इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. भक्तिन का वास्तविक नाम क्या था?
उत्तर: भक्तिन का वास्तविक नाम लछमिन था, अर्थात् लक्ष्मी।
प्र. महादेवी वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ।
प्र. भक्तिन किस संग्रह में संकलित एक रचना है?
उत्तर: भक्तिन महादेवी वर्मा के संस्मरण-संग्रह ‘स्मृति की रेखाएँ’ में संकलित है।
प्र. भक्तिन का विवाह किस आयु में हुआ था?
उत्तर: भक्तिन का विवाह मात्र पाँच वर्ष की आयु में हँडिया गाँव के एक गोपालक परिवार में हुआ था।
प्र. भक्तिन के पति की मृत्यु किस आयु में हुई?
उत्तर: भक्तिन के पति की मृत्यु छत्तीस वर्ष से कुछ अधिक आयु में हुई, तब भक्तिन स्वयं उनतीस वर्ष की थीं।
प्र. महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार किस रचना पर मिला?
उत्तर: महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके काव्य-संग्रह ‘यामा’ के लिए सन् 1983 में मिला।
प्र. भक्तिन के गले में क्या देखकर लेखिका ने उसका नाम रखा?
उत्तर: भक्तिन के गले में कंठी माला देखकर लेखिका ने उसका नाम ‘भक्तिन’ रखा।
प्र. भक्तिन ने गुप्त बचत के रूप में कितनी राशि होने की बात बताई?
उत्तर: भक्तिन ने पाँच बीसी और पाँच रुपया (बीसी = बीस), अर्थात् कुल 105 रुपये गड़े होने की बात बताई।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. भक्तिन अपना असली नाम लोगों से क्यों छुपाती थी?
उत्तर: भक्तिन का नाम लछमिन, यानी लक्ष्मी है। पाठ कहता है कि “लक्ष्मी की समृद्धि भक्तिन के कपाल की कुंचित रेखाओं में नहीं बँध सकी”, यद्यपि उसके जीवन में समृद्धि के दिन भी आए (हरे-भरे खेत, मोटी-ताज़ी गाय-भैंस, फलों से लदे पेड़) और बाद में दुख और संघर्ष अधिक रहे। पाठ के अनुसार भक्तिन बहुत समझदार है, इसलिए वह अपना समृद्धि-सूचक नाम किसी को नहीं बताती। नौकरी माँगते समय उसने ईमानदारी से केवल एक बार यह नाम बताया और प्रार्थना की कि इसका उपयोग कभी न किया जाए।
प्र. भक्तिन के पिता की मृत्यु की सूचना उसे देर से क्यों दी गई?
उत्तर: पिता का भक्तिन पर अगाध प्रेम होने के कारण स्वभावतः ईर्ष्यालु और संपत्ति की रक्षा में सतर्क विमाता ने पिता के मरणांतक रोग का समाचार तब भेजा, जब वह मृत्यु की सूचना भी बन चुका था। सास ने भी रोने-पीटने के अपशकुन से बचने के लिए भक्तिन को कुछ न बताया।
प्र. भक्तिन को अपने ससुराल में जिठानियों की तुलना में किस तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा?
उत्तर: भक्तिन ने तीन पुत्रियों को जन्म दिया, जबकि जिठानियों के बेटे थे; सास और जिठानियों ने उसकी उपेक्षा की। इसी भेदभाव में जिठानियाँ अपने भात पर सफ़ेद राब और गाढ़ा दूध पातीं और बेटों को मलाई खिलातीं, जबकि भक्तिन को काले गुड़ के साथ मट्ठा और उसकी बेटियों को चने-बाजरे की घुघरी मिलती थी।
प्र. ‘अलगौझा’ क्या है, और भक्तिन ने इसे कैसे प्राप्त किया?
उत्तर: ‘अलगौझा’ का अर्थ है परिवार के साझा घर से अलग होकर स्वतंत्र गृहस्थी बसाना। भक्तिन के प्रति उसके पति के गहरे प्रेम के कारण ही भक्तिन अपने ससुराल वालों से अलगौझा करवा पाई, जिसके बाद परिश्रमी दंपति के निरंतर प्रयास से घर में समृद्धि आई (हरे-भरे खेत, मोटी-ताज़ी गाय-भैंस, फलों से लदे पेड़)।
प्र. भक्तिन ने पुनर्विवाह के दबाव को क्यों और कैसे ठुकराया?
