कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 1 संविधान महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले ख़ुद उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. संविधान किसे कहते हैं?

उत्तर: संविधान बुनियादी नियमों का वह समूह है जिसके अनुसार किसी राज्य का गठन और शासन होता है।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. जनमत संग्रह (Referendum) क्या है?

उत्तर: जनमत संग्रह वह प्रक्रिया है जिसमें किसी संविधान या कानून की वांछनीयता पर देश की पूरी जनता सीधे मतदान करती है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई?

उत्तर: संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. उद्देश्य प्रस्ताव किसने और कब प्रस्तुत किया?

उत्तर: उद्देश्य प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू ने 1946 में संविधान सभा के सामने प्रस्तुत किया था।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. संविधान सभा में कौन-सा प्रावधान बिना किसी बहस के पारित हुआ?

उत्तर: सार्वभौम वयस्क मताधिकार अकेला ऐसा प्रावधान था जो बिना किसी बहस के पारित हुआ।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. न्यायिक पुनरावलोकन किस देश के संविधान से लिया गया?

उत्तर: न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति अमेरिकी संविधान से ली गई है।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. भारत का संविधान कब लागू हुआ?

उत्तर: भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. ‘जीवंत दस्तावेज़’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: ‘जीवंत दस्तावेज़’ उस संविधान को कहते हैं जो अपने बुनियादी मूल्य बचाकर भी संशोधन के ज़रिए बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढल सकता है।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. संविधान अंगीकृत होने, उस पर हस्ताक्षर होने और लागू होने की तीनों तारीख़ें लिखिए।

उत्तर: संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया, 24 जनवरी 1950 को 284 सदस्यों ने उस पर हस्ताक्षर किए, और यह 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. संविधान सभा को अप्रत्यक्ष विधि से क्यों चुना गया?

उत्तर: संविधान सभा के सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा चुने गए, क्योंकि उस समय सार्वभौम वयस्क मताधिकार लागू नहीं था और प्रांतीय विधान सभाएँ पहले से भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत मौजूद थीं।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार सीटें कैसे बाँटी गईं?

उत्तर: हर प्रांत और देशी रियासत को उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें मिलीं, लगभग 10 लाख की आबादी पर एक सीट। प्रांतों को 292 सदस्य चुनने थे, जबकि देशी रियासतों को न्यूनतम 93 सीटें मिलीं।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. नियंत्रण और संतुलन (Checks and Balances) क्या है?

उत्तर: यह वह व्यवस्था है जिसमें सरकार की अलग-अलग संस्थाएँ, जैसे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, एक-दूसरे की शक्तियों पर निगरानी रखती हैं, ताकि कोई एक संस्था बाक़ी से ज़्यादा ताक़तवर होकर संविधान को पलट न सके।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रीय पहचान का आधार क्या है, और जर्मनी से यह कैसे अलग है?

उत्तर: भारतीय संविधान नस्ल या जातीयता को नागरिकता का आधार नहीं मानता। इसके उलट जर्मनी की राष्ट्रीय पहचान ‘जर्मन नस्ल’ के आधार पर बनी थी, और वहाँ के संविधान ने इसी पहचान को अभिव्यक्ति दी।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. संविधान सभा में विचार-विमर्श किन मुद्दों पर हुआ?

उत्तर: केंद्रीकृत या विकेंद्रित शासन, राज्यों और केंद्र के संबंध, न्यायपालिका की शक्तियाँ, और संपत्ति के अधिकार की रक्षा जैसे लगभग हर मुद्दे पर गहराई से बहस हुई।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. संविधान सभा की कार्यविधि की दो ख़ास बातें बताइए।

उत्तर: 1. सभा की 8 मुख्य कमेटियाँ थीं, जो नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, पटेल या अंबेडकर की अध्यक्षता में विषयवार मसौदा तैयार करती थीं।
2. हर तर्क, सवाल या शंका का लिखित रूप में जवाब दिया जाता था, और सत्र प्रेस व जनता दोनों के लिए खुले थे।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. संविधान सभा में सदस्यों की संख्या विभाजन से कैसे प्रभावित हुई?

