इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. उमाशंकर जोशी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: उमाशंकर जोशी का जन्म सन् 1911 में गुजरात में हुआ।
प्र. उमाशंकर जोशी का निधन कब हुआ?
उत्तर: उमाशंकर जोशी का निधन सन् 1988 में हुआ।
प्र. दोनों प्रस्तुत कविताओं का हिंदी रूपांतरण किसने किया?
उत्तर: दोनों कविताओं का गुजराती से हिंदी रूपांतरण रघुवीर चौधरी और भोलाभाई पटेल ने किया है।
प्र. उमाशंकर जोशी ने 1947 से किस पत्रिका का संपादन किया?
उत्तर: उन्होंने 1947 से ‘संस्कृति’ नामक पत्रिका का संपादन किया।
प्र. ‘छोटा मेरा खेत’ कविता में खेत की तुलना किससे की गई है?
उत्तर: खेत की तुलना कागज़ के एक चौकोर पन्ने से की गई है।
प्र. कविता में ‘बीज’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: पाठ के अनुसार बीज रचना के प्रारंभिक विचार और अभिव्यक्ति का प्रतीक हो सकता है (“यह बीज-रचना विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है”)।
प्र. ‘बगुलों के पंख’ कविता में बगुले किस रंग के बादलों की पृष्ठभूमि में उड़ रहे हैं?
उत्तर: बगुले कजरारे (काले) बादलों की पृष्ठभूमि में उड़ रहे हैं।
प्र. उमाशंकर जोशी ने कालिदास की किस कृति का गुजराती अनुवाद किया?
उत्तर: उन्होंने कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ का गुजराती में अनुवाद किया।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या हैं?
उत्तर: पाठ के अनुसार अंधड़ से आशय भावनात्मक आँधी (हलचल) से है, जो किसी क्षण कवि के भीतर उठती है। उसके प्रभाव से बीज बोया जाता है; बीज रचना का प्रारंभिक विचार और अभिव्यक्ति है, जो खेत रूपी कागज़ में बोया जाता है।
प्र. ‘रस का अक्षयपात्र’ से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है?
उत्तर: साहित्य का रस कभी नहीं चुकता। अक्षयपात्र की तरह, जितना बाँटा जाता है, उतना भी कम नहीं होता (“लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती”); पाठ के अनुसार उत्तम साहित्य कालजयी होता है और असंख्य पाठकों द्वारा असंख्य बार पढ़ा जाता है।
प्र. छोटे चौकोने खेत को कागज़ का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?
उत्तर: कागज़ का पन्ना भी खेत की भाँति चौकोर होता है, और उस पर भी रचना रूपी फ़सल उगाई जाती है। इस तरह लेखन-कर्म को कृषि-कर्म के समांतर दिखाया गया है।
प्र. उमाशंकर जोशी की काव्य-शैली की क्या विशेषता थी?
उत्तर: उन्होंने गुजराती कविता को प्रकृति से जोड़ा, आम ज़िंदगी के अनुभव से परिचित कराया और सामान्य बोलचाल की भाषा में नयी शैली दी।
प्र. ‘बगुलों के पंख’ कविता में वस्तुगत और आत्मगत के संयोग की युक्ति क्या है?
उत्तर: कवि सौंदर्य के ब्यौरों (बगुले, बादल, साँझ) का चित्रात्मक वर्णन करने के साथ-साथ अपने मन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव (आँखें चुराना, माया में बँधना) का भी वर्णन करता है।
प्र. ‘खेत में पैदा होने वाला अन्न’ और ‘साहित्य के रस’ में कवि क्या अंतर बताते हैं?
उत्तर: खेत का अन्न कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है, पर साहित्य का रस कभी नहीं चुकता। यही कृषि और साहित्य के बीच का एक अंतर है।
प्र. उमाशंकर जोशी के निबंधकार रूप के बारे में पाठ क्या कहता है?
