इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. आधार सामग्री की परिभाषा एक पंक्ति में दीजिए।
उत्तर: आधार सामग्री यथार्थ विश्व की एक ही (एकल) माप है।
प्र. प्राथमिक स्रोत की परिभाषा एक पंक्ति में दीजिए।
उत्तर: प्राथमिक स्रोत वे आंकड़े हैं जो किसी व्यक्ति, समूह या संस्था द्वारा पहली बार एकत्रित किए जाते हैं।
प्र. ‘फोर एंड क्रास विधि’ किसे कहते हैं?
उत्तर: एक मिलान चिह्न में चार बनाकर पाँचवें को काटने की विधि को फोर एंड क्रास विधि कहते हैं।
प्र. सूचकांक में आधार वर्ष का मूल्य कितना लिया जाता है?
उत्तर: आधार वर्ष का मूल्य साधारणतया 100 लिया जाता है।
प्र. साक्षात्कार विधि में सूचना कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर: शोधकर्ता उत्तरदाता से सीधे संवाद द्वारा सूचना प्राप्त करता है।
प्र. पटवारी द्वारा रखे गए अभिलेख किस श्रेणी के स्रोत हैं?
उत्तर: यह द्वितीयक आंकड़ों का एक अप्रकाशित सरकारी स्रोत है।
प्र. आवृत्ति (f) की परिभाषा एक पंक्ति में दीजिए।
उत्तर: आवृत्ति (f) किसी दिए गए वर्ग में आने वाले व्यक्तियों (प्रेक्षणों) की संख्या है।
प्र. ओजाइव किसे कहते हैं?
उत्तर: संचयी आवृत्तियों को आलेखित करने पर मिलने वाले वक्र को ओजाइव कहते हैं।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. आंकड़ा और सूचना के बीच अंतर बताइए।
उत्तर: आंकड़ा यथार्थ विश्व के मापन को दर्शाने वाली कच्ची, असंसाधित संख्याएँ हैं। सूचना किसी प्रश्न का अर्थपूर्ण उत्तर है, जो आंकड़ों को गणितीय, तार्किक या सांख्यिकीय रूप से प्रक्रमित करने के बाद प्राप्त होती है।
प्र. आंकड़ों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: आंकड़े ऐसी संख्याएँ हैं जो यथार्थ विश्व के मापन को दर्शाती हैं, जैसे किसी स्थान की वर्षा या दो नगरों के बीच की दूरी। एकल माप को आधार सामग्री कहते हैं।
प्र. एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ हैं?
उत्तर: पाद टिप्पणी सारणी में दिए गए आंकड़ों के स्रोत, इकाई या किसी विशेष शर्त को स्पष्ट करती है (जैसे सारणी 1.1 में ‘PoK रहित’ या ‘केंद्र शासित प्रदेश’ की टिप्पणी), जिससे पाठक आंकड़ों का सही अर्थ समझ सके।
प्र. आंकड़ों के प्राथमिक स्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर: प्राथमिक स्रोत वे आंकड़े हैं जो किसी व्यक्ति, समूह या संस्था द्वारा पहली बार, प्रत्यक्ष रूप से एकत्रित किए जाते हैं, जैसे व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली/अनुसूची या क्षेत्रीय मापन उपकरणों द्वारा।
प्र. द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्रोत बताइए।
उत्तर: सरकारी प्रकाशन, अर्ध सरकारी प्रकाशन, अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन, निजी प्रकाशन और समाचारपत्र/इलेक्ट्रॉनिक माध्यम द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्रोत हैं।
प्र. आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्ती विधि क्या है?
