NCERT की पाठ्यपुस्तक भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य, भाग-2 के अध्याय 1 (आंकड़े: स्रोत और संकलन) की प्रश्नावली/अभ्यास के सभी प्रश्न (और अध्याय के बीच में पूछा गया प्रश्न), ठीक उसी रूप में जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।
1 बहुविकल्पीय प्रश्न (अभ्यास प्रश्न 1)
प्र. एक संख्या अथवा लक्षण को जो मापन को प्रदर्शित करता है, कहते हैं
(क) अंक (ख) आँकड़े (ग) संख्या (घ) लक्षण
उत्तर: (ख) आँकड़े। अध्याय आंकड़ों को ऐसी संख्याओं के रूप में परिभाषित करता है जो यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करती हैं।
प्र. एकल आधार सामग्री एकमात्र माप है
(क) तालिका (ख) आवृत्ति (ग) वास्तविक संसार (घ) सूचना
उत्तर: (ग) वास्तविक संसार। आधार सामग्री यथार्थ (वास्तविक) विश्व की एक ही माप है; बाकी तीनों विकल्प आधार सामग्री की परिभाषा से मेल नहीं खाते।
प्र. एक मिलान चिह्न में, फोर एंड क्रांसिंग फिफ़्थ द्वारा समूहीकरण को कहते हैं
(क) फोर एंड क्रास विधि (ख) मिलान चिह्न विधि (ग) आवृत्ति अंकित विधि (घ) समावेश विधि
उत्तर: (क) फोर एंड क्रास विधि। चार बनाकर पाँचवें को काटने की इस विधि को अध्याय स्वयं “फोर एंड क्रास विधि” नाम से बताता है।
प्र. ओजाइव एक विधि है जिसमें
(क) साधारण आवृत्ति नापी जाती है। (ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती है। (ग) साधारण आवृत्ति अंकित की जाती है। (घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती है।
उत्तर: (घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती है। ओजाइव संचयी आवृत्तियों (Cf) को आलेखित (अंकित) करने पर मिलने वाला वक्र है, केवल “नापने” की क्रिया नहीं, बल्कि ग्राफ़ पर अंकित करने की क्रिया है।
प्र. यदि वर्ग के दोनों अंत आवृत्ति समूह में लिए गए हों, इसे कहते हैं
(क) बहिष्कार विधि (ख) समावेश विधि (ग) चिह्न विधि (घ) सांख्यिकीय विधि
उत्तर: (ख) समावेश विधि। जब वर्ग की दोनों सीमाएँ (निम्न और उच्च, दोनों) उसी वर्ग-समूह में गिनी जाती हैं, तो इसे समावेश विधि कहा जाता है।
टिप्पणी: यह अभ्यास-प्रश्न “समावेश विधि” और “बहिष्कार विधि” शब्द प्रयोग करता है, जबकि अध्याय की मुख्य विषय-वस्तु में इन्हीं दो संकल्पनाओं के लिए “समावेशी विधि” और “अपवर्ती विधि” शब्द प्रयुक्त हुए हैं (दोनों जगह अंग्रेज़ी मूल शब्द “Inclusive Method” और “Exclusive Method” ही हैं)। यह किताब की अपनी आंतरिक शब्दावली-भिन्नता है, अध्याय के मुख्य भाग और अभ्यास-खंड के बीच, अनुवाद की त्रुटि नहीं।
2 लगभग 30 शब्दों में उत्तर (अभ्यास प्रश्न 2, हिंदी संस्करण के अपने छह उप-प्रश्न)
प्र. आंकड़ा और सूचना के बीच अंतर।
उत्तर: आंकड़ा यथार्थ विश्व के मापन को दर्शाने वाली कच्ची, असंसाधित संख्याएँ हैं। सूचना किसी प्रश्न का अर्थपूर्ण उत्तर है, जो आंकड़ों को गणितीय, तार्किक या सांख्यिकीय रूप से प्रक्रमित करने के बाद ही प्राप्त होती है।
प्र. आंकड़ों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: आंकड़े ऐसी संख्याएँ हैं जो यथार्थ विश्व के मापन को दर्शाती हैं, जैसे “बाड़मेर में 20 सेमी वर्षा” या “दिल्ली-मुंबई की दूरी 1,305 किमी”। एकल माप को आधार सामग्री कहते हैं।
टिप्पणी: हिंदी संस्करण का यह प्रश्न सीधे “आंकड़ों” के बारे में पूछता है, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण का समतुल्य प्रश्न “data processing” (आंकड़ों के प्रक्रमण) के बारे में पूछता है (“What do you mean by data processing?”)। यह दोनों संस्करणों के बीच एक वास्तविक शब्दावली/विषय-भिन्नता है, हिंदी संस्करण के अपने प्रश्न के अनुसार यहाँ उत्तर दिया गया है।
प्र. एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ हैं?