उत्तर: निबंधकार के रूप में उमाशंकर जोशी गुजराती साहित्य में बेजोड़ (अतुलनीय) माने जाते हैं।
प्र. ‘बगुलों के पंख’ कविता में रंगों का कौन-सा विरोधी युग्म चित्रित हुआ है?
उत्तर: कजरारे (काले) बादलों से छाए आकाश में तैरती साँझ की सतेज श्वेत (सफ़ेद) काया, और उसी के समान लगते सफ़ेद बगुले: काले और सफ़ेद रंगों का यह विरोधी युग्म चित्रित हुआ है।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. ‘छोटा मेरा खेत’ कविता में रचना-प्रक्रिया को कृषि-रूपक से किस प्रकार समझाया गया है, विस्तार से लिखें।
उत्तर: कविता कागज़ के पन्ने को चौकोर खेत का रूपक देती है। कोई अंधड़ (पाठ के अनुसार भावनात्मक आँधी) आता है और उसके प्रभाव से किसी क्षण उस खेत में रचना का बीज (विचार और अभिव्यक्ति) बोया जाता है। यह बीज कल्पना रूपी रसायन को पीकर गल जाता है, जिससे शब्दों के अंकुर फूटते हैं। रचना पल्लव-पुष्पों से लद जाती है, फिर फल झूमने लगते हैं और अलौकिक रस-धारा फूट पड़ती है। बोना (रोपाई) पल-भर में होता है, पर उत्तम साहित्य अनंत काल तक पढ़ा जाता है (कटाई अनंतता की)। इस तरह पूरी रचना-प्रक्रिया कृषि-चक्र के हर चरण से जोड़ी गई है।
प्र. व्याख्या करें: ‘शब्द के अंकुर फूटे, पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।’
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि बताते हैं कि जैसे ही बीज (विचार) कल्पना के सहारे विकसित होता है, रचना के शब्द अंकुर की तरह फूटने लगते हैं। धीरे-धीरे रचना पल्लव-पुष्पों (कोमल पत्तों-फूलों) से विशेष रूप से लद जाती है, यानी विचार से शुरू हुई रचना अब समृद्ध और पूर्ण भाषा-रूप ग्रहण कर लेती है।
प्र. व्याख्या करें: ‘रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की, लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।’
उत्तर: इन पंक्तियों में रोपाई और कटाई के समय का अंतर है। रचना का बीज (विचार) पल-भर में बोया जाता है (रोपाई क्षण की), पर उत्तम साहित्य कालजयी होकर अनंत काल तक असंख्य पाठकों द्वारा पढ़ा जाता है (कटाई अनंतता की)। और यह साहित्यिक रस जितना बाँटा (लुटाया) जाता है, उतना भी कम नहीं होता।
प्र. उमाशंकर जोशी के जीवन और साहित्यिक योगदान का वर्णन करें।
उत्तर: उमाशंकर जोशी का जन्म सन् 1911 में गुजरात में हुआ और निधन सन् 1988 में हुआ। वे बीसवीं सदी की गुजराती कविता और साहित्य को नयी भंगिमा और नया स्वर देने वाले कवि थे, जिनका योगदान पूरे भारतीय साहित्य के लिए महत्त्वपूर्ण है। उन्हें परंपरा का गहरा ज्ञान था। उन्होंने कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ और भवभूति के ‘उत्तररामचरित’ का गुजराती में अनुवाद किया। कवि के रूप में उन्होंने गुजराती कविता को प्रकृति से जोड़ा और सामान्य बोलचाल की भाषा में नयी शैली दी। साहित्य-आलोचना और निबंध-लेखन में भी उनका योगदान बेजोड़ माना जाता है। उन्होंने 1947 से ‘संस्कृति’ पत्रिका का संपादन भी किया उनका आज़ादी की लड़ाई से रिश्ता रहा और उसके दौरान वे जेल भी गए।
