कक्षा 11 राजनीति विज्ञान बुक 2 अध्याय 8 धर्मनिरपेक्षता शॉर्ट नोट्स

1 मुख्य परिभाषाएँ

परिभाषाएँ एक जगह
धर्मनिरपेक्षताअंतर-धार्मिक और अंतःधार्मिक, दोनों तरह के वर्चस्वों से मुक्त समाज चाहने वाला नियामक सिद्धांत
अंतर-धार्मिक वर्चस्वएक धर्म का दूसरे धर्म पर वर्चस्व (उदा. 1984, कश्मीरी पंडित, 2002 गुजरात)
अंतःधार्मिक वर्चस्वधर्म के भीतर वर्चस्व (उदा. दलितों-महिलाओं का मंदिर-प्रवेश रोकना)
धर्मतांत्रिक राज्यकिसी धर्म के पुरोहितों/प्रमुखों द्वारा प्रत्यक्ष शासित राष्ट्र (पोप-राज्य, तालिबान)
पारस्परिक निषेधपश्चिमी/अमेरिकी मॉडल : राज्य-धर्म एक-दूसरे में दख़ल नहीं देते
सैद्धांतिक दूरीभारतीय मॉडल : राज्य दूरी रखता है, पर ज़रूरत पर सैद्धांतिक हस्तक्षेप भी कर सकता है
अस्पृश्यता-प्रतिबंधराज्य के नकारात्मक जुड़ाव (धार्मिक अत्याचार-विरोध) का उदाहरण
वोट-बैंक की राजनीतिकिसी सामाजिक समूह को चुनाव में एक इकाई की तरह मतदान के लिए एकजुट करना

2 नामित उदाहरण : एक-नज़र तालिका

प्रसंग उदाहरण / आँकड़े
अंतर-धार्मिक वर्चस्व, 1984 2,700 से ज़्यादा सिख मारे गए
अंतर-धार्मिक वर्चस्व, कश्मीर हज़ारों कश्मीरी पंडितों का पलायन, दो दशकों बाद भी वापसी नहीं
अंतर-धार्मिक वर्चस्व, 2002 गुजरात, गोधरा दंगों के बाद 1,000 से अधिक मौतें
धर्मतांत्रिक राज्य मध्यकालीन यूरोप की पोप राज्यसत्ता, तालिबानी राज्यसत्ता
ग़ैर-धर्मतांत्रिक पर धार्मिक गठजोड़ 16वीं सदी इंग्लैंड (आंग्ल चर्च), आज का पाकिस्तान (सुन्नी इस्लाम)
अतातुर्क की धर्मनिरपेक्षता खिलाफ़त समाप्त, फ़ेज़ टोपी प्रतिबंध, 1928 नई तुर्की वर्णमाला
नेहरू का कथन “सभी धर्मों को राज्य द्वारा समान संरक्षण”
असंभव परियोजना का जवाब ऑटोमन साम्राज्य का सह-अस्तित्व उदाहरण

3 दो मॉडलों की तुलना

3.1 पश्चिमी मॉडल बनाम भारतीय मॉडल

पश्चिमी (यूरोपीय/अमेरिकी) मॉडल

  • पारस्परिक निषेध : कोई भी दख़ल नहीं
  • व्यक्तिवादी : केवल व्यक्ति के अधिकार
  • राज्य-समर्थित सुधार की गुंजाइश नहीं
  • अंतःधार्मिक वर्चस्व पर ही ध्यान (धार्मिक रूप से सजातीय समाज)

भारतीय मॉडल

  • सैद्धांतिक दूरी : ज़रूरत पर हस्तक्षेप संभव
  • व्यक्ति और समुदाय, दोनों के अधिकार
  • राज्य-समर्थित धार्मिक सुधार की अनुमति (अस्पृश्यता-प्रतिबंध)
  • अंतर-धार्मिक और अंतःधार्मिक, दोनों वर्चस्वों पर बराबर ध्यान

4 छह आलोचनाएँ, छह जवाब

आलोचना एक-पंक्ति जवाब
1. धर्म-विरोधी वर्चस्व-विरोध ≠ धर्म-विरोध; यह धार्मिक पहचान की हिफ़ाज़त करती है
2. पश्चिम से आयातित पश्चिमी राज्य ईसाइयत से संबंध-विच्छेद करके धर्मनिरपेक्ष बने, इसलिए पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता में वैसी कोई ईसाइयत नहीं; धर्मनिरपेक्षता के पश्चिमी और ग़ैर-पश्चिमी, दोनों मूल हैं; भारत का अपना रूप है
3. अल्पसंख्यकवाद अल्पसंख्यक अधिकार विशेष सुविधा नहीं, बराबरी का साधन हैं (ट्रेन व लिफ़्ट उदाहरण)
4. अतिशय हस्तक्षेपकारी सैद्धांतिक दूरी हस्तक्षेप की गुंजाइश देती है, पर हस्तक्षेप = उत्पीड़न नहीं
5. वोट-बैंक राजनीति वोट माँगना अपने-आप में ग़लत नहीं; राजनेता दोषी तब जब समूह को लाभ न मिले, या उसका कल्याण दूसरे समूहों के अधिकारों की क़ीमत पर हो (नया अन्याय)
6. असंभव परियोजना ऑटोमन साम्राज्य दिखाता है कि सह-अस्तित्व संभव है; भारत विश्व के भविष्य का प्रतिबिंब है

5 जल्दी दोहराने योग्य पंक्तियाँ

एक-पंक्ति में याद रखें

धर्मनिरपेक्षता = दोहरे वर्चस्व (अंतर + अंतः) का विरोध। धर्मतांत्रिक राज्य = पुरोहितों का शासन। पारस्परिक निषेध = पश्चिमी दूरी। सैद्धांतिक दूरी = भारतीय दूरी + ज़रूरत पर हस्तक्षेप। सर्व धर्म समभाव अकेले भारतीय धर्मनिरपेक्षता की जटिलता को नहीं समेटता।

आख़िरी दोहराव
  • दो वर्चस्व : अंतर-धार्मिक (1984, कश्मीर, 2002) और अंतःधार्मिक (मंदिर-प्रवेश)
  • धर्मतांत्रिक राज्य के उदाहरण : पोप-राज्य, तालिबान; ग़ैर-धर्मतांत्रिक पर धार्मिक गठजोड़ : इंग्लैंड, पाकिस्तान
  • पश्चिमी मॉडल = पारस्परिक निषेध + व्यक्तिवादी; भारतीय मॉडल = सैद्धांतिक दूरी + तीन भिन्नताएँ
  • छहों आलोचनाओं के एक-पंक्ति जवाब रट लें
अंतिम जाँच
  • क्या मुझे तीनों नामित उदाहरण (1984, कश्मीर, 2002) के आँकड़े सही याद हैं?
  • क्या मुझे पारस्परिक निषेध और सैद्धांतिक दूरी में फ़र्क़ स्पष्ट है?
  • क्या मुझे छहों आलोचनाएँ क्रम से याद हैं?