उत्तर: 3 जून 1947 की विभाजन योजना के बाद पाकिस्तान के क्षेत्रों से चुने गए सदस्य संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे, जिससे कुल सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. संविधान के पाँच काम समझाइए।

उत्तर: 1. तालमेल और भरोसा: सार्वजनिक रूप से घोषित और लागू करने योग्य बुनियादी नियम देकर समाज में न्यूनतम तालमेल बनाता है।
2. निर्णय-निर्माण शक्ति की विशिष्टता: यह तय करता है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी और सरकार कैसे बनेगी।
3. सरकार की शक्तियों पर सीमाएँ: मौलिक अधिकारों के ज़रिए सरकार पर वे सीमाएँ लगाता है जिन्हें वह कभी लाँघ नहीं सकती।
4. समाज की आकांक्षाएँ पूरी करना: सरकार को कल्याणकारी क़दम उठाने में सक्षम बनाता है, जैसा भारतीय संविधान करता है।
5. राष्ट्र की बुनियादी पहचान: लोगों को एक सामूहिक राजनीतिक और नैतिक पहचान देता है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. संविधान को असरदार बनाने वाले तीन कारक कौन-से हैं?

उत्तर: 1. प्रचलन में लाने का तरीक़ा: यह कि संविधान किसने बनाया और उन्हें कितना जन-विश्वास हासिल था। भारत, दक्षिण अफ़्रीका और अमेरिका के संविधान जन-आंदोलनों के बाद बने।
2. मौलिक प्रावधान: एक सफल संविधान हर व्यक्ति को उसे मानने का कोई न कोई कारण देता है, और सबकी स्वतंत्रता व समानता की रक्षा करता है।
3. संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा: शक्ति का इस तरह बिखराव कि कोई एक संस्था उस पर एकाधिकार न पा सके, और साथ ही कठोरता व लचीलेपन के बीच सही संतुलन।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. संविधान सभा को कितना प्रतिनिधिक माना जा सकता है, और उसकी सीमाएँ क्या थीं?

उत्तर: 1. सभा सार्वभौम वयस्क मताधिकार से नहीं चुनी गई थी, उसके सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष विधि से चुने गए।
2. फिर भी सभा को प्रतिनिधिक बनाने की गंभीर कोशिश हुई, सभी धर्मों को प्रतिनिधित्व मिला और 28 सदस्य अनुसूचित जातियों से थे।
3. विभाजन के बाद कांग्रेस के पास 82 प्रतिशत सीटें थीं, पर कांग्रेस स्वयं इतनी विविध पार्टी थी कि उसमें लगभग हर विचार की जगह थी।
4. सत्ता केवल सदस्यों के प्रतिनिधिक होने से नहीं, बल्कि सभा में अपनाई गई प्रक्रियाओं और सार्वजनिक विवेक की भावना से भी आई।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. संविधान सभा में विचार-विमर्श के सिद्धांत को समझाइए।

उत्तर: 1. संविधान सभा की सत्ता सिर्फ़ प्रतिनिधिक होने से नहीं, उन प्रक्रियाओं और मूल्यों से भी आई जो सदस्य अपनी बहसों में लाए।
2. हर सदस्य ने पूरे राष्ट्र के हित को ध्यान में रखकर विचार किया, अपने निजी हित को नहीं। मतभेद सिद्धांत के थे, स्वार्थ के नहीं।
3. सदस्यों ने अपने विचारों के पक्ष में केवल दावा नहीं किया, बल्कि सिद्धांतबद्ध कारण दिए, ताकि दूसरे सदस्य भी सहमत हो सकें, इसे सार्वजनिक विवेक कहते हैं।
4. इसीलिए ये बहसें फ्रांसीसी और अमेरिकी क्रांति जितनी महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. भारतीय संविधान ने किन देशों से कौन-से प्रावधान उधार लिए, और यह उधार अंधी नक़ल क्यों नहीं थी?

उत्तर: 1. ब्रिटेन से संसदीय स्वरूप, सर्वाधिक मत के आधार पर जीत और कानून के शासन का विचार।
2. अमेरिका से मौलिक अधिकारों की सूची और न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति।
3. आयरलैंड से राज्य के नीति-निर्देशक तत्व।
4. फ़्रांस से स्वतंत्रता, समता और बंधुता के सिद्धांत, और कनाडा से अवशिष्ट शक्तियों का विचार।
5. यह अंधी नक़ल नहीं थी, हर प्रावधान को यह साबित करना पड़ता था कि वह भारत की समस्याओं और आशाओं के अनुरूप है।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. भारतीय संविधान ‘जीवंत दस्तावेज़’ क्यों कहलाता है?