प्र. ‘बगुलों के पंख’ कविता में सौंदर्य के अपेक्षित प्रभाव को उत्पन्न करने के लिए कवि ने किस युक्ति का प्रयोग किया है? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर: कवि ने वस्तुगत (बाहर जो दिखे) और आत्मगत (भीतर जो महसूस हो) के संयोग की युक्ति अपनाई है। पहले वे सौंदर्य के ब्यौरों का चित्रात्मक वर्णन करते हैं, जैसे कजरारे बादलों में उड़ते सफ़ेद बगुले और तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया, फिर अपने मन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का वर्णन करते हैं, जैसे ‘चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखें’ और ‘हौले हौले जाती मुझे बाँध निज माया से’। यही संयोग पाठक को मूल सौंदर्य के काफ़ी निकट ले जाता है।
प्र. ‘छोटा मेरा खेत’ और ‘बगुलों के पंख’ की काव्य-शैली की तुलना करें।
उत्तर: ‘छोटा मेरा खेत’ चार अंतरों की विस्तृत रूपक-प्रधान कविता है, जिसमें रचना-प्रक्रिया को कृषि-रूपक के ज़रिये समझाया गया है। ‘बगुलों के पंख’ मात्र आठ पंक्तियों की एक ही अंतरे की दृश्य-बिंब-प्रधान कविता है, जो प्रत्यक्ष चित्रात्मक वर्णन पर आधारित है। दोनों में एक साझा तकनीक भी है, आवृत्ति (पुनरावृत्ति): दोनों कविताएँ अपनी पहली पंक्ति या भाव को अंत में दोहराकर गोलाकार संरचना बनाती हैं।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. शब्दों के माध्यम से जब कवि दृश्यों, चित्रों, ध्वनि-योजना अथवा रूप-रस-गंध को हमारे ऐन्द्रिक अनुभवों में साकार कर देता है तो बिंब का निर्माण होता है। इस आधार पर ‘बगुलों के पंख’ कविता से बिंब की खोज करते हुए विस्तार से समझाएँ।
उत्तर: ‘बगुलों के पंख’ कविता दृश्य-बिंब से भरपूर है। कवि आकाश में पंक्तिबद्ध उड़ते सफ़ेद बगुलों को काले (कजरारे) बादलों की पृष्ठभूमि में दिखाते हैं, यह चित्रात्मक वर्णन एक स्पष्ट दृश्य-बिंब रचता है। इसके आगे ‘तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया’ कहकर साँझ को मानो शरीर (काया) दिया गया है, और पाठ के अनुसार बगुले इसी श्वेत काया के समान प्रतीत होते हैं; यह भी एक जीवंत दृश्य-बिंब है। इन बिंबों से पाठक स्वयं वह शाम का आकाश अपनी आँखों के सामने देख पाता है, यही बिंब-विधान की सफलता है।
प्र. जहाँ उपमेय में उपमान का आरोप हो, रूपक कहलाता है। ‘छोटा मेरा खेत’ कविता में से रूपक का चुनाव करते हुए विस्तार से समझाएँ।
उत्तर: ‘छोटा मेरा खेत’ कविता पूरी तरह एक विस्तृत रूपक पर टिकी है। कागज़ के पन्ने को सीधे ‘खेत’ कह दिया गया है, ‘खेत जैसा पन्ना’ नहीं, यही रूपक है। इसी तरह भावनात्मक आँधी को ‘अंधड़’ कहा गया है, रचना के विचार को ‘बीज’, कल्पना को बीज को पोषण देने वाला ‘रसायन’, भाषा में ढलती रचना को ‘अंकुर’ और ‘पल्लव-पुष्प’, और पूर्ण रचना के आनंद को ‘फल’ व ‘रस’ कहा गया है। अंत में साहित्य के अक्षय आनंद को ‘रस का अक्षय पात्र’ कहा गया है। इस तरह रचना-प्रक्रिया के हर चरण को खेती के किसी न किसी रूपक में बाँध दिया गया है।