उत्तर: पति की मृत्यु के बाद जेठ-जिठौत भक्तिन की समृद्ध संपत्ति हड़पना चाहते थे, जो तभी संभव था जब भक्तिन दूसरा विवाह कर ले। पर भक्तिन ने अपने स्वाभिमान से जवाब दिया: ‘हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहि त तुम्हार पचै की छाती पै होरहा भूँजब और राज करब, समुझे रहौ।’ (अर्थ: हम कुतिया-बिल्ली नहीं हैं; हमारा मन चाहेगा तो हम दूसरे के पास जाएँगे, नहीं तो तुम लोगों की छाती पर होरहा भूँजेंगे और राज करेंगे, समझ लो।) यानी दोनों ही संभावनाएँ उसकी अपनी इच्छा पर टिकी थीं, किसी दबाव पर नहीं।
प्र. भक्तिन ने अपनी संपत्ति को हमेशा के लिए सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए?
उत्तर: भक्तिन ने गुरु से कान फुँकवाकर (दीक्षा लेकर) कंठी बाँधी और पति के नाम पर घी से चिकने केशों को समर्पित कर अपने कभी न टलने की घोषणा कर दी। इसके अलावा उसने छोटी लड़कियों के हाथ पीले कर उन्हें ससुराल पहुँचाया और पति के चुने हुए बड़े दामाद को घरजमाई बनाकर रखा।
प्र. ज़मींदार ने भक्तिन को किस तरह अपमानित किया, और इसका क्या परिणाम हुआ?
उत्तर: एक बार लगान समय पर न पहुँचने पर ज़मींदार ने भक्तिन को बुलाकर पूरे दिन कड़ी धूप में खड़ा रखा। यह अपमान भक्तिन की कर्मठता में सबसे बड़ा कलंक बन गया, अतः दूसरे ही दिन वह कमाई के विचार से शहर आ पहुँची, यहीं से उसका महादेवी के घर सेवा का जीवन शुरू हुआ।
प्र. पाक-कला विवाद में भक्तिन ने अपनी सफ़ाई में कौन-कौन से बहाने दिए?
उत्तर: पहली बार की “एक अंगुल मोटी और गहरी काली चित्तीदार” रोटियों पर महादेवी के असंतोष जताने पर भक्तिन कहती है कि रोटियाँ अच्छी सेंकने के प्रयास में कुछ अधिक खरी हो गई हैं, पर अच्छी हैं; दूध-घी लेखिका को अच्छा नहीं लगता, नहीं तो सब ठीक हो जाता; शाम को दाल की जगह तरकारी बना दी जाएगी; अमचूर-लाल मिर्च की चटनी या गाँव का गुड़ भी चल सकता है। अंत में वह अपने ससुर, पितिया ससुर, अजिया सास आदि के दिए मौखिक ‘प्रमाण-पत्रों’ का हवाला देकर अपनी पाक-कुशलता सिद्ध कर देती है।
प्र. भक्तिन के आने से महादेवी के जीवन पर क्या असर पड़ा?
उत्तर: भक्तिन ने महादेवी को अपने ग्रामीण खान-पान (मक्के का दलिया, बाजरे के पुए, महुए की लपसी) से परिचित कराया, जिससे महादेवी स्वयं लिखती हैं कि वे पहले से अधिक देहाती बन गईं। पर भक्तिन खुद कभी शहरी स्वाद (जैसे रसगुल्ला) अपना नहीं पाई, यानी असर एकतरफ़ा ही रहा।
प्र. हस्ताक्षर के नियम पर भक्तिन ने क्या तर्क दिया, और उसका क्या असर हुआ?