उत्तर: 1. एक अच्छा संविधान कुछ मूल्यों और प्रक्रियाओं को स्थायी मानता है, पर साथ ही बदलती ज़रूरतों के हिसाब से ढलने की गुंजाइश भी रखता है।
2. बहुत कठोर संविधान बदलाव के दबाव में टूट सकता है, बहुत लचीला संविधान सुरक्षा और पहचान नहीं देता।
3. भारतीय संविधान इन दोनों के बीच सही संतुलन बनाता है, संशोधन की प्रक्रिया देकर भी बुनियादी मूल्यों को सुरक्षित रखता है।
4. यही संतुलन उसे एक ‘जीवंत दस्तावेज़’ बनाता है, जो समय के साथ बदलती परिस्थितियों में भी प्रासंगिक बना रहता है।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. नेपाल के संविधान-निर्माण के अनुभव से क्या सबक़ मिलता है?

उत्तर: 1. 1948 से नेपाल में पाँच संविधान बने: 1948, 1951, 1959, 1962 और 1990 में, पर सभी नेपाल-नरेश द्वारा ‘प्रदान’ किए गए थे।
2. 1990 के संविधान से बहु-दलीय लोकतंत्र शुरू हुआ, पर राजा के पास अंतिम शक्तियाँ बनी रहीं, इसलिए विवाद जारी रहा।
3. राजा ने अक्तूबर 2002 में समस्त शक्तियाँ अपने हाथ में ले लीं, जिससे जन-आंदोलन तेज़ हुआ और नई संविधान सभा की माँग उठी।
4. सबक़ यह है कि जब तक संविधान बनाने वाली सत्ता जनता से नहीं आती, तब तक संविधान स्थायी रूप से मान्य नहीं होता। अंततः 2008 में नेपाल गणराज्य बना और 2015 में जनता द्वारा नया संविधान अपनाया गया।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. संविधान की सत्ता जाँचने के तीन कारक विस्तार से समझाइए, और भारतीय संविधान इस पर कितना खरा उतरता है?

उत्तर: 1. प्रचलन में लाने का तरीक़ा: भारत का संविधान औपचारिक रूप से दिसंबर 1946 से नवंबर 1949 के बीच बना, पर इसकी जड़ें लंबे राष्ट्रीय आंदोलन में थीं। इसके निर्माता जन-विश्वास वाले लोग थे। भारत में कभी जनमत संग्रह नहीं हुआ, फिर भी लोगों ने प्रावधानों पर अमल करके संविधान को अपनाया।
2. मौलिक प्रावधान: संविधान ने किसी स्थायी बहुमत को अल्पसंख्यक उत्पीड़न की छूट नहीं दी, और सबकी स्वतंत्रता व समानता की रक्षा की कोशिश की।
3. संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा: शक्ति का क्षैतिज बँटवारा विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और चुनाव आयोग के बीच किया गया, साथ ही संविधान को संशोधन योग्य बनाकर कठोरता-लचीलेपन का संतुलन साधा गया।
निष्कर्ष: भारतीय संविधान तीनों कसौटियों पर खरा उतरता है, इसीलिए यह काग़ज़ पर सीमित न रहकर एक जीवंत दस्तावेज़ बन पाया।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. भारतीय संविधान कैसे बना, इसकी पूरी प्रक्रिया समझाइए।

