कक्षा 12 भूगोल अध्याय 14 शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: सभी परिभाषाएँ, नियोजन कार्यक्रमों की तालिकाएँ, भरमौर और इंदिरा गांधी नहर के केस-स्टडी तथ्य, और सतत पोषणीय विकास के सात उपाय। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 पाँच परिभाषाएँ जो कंठस्थ करनी हैं

याद कर लेंपरिभाषा 1

खंडीय नियोजन अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों (कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, ऊर्जा, परिवहन, संचार आदि) के विकास के लिए कार्यक्रम बनाना और लागू करना है।

याद कर लेंपरिभाषा 2

प्रादेशिक नियोजन विकास के असमान प्रतिरूप को देखते हुए एक स्थानिक परिप्रेक्ष्य अपनाकर प्रादेशिक असंतुलन कम करने के लिए बनाई गई योजना है।

याद कर लेंपरिभाषा 3

लक्ष्य क्षेत्र नियोजन आर्थिक रूप से पिछड़े भौगोलिक क्षेत्रों के लिए बनाई गई योजना है; लक्ष्य समूह नियोजन समाज के विशेष वर्गों (जैसे लघु व सीमांत किसान) के लिए बनाई गई योजना है।

याद कर लेंपरिभाषा 4

सतत पोषणीय विकास (ब्रंटलैंड रिपोर्ट, 1987): वह विकास जिसमें भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकता-पूर्ति की क्षमता को प्रभावित किए बिना वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।

याद कर लेंपरिभाषा 5

आई-टी-डी-पी (ITDP) यानी समन्वित जनजातीय विकास परियोजना, जनजातीय क्षेत्रों (जैसे भरमौर) के विकास और उनके व अन्य क्षेत्रों के बीच के अंतर को कम करने के लिए बनाई गई विशेष क्षेत्र योजना है।

2 नियोजन के कार्यक्रम, एक तालिका में

कार्यक्रम शुरू हुआ मुख्य फोकस
सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम चौथी पंचवर्षीय योजना रोज़गार + उत्पादक संपत्ति; बाद में सिंचाई, वनीकरण, चरागाह, जल-संभर विकास
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम पाँचवीं पंचवर्षीय योजना बागवानी, रोपण कृषि, पशुपालन, वानिकी, लघु/ग्रामीण उद्योग
भरमौर तहसील की जनजातीय उप-योजना (ITDP) 1974 (पाँचवीं योजना) परिवहन-संचार, कृषि, सामाजिक सेवाएँ
विशिष्ट क्षेत्र कार्यक्रम (पर्वतीय/उ.पू./जनजातीय/पिछड़े क्षेत्र) आठवीं पंचवर्षीय योजना अवसंरचना विकास
परीक्षा संकेत

लक्ष्य-क्षेत्र कार्यक्रमों के उदाहरण किताब में तीन नाम से दिए गए हैं: कमान क्षेत्र विकास, सूखा संभावी क्षेत्र, और पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम। लक्ष्य-समूह के उदाहरण हैं: लघु कृषक विकास संस्था (SFDA) और सीमांत किसान विकास संस्था (MFDA)।

स्वतंत्रता के बाद नियोजन: पहले केंद्रीकृत योजनाएँ अपनाई गईं, फिर धीरे-धीरे विकेंद्रीकृत बहुस्तरीय नियोजन (केंद्र, राज्य, जिला तीनों स्तर) की ओर कदम बढ़ाए गए।

3 पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, संख्याओं में

  • पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में शुरू, कुल 15 ज़िले शामिल
  • ज़िले: उत्तराखंड के सभी पर्वतीय ज़िले, असम की मिकिर पहाड़ी व उत्तरी कछार पहाड़ियाँ, दार्जिलिंग (प.बंगाल), नीलगिरी (तमिलनाडु)
  • 1981 की राष्ट्रीय समिति का मापदंड: ऊँचाई 600 मीटर से अधिक और जनजातीय उप-योजना से बाहर के क्षेत्र
  • राष्ट्रीय समिति के 6 सुझाव: सभी लाभान्वित हों, स्थानीय संसाधन-प्रतिभा विकास, निर्वाह अर्थव्यवस्था को निवेश-उन्मुखी बनाना, अंतःप्रादेशिक शोषण रोकना, बाज़ार सुधार, पारिस्थितिकीय संतुलन

