NCERT की पाठ्यपुस्तक भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार के अध्याय 2 «भारतीय संविधान में अधिकार» की प्रश्नावली के दसों प्रश्न, हिंदी संस्करण की अपनी शब्दावली में, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।
1 सही या ग़लत बताइए
प्र. निम्नलिखित प्रत्येक कथन के बारे में बताएँ कि वह सही है या ग़लत:
(क) अधिकार-पत्र में किसी देश की जनता को हासिल अधिकारों का वर्णन रहता है।
(ख) अधिकार-पत्र व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
(ग) विश्व के हर देश में अधिकार-पत्र होता है।
उत्तर:
(क) सही। अधिकारों का घोषणापत्र ठीक यही है: वह सूची जिसमें संविधान किसी देश की जनता के अधिकार सूचीबद्ध और सुरक्षित करता है।
(ख) सही। व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना, समानता के साथ, घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य है।
(ग) ग़लत। हर देश का लिखित अधिकार-पत्र नहीं होता; कुछ लोकतंत्र परंपरा और साधारण कानून से भी अधिकारों की रक्षा करते हैं।
2 मौलिक अधिकारों का सबसे सटीक वर्णन
प्र. निम्नलिखित में कौन मौलिक अधिकारों का सबसे सटीक वर्णन है?
(क) किसी व्यक्ति को प्राप्त समस्त अधिकार
(ख) कानून द्वारा नागरिक को प्रदत्त समस्त अधिकार
(ग) संविधान द्वारा प्रदत्त और सुरक्षित समस्त अधिकार
(घ) संविधान द्वारा प्रदत्त वे अधिकार जिन पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता
उत्तर: (ग)। मौलिक अधिकार वही हैं जिन्हें संविधान ख़ुद सूचीबद्ध कर सुरक्षित रखता है। विकल्प (क) बहुत व्यापक है, क्योंकि हर वह अधिकार जो व्यक्ति को “मिलना चाहिए” वह मौलिक अधिकार नहीं होता। विकल्प (ख) साधारण कानूनी अधिकार का वर्णन है, जिसे विधायिका साधारण कानून से बदल सकती है, मौलिक अधिकार को नहीं, जिसे सिर्फ़ संशोधन से बदला जा सकता है। विकल्प (घ) ग़लत है क्योंकि मौलिक अधिकार असीमित नहीं हैं, सरकार इन पर औचित्यपूर्ण प्रतिबंध लगा सकती है।
3 कौन-सा मौलिक अधिकार, कैसे
प्र. निम्नलिखित स्थितियों को पढ़ें। प्रत्येक स्थिति के बारे में बताएँ कि किस मौलिक अधिकार का उपयोग या उल्लंघन हो रहा है और कैसे?
(क) राष्ट्रीय एयरलाइन के चालक-परिचालक दल के ऐसे पुरुषों को जिनका वजन ज़्यादा है, नौकरी में तरक्की दी गई लेकिन उनकी ऐसी महिला सहकर्मियों को, जिनका वजन बढ़ गया था, दंडित किया गया।
(ख) एक निर्देशक एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाता है जिसमें सरकारी नीतियों की आलोचना है।
(ग) एक बड़े बाँध के कारण विस्थापित हुए लोग अपने पुनर्वास की माँग करते हुए रैली निकालते हैं।
(घ) आंध्र-सोसायटी आंध्र प्रदेश के बाहर तेलुगु माध्यम के विद्यालय चलाती है।
उत्तर:
(क) यह समता के अधिकार का उल्लंघन है, विशेषतः लिंग के आधार पर भेदभाव के निषेध का। पुरुषों पर लागू नियम को महिलाओं पर सख़्ती से लागू करना ठीक वैसा ही भेदभाव है जिसे रोकने के लिए यह अधिकार बना है।
(ख) यह स्वतंत्रता के अधिकार का वैध प्रयोग है, विशेषतः भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का। डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए सरकारी नीति की आलोचना अभिव्यक्ति का ही एक रूप है, जिसे संविधान लोक-व्यवस्था जैसी औचित्यपूर्ण सीमाओं के अलावा सुरक्षित रखता है।
(ग) यह स्वतंत्रता के अधिकार का वैध प्रयोग है, विशेषतः शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता का। पुनर्वास की माँग करती रैली शांतिपूर्ण विरोध है, जिसे संविधान तब तक सुरक्षित रखता है जब तक वह शांतिपूर्ण और बिना हथियार के हो।
(घ) यह सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार का वैध प्रयोग है। एक भाषाई समुदाय (आंध्र प्रदेश के बाहर तेलुगु-भाषी अल्पसंख्यक) को अपनी भाषा सुरक्षित रखने और उसे पढ़ाने के लिए अपने शिक्षण संस्थान खोलने का अधिकार है।
4 सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की सही व्याख्या
प्र. निम्नलिखित में कौन सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की सही व्याख्या है?