उत्तर: 1. गठन: संविधान सभा अविभाजित भारत के लिए चुनी गई, पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई और विभाजित भारत के लिए 14 अगस्त 1947 को पुनः बैठी।
2. सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष विधि से चुने गए, कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार, जिसमें प्रांतों को 292 और रियासतों को न्यूनतम 93 सीटें मिलीं।
3. विभाजन के बाद (3 जून 1947 की योजना से) सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई। सभा विभाजन की हिंसा की पृष्ठभूमि में भी सही सबक़ लेकर काम करती रही।
4. सभा सार्वभौम मताधिकार से नहीं चुनी गई थी, फिर भी प्रतिनिधिक बनाने की कोशिश हुई, 28 सदस्य अनुसूचित जातियों से थे।
5. विचार-विमर्श का सिद्धांत: सदस्यों ने सार्वजनिक विवेक के साथ बहस की, सिर्फ़ सार्वभौम वयस्क मताधिकार बिना बहस पारित हुआ।
6. कार्यविधि: 8 मुख्य कमेटियाँ, नेहरू-प्रसाद-पटेल-अंबेडकर की अध्यक्षता, 166 दिन की बैठकें, 2 वर्ष 11 महीने की कुल अवधि, सभी सत्र जनता के लिए खुले।
7. राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत: सिद्धांत लंबी आज़ादी की लड़ाई से आए, जिनका सार नेहरू के 1946 के उद्देश्य प्रस्ताव में समाया।
8. संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत, 24 जनवरी 1950 को हस्ताक्षरित, और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. संविधान सिर्फ़ काग़ज़ पर मौजूद नियमों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवंत दस्तावेज़ है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: 1. कई देशों के संविधान केवल काग़ज़ पर मौजूद रहते हैं, उनका असल जीवन पर कोई असर नहीं पड़ता।
2. भारतीय संविधान इससे अलग है, क्योंकि यह तीन कारकों पर खरा उतरता है: प्रचलन में लाने का तरीक़ा, मौलिक प्रावधान, और संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा।
3. यह न केवल शक्ति बाँटता और सीमाएँ लगाता है, बल्कि सरकार को समाज की आकांक्षाएँ पूरी करने में सक्षम भी बनाता है, जैसे जाति-भेद से मुक्त समाज का लक्ष्य।
4. यह संशोधन के ज़रिए बदलती परिस्थितियों में ढल सकता है, फिर भी अपने बुनियादी मूल्यों को नहीं छोड़ता, इसी संतुलन को ‘जीवंत दस्तावेज़’ कहते हैं।
5. यही वजह है कि यह लगभग तीन साल की खोज के बाद बना दस्तावेज़ आज तक बचा हुआ है, जबकि कई और संविधान काग़ज़ के साथ ही ख़त्म हो गए, और भारत का संविधान ख़ुद दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों के लिए आदर्श बना।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. रजत ने अपने शिक्षक से पूछा: ‘संविधान एक पचास साल पुराना दस्तावेज़ है और इसलिए पुराना पड़ चुका है। किसी ने इसको लागू करते समय मुझसे राय नहीं माँगी। यह इतनी कठिन भाषा में लिखा है कि मैं इसे समझ नहीं सकता। मैं इस दस्तावेज़ की बातों का पालन क्यों करूँ?’ अगर आप शिक्षक होते तो रजत को क्या उत्तर देते?

उत्तर: 1. पुराना होना ख़ामी नहीं: भारत, दक्षिण अफ़्रीका और अमेरिका के सबसे सफल संविधान भी दशकों पुराने हैं। संविधान ‘जीवंत दस्तावेज़’ है, संशोधन के ज़रिए बदलती ज़रूरतों में ढल सकता है, इसलिए पुराना होना उसे अप्रासंगिक नहीं बनाता।
2. सहमति की सीमा असली मुद्दा नहीं: रजत की तरह किसी भी नई पीढ़ी से सीधे राय नहीं ली जा सकती, पर संविधान सभा जन-आंदोलन की विरासत लेकर बनी थी और लोगों ने उसके प्रावधानों पर अमल करके उसे अपनाया, यानी सहमति अप्रत्यक्ष रूप से बनी रहती है।
3. भाषा कठिन हो सकती है, पर यही वजह इस विषय को पढ़ने की है, ताकि नागरिक अपने अधिकार और सरकार की सीमाएँ समझ सकें। कठिन भाषा संविधान के मूल्यों को अमान्य नहीं करती।
4. आख़िरी और सबसे बड़ा कारण: संविधान सबको न्यूनतम तालमेल, सुरक्षा, स्वतंत्रता और एक साझी राष्ट्रीय पहचान देता है, बिना इसके समाज में हर व्यक्ति असुरक्षित होगा। इसीलिए इसका पालन अपनी ही सुरक्षा के लिए ज़रूरी है।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
संविधान सभा में अंबेडकर तो कांग्रेस और गांधी के कड़े आलोचक थे, और उन पर अनुसूचित जातियों के उत्थान के लिए पर्याप्त काम न करने का आरोप लगाते थे। पटेल और नेहरू भी बहुत-से मुद्दों पर एक-दूसरे से असहमत थे। फिर भी सबने एक साथ मिलकर काम किया। प्रत्येक कमेटी ने आम तौर पर संविधान के कुछ-कुछ प्रावधानों का प्रारूप तैयार किया जिन पर बाद में पूरी संविधान सभा में चर्चा की गई। आम तौर पर यह प्रयास किया गया कि फ़ैसले आम राय से हों और कोई भी प्रावधान किसी ख़ास हित समूह के पक्ष में न हो। कई प्रावधानों पर निर्णय मत विभाजन करके भी लिए गए।