4 सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP), संख्याओं में

  • चौथी पंचवर्षीय योजना में शुरू; पाँचवीं योजना में कार्यक्षेत्र विस्तृत
  • 1967: योजना आयोग ने 67 ज़िले (पूर्ण या आंशिक) सूखा संभावी चिह्नित किए
  • 1972: सिंचाई आयोग का मापदंड: 30 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र
  • सूखा संभावी पेटी: राजस्थान, गुजरात, प.मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा (महाराष्ट्र), रायलसीमा व तेलंगाना पठार (आं.प्र.), कर्नाटक पठार, तमिलनाडु की उच्च भूमि
  • पंजाब, हरियाणा, उ.राजस्थान: सिंचाई के प्रसार से सूखे से सुरक्षित

5 केस स्टडी: भरमौर आई-टी-डी-पी, एक तालिका में

तथ्य विवरण
स्थान चंबा ज़िला, हिमाचल प्रदेश (भरमौर व होली तहसील)
अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र 21 नवंबर 1975 से
जनजाति गद्दी (ऋतु-प्रवास करने वाली, गद्दीयाली भाषा)
निर्देशांक व क्षेत्रफल 32°11′-32°41′ उत्तर, 76°22′-76°53′ पूर्व; ~1,818 वर्ग किमी
ऊँचाई 1,500 – 3,700 मीटर
पर्वत श्रेणियाँ उत्तर में पीर पंजाल, दक्षिण में धौलाधार (रोहतांग दर्रे के पास मिलती हैं)
नदियाँ रावी व सहायक नदियाँ बुढ़ील, टुंडेन
4 भौगोलिक भाग होली, खणी, कुगती, तुंदाह
तापमान जनवरी 4°C, जुलाई 26°C
2011 जनगणना जनसंख्या 39,113; घनत्व 21/वर्ग किमी
ITDP दर्जा 1974 में, हिमाचल प्रदेश की 5 आई-टी-डी-पी में से एक
स्त्री साक्षरता 1971: 1.88% → 2011: 65%
पशुचारण अब केवल 1/10 परिवार ऋतु-प्रवास करते हैं; फिर भी शरद ऋतु में कांगड़ा प्रवास जारी
परीक्षा संकेत

अवसंरचना विकास का लाभ असमान रहा: रावी किनारे बसे होली-खणी के गाँव सबसे अधिक लाभान्वित हुए, जबकि तुंदाह-कुगती के दूरदराज़ गाँव अभी भी विकास से बाहर हैं। यह “उपलब्धि बनाम कमी” वाला बिंदु परीक्षा में बहुत पूछा जाता है।

6 सतत पोषणीय विकास की समय-रेखा

वर्ष घटना
1968 एहरलिच की पुस्तक “द पॉपुलेशन बम” प्रकाशित
1970 का दशक “पुनर्वितरण के साथ वृद्धि” व “वृद्धि और समानता” वाक्यांश विकास की परिभाषा में शामिल
1972 मीडोस और अन्य की पुस्तक “द लिमिट्स टू ग्रोथ” प्रकाशित
1980 का दशक तक विकास एक बहु-आयामी सामाजिक-भौतिक कल्याण की संकल्पना बना
1987 WCED की रिपोर्ट “अवर कॉमन फ़्यूचर” (ब्रंटलैंड रिपोर्ट) प्रस्तुत, अध्यक्ष: गरो हरलेम ब्रंटलैंड (नॉर्वे की प्रधानमंत्री)

7 केस स्टडी: इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र, एक तालिका में