उत्तर: पाद टिप्पणी सारणी में दिए गए आंकड़ों के स्रोत, इकाई या किसी विशेष शर्त को स्पष्ट करती है (जैसे सारणी 1.1 में “PoK रहित” या “केंद्र शासित प्रदेश” जैसी टिप्पणियाँ), जिससे पाठक आंकड़ों का सही अर्थ आसानी से समझ सके।
प्र. आंकड़ों के प्राथमिक स्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर: प्राथमिक स्रोत वे आंकड़े हैं जो किसी व्यक्ति, समूह या संस्था द्वारा पहली बार, प्रत्यक्ष रूप से एकत्रित किए जाते हैं, जैसे व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली/अनुसूची या मृदा किट-ट्रांसड्यूसर जैसे क्षेत्रीय मापन उपकरणों द्वारा।
प्र. द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्रोत बताइए।
उत्तर: सरकारी प्रकाशन, अर्ध सरकारी प्रकाशन, अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन, निजी प्रकाशन और समाचारपत्र/इलेक्ट्रॉनिक माध्यम, द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्रोत हैं।
प्र. आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्ती विधि क्या है?
उत्तर: अपवर्ती विधि में वर्ग 20-30, 30-40 आदि रूप में लिखे जाते हैं, जहाँ एक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा के बराबर होती है। ऐसा मान (जैसे 30) उस वर्ग (30-40) में गिना जाता है जिसकी यह निम्न सीमा है, और उस वर्ग (20-30) से निकाल दिया जाता है जिसकी यह उच्च सीमा है।
टिप्पणी: यह प्रश्न अंग्रेज़ी संस्करण के पाँच प्रश्नों में नहीं है; यह हिंदी संस्करण का अपना छठा, अतिरिक्त प्रश्न है।
3 लगभग 125 शब्दों में उत्तर (अभ्यास प्रश्न 3)
प्र. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा कीजिए जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्र किए जा सकते हैं।
उत्तर: राष्ट्रीय अभिकरण: भारत की जनगणना, जो भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित होती है और जनसंख्या, साक्षरता जैसे आंकड़े देती है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्टें। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की मौसम रिपोर्टें। राज्य सरकारों द्वारा प्रकाशित सांख्यिकीय सारांश और विभिन्न आयोगों की आवधिक रिपोर्टें। अर्ध सरकारी स्तर पर नगर विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों और जिला परिषदों की रिपोर्टें भी द्वितीयक आंकड़ों का स्रोत हैं।
अंतर्राष्ट्रीय अभिकरण: संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अभिकरण, जैसे UNESCO (शिक्षा-विज्ञान-संस्कृति), UNDP (विकास कार्यक्रम), WHO (स्वास्थ्य) और FAO (खाद्य-कृषि), जो डैमोग्राफ़िक इयर बुक, स्टेटिस्टीकल इयर बुक और मानव विकास रिपोर्ट जैसे प्रकाशन नियमित रूप से जारी करते हैं। इनके अतिरिक्त निजी प्रकाशन (समाचारपत्रों और निजी संस्थाओं की वार्षिकी-सर्वेक्षण) भी द्वितीयक आंकड़ों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
प्र. सूचकांक का क्या महत्त्व है? सूचकांक की परिकलन की प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए।
