अंतर्संबद्धता का एहसास
- विश्व-कुटुंब और वैश्विक समाज अभी विद्यमान नहीं
- राष्ट्रीय नागरिकता की पूरक, विकल्प नहीं
4 भारत में नागरिकता प्राप्ति के पाँच रास्ते
जन्म से, वंश-परंपरा से, पंजीकरण से, देशीकरण से, और भू-क्षेत्र के राज्यक्षेत्र में शामिल होने से। संविधान का भाग दो नागरिकता के प्रावधान तय करता है; राज्य धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता।
आख़िरी दोहराव
- नागरिकता = पूर्ण और समान सदस्यता; अधिकार संघर्ष से मिले (1789 फ्रांसीसी क्रांति, दक्षिण अफ़्रीका का संघर्ष)
- मार्शल के तीन अधिकार: नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक
- ओल्गा टेलिस मुक़दमा (1985): धारा-21, आजीविका का अधिकार
- भारत में नागरिकता के पाँच रास्ते: जन्म, वंश-परंपरा, पंजीकरण, देशीकरण, भू-क्षेत्र सम्मिलन
- शरणार्थी/राज्यहीन लोग: भारत ने 1959 में दलाई लामा को शरण दी
- वैश्विक नागरिकता राष्ट्रीय नागरिकता की पूरक है, विकल्प नहीं
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