उत्तर: अपवर्ती विधि में वर्ग 20-30, 30-40 आदि के रूप में लिखे जाते हैं, जहाँ एक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा के बराबर होती है, पर ऐसा मान उस वर्ग में गिना जाता है जिसकी यह निम्न सीमा है, और उस वर्ग से निकाल दिया जाता है जिसकी यह उच्च सीमा है।
प्र. सांख्यिकीय सारणी को अपने शब्दों में परिभाषित कीजिए।
उत्तर: सांख्यिकीय सारणी आंकड़ों की स्तंभों और पंक्तियों में एक सुव्यवस्थित व्यवस्था है, जो प्रस्तुतीकरण को सरल बनाती है, तुलना को आसान करती है, और पाठक को सूचना जल्दी खोजने देती है।
प्र. ‘कच्चा आंकड़ा’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: किसी स्रोत से एकत्र किया गया आंकड़ा जो शुरुआत में एक बड़े, उलझे हुए ढेर के रूप में होता है, जिसमें कोई तारतम्य नहीं दिखता, उसे कच्चा आंकड़ा कहते हैं।
प्र. प्रश्नावली और अनुसूची में कोई एक अंतर बताइए।
उत्तर: प्रश्नावली उत्तरदाता स्वयं भरता है, जबकि अनुसूची एक प्रशिक्षित परिगणक उत्तरदाता से पूछकर भरता है।
प्र. समावेशी विधि, अपवर्ती विधि से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: समावेशी विधि में वर्ग 20-29, 30-39 आदि रूप में लिखे जाते हैं और वर्ग की अपनी उच्च सीमा के बराबर मान उसी वर्ग में रहता है; अपवर्ती विधि में वर्ग 20-30, 30-40 रूप में लिखे जाते हैं और उच्च सीमा के बराबर मान अगले वर्ग में चला जाता है।
प्र. आंकड़ों की आवश्यकता किसी क्षेत्र के शस्य प्रारूप और किसी नगर की वृद्धि के अध्ययन में किस प्रकार होती है?
उत्तर: शस्य प्रारूप के अध्ययन के लिए फसल क्षेत्र, फसल की उत्पादकता व उत्पादन, सिंचित क्षेत्र, वर्षा की मात्रा और उर्वरक-कीटनाशक जैसे निवेश के आंकड़े चाहिए। किसी नगर की वृद्धि के अध्ययन के लिए कुल जनसंख्या, घनत्व, प्रवासियों की संख्या, लोगों का व्यवसाय, उद्योग और यातायात-संचार के साधनों से संबंधित आंकड़े चाहिए। इसी से स्पष्ट होता है कि आंकड़े भौगोलिक विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा कीजिए जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्र किए जा सकते हैं।
उत्तर: राष्ट्रीय स्तर पर: भारत की जनगणना (भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित), राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्टें, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की मौसम रिपोर्टें, और राज्य सरकारों के सांख्यिकीय सारांश। अर्ध सरकारी स्तर पर नगर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और जिला परिषदों की रिपोर्टें। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र के अभिकरण जैसे UNESCO, UNDP, WHO और FAO, जो डैमोग्राफ़िक इयर बुक, स्टेटिस्टीकल इयर बुक और मानव विकास रिपोर्ट जैसे प्रकाशन नियमित रूप से जारी करते हैं।
प्र. सूचकांक का क्या महत्त्व है? सूचकांक की परिकलन की प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए।
उत्तर: सूचकांक किसी चर, या संबंधित चरों के समूह में, समय, स्थान या अन्य विशेषताओं के संदर्भ में हुए परिवर्तन को दर्शाता है, और अर्थशास्त्र-व्यवसाय में कीमत व मात्रा के परिवर्तन देखने के लिए व्यापक रूप से प्रयोग होता है। साधारण समुच्चय विधि सूत्र: सूचकांक = (वर्तमान वर्ष का योग ÷ आधार वर्ष का योग) × 100, आधार वर्ष का मूल्य साधारणतया 100 लिया जाता है। उदाहरण, भारत में लौह अयस्क उत्पादन: आधार वर्ष 1970-71 में उत्पादन 32.5 मिलियन टन (सूचकांक 100)। 1980-81 में उत्पादन 42.2 मिलियन टन, सूचकांक (42.2÷32.5)×100 = 130। 1990-91 में 53.7 मिलियन टन, सूचकांक 165। 2000-01 में 67.4 मिलियन टन, सूचकांक 207। इस प्रकार 1970-71 से 2000-01 तक उत्पादन में लगातार वृद्धि देखी गई।
