परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: सभी परिभाषाएँ, आंकड़ों के स्रोतों की तालिका, सांख्यिकीय सारणी व सूचकांक के सूत्र-उदाहरण, और वर्गीकरण-आवृत्ति की पूरी सारणी। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 सात परिभाषाएँ जो कंठस्थ करनी हैं
आंकड़े ऐसी संख्याएँ हैं जो यथार्थ विश्व के मापन को दर्शाती हैं (जैसे बाड़मेर में 20 सेमी वर्षा, या बाँसवाड़ा में 24 घंटे में 35 सेमी वर्षा)। आधार सामग्री एक ही (एकल) माप है।
सूचना किसी प्रश्न का अर्थपूर्ण उत्तर है, जो कच्चे आंकड़े को गणितीय, तार्किक या सांख्यिकीय रूप से प्रक्रमित करने के बाद प्राप्त होती है।
प्राथमिक स्रोत: आंकड़े जो पहली बार, प्रत्यक्ष रूप से एकत्रित किए जाते हैं। द्वितीयक स्रोत: आंकड़े जो पहले से एकत्रित हैं, प्रकाशित या अप्रकाशित रूप में उपलब्ध।
सांख्यिकीय सारणी आंकड़ों की स्तंभों-पंक्तियों में एक सुव्यवस्थित व्यवस्था है, जो प्रस्तुतीकरण सरल बनाती है और तुलना आसान करती है।
सूचकांक समय, स्थान या अन्य विशेषताओं के संदर्भ में किसी चर में हुए परिवर्तन को दर्शाने वाला एक सांख्यिकीय माप है। सूत्र: सूचकांक = (Σq1 ÷ Σq0) × 100, आधार वर्ष का मूल्य साधारणतया 100 लिया जाता है।
आंकड़ों की आवश्यकता: शस्य प्रारूप के अध्ययन के लिए फसल क्षेत्र, उत्पादकता, सिंचित क्षेत्र और वर्षा जैसे आंकड़े चाहिए; किसी नगर की वृद्धि के अध्ययन के लिए जनसंख्या, घनत्व, प्रवासी, व्यवसाय, उद्योग और परिवहन के आंकड़े चाहिए।
नदी पार करने वाले व्यक्ति ने चार बिंदुओं की गहराई (0.6, 0.8, 0.9, 1.5 मीटर) मापकर औसत 0.95 मीटर निकाला, जो बच्चे की 1 मीटर लंबाई से कम था, पर एक बिंदु पर गहराई 1.5 मीटर थी, इसलिए बच्चा डूब गया। औसत व्यक्तिगत मानों की सच्चाई छुपा सकता है, इसे सांख्यिकीय दोष कहते हैं।
2 आंकड़ों के स्रोत, एक तालिका में
| वर्ग | उपप्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राथमिक | व्यक्तिगत प्रेक्षण | क्षेत्र में प्रत्यक्ष अवलोकन |
| साक्षात्कार | शोधकर्ता-उत्तरदाता सीधा संवाद | |
| प्रश्नावली / अनुसूची | उत्तरदाता स्वयं भरे (प्रश्नावली) / प्रशिक्षित परिगणक भरे (अनुसूची) | |
| अन्य विधियाँ | मृदा किट, जल गुणवत्ता किट, ट्रांसड्यूसर | |
| द्वितीयक, प्रकाशित | सरकारी | जनगणना, NSS, IMD |
| अर्ध सरकारी | नगर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जिला परिषद | |
| अंतर्राष्ट्रीय | UNESCO, UNDP, WHO, FAO | |
| निजी | निजी संस्थाओं की वार्षिकी | |
| समाचारपत्र-पत्रिकाएँ | दैनिक, साप्ताहिक, मासिक | |
| इलेक्ट्रॉनिक माध्यम | इंटरनेट, अब प्रमुख स्रोत | |
| द्वितीयक, अप्रकाशित | सरकारी प्रलेख | पटवारी के गाँव-स्तर के राजस्व अभिलेख |
| अर्ध सरकारी प्रलेख | नगर निगम-जिला परिषद की आवधिक रिपोर्टें | |
| निजी प्रलेख | कंपनियों, व्यापार संघों के रिकॉर्ड |
प्रश्नावली और अनुसूची को एक ही चीज मत समझिए। असली फर्क सिर्फ़ इसे कौन भरता है: उत्तरदाता स्वयं (प्रश्नावली) या एक प्रशिक्षित परिगणक (अनुसूची)। यही अनुसूची को निरक्षर उत्तरदाताओं के लिए भी काम-लायक बनाता है।
3 दो नामी आंकड़े जो अक्सर छूट जाते हैं
- नई दिल्ली-मुंबई दूरी: वाया कोटा-वड़ोदरा = 1,305 किमी; वाया इटारसी-मनमाड = 1,542 किमी
- बाँसवाड़ा में 24 घंटे में निरंतर 35 सेमी वर्षा (बाड़मेर की 20 सेमी वर्षा वाले उदाहरण के साथ ही किताब में दिया गया दूसरा वर्षा-उदाहरण)
