इस अध्याय के 25 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, हर परीक्षा-शैली में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकराजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका में क्या फ़र्क़ है?
(क) राजनीतिक कार्यपालिका चुनाव से बदलती है, स्थायी कार्यपालिका सरकार बदलने पर भी बनी रहती है(ख) दोनों एक ही चीज़ हैं(ग) स्थायी कार्यपालिका सिर्फ़ राष्ट्रपति को कहते हैं(घ) राजनीतिक कार्यपालिका सिर्फ़ राज्यों में होती है - 1 अंककिस व्यवस्था में राष्ट्रपति देश का प्रधान और सरकार का प्रधान, दोनों होता है?
(क) संसदीय व्यवस्था(ख) अर्द्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था(ग) राजतंत्र(घ) अध्यक्षात्मक व्यवस्था - 1 अंकमंत्रिपरिषद् की सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी है, यह किस अनुच्छेद में कहा गया है?
(क) अनुच्छेद 61(ख) अनुच्छेद 72(ग) अनुच्छेद 74(घ) अनुच्छेद 78 - 1 अंकभारत के राष्ट्रपति का चुनाव किस पद्धति से होता है?
(क) सर्वाधिक मत से जीत (FPTP)(ख) सीधे जनता द्वारा(ग) लोक सभा द्वारा साधारण बहुमत से(घ) समानुपातिक प्रतिनिधित्व, एकल संक्रमणीय मत से - 1 अंकपॉकेट वीटो का असली उदाहरण किस विधेयक से जुड़ा है?
(क) नागरिकता संशोधन विधेयक(ख) सूचना का अधिकार विधेयक(ग) महिला आरक्षण विधेयक(घ) भारतीय पोस्ट ऑफिस (संशोधन) विधेयक, 1986 - 1 अंक1998 में किस राष्ट्रपति ने वाजपेयी से समर्थन के काग़ज़ माँगे थे?
(क) ज्ञानी जैल सिंह(ख) वेंकटरमण(ग) के.आर. नारायणन(घ) प्रणब मुखर्जी - 1 अंकराष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु पर कौन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे?
(क) बी.डी. जत्ती(ख) के.आर. नारायणन(ग) वेंकटरमण(घ) ज्ञानी जैल सिंह - 1 अंक91वें संविधान संशोधन (2003) से मंत्रिपरिषद् का आकार अब कितना हो सकता है?
(क) सदन के 10% सदस्यों से ज़्यादा नहीं(ख) सदन के 20% सदस्यों से ज़्यादा नहीं(ग) सदन के 15% सदस्यों से ज़्यादा नहीं(घ) कोई सीमा नहीं - 1 अंकसामूहिक उत्तरदायित्व का क्या मतलब है?
(क) हर मंत्री अकेले अपने विभाग के लिए ज़िम्मेदार है(ख) राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् के लिए ज़िम्मेदार है(ग) पूरी मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति ज़िम्मेदार है(घ) मंत्रिपरिषद् राज्य सभा के प्रति ज़िम्मेदार है - 1 अंकप्रधानमंत्री को नेहरू ने किस नाम से वर्णित किया?
(क) सरकार का मुखिया(ख) सरकार का लिंचपिन (धुरी)(ग) सरकार का प्रतीक(घ) सरकार का सेवक - 1 अंककेंद्र सरकार के लिए सिविल सेवकों की भर्ती कौन करता है?
(क) राज्य लोक सेवा आयोग(ख) निर्वाचन आयोग(ग) परिसीमन आयोग(घ) संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) - 1 अंकसिविल सेवा में शुरू में किसके लिए आरक्षण दिया गया था?
(क) महिलाओं के लिए(ख) SC और ST के लिए(ग) OBC के लिए(घ) EWS के लिए - 1 अंकराज्य स्तर पर मुख्यमंत्री के मुक़ाबले किसके पास अपने विवेक का इस्तेमाल करने की ज़्यादा गुंजाइश होती है?