प्र. साक्षात्कार विधि की सावधानियों की सहायता से समझाइए कि सर्वेक्षण कैसे लिया जाता है, यह उतना ही जरूरी क्यों है जितने पूछे गए प्रश्न।
उत्तर: NCERT साक्षात्कार की आठ सावधानियाँ बताता है: सूचनाओं की परिशुद्ध सूची बनाना, सर्वेक्षण के उद्देश्य में स्पष्ट रहना, संवेदनशील प्रश्नों से पहले विश्वास में लेना और गोपनीयता का आश्वासन देना, अनुकूल वातावरण बनाना, सरल-शिष्ट भाषा रखना, आत्मसम्मान या धार्मिक भावना को ठेस न पहुँचाना, अंत में कुछ और जोड़ने के लिए पूछना, और समय के लिए धन्यवाद देना। ये दिखाते हैं कि साक्षात्कार की सफलता पूरी तरह इस पर निर्भर करती है कि साक्षात्कार कैसे लिया गया, क्योंकि गलत तरीके से पूछा गया सही प्रश्न भी अविश्वसनीय या अधूरी सूचना दे सकता है।
प्र. प्रश्नावली विधि और अनुसूची विधि में अंतर स्पष्ट कीजिए, और बताइए अनुसूची विधि अधिक समावेशी क्यों है।
उत्तर: प्रश्नावली में संरचित प्रश्न व उत्तर के लिए स्थान उत्तरदाता को दिए जाते हैं और वह स्वयं भरता है; यह बड़े क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए उपयोगी है और दूरवर्ती क्षेत्रों में डाक से भेजी जा सकती है, पर केवल साक्षर उत्तरदाताओं तक ही सीमित है। अनुसूची में वही प्रश्न एक प्रशिक्षित परिगणक द्वारा उत्तरदाता से पूछकर भरे जाते हैं; इसके लिए परिगणक का पूरी तरह प्रशिक्षित होना आवश्यक है। अनुसूची विधि अधिक समावेशी इसलिए है क्योंकि इससे साक्षर और निरक्षर, दोनों तरह के उत्तरदाताओं से सूचना एकत्र की जा सकती है, जबकि प्रश्नावली में उत्तरदाता का साक्षर होना अनिवार्य है।
प्र. 60 विद्यार्थियों के प्राप्तांक के उदाहरण से बताइए कि कच्चे आंकड़ों को आवृत्ति वितरण में कैसे समूहित किया जाता है।
उत्तर: 60 विद्यार्थियों के भूगोल प्रश्नपत्र के प्राप्तांक 02 से 96 तक की एक लंबी, अवर्गीकृत सूची (सारणी 1.4) के रूप में हैं। सबसे पहले परिसर (02-96) के आधार पर 10 इकाई के अंतराल वाले 10 वर्ग (0-10, 10-20 … 90-100) बनाए जाते हैं। फिर फोर एंड क्रास विधि (मिलान चिह्न) से हर प्रेक्षण को उसके वर्ग में चिह्नित किया जाता है, जैसे पहला प्राप्तांक 47 वर्ग 40-50 में चिह्नित होता है। हर वर्ग के मिलान चिह्नों की गिनती उस वर्ग की साधारण आवृत्ति (f) बनती है, और हर f को पिछले सभी f के योग में जोड़ने पर संचयी आवृत्ति (Cf) मिलती है, जो अंतिम वर्ग तक N (=60) के बराबर हो जाती है।
प्र. ओजाइव बनाने की ‘कमतर विधि’ और ‘अधिकतर विधि’ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कमतर विधि में प्रत्येक वर्ग की उच्च सीमा से शुरू करके आवृत्तियाँ जोड़ते जाते हैं, जिससे एक उभरता हुआ वक्र मिलता है (सारणी 1.8, चित्र 1.6)। अधिकतर विधि में प्रत्येक वर्ग की निम्न सीमा से शुरू करके संचयी योग से हर वर्ग की आवृत्ति घटाते जाते हैं, जिससे एक गिरता हुआ वक्र मिलता है (सारणी 1.9, चित्र 1.7)। दोनों वक्रों को एक ही ग्राफ़ पर मिलाने से एक तुलनात्मक चित्र (चित्र 1.8, सारणी 1.10) बनता है, जो दोनों वक्रों के प्रतिच्छेदन बिंदु को भी दर्शाता है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. आंकड़ों के प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों में अंतर स्पष्ट कीजिए। प्रत्येक के प्रमुख उपप्रकारों की सूची सहित उदाहरण दीजिए।