(क) शैक्षिक-संस्था खोलने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के ही बच्चे इस संस्थान में पढ़ाई कर सकते हैं।
(ख) सरकारी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अल्पसंख्यक-वर्ग के बच्चों को उनकी संस्कृति और धर्म-विश्वासों से परिचित कराया जाए।
(ग) भाषाई और धार्मिक-अल्पसंख्यक अपने बच्चों के लिए विद्यालय खोल सकते हैं और उनके लिए इन विद्यालयों को आरक्षित कर सकते हैं।
(घ) भाषाई और धार्मिक-अल्पसंख्यक यह माँग कर सकते हैं कि उनके बच्चे उनके द्वारा संचालित शैक्षणिक-संस्थाओं के अतिरिक्त किसी अन्य संस्थान में नहीं पढ़ेंगे।
उत्तर: (ग)। सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा और संस्कृति सुरक्षित रखने के लिए अपने शिक्षण संस्थान खोलने की अनुमति देते हैं। विकल्प (क) ग़लत है क्योंकि अल्पसंख्यक-प्रबंधित संस्थान सिर्फ़ अपने समुदाय के बच्चों तक सीमित नहीं होता। विकल्प (ख) ग़लत है क्योंकि सरकारी संस्थाओं को धर्म के मामले में निष्पक्ष रहना होता है, वे किसी अल्पसंख्यक की मान्यताएँ सिखाने के लिए बाध्य नहीं हैं। विकल्प (घ) ग़लत है क्योंकि अल्पसंख्यकों को अपने स्कूल खोलने का अधिकार है, पर बच्चों को हर दूसरे संस्थान से बाहर रखने पर ज़ोर देने का अधिकार नहीं।
5 उल्लंघन और उसका कारण
प्र. इनमें कौन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और क्यों?
(क) न्यूनतम देय मज़दूरी नहीं देना।
(ख) किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना।
(ग) 9 बजे रात के बाद लाऊड-स्पीकर बजाने पर रोक लगाना।
(घ) भाषण तैयार करना।
उत्तर:
(क) उल्लंघन है। न्यूनतम मज़दूरी से कम देना बेगार है, जो शोषण के विरुद्ध अधिकार का उल्लंघन करता है, ठीक वैसे जैसे इसी अध्याय में एशियाई खेलों के मज़दूरों के मामले में हुआ।
(ख) कारण पर निर्भर करता है। किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना स्वतंत्रता के अधिकार (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है, जब तक वह लोक-व्यवस्था या नैतिकता जैसी औचित्यपूर्ण सीमा के तहत न हो; बिना कारण की मनमानी पाबंदी उल्लंघन होगी।
(ग) उल्लंघन नहीं है। यह भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लोक-व्यवस्था और रात में दूसरे नागरिकों की शांति के हित में लगी एक औचित्यपूर्ण पाबंदी है, जिसकी संविधान इजाज़त देता है।
(घ) उल्लंघन नहीं है। भाषण तैयार करना ख़ुद स्वतंत्रता के अधिकार (भाषण की स्वतंत्रता) का प्रयोग है, किसी के अधिकार का उल्लंघन नहीं, जब तक उसकी सामग्री हिंसा भड़काने जैसी किसी औचित्यपूर्ण सीमा को न तोड़े।
6 गरीबों को क्या चाहिए: मौलिक अधिकार या नीति-निर्देशक तत्व?