तथ्य विवरण
पुराना नाम राजस्थान नहर
संकल्पनाकार कँवर सेन (1948)
शुभारंभ 31 मार्च 1958
उद्गम हरिके बाँध, पंजाब
मार्ग थार मरुस्थल (मरुस्थली), पाक सीमा के समानांतर ~40 किमी
कुल लंबाई 9,060 किमी
कुल कमान क्षेत्र 19.63 लाख हेक्टेयर (70% प्रवाह प्रणाली, शेष लिफ़्ट)
चरण-I गंगानगर, हनुमानगढ़, उ.बीकानेर; 5.53 लाख हेक्टेयर; सिंचाई शुरू 1960 दशक आरंभ में
चरण-II बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, चुरू; 14.10 लाख हेक्टेयर; सिंचाई शुरू 1980 दशक मध्य में; तापमान 50°C तक
सकारात्मक प्रभाव मृदा नमी, हरियाली, अपरदन-निक्षेप में कमी
नकारात्मक प्रभाव जलाक्रांतता + मृदा लवणता
फ़सल बदलाव चना/बाजरा/ग्वार → गेहूँ/कपास/मूँगफली/चावल

8 सतत पोषणीय विकास के 7 उपाय (इंदिरा गांधी नहर)

  • (i) जल प्रबंधन नीति का कठोर कार्यान्वयन (चरण-I रक्षण सिंचाई, चरण-II विस्तारित सिंचाई/चरागाह)
  • (ii) शस्य प्रतिरूप में जल-सघन फ़सलों से बचाव, बागाती फ़सलें (खट्टे फल)
  • (iii) CAD कार्यक्रम: नाला अस्तरीकरण, भूमि विकास-समतलन, वारबंदी पद्धति
  • (iv) जलाक्रांत/लवण-प्रभावित भूमि का पुनरुद्धार
  • (v) पारितंत्र-विकास: वनीकरण, रक्षक मेखला, चरागाह (चरण-II में विशेष आवश्यक)
  • (vi) सामाजिक सततपोषणता: निर्धन भूआवंटियों को वित्तीय/संस्थागत सहायता
  • (vii) आर्थिक सततपोषणता: विविधीकरण, गाँव-कृषिसेवा केंद्र-मंडी संबंध

ध्यान दें: सातों में से पाँच उपाय (i, iii, iv, v के साथ जल-सघन फ़सलों से बचाव भी) मुख्यतः पारिस्थितिकीय संतुलन बहाल करने पर केंद्रित हैं; केवल (vi) और (vii) सामाजिक-आर्थिक पक्ष पर हैं।

अंतिम दोहराव: सिर्फ़ संख्याएँ और नाम
  • नीति आयोग: स्थापना 1 जनवरी 2015, योजना आयोग का स्थान लिया
  • नियोजन के 2 उपागम: खंडीय (सेक्टर-आधारित) और प्रादेशिक (क्षेत्र-आधारित)
  • पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम: 5वीं योजना, 15 ज़िले, 600 मी. मापदंड (1981)
  • सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम: 4थी योजना, 67 ज़िले (1967), 30% सिंचित मापदंड (1972)
  • भरमौर: चंबा ज़िला (हि.प्र.), गद्दी जनजाति, 21 नवंबर 1975 अधिसूचित, जनसंख्या 39,113 (2011), स्त्री साक्षरता 1.88%→65%
  • सतत पोषणीय विकास: ब्रंटलैंड रिपोर्ट 1987, “अवर कॉमन फ़्यूचर”, अध्यक्ष गरो हरलेम ब्रंटलैंड
  • इंदिरा गांधी नहर: पूर्व नाम राजस्थान नहर, कँवर सेन (1948), शुभारंभ 1958, लंबाई 9,060 किमी, कमान क्षेत्र 19.63 लाख हेक्टेयर
  • चरण-I: 5.53 लाख हे. (1960 दशक) · चरण-II: 14.10 लाख हे. (1980 दशक)
  • 7 उपाय, इनमें से 5 पारिस्थितिकीय संतुलन पर केंद्रित