उत्तर: सूचकांक एक सांख्यिकीय माप है जो किसी चर, या संबंधित चरों के समूह में, समय, स्थान या अन्य विशेषताओं के संदर्भ में हुए परिवर्तन को दर्शाता है। यह केवल समय के साथ परिवर्तन ही नहीं, बल्कि विभिन्न स्थानों, उद्योगों, नगरों या देशों की आर्थिक स्थितियों की तुलना में भी सहायक है, इसीलिए अर्थशास्त्र और व्यवसाय में कीमत व मात्रा में आए परिवर्तन देखने के लिए इसका व्यापक प्रयोग होता है।
साधारण समुच्चय विधि का सूत्र है: सूचकांक = (वर्तमान वर्ष के उत्पादन का योग ÷ आधार वर्ष के उत्पादन का योग) × 100, जिसमें आधार वर्ष का मूल्य साधारणतया 100 लिया जाता है।
उदाहरण, भारत में लौह अयस्क का उत्पादन (आधार वर्ष 1970-71 = 32.5 मिलियन टन): 1980-81 में उत्पादन 42.2 मिलियन टन था, सूचकांक (42.2÷32.5)×100 = 130। 1990-91 में उत्पादन 53.7 मिलियन टन था, सूचकांक 165। 2000-01 में उत्पादन 67.4 मिलियन टन था, सूचकांक 207। इस प्रकार 1970-71 से 2000-01 के बीच उत्पादन में लगातार वृद्धि देखी गई, जिसे सूचकांक के माध्यम से एक ही आधार-रेखा पर आसानी से तुलना करके दिखाया जा सकता है।
अध्याय के अंत में एक क्रियाकलाप भी है: 35 विद्यार्थियों के 10-अंक के यूनिट टेस्ट में प्राप्त अंक (1, 0, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 2, 3, 4, 0, 2, 5, 8, 4, 5, 3, 6, 3, 2, 7, 6, 5, 4, 3, 7, 8, 9, 7, 9, 4, 5, 4, 3) को संचयी आवृत्ति वितरण के रूप में प्रस्तुत करना है। यह प्रश्नावली में गिना नहीं जाता, पर परीक्षा में व्यावहारिक/स्रोत-आधारित प्रश्न के रूप में पूछा जा सकता है। 60 विद्यार्थियों वाले उदाहरण (सारणी 1.4-1.6) जैसी ही विधि यहाँ भी अपनाइए: पहले परिसर (यहाँ 0 से 9) ज्ञात कीजिए, फिर उपयुक्त वर्ग अंतराल तय कर मिलान चिह्न से आवृत्ति (f) और संचयी आवृत्ति (Cf) निकालिए।
हल किया हुआ उदाहरण: परिसर 0 से 9 होने के कारण यहाँ 2 इकाई के अंतराल वाले 5 वर्ग सुविधाजनक हैं (10 इकाई के अंतराल वाले बड़े वर्ग यहाँ बहुत बड़े पड़ेंगे, क्योंकि पूरा परिसर ही 10 अंक का है)।
| वर्ग | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (Cf) |
|---|---|---|
| 0-1 | 3 | 3 |
| 2-3 | 10 | 13 |
| 4-5 | 11 | 24 |
| 6-7 | 7 | 31 |
| 8-9 | 4 | 35 |
Σf = N = 35। यह हल केवल अभ्यास के लिए दर्शाया गया वर्गीकरण है; NCERT स्वयं इस क्रियाकलाप का कोई निश्चित उत्तर नहीं देता, विद्यार्थी अपनी कक्षा के आधार पर स्वयं आवृत्ति वितरण भी बनाएँ (क्रियाकलाप 2)।
4 अध्याय के बीच में पूछा गया प्रश्न
प्र. अब आप जान सकते हो कि तालिका 1.4 के सभी सीमांत मूल्य कहाँ जाएँगे।
उत्तर: तालिका 1.4 के सीमांत मूल्य वे प्राप्तांक हैं जो किसी वर्ग की सीमा के ठीक बराबर हैं: 10, 50, 70, 80 और 90 (दो बार)। अपवर्ती विधि में ऐसा मान उस वर्ग में रखा जाता है जिसमें वह निम्न सीमा पर आता है, और उस वर्ग से निकाल दिया जाता है जिसमें वह उच्च सीमा पर है। इसलिए 10 वर्ग 10-20 में (0-10 में नहीं), 50 वर्ग 50-60 में (40-50 में नहीं), 70 वर्ग 70-80 में, 80 वर्ग 80-90 में, और दोनों 90 वर्ग 90-100 में जाएँगे। तालिका 1.5 में ये ठीक इसी प्रकार रखे गए हैं।
प्रश्न 1 के पाँचों वस्तुनिष्ठ प्रश्न और प्रश्न 3(ii) का सूचकांक-उदाहरण अच्छी तरह तैयार कर लीजिए। प्रश्न 1(v) में किताब के दो शब्द-रूपों (“समावेश विधि” और “समावेशी विधि”) को गड़बड़ाइए मत, दोनों एक ही अवधारणा के लिए हैं।