प्र. गरीबों के बीच काम कर रहे एक कार्यकर्त्ता का कहना है कि गरीबों को मौलिक अधिकारों की ज़रूरत नहीं है। उनके लिए ज़रूरी यह है कि नीति-निर्देशक सिद्धांतों को कानूनी तौर पर बाध्यकारी बना दिया जाए। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर का कारण बताएँ।
उत्तर: पूरी तरह नहीं। कार्यकर्त्ता की बात में दम है: काम के अधिकार जैसा नीति-निर्देशक तत्व अगर कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाए तो किसी गरीब व्यक्ति की ज़िंदगी सीधे बदल जाएगी, जबकि किसी अमूर्त कानूनी गारंटी के लिए अदालत में मुकदमा लड़ना उसके लिए आसान नहीं। पर मौलिक अधिकार भी गरीबों के लिए बेकार नहीं हैं: इसी अध्याय के एशियाई खेलों के मज़दूरों के मामले में, शोषण के विरुद्ध उनके मौलिक अधिकार को अदालत में चुनौती दिए जाने पर उन्हें उनकी बकाया मज़दूरी मिल गई। कई नीति-निर्देशक तत्व, जैसे शिक्षा का अधिकार, पंचायती राज और मिड-डे मील योजना, वाद योग्य बनाए बिना ही साधारण कानून और राजनीतिक दबाव से लागू हो चुके हैं। एक संतुलित निष्कर्ष यह है कि गरीबों को दोनों चाहिए: मौलिक अधिकार जो सीधे शोषण से बचाते हैं, और नीति-निर्देशक तत्व जो सरकार को कल्याणकारी क़दमों की ओर धकेलते हैं।
7 झाड़ू लगाने के काम में मजबूर जातियाँ
प्र. अनेक रिपोर्टों से पता चलता है कि जो जातियाँ पहले झाड़ू देने के काम में लगी थीं उन्हें अब भी मज़बूरन यही काम करना पड़ रहा है। जो लोग अधिकार-पद पर बैठे हैं वे इन्हें कोई और काम नहीं देते। इनके बच्चों को पढ़ाई-लिखाई करने पर हतोत्साहित किया जाता है। इस उदाहरण में किस मौलिक-अधिकार का उल्लंघन हो रहा है?
उत्तर: इसमें एक से ज़्यादा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। पहला, समता का अधिकार टूटता है: सिर्फ़ जाति के आधार पर किसी को कोई और काम न देना ठीक वही जातिगत भेदभाव है जिसे यह अधिकार रोकता है, और यह छूआछूत के अंत से भी गहरा जुड़ा है। दूसरा, अगर उन्हें अपनी मर्ज़ी के विरुद्ध यह काम करने पर मजबूर किया जाता है, तो शोषण के विरुद्ध अधिकार का भी उल्लंघन होता है, क्योंकि जाति से जुड़ा जबरन या अपमानजनक काम भी एक तरह का शोषण है। तीसरा, बच्चों को पढ़ाई से हतोत्साहित करना शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, और साथ ही समता के अधिकार को भी कमज़ोर करता है, क्योंकि इससे अगली पीढ़ी भी उसी स्थिति में फँसी रह जाती है।
8 भूखमरी और भारतीय खाद्य निगम
प्र. एक मानवाधिकार-समूह ने अपनी याचिका में अदालत का ध्यान देश में मौजूद भूखमरी की स्थिति की तरफ खींचा। भारतीय खाद्य-निगम के गोदामों में 5 करोड़ टन से ज़्यादा अनाज भरा हुआ था। शोध से पता चलता है कि अधिकांश राशन-कार्डधारी यह नहीं जानते कि उचित-मूल्य की दुकानों से कितनी मात्रा में वे अनाज खरीद सकते हैं। मानवाधिकार समूह ने अपनी याचिका में अदालत से निवेदन किया कि वह सरकार को सार्वजनिक-वितरण-प्रणाली में सुधार करने का आदेश दे।
(क) इस मामले में कौन-कौन से अधिकार शामिल हैं? ये अधिकार आपस में किस तरह जुड़े हैं?
(ख) क्या ये अधिकार जीवन के अधिकार का एक अंग हैं?