उत्तर: प्राथमिक स्रोत: वे आंकड़े जो किसी व्यक्ति, समूह या संस्था द्वारा पहली बार एकत्रित किए जाते हैं। चार विधियाँ: (1) व्यक्तिगत प्रेक्षण, क्षेत्र में प्रत्यक्ष अवलोकन; (2) साक्षात्कार, शोधकर्ता-उत्तरदाता सीधा संवाद; (3) प्रश्नावली/अनुसूची, संरचित प्रश्न-उत्तर; (4) अन्य विधियाँ, जैसे मृदा किट, जल गुणवत्ता किट और ट्रांसड्यूसर से प्रत्यक्ष क्षेत्रीय मापन।
द्वितीयक स्रोत: वे आंकड़े जो पहले से एकत्रित हैं और प्रकाशित या अप्रकाशित रूप में उपलब्ध हैं। प्रकाशित: सरकारी (जनगणना, NSS, IMD), अर्ध सरकारी (नगर निगम, जिला परिषद), अंतर्राष्ट्रीय (UNESCO, UNDP, WHO, FAO), निजी, समाचारपत्र-पत्रिकाएँ, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम। अप्रकाशित: सरकारी प्रलेख (पटवारी के राजस्व अभिलेख), अर्ध सरकारी प्रलेख, निजी प्रलेख (कंपनियों, व्यापार संघों के रिकॉर्ड)।
मूल अंतर: प्राथमिक स्रोत में आंकड़े संग्रहकर्ता द्वारा स्वयं, पहली बार एकत्रित किए जाते हैं; द्वितीयक स्रोत में आंकड़े किसी और द्वारा पहले ही एकत्रित और अभिलिखित किए जा चुके होते हैं।
प्र. कच्चे आंकड़ों को वर्गीकृत करने की पूरी प्रक्रिया, और उसके बाद आवृत्ति बहुभुज व ओजाइव द्वारा उनके ग्राफ़ीय निरूपण को समझाइए।
उत्तर: वर्गीकरण: कच्चे आंकड़े शुरू में एक बड़ा, अवर्गीकृत ढेर होते हैं (जैसे सारणी 1.4 के 02-96 परिसर वाले 60 प्राप्तांक)। पहले परिसर के आधार पर वर्गों की संख्या और वर्ग अंतराल तय होते हैं (यहाँ 10 इकाई के 10 वर्ग)। फिर फोर एंड क्रास विधि से हर प्रेक्षण को उसके वर्ग में चिह्नित कर साधारण आवृत्ति (f) और संचयी आवृत्ति (Cf) निकाली जाती है (सारणी 1.6), जहाँ Σf = N = 60। वर्ग अंतराल लिखने की दो विधियाँ हैं: अपवर्ती (20-30, 30-40; उच्च सीमा का मान अगले वर्ग में) और समावेशी (20-29, 30-39; उच्च सीमा का मान उसी वर्ग में)।
ग्राफ़ीय निरूपण: आवृत्ति वितरण के ग्राफ़ को आवृत्ति बहुभुज कहते हैं, जो दो या अधिक आवृत्ति वितरणों की तुलना में सहायक है। संचयी आवृत्तियों को आलेखित करने पर बनने वाला वक्र ओजाइव कहलाता है, जो कमतर विधि (उच्च सीमा से शुरू, आवृत्तियाँ जोड़ते हुए, उभरता वक्र) या अधिकतर विधि (निम्न सीमा से शुरू, आवृत्तियाँ घटाते हुए, गिरता वक्र) से बनाया जा सकता है। दोनों वक्रों को एक साथ आलेखित करने पर एक तुलनात्मक चित्र मिलता है।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक इस घटना में औसत गहराई कितनी निकाली गई थी?
उत्तर: 0.95 मीटर।
(ख) 1 अंक बच्चे की लंबाई कितनी थी?
उत्तर: 1 मीटर।
(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि इस घटना से किस सांख्यिकीय अवधारणा का पता चलता है, और क्यों?
उत्तर: इस घटना से ‘सांख्यिकीय दोष’ का पता चलता है, क्योंकि औसत मान (0.95मी) ने चार बिंदुओं में से एक बिंदु की वास्तविक गहराई (1.5मी, जो बच्चे की लंबाई से अधिक थी) को छुपा दिया, जिससे गलत निष्कर्ष निकला।
(क) 1 अंक भारत की जनगणना किस श्रेणी का स्रोत है?
उत्तर: प्रकाशित द्वितीयक स्रोत, सरकारी प्रकाशन।
(ख) 1 अंक पटवारी के राजस्व अभिलेख किस श्रेणी में आते हैं?
उत्तर: अप्रकाशित द्वितीयक स्रोत, सरकारी प्रलेख।
(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि द्वितीयक आंकड़ों में प्रकाशित और अप्रकाशित स्रोतों में मूल अंतर क्या है।
उत्तर: प्रकाशित स्रोत आम जनता के लिए छपे और उपलब्ध होते हैं (जैसे जनगणना रिपोर्ट, UN प्रकाशन), जबकि अप्रकाशित स्रोत विभिन्न स्तरों के प्रशासन द्वारा तैयार किए गए अभिलेख होते हैं जो सामान्यतः प्रकाशित नहीं होते (जैसे पटवारी के गाँव-स्तर के राजस्व अभिलेख)।