4 निरपेक्ष, प्रतिशत और सूचकांक, एक उदाहरण के साथ
| रूप | पहचान | किताब का उदाहरण |
|---|---|---|
| निरपेक्ष | मूल रूप में, पूर्णांक | भारत की कुल जनसंख्या 2011 = 1,21,05,69,573 |
| प्रतिशत/अनुपात | सामान्य प्राचल से परिकलित | साक्षरता दर 2011 = 73.04% (पुरुष 80.9%, स्त्री 64.6%) |
| सूचकांक | आधार वर्ष = 100, फिर तुलना | लौह अयस्क: 1970-71=100, 1980-81=130, 1990-91=165, 2000-01=207 |
साक्षरता दर सूत्र: (कुल साक्षर ÷ कुल जनसंख्या) × 100
5 वर्गीकरण और आवृत्ति वितरण, पूरी सारणी 1.6
60 विद्यार्थियों के भूगोल प्रश्नपत्र के प्राप्तांक (परिसर 02-96) को 10 इकाई के अंतराल वाले 10 वर्गों में बाँटा गया, और फोर एंड क्रास विधि (मिलान चिह्न) से हर प्राप्तांक को उसके वर्ग में चिह्नित किया गया।
| वर्ग | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (Cf) |
|---|---|---|
| 0-10 | 4 | 4 |
| 10-20 | 5 | 9 |
| 20-30 | 5 | 14 |
| 30-40 | 7 | 21 |
| 40-50 | 6 | 27 |
| 50-60 | 10 | 37 |
| 60-70 | 8 | 45 |
| 70-80 | 6 | 51 |
| 80-90 | 5 | 56 |
| 90-100 | 4 | 60 |
Σf = N = 60। पढ़ना: 27 विद्यार्थियों के प्राप्तांक 50 से कम थे; 45 विद्यार्थियों के प्राप्तांक 70 से कम थे।
अपवर्ती विधि
- 20-30, 30-40 रूप
- उच्च सीमा = अगले वर्ग की निम्न सीमा
- मान 30 उस वर्ग (30-40) में जाता है जिसकी यह निम्न सीमा है, न कि 20-30 में
समावेशी विधि
- 20-29, 30-39 रूप
- उच्च सीमा, अगली निम्न सीमा से 1 भिन्न
- वर्ग की अपनी उच्च सीमा उसी वर्ग में रहती है
दोनों विधियों में हर वर्ग फिर भी 10 इकाई तक फैला रहता है।
6 आवृत्ति बहुभुज और ओजाइव
- आवृत्ति बहुभुज: आवृत्ति वितरण का ग्राफ़; दो या अधिक वितरणों की तुलना में सहायक
- ओजाइव: संचयी आवृत्ति (Cf) को आलेखित करने पर बनने वाला वक्र
- कमतर विधि: उच्च सीमा से शुरू, आवृत्तियाँ जोड़ते जाना → उभरता वक्र
- अधिकतर विधि: निम्न सीमा से शुरू, आवृत्तियाँ घटाते जाना → गिरता वक्र
- क्या मैं आंकड़े, सूचना, प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत की परिभाषा बिना देखे दे सकता हूँ?
- क्या मैं द्वितीयक स्रोतों की सभी छह प्रकाशित और तीनों अप्रकाशित श्रेणियाँ बता सकता हूँ?
- क्या मैं दिए गए उत्पादन आँकड़ों से सूचकांक निकाल सकता हूँ?
- क्या मैं अपवर्ती और समावेशी विधि का अंतर एक उदाहरण से समझा सकता हूँ?
- क्या मैं संचयी आवृत्ति सारणी पढ़कर बता सकता हूँ कि कितने प्रेक्षण किसी मान से कम/अधिक हैं?
- आंकड़े = यथार्थ विश्व के कच्चे माप; आधार सामग्री = एकल माप; सूचना = प्रक्रमित आंकड़ों से निकला अर्थपूर्ण निष्कर्ष
- प्राथमिक स्रोत की चार विधियाँ: व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली/अनुसूची, अन्य विधियाँ
- द्वितीयक, प्रकाशित (6): सरकारी, अर्ध सरकारी, अंतर्राष्ट्रीय, निजी, समाचारपत्र, इलेक्ट्रॉनिक। अप्रकाशित (3): सरकारी, अर्ध सरकारी, निजी प्रलेख
- कच्चा आंकड़ा → सांख्यिकीय सारणी → निरपेक्ष/प्रतिशत/सूचकांक के रूप में प्रस्तुतीकरण
- सूचकांक = (वर्तमान वर्ष का योग ÷ आधार वर्ष का योग) × 100, आधार वर्ष = 100
- वर्गीकरण के लिए परिसर से वर्गों की संख्या व वर्ग अंतराल तय होता है; फोर एंड क्रास विधि से मिलान चिह्न लगते हैं
- आवृत्ति (f), संचयी आवृत्ति (Cf), Σf = N; अपवर्ती बनाम समावेशी विधि
- आवृत्ति बहुभुज तुलना के लिए; ओजाइव कमतर/अधिकतर विधि से संचयी आवृत्ति का वक्र