उत्तर:
(क) इसमें संवैधानिक उपचारों का अधिकार (समूह का अदालत जाना), सूचना पाने का अधिकार (राशन-कार्डधारियों को अपने हक़ की मात्रा न पता होना), और भोजन का अधिकार (जो निहित रूप से इसमें शामिल है) जुड़े हैं। ये आपस में इस तरह जुड़े हैं कि सूचना का अधिकार बाक़ी अधिकारों को असल में इस्तेमाल करने योग्य बनाता है: जिस राशन-कार्डधारी को अपना हक़ ही पता नहीं, वह उसकी माँग नहीं कर सकता, इसलिए समुचित भोजन का अधिकार सिर्फ़ अनाज की कमी से नहीं, बल्कि सूचना और वितरण-व्यवस्था की कमी से भी छिन जाता है, और अदालत की शक्ति ही इन सबको जोड़कर एक उपचार दे सकती है।
(ख) हाँ। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार में आश्रय और आजीविका का अधिकार शामिल कर चुका है, इस तर्क पर कि आजीविका के साधनों के बिना कोई असल में जी नहीं सकता। समुचित भोजन तक पहुँच पर भी यही तर्क लागू होता है: बिना पर्याप्त भोजन के कोई व्यक्ति गरिमा के साथ, या बिल्कुल भी, नहीं जी सकता, इसलिए भूखमरी के विरुद्ध अधिकार जीवन के अधिकार का ही स्वाभाविक विस्तार है, जिसे अदालतें पहले ही मान चुकी हैं।
9 सोमनाथ लाहिड़ी का वक्तव्य
प्र. इस अध्याय में उद्धृत सोमनाथ लाहिड़ी द्वारा संविधान-सभा में दिए गए वक्तव्य को पढ़ें। क्या आप उनके कथन से सहमत हैं? यदि हाँ तो इसकी पुष्टि में कुछ उदाहरण दें। यदि नहीं तो उनके कथन के विरुद्ध तर्क प्रस्तुत करें।
उत्तर: एक संतुलित उत्तर न तो पूरी तरह सहमत होता है, न पूरी तरह असहमत। लाहिड़ी ने कहा था कि मौलिक अधिकार एक सिपाही के नज़रिए से बनाए गए हैं, बहुत कम अधिकार दिए गए हैं और लगभग हर अनुच्छेद के बाद एक ऐसा उपबंध है जो उस अधिकार को लगभग पूरी तरह वापस ले लेता है। इसमें सच्चाई है: भाषण की स्वतंत्रता पर लोक-व्यवस्था और नैतिकता के आधार पर पाबंदी है, सभा की स्वतंत्रता पर पाँच या ज़्यादा लोगों को ग़ैर-कानूनी घोषित करने की शक्ति है, और निवारक नज़रबंदी बिना मुकदमे के तीन महीने तक हिरासत की इजाज़त देती है, जिसका अध्याय ख़ुद कहता है कि सरकारों ने अक्सर आम आलोचकों के विरुद्ध दुरुपयोग किया है। पर इसके उलट भी दलील है: बिना किसी पाबंदी वाला अधिकार एक व्यक्ति की स्वतंत्रता को हर किसी की स्वतंत्रता के लिए ख़तरा बना देगा, इसीलिए अध्याय स्वतंत्रता को दूसरों की स्वतंत्रता को नुकसान पहुँचाए बिना परिभाषित करता है। इसलिए सही निष्कर्ष यह है कि लाहिड़ी पाबंदियों के व्यापक होने के बारे में सही थे, पर यह कहना ग़लत होगा कि इससे अधिकार बेमानी हो गए: संवैधानिक उपचारों के अधिकार और 1950 से न्यायपालिका के फ़ैसलों ने बार-बार अधिकारों को बढ़ाया है, न कि पाबंदियों को उन्हें निगलने दिया है।
10 सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार
प्र. आपके अनुसार कौन-सा मौलिक अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है? इसके प्रावधानों को संक्षेप में लिखें और तर्क देकर बताएँ कि यह क्यों महत्वपूर्ण है।
उत्तर: संवैधानिक उपचारों के अधिकार (अनुच्छेद 32) का दावा सबसे मज़बूत है, जिसे डॉ. अंबेडकर ने ख़ुद “संविधान का हृदय और आत्मा” कहा था। यह किसी भी नागरिक को अपने मौलिक अधिकार के उल्लंघन पर सीधे उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय जाने देता है, और अदालत बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध आदेश, अधिकार पृच्छा और उत्प्रेषण, इन पाँच रिट में से कोई भी जारी कर सकती है। यह सबसे ज़रूरी इसलिए है क्योंकि हर दूसरे मौलिक अधिकार की असली ताक़त इसी पर निर्भर करती है: मचल लालुँग का 54 साल हिरासत में रहना दिखाता है कि बिना लागू करवाने के रास्ते के एक अधिकार का क्या हश्र होता है, जबकि एशियाई खेलों के मज़दूरों का मामला दिखाता है कि जब अधिकार लागू हो सके तो क्या होता है। बाक़ी हर मौलिक अधिकार एक ख़ास तरह के नुकसान से बचाता है, पर यह अधिकार बाक़ी सबको असली बनाने की क्षमता की रक्षा करता है, इसीलिए इसे खोना किसी और एक अधिकार को खोने से कहीं ज़्यादा नुकसानदायक होगा।