(क) 1 अंक संविधान सभा की कमेटियों की अध्यक्षता आम तौर पर कौन करता था?
उत्तर: नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल या बी.आर. अंबेडकर।

(ख) 2 अंक गद्यांश के अनुसार सभा में मतभेद किस तरह के थे?
उत्तर: अंबेडकर कांग्रेस और गांधी के कड़े आलोचक थे, और पटेल व नेहरू कई मुद्दों पर असहमत थे। पर ये मतभेद सिद्धांत और राष्ट्रहित के आधार पर थे, निजी स्वार्थ के नहीं, इसीलिए सब एक साथ मिलकर काम कर सके।

(ग) 3 अंक गद्यांश में बताई गई कार्यविधि से ‘सार्वजनिक विवेक’ का सिद्धांत कैसे झलकता है?
उत्तर: सार्वजनिक विवेक का मतलब है अपने हित की जगह सिद्धांत के आधार पर तर्क देना। गद्यांश दिखाता है कि सभा ने आम राय बनाने की कोशिश की और किसी भी प्रावधान को किसी ख़ास हित समूह के पक्ष में नहीं जाने दिया। जहाँ आम राय संभव नहीं थी, वहाँ खुले मत विभाजन से फ़ैसला हुआ, न कि दबाव या सौदेबाज़ी से। यह दिखाता है कि विरोधी विचारों के बावजूद हर सदस्य ने राष्ट्रहित को ऊपर रखा, यही सार्वजनिक विवेक का असली अर्थ है।

केस स्टडी
एक सफल संविधान की यह विशेषता है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को उसके प्रावधानों का आदर करने का कोई कारण अवश्य देता है। कोई संविधान अपने आप न्याय के आदर्श स्वरूप की स्थापना नहीं करता, लेकिन उसे लोगों को विश्वास दिलाना पड़ता है कि वह न्याय पाने के लिए ढाँचा उपलब्ध कराता है। संविधान जितना ज़्यादा अपने सभी सदस्यों की स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करे, उतना ही उसके सफल होने की संभावना ज़्यादा होती है।

(क) 1 अंक गद्यांश के अनुसार सफल संविधान की सबसे बड़ी पहचान क्या है?
उत्तर: वह हर व्यक्ति को अपने प्रावधानों का आदर करने का कोई न कोई कारण देता है।

(ख) 2 अंक कोई संविधान लोगों को न्याय के बारे में क्या भरोसा दिलाता है?
उत्तर: कोई भी संविधान अपने आप पूर्ण न्याय स्थापित नहीं करता, पर उसे यह भरोसा दिलाना पड़ता है कि वह न्याय पाने के लिए ज़रूरी ढाँचा उपलब्ध कराता है, यानी संस्थाएँ और प्रक्रियाएँ देता है जिनसे न्याय की माँग की जा सके।

(ग) 3 अंक स्वतंत्रता और समानता की रक्षा किसी संविधान की सफलता से कैसे जुड़ी है?
उत्तर: गद्यांश के अनुसार संविधान जितना ज़्यादा हर सदस्य की स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करे, उतना ही वह सफल होने की संभावना रखता है। इसका कारण यह है कि जो संविधान बहुसंख्यक को अल्पसंख्यक के उत्पीड़न की छूट दे या कुछ लोगों को सुनियोजित ढंग से ज़्यादा सुविधा दे, वह जनता की निष्ठा खो देता है। इसलिए स्वतंत्रता-समानता की रक्षा ही वह आधार है जिस पर एक संविधान को सबकी स्वीकृति मिलती है।