उत्तर: महादेवी ने सब काम करनेवालों से अँगूठे के निशान की जगह हस्ताक्षर लेने का नियम बनाया; तब भक्तिन ने तर्क दिया कि जब मालकिन खुद रात-दिन किताबों में डूबी रहती हैं, तो अगर वह भी पढ़ने लगे तो घर-गृहस्थी कौन देखेगा। इस तर्क का ऐसा असर हुआ कि बिना पढ़े ही भक्तिन क्लास में इंस्पेक्टर जैसे घूम-घूमकर दूसरों की लिखावट पर टीका-टिप्पणी करने लगी, यानी अनपढ़ होकर भी पढ़ने वालों की ‘गुरु’ बन बैठी।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. भक्तिन के जीवन के चार परिच्छेदों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर: पहला परिच्छेद बचपन का है: झूँसी में पालन-पोषण, विमाता की छाया, पाँच वर्ष में विवाह और पिता की मृत्यु का देर से पता चलना। दूसरा परिच्छेद वैवाहिक जीवन का है: तीन पुत्रियों का जन्म, जिठानियों का भेदभाव, पर पति का अगाध प्रेम और अलगौझा से आई समृद्धि। तीसरा परिच्छेद विधवा जीवन का है: छत्तीस वर्ष से कुछ अधिक आयु में पति की मृत्यु, पुनर्विवाह का दबाव ठुकराना, बड़ी बेटी की त्रासदी और ज़मींदार का अपमान। चौथा और वर्तमान परिच्छेद महादेवी के घर सेवा का है, जहाँ भक्तिन आज भी अपने पूरे स्वाभिमान और वफ़ादारी के साथ जी रही है।
प्र. बड़ी बेटी के विवाह के प्रसंग में पंचायत के फ़ैसले को अन्यायपूर्ण क्यों कहा गया है?
उत्तर: जेठ-जिठौतों ने विधवा बेटी की संपत्ति हड़पने के लिए अपने तीतर लड़ाने वाले साले को उससे जोड़ने की साज़िश रची। वह युवक ज़बरन बेटी की कोठरी में घुस गया, जिसे बेटी ने पीटकर बाहर निकाला। पंचायत बैठी और दोनों पक्षों की बात सामने आई, पर उसने समस्या का मूल कारण कलियुग माना और यह तय किए बिना कि दोष किसका है, केवल यह देखा कि दोनों एक कोठरी से साथ निकले हैं, और इसी आधार पर दोनों को पति-पत्नी मान लिया। यह फ़ैसला अन्यायपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसमें स्त्री की अपनी इच्छा और चुनाव की कोई जगह नहीं थी, अपराधी कौन है यह तय किए बिना ही सज़ा जैसा विवाह थोप दिया गया।
प्र. भक्तिन के चरित्र में गुण और दुर्गुण, दोनों किस तरह साथ-साथ मिलते हैं?
उत्तर: भक्तिन स्वाभिमानी, कर्मठ और अपनी मालकिन के प्रति गहरी वफ़ादार है, उसने अकेले दम पर संपत्ति और बेटियों की रक्षा की। साथ ही वह पूरी तरह सत्यवादी भी नहीं है, इधर-उधर पड़े पैसे उठाकर रख लेती है, और शास्त्र के प्रश्नों को अपनी सुविधा के अनुसार सुलझा लेती है। पर उसके ये छोटे दुर्गुण भी उसकी सेवा-भावना और मालकिन का भला चाहने की मंशा से ही जुड़े हैं, इसीलिए महादेवी लिखती हैं कि ‘भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा’, फिर भी वे उसे प्रेम करती हैं।
प्र. भक्तिन की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: महादेवी की अपनी भाषा संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्दावली से भरी है, जैसे मर्मभेदी, करुणामयी, पितृसत्तात्मक। इसके साथ भक्तिन के संवाद उसकी अपनी अवधी लोकभाषा में दिए गए हैं, जैसे ‘तुम पचै’, ‘होरहा’, ‘कउन’। इन दोनों भाषा-शैलियों का मेल पाठ को गंभीरता और सजीवता, दोनों देता है। इसके अलावा व्यंग्य-विनोद भी इस भाषा-शैली का अहम हिस्सा है, जैसे बेटियों को ‘दो संस्करण’ कहना और भक्तिन का बिना पढ़े ‘इंस्पेक्टर’ बन जाना।
प्र. भक्तिन के युद्ध-प्रसंग से उसके चरित्र की कौन-सी नई विशेषता उजागर होती है?
