परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, संख्याएँ, तारीख़ें और तालिकाएँ। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 संविधान के पाँच काम, एक नज़र में
संविधान के पाँच काम
1 · तालमेलबुनियादी नियम, सबको ज्ञात, लागू करने योग्य
2 · निर्णय-शक्तितय कौन करेगा, सरकार कैसे बनेगी
3 · सीमाएँमौलिक अधिकारों से सरकार पर लगाम
4 · आकांक्षाएँसरकार को सकारात्मक काम की क्षमता
5 · पहचानराजनीतिक और नैतिक पहचान दोनों
2 याद रखने लायक़ संख्याएँ और तारीख़ें
299विभाजन के बाद संविधान सभा के सदस्य
166दिन, संविधान सभा की बैठकें
8मुख्य कमेटियाँ
| तारीख़ | क्या हुआ |
|---|---|
| 9 दिसंबर 1946 | संविधान सभा की पहली बैठक |
| 14 अगस्त 1947 | विभाजित भारत के लिए पुनः बैठक |
| 26 नवंबर 1949 | संविधान अंगीकृत, ‘संविधान दिवस’ |
| 24 जनवरी 1950 | 284 सदस्यों के हस्ताक्षर |
| 26 जनवरी 1950 | संविधान लागू, ‘गणतंत्र दिवस’ |
| संख्या | किसकी |
|---|---|
| 292 | प्रांतों से चुने जाने वाले सदस्य |
| 93 | देशी रियासतों को न्यूनतम सीटें |
| 28 | अनुसूचित जातियों से सदस्य |
| 82% | कांग्रेस के पास विभाजन के बाद सीटें |
| 2 वर्ष 11 महीने | संविधान सभा की कुल अवधि |
3 परिभाषाएँ, ठीक जैसी लिखनी हैं
सारी परिभाषाएँ एक जगह
संविधानबुनियादी नियमों का वह समूह जिसके अनुसार किसी राज्य का गठन और शासन होता है
जनमत संग्रहकिसी संविधान या कानून की वांछनीयता पर पूरी जनता का सीधा मतदान
समानुपातिक प्रतिनिधित्ववह पद्धति जिसमें हर समुदाय या दल को उसके जनसंख्या-हिस्से के अनुपात में प्रतिनिधि मिलते हैं
अवरोध और संतुलनसरकार की अलग-अलग संस्थाओं का एक-दूसरे की शक्तियों पर निगरानी रखना
जीवंत दस्तावेज़वह संविधान जो बुनियादी मूल्य बचाकर भी संशोधन से बदलती परिस्थितियों में ढल सके
न्यायिक पुनरावलोकनन्यायपालिका की वह शक्ति जिससे वह किसी कानून को संविधान-विरोधी पाकर रद्द कर सकती है
सार्वजनिक विवेकअपने हित की जगह सिद्धांत पर आधारित तर्क देने की आदत, ताकि दूसरे भी सहमत हो सकें
उद्देश्य-प्रस्ताव1946 में नेहरू द्वारा रखा गया प्रस्ताव, जिसने संविधान सभा के लक्ष्य तय किए
4 संविधान की सत्ता : तीन कारक
| कारक | याद रखने की बात |
|---|---|
| प्रचलन में लाने का तरीक़ा | भारत, दक्षिण अफ़्रीका, अमेरिका: जन-आंदोलनों से; भारत में जनमत संग्रह कभी नहीं हुआ |
| मौलिक प्रावधान | हर व्यक्ति को संविधान मानने का कोई कारण मिलना चाहिए |
| संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा | क्षैतिज बँटवारा: विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, निर्वाचन आयोग |
5 उधार लिए गए प्रावधान
| देश | क्या लिया गया |
|---|---|
| ब्रिटेन | संसदीय स्वरूप, सर्वाधिक मत के आधार पर जीत |
| अमेरिका | मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन |
| आयरलैंड | राज्य के नीति-निर्देशक तत्व |
| फ़्रांस | स्वतंत्रता, समता, बंधुता |
| कनाडा | अवशिष्ट शक्तियाँ, अर्ध-संघीय व्यवस्था |
आख़िरी दोहराव
- सिर्फ़ सार्वभौम वयस्क मताधिकार बिना बहस पारित हुआ, बाक़ी हर मुद्दे पर गहरी बहस हुई
- जर्मनी की पहचान नस्ल पर आधारित थी; भारतीय संविधान नस्ल को नागरिकता का आधार नहीं मानता
- नेपाल में 1948 से पाँच संविधान बने, सभी राजा द्वारा ‘प्रदान’; 2008 में गणराज्य, 2015 में नया संविधान
- उधार लेना अंधी नक़ल नहीं थी, हर प्रावधान भारत की ज़रूरत के हिसाब से जाँचा गया
- भारत का संविधान बाद में दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों के लिए आदर्श बना
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