(क) मुख्य सचिव(ख) राज्यपाल(ग) विधानसभा अध्यक्ष(घ) महाधिवक्ता
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् की सलाह को हमेशा तुरंत मानने के लिए बाध्य है।
कारण (R): राष्ट्रपति सलाह पर पुनर्विचार के लिए कह सकता है, पर पुनर्विचार के बाद आई सलाह माननी पड़ती है।
(क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सही है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सही है - 1 अंकअभिकथन (A): भारत की नौकरशाही राजनीतिक रूप से तटस्थ रहने की अपेक्षा रखती है।
कारण (R): नौकरशाही सरकार बदलने पर भी नई सरकार की नीतियाँ ईमानदारी से लागू करती है।
(क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं करता(ग) A सही है, पर R असत्य है(घ) A असत्य है, पर R सही है
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए।
सूची I: (i) अमेरिका (ii) भारत (iii) फ्रांस (iv) श्रीलंका
सूची II: (अ) अध्यक्षात्मक (ब) संसदीय (स) अर्द्ध-अध्यक्षात्मक (द) कार्यकारी राष्ट्रपति व्यवस्था
(क) i-अ, ii-ब, iii-स, iv-द(ख) i-ब, ii-अ, iii-स, iv-द(ग) i-अ, ii-ब, iii-द, iv-स(घ) i-स, ii-ब, iii-अ, iv-द - 1 अंकसूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए।
सूची I: (i) भारतीय विदेश सेवा (ii) राज्य लोक सेवा (iii) अखिल भारतीय सेवाएँ (iv) केंद्रीय सेवाएँ
सूची II: (अ) केंद्र के दफ़्तरों में काम, राजधानी या कहीं और (ब) विदेशों में भारत के लिए कार्यरत (स) जिस प्रदेश में भेजा जाए वहाँ काम, प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में भी (द) जिस प्रदेश में बहाली हो उसी में काम
(क) i-द, ii-ब, iii-स, iv-अ(ख) i-ब, ii-स, iii-द, iv-अ(ग) i-ब, ii-द, iii-स, iv-अ(घ) i-ब, ii-द, iii-अ, iv-स
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: राष्ट्रपति के पास औपचारिक रूप से कार्यपालिका, विधायी, न्यायिक और आपातकालीन शक्तियों की बड़ी सूची है।
कथन II: व्यवहार में राष्ट्रपति ये शक्तियाँ मंत्रिपरिषद् की सलाह पर ही इस्तेमाल करता है।
(क) दोनों कथन सही हैं, और कथन II स्पष्ट करता है कि कथन I व्यवहार में कैसे लागू होता है(ख) दोनों कथन सही हैं पर असंबंधित हैं(ग) कथन I असत्य है, कथन II सही है(घ) दोनों कथन असत्य हैं - 1 अंककथन I: 1989 के बाद प्रधानमंत्री की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी।
कथन II: गठबंधन सरकारों में सहयोगी दलों से लगातार बातचीत करनी पड़ती है।
(क) दोनों कथन सही हैं और कथन II, कथन I की व्याख्या करता है(ख) कथन I सही है, कथन II असत्य है(ग) कथन I असत्य है, कथन II सही है(घ) दोनों कथन असत्य हैं
5 काल-क्रम प्रश्न
काल-क्रम प्रश्न
- 1 अंकपोस्ट ऑफिस विधेयक से जुड़ी घटनाओं को सही क्रम में लगाइए।
1. वेंकटरमण ने विधेयक पुनर्विचार के लिए लौटाया
2. संसद ने विधेयक पारित किया
3. नई गठबंधन सरकार ने विधेयक दोबारा पेश नहीं किया
4. ज्ञानी जैल सिंह ने कोई फ़ैसला नहीं लिया
(क) 2-4-1-3(ख) 2-1-4-3(ग) 4-2-1-3(घ) 2-4-3-1
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंकराष्ट्रपति द्वारा किसी विधेयक को बिना समय-सीमा के लंबित रखने की अनौपचारिक शक्ति को ______ कहते हैं।
(क) पूर्ण वीटो(ख) पॉकेट वीटो(ग) निलंबनकारी वीटो(घ) गुणात्मक वीटो
7 असंगत चुनिए
असंगत चुनिए
- 1 अंकनिम्न में से कौन-सा देश अर्द्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था का उदाहरण नहीं है?
