परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, संख्याएँ, तारीख़ें और तालिकाएँ। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 छह मौलिक अधिकार, एक नज़र में
मौलिक अधिकार (भाग 3)
1 · समताकोई भेदभाव नहीं, अवसर की समानता
2 · स्वतंत्रताभाषण, आवागमन, जीवन, स्वतंत्रता
3 · शोषण के विरुद्धबेगार नहीं, बाल-मज़दूरी नहीं
4 · धार्मिक स्वतंत्रताआस्था, आचरण, प्रचार
5 · सांस्कृतिक-शैक्षिकअल्पसंख्यकों की भाषा और स्कूल
6 · संवैधानिक उपचारबाक़ी सभी अधिकारों को लागू करवाने वाला अधिकार
2 याद रखने लायक़ संख्याएँ और तारीख़ें
54साल मचल लालुँग बिना मुकदमे के हिरासत में रहा
24घंटे में गिरफ़्तार व्यक्ति को न्यायाधीश के सामने पेश करना ज़रूरी
5रिट जो अदालतें जारी कर सकती हैं
| वर्ष | क्या हुआ |
|---|---|
| 1928 | मोतीलाल नेहरू समिति अधिकारों के घोषणापत्र की माँग करती है |
| 1950 | संपत्ति के अधिकार को सीमित करने वाले कानून शुरू होते हैं |
| 1973 | केशवानन्द भारती मुकदमा: संपत्ति का अधिकार मूल ढाँचे का हिस्सा नहीं |
| 1976 | 42वाँ संशोधन 10 मौलिक कर्त्तव्य जोड़ता है |
| 1978 | 44वाँ संशोधन संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300(क) बनाता है |
| 1993 | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना |
| 1996 | दक्षिण अफ़्रीका का संविधान और उसका घोषणापत्र लागू |
3 पाँच रिट
| रिट | क्या करती है |
|---|---|
| बंदी प्रत्यक्षीकरण | गिरफ़्तार व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करती है |
| परमादेश | अधिकारी को उसका कानूनी कर्त्तव्य निभाने का आदेश देती है |
| निषेध आदेश | निचली अदालत को अधिकार-क्षेत्र से बाहर जाने से रोकती है |
| अधिकार पृच्छा | अपात्र व्यक्ति को पद से रोकती है |
| उत्प्रेषण | लंबित मामले को ऊपर की अदालत में भेजती है |
4 परिभाषाएँ, ठीक जैसी लिखनी हैं
सारी परिभाषाएँ एक जगह
अधिकारों का घोषणापत्रनागरिकों के अधिकारों की वह सूची जिसे संविधान ख़ुद सूचीबद्ध कर, सुरक्षित रखता है और उल्लंघन पर उपचार की गारंटी देता है
मौलिक अधिकारसंविधान द्वारा अलग से सूचीबद्ध और सुरक्षित अधिकार, जिन्हें सिर्फ़ संविधान संशोधन से बदला जा सकता है
निवारक नज़रबंदीभविष्य के ग़ैर-कानूनी काम की आशंका पर, बिना मुकदमे के, अधिकतम 3 महीने तक हिरासत में रखना
राज्य के नीति-निर्देशक तत्वसंविधान में लिखे गए सरकार के लिए वाद-योग्य न होने वाले दिशा-निर्देश
मूल ढाँचे का सिद्धांतसर्वोच्च न्यायालय का यह नियम कि संविधान की कुछ बुनियादी विशेषताएँ संसद बदल नहीं सकती
रिटमौलिक अधिकार लागू करवाने के लिए उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का विशेष आदेश
धर्मनिरपेक्षताराज्य सभी धर्मों के साथ समान बर्ताव करता है, किसी को तरजीह नहीं देता
अल्पसंख्यकसाझी भाषा या धर्म वाला ऐसा समूह जो किसी क्षेत्र या पूरे देश में संख्या के हिसाब से किसी अन्य समूह से छोटा हो
5 नीति-निर्देशक तत्व, तीन कॉलम में
| लक्ष्य | ऐसे अधिकार जो वाद योग्य नहीं | नीतियाँ |
|---|---|---|
| जनता का कल्याण | समुचित जीविका | समान नागरिक संहिता |
| सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक न्याय | समान काम की समान मज़दूरी | शराब पीने पर प्रतिबंध |
| जीवन-स्तर ऊँचा उठाना | आर्थिक शोषण के विरुद्ध अधिकार | कुटीर उद्योगों को बढ़ावा |
| अंतर्राष्ट्रीय शांति | काम का अधिकार | ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन |
झटपट दोहराव: परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें
- अधिकारों का घोषणापत्र संविधान के अंदर ही नागरिकों के अधिकार सूचीबद्ध और सुरक्षित करता है
- भारत में छह मौलिक अधिकार हैं: समता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक-शैक्षिक अधिकार, संवैधानिक उपचार
- अनुच्छेद 21 जीवन और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है; गिरफ़्तारी के बाद 24 घंटे में न्यायाधीश के सामने पेशी ज़रूरी
- निवारक नज़रबंदी: अधिकतम 3 महीने, फिर सलाहकार बोर्ड की समीक्षा
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार 5 रिट से काम करता है: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध आदेश, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (1993) जाँच और सिफ़ारिश कर सकता है, मुकदमा नहीं चला सकता
- नीति-निर्देशक तत्व नीति की दिशा देते हैं, पर अदालत से लागू नहीं करवाए जा सकते
- 42वें संशोधन (1976) ने 10 मौलिक कर्त्तव्य जोड़े, अधिकारों को इनकी शर्त पर नहीं बाँधा
- संपत्ति का अधिकार 1978 (44वें संशोधन) तक मौलिक अधिकार था, अब अनुच्छेद 300(क) के तहत साधारण अधिकार है
- केशवानन्द भारती मुकदमा: संसद संविधान का मूल ढाँचा नहीं बदल सकती
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