उत्तर: जब देश की सीमा में युद्ध बढ़ता देख लोग आतंकित हुए, तो भक्तिन के अपने बेटी-दामाद उसे साथ ले जाने आए, पर वह उनके साथ नहीं गई। युद्ध के भय के समय वह पहली बार लेखिका से गाँव चलने का अनुरोध करने आई, और जब महादेवी ने कहा कि वहाँ जाकर रहने के लिए उनके पास रुपया नहीं है, तो भक्तिन ने अपनी गुप्त बचत (पाँच बीसी और पाँच रुपया) से सब प्रबंध करने की बात कही। इससे उसकी कंजूसी की छवि के पीछे छिपी असली उदारता और महादेवी के प्रति उसकी गहरी वफ़ादारी उजागर होती है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. भक्तिन को ‘स्त्री-अस्मिता की संघर्षपूर्ण आवाज़’ क्यों कहा गया है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भक्तिन का पूरा जीवन एक पितृसत्तात्मक और सामंती समाज में स्त्री के संघर्ष की कहानी है। बचपन में उसे विमाता की उपेक्षा झेलनी पड़ी और पाँच वर्ष की उम्र में ही उसका विवाह कर दिया गया, जिसमें उसकी अपनी कोई मर्ज़ी नहीं थी। ससुराल में तीन पुत्रियों की माँ बनने पर उसे भेदभाव सहना पड़ा, मानो पुत्री जन्म देना उसकी अपनी ग़लती हो। पति की मृत्यु के बाद जब जेठ-जिठौत उसकी संपत्ति हड़पने के लिए पुनर्विवाह पर दबाव डालते हैं, तो वह अकेले दम पर डटकर खड़ी होती है और स्पष्ट इनकार करती है। उसकी बेटी के साथ हुए पंचायत के अन्यायपूर्ण फ़ैसले को इस बात के उदाहरण के रूप में पढ़ा जा सकता है कि उस समाज में स्त्री की अपनी इच्छा को मूल्य नहीं मिलता था। वह अपनी बेटियों के हक की लड़ाई में हारती भी है (बेटी पर पति थोपा गया, लगान न चुका पाने पर ज़मींदार ने अपमानित किया), पर हार के बाद भी उसने अपनी ज़िंदगी की राह नए सिरे से तय की और कमाई के लिए शहर आ गई। इसी संघर्ष के कारण पाठ की भूमिका कहती है कि इस पाठ को भक्तिन के बहाने स्त्री-अस्मिता की संघर्षपूर्ण आवाज़ के रूप में भी पढ़ा जाना चाहिए।
प्र. ‘भक्तिन को नौकर कहना असंगत है’ महादेवी वर्मा के इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: महादेवी लिखती हैं कि उनके और भक्तिन के बीच सेवक-स्वामी का संबंध है, यह कहना कठिन है, “क्योंकि ऐसा कोई स्वामी नहीं हो सकता, जो इच्छा होने पर भी सेवक को अपनी सेवा से हटा न सके और ऐसा कोई सेवक भी नहीं सुना गया, जो स्वामी के चले जाने का आदेश पाकर अवज्ञा से हँस दे।” यानी साधारण स्वामी चाहने पर सेवक को हटा सकता है और साधारण सेवक ऐसे आदेश पर हँसता नहीं; भक्तिन का संबंध इस ढाँचे में नहीं बँधता। महादेवी कहती हैं कि भक्तिन को नौकर कहना उतना ही असंगत है, जितना घर में बारी-बारी से आने-जाने वाले अँधेरे-उजाले और आँगन में फूलने वाले गुलाब और आम को सेवक मानना। वे जिस प्रकार एक अस्तित्व रखते हैं, जिसे सार्थकता देने के लिए ही हमें सुख-दुख देते हैं, उसी प्रकार भक्तिन का स्वतंत्र व्यक्तित्व अपने विकास का परिचय देते हुए ही महादेवी के जीवन को घेरे हुए है। इसीलिए उसे नौकर कहना ठीक नहीं; वह इससे कहीं बढ़कर एक साथी है।
प्र. पाठ के आधार पर भक्तिन और महादेवी के आपसी प्रभाव को स्पष्ट कीजिए। इनमें से किसने किसे अधिक बदला?