(क) फ्रांस(ख) रूस(ग) श्रीलंका(घ) जर्मनी
8 गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
1986 में संसद ने भारतीय पोस्ट ऑफिस (संशोधन) विधेयक पारित किया, जिसकी आलोचना हुई क्योंकि यह प्रेस की स्वतंत्रता को बाधित करता था। उस समय के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने इस पर न तो स्वीकृति दी और न ही इसे लौटाया, पूरे शेष कार्यकाल में कोई फ़ैसला नहीं लिया। बाद में आए राष्ट्रपति वेंकटरमण ने इसे पुनर्विचार के लिए संसद को भेज दिया, पर तब तक सत्ता-परिवर्तन हो चुका था। 1989 में सत्ता में आई नई गठबंधन सरकार ने इस विधेयक को दोबारा पेश ही नहीं किया, इसलिए यह अंततः क़ानून नहीं बन सका।
- 1 अंकगद्यांश के अनुसार पोस्ट ऑफिस विधेयक का अंतिम नतीजा क्या हुआ?
(क) यह क़ानून बन गया(ख) यह कभी क़ानून नहीं बन सका(ग) सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया(घ) राज्य सभा ने इसे अस्वीकार कर दिया
गद्यांश
1989 के बाद से भारत ने कई गठबंधन सरकारें देखी हैं, और इनमें से कई पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं। इसका प्रधानमंत्री पद पर चार तरह का असर पड़ा है। पहला, प्रधानमंत्री चुनने में राष्ट्रपति की भूमिका बढ़ी। दूसरा, गठबंधन साझेदारों से लगातार बातचीत करनी पड़ती है, जिससे प्रधानमंत्री का अधिकार घटा। तीसरा, मंत्री और उनके विभाग चुनने की प्रधानमंत्री की छूट भी सीमित हुई। चौथा, नीतियाँ और कार्यक्रम अब सिर्फ़ प्रधानमंत्री तय नहीं करता, सहयोगी दलों से बातचीत और समझौते के बाद बनते हैं।
- 1 अंकगद्यांश के अनुसार गठबंधन युग का प्रधानमंत्री पद पर पहला असर क्या है?
(क) नीति-निर्माण आसान हुआ(ख) मंत्रियों की संख्या घटी(ग) प्रधानमंत्री चुनने में राष्ट्रपति की भूमिका बढ़ी(घ) चुनाव कम हुए
9 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंकनिम्न कथनों पर विचार कीजिए।
(i) राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, दोनों का कार्यकाल 5 वर्ष है।
(ii) उपराष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधान सभाओं के सदस्य भी वोट डालते हैं।
(क) केवल (i) सत्य है(ख) दोनों सत्य हैं(ग) केवल (ii) सत्य है(घ) दोनों असत्य हैं
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न1. (क): राजनीतिक कार्यपालिका (सरकार का प्रधान और मंत्री) चुनाव के साथ बदलती रहती है, जबकि स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाही) सरकार बदलने पर भी बनी रहती है। · 2. (घ): अध्यक्षात्मक व्यवस्था में राष्ट्रपति देश का प्रधान भी होता है और सरकार का प्रधान भी, जैसे अमेरिका में। · 3. (ग): अनुच्छेद 74(1) कहता है कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद् होगी जो राष्ट्रपति को सलाह देगी, और राष्ट्रपति उस सलाह के अनुसार कार्य करेगा। · 4. (घ): राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है, निर्वाचित सांसदों और विधायकों द्वारा, समानुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत पद्धति से। · 5. (घ): 1986 के भारतीय पोस्ट ऑफिस (संशोधन) विधेयक पर राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने कोई फ़ैसला नहीं लिया, यह पॉकेट वीटो का असली उदाहरण है। · 6. (ग): 1998 में राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने अटल बिहारी वाजपेयी से संबंधित दलों के समर्थन-पत्र माँगे थे। · 7. (क): बी.डी. जत्ती ने फखरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु पर नया राष्ट्रपति चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में काम किया। · 8. (ग): 91वें संविधान संशोधन के बाद मंत्रिपरिषद् का आकार लोक सभा या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं हो सकता। · 9. (ग): सामूहिक उत्तरदायित्व का मतलब है कि पूरी मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति ज़िम्मेदार है, एक मंत्री पर अविश्वास प्रस्ताव भी सबको गिरा देता है। · 10. (ख): नेहरू ने प्रधानमंत्री को सरकार का ‘लिंचपिन’ यानी धुरी बताया था। · 11. (घ): संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) केंद्र सरकार के लिए सिविल सेवकों की भर्ती करता है। · 12. (ख): संविधान ने शुरू में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण दिया, बाद में महिला, OBC और EWS भी जोड़े गए। · 13. (ख): केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री के मुक़ाबले अपने विवेक का इस्तेमाल करने की गुंजाइश ज़्यादा होती है।
अभिकथन-कारण1. (घ): A असत्य है, राष्ट्रपति सलाह पर तुरंत नहीं, पहले पुनर्विचार के लिए कह सकता है। R सही है, यही पुनर्विचार की प्रक्रिया है। · 2. (क): दोनों कथन सही हैं, और R ही वह तरीक़ा है जिससे नौकरशाही की राजनीतिक तटस्थता व्यवहार में दिखती है।
सुमेलन कीजिए1. (क): अमेरिका अध्यक्षात्मक, भारत संसदीय, फ्रांस अर्द्ध-अध्यक्षात्मक, और श्रीलंका की अपनी कार्यकारी राष्ट्रपति व्यवस्था है। · 2. (ग): भारतीय विदेश सेवा विदेशों में काम करती है, राज्य लोक सेवा उसी प्रदेश में, अखिल भारतीय सेवाएँ किसी भी प्रदेश में भेजी जा सकती हैं, केंद्रीय सेवाएँ केंद्र के दफ़्तरों में काम करती हैं।
कथन आधारित प्रश्न1. (क): दोनों कथन सही हैं, कथन I संविधान की औपचारिक स्थिति बताता है और कथन II यह स्पष्ट करता है कि व्यवहार में यह शक्ति कैसे इस्तेमाल होती है। · 2. (ग): कथन I असत्य है, गठबंधन युग में प्रधानमंत्री की स्वतंत्र निर्णय क्षमता घटी है, बढ़ी नहीं। कथन II सही है और यही इसका कारण है।
काल-क्रम प्रश्न1. (क): पहले संसद ने विधेयक पारित किया, फिर जैल सिंह ने कोई फ़ैसला नहीं लिया, बाद में वेंकटरमण ने लौटाया, और अंत में नई सरकार ने इसे दोबारा पेश नहीं किया।
रिक्त स्थान1. (ख): इसे पॉकेट वीटो कहते हैं, क्योंकि संविधान में विधेयक लौटाने की कोई समय-सीमा तय नहीं है।
असंगत चुनिए1. (घ): जर्मनी संसदीय व्यवस्था का उदाहरण है, अर्द्ध-अध्यक्षात्मक का नहीं। फ्रांस, रूस और श्रीलंका सभी अर्द्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था के उदाहरण हैं।
गद्यांश आधारित प्रश्न1. (ख): गद्यांश बताता है कि नई गठबंधन सरकार ने विधेयक दोबारा पेश नहीं किया, इसलिए यह कभी क़ानून नहीं बन सका। · 2. (ग): गद्यांश के अनुसार पहला असर यह है कि प्रधानमंत्री चुनने में राष्ट्रपति की भूमिका बढ़ी है।
सत्य-असत्य1. (क): दोनों का कार्यकाल 5 वर्ष है, यह सही है। पर उपराष्ट्रपति के चुनाव-मंडल में राज्य विधान सभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते।
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