उत्तर: पाठ में यह स्पष्ट दिखता है कि भक्तिन का प्रभाव महादेवी पर कहीं अधिक गहरा पड़ा, बजाय इसके कि महादेवी भक्तिन को बदल पातीं। भक्तिन ने महादेवी को अपने ग्रामीण खान-पान, जैसे मक्के का दलिया, बाजरे के पुए और महुए की लपसी, से परिचित कराया, जिससे महादेवी स्वयं मानती हैं कि वे पहले से अधिक देहाती हो गईं। भक्तिन ने महादेवी को जीवन की सरलता के प्रति भी जाग्रत किया, जिससे महादेवी अपनी असुविधाएँ छिपाने लगीं। इसके उलट भक्तिन के अपने रहन-सहन, भाषा या स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया, उसने कभी साफ़ धोती पहनना नहीं सीखा, न शहर का रसगुल्ला अपनाया, न पुकारने पर ‘जी’ कहने का शिष्टाचार सीखा। इस तरह यह रिश्ता एकतरफ़ा प्रभाव का उदाहरण है, जहाँ भक्तिन ने अपनी सहज-बुद्धि और अपनेपन से महादेवी के व्यक्तित्व के कई अनछुए पहलू उजागर कर दिए, बिना खुद कुछ बदले।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक विमाता ने पिता के मरणांतक रोग का समाचार कब भेजा?
उत्तर: विमाता ने पिता के मरणांतक रोग का समाचार तब भेजा, जब वह मृत्यु की सूचना भी बन चुका था, यानी बहुत देर से।
(ख) 1 अंक सास ने भक्तिन को क्यों नहीं बताया कि उसके पिता बीमार हैं?
उत्तर: सास ने रोने-पीटने के अपशकुन से बचने के लिए भक्तिन को कुछ नहीं बताया।
(ग) 2 अंक ‘इस अप्रत्याशित अनुग्रह ने उसके पैरों में जो पंख लगा दिए थे, वे गाँव की सीमा में पहुँचते ही झड़ गए’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अचानक नैहर जाने की अनुमति पाकर भक्तिन बहुत उत्साहित और प्रसन्न होकर तेज़ी से चली, मानो उसके पैरों में पंख लग गए हों। पर जैसे ही वह गाँव पहुँची, यह उत्साह और खुशी पल-भर में समाप्त हो गई, क्योंकि उसे पता चला कि उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है।
(घ) 2 अंक इस पूरे प्रसंग से विमाता और सास के व्यवहार के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर: इस प्रसंग से पता चलता है कि दोनों संपत्ति और रीति-रिवाजों की परवाह भक्तिन के भावनात्मक हक़ से ज़्यादा करती थीं। विमाता को भक्तिन के दुख से ज़्यादा अपनी संपत्ति और सामाजिक अपशकुन की चिंता थी, और सास ने भी सच्चाई छुपाकर उसी सोच का साथ दिया, जिससे भक्तिन को अपने पिता से आख़िरी बार मिलने का मौक़ा तक नहीं मिला।
(क) 1 अंक भक्तिन किस ऐतिहासिक गाँव के एक सूरमा की बेटी थी?
उत्तर: भक्तिन ऐतिहासिक गाँव झूँसी के एक गाँव-प्रसिद्ध सूरमा की बेटी थी।
(ख) 1 अंक भक्तिन का विवाह किस गाँव में और किस आयु में हुआ?
उत्तर: भक्तिन का विवाह हँडिया ग्राम में, पाँच वर्ष की आयु में हुआ।
(ग) 2 अंक ‘पिता ने शास्त्र से दो पग आगे रहने की ख्याति कमाई’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि पिता ने शास्त्र-सम्मत उम्र से भी पहले, यानी बहुत छोटी उम्र में ही भक्तिन का विवाह करके यह दिखाने की कोशिश की कि वे धर्म-कर्म के पालन में दूसरों से भी आगे हैं, भले ही यह भक्तिन के लिए हानिकारक क्यों न रहा हो।
(घ) 2 अंक ‘विमाता ने… महाजन का पुण्य लूटा’ पंक्ति में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यहाँ लेखिका व्यंग्य करती हैं कि विमाता ने नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही भक्तिन का गौना करवा दिया, मानो वह कोई पराई अमानत हो जिसे जल्दी लौटाना उसका कर्तव्य हो। असल में विमाता भक्तिन को जल्दी से जल्दी घर से विदा कर देना चाहती थी, पर इसे धार्मिक कर्तव्य-पालन जैसा दिखाया गया, यही इस पंक्ति का व्यंग्य है।