प्र. उमाशंकर जोशी की काव्य-दृष्टि और भारतीय साहित्य में उनके योगदान का समग्र मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर: उमाशंकर जोशी मूलतः गुजराती भाषा के कवि थे, पर उनका साहित्यिक अवदान पूरे भारतीय साहित्य के लिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने बीसवीं सदी की गुजराती कविता और साहित्य को नयी भंगिमा और नया स्वर दिया। उन्हें परंपरा का गहरा ज्ञान था। उन्होंने कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम् और भवभूति के उत्तररामचरित का गुजराती अनुवाद किया, और इन अनुवादों ने गुजराती साहित्य की अभिव्यक्ति-क्षमता को बढ़ाया। बतौर कवि उन्होंने गुजराती कविता को प्रकृति और आम ज़िंदगी के अनुभव से जोड़ा तथा सामान्य बोलचाल की भाषा में नयी शैली दी, वे जीवन के सामान्य प्रसंगों पर सामान्य बोलचाल की भाषा में कविता लिखने वाले भारतीय आधुनिकतावादियों में अन्यतम हैं। कविता के अतिरिक्त साहित्य-आलोचना और निबंध-लेखन में भी उनका योगदान बहुमूल्य रहा, और वे स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़े रहे और उसके दौरान जेल भी गए।
प्र. ‘छोटा मेरा खेत’ कविता के आधार पर स्पष्ट करें कि कवि रचना-प्रक्रिया और वास्तविक कृषि-कर्म में क्या समानताएँ व क्या अंतर देखता है।
उत्तर: समानताएँ: दोनों में एक क्षेत्र (खेत/कागज़) होता है, दोनों में कोई बाहरी प्रेरक तत्व (अंधड़) बीज बोने का कारण बनता है, दोनों में बीज पोषण पाकर (कल्पना/खाद-पानी) अंकुरित होता है, और अंततः दोनों में फल-रस प्राप्त होता है। अंतर यह है कि वास्तविक खेती की उपज (अन्न) कुछ समय बाद समाप्त हो जाती है। परंतु साहित्य-रचना में रोपाई (रचना का बनना) भले ही क्षण-भर में हो, उसकी कटाई (पाठकों द्वारा पढ़ा जाना) अनंत काल तक चलती रहती है, और साहित्य का रस बाँटने पर भी कभी कम नहीं होता, अक्षयपात्र की तरह सदा बना रहता है। यह अंतर पाठ में रेखांकित है।
5 केस स्टडी
बीज गल गया निःशेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
झूमने लगे फल,
रस अलौकिक,
अमृत धाराएँ फूटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।
(क) 1 अंक बीज किसे पीकर गलता है?
उत्तर: बीज कल्पना के रसायनों को पीकर पूरी तरह (निःशेष) गल जाता है।
(ख) 1 अंक ‘पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष’ पंक्ति का क्या अर्थ है?
उत्तर: रचना कोमल पत्तों-फूलों (पल्लव-पुष्पों) से विशेष रूप से लद जाती है, यानी रचना समृद्ध व पूर्ण रूप ग्रहण करती है।
(ग) 2 अंक ‘रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की’ पंक्ति में कौन-सा भाव छिपा है?
उत्तर: रचना का बीज पल-भर में बोया जाता है (रोपाई क्षण की), पर उत्तम साहित्य कालजयी होकर अनंत काल तक असंख्य पाठकों द्वारा पढ़ा जाता है (कटाई अनंतता की)। यही रचना और सामान्य कृषि-कर्म के बीच का अंतर है।
(घ) 2 अंक पद्यांश के आधार पर स्पष्ट करें कि साहित्य का रस ‘लुटते रहने से जरा भी नहीं कम’ क्यों होता।
उत्तर: पाठ के अनुसार खेत का अन्न कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है, पर साहित्य का रस कभी चुकता नहीं; उत्तम साहित्य कालजयी होता है और असंख्य पाठकों द्वारा असंख्य बार पढ़ा जाता है। इसलिए जितना बाँटा जाता है, उतना भी कम नहीं होता, ठीक अक्षयपात्र जैसा गुण।
चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखें।
कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया।
हौले हौले जाती मुझे बाँध निज माया से।
उसे कोई तनिक रोक रक्खो।
(क) 1 अंक कवि की आँखें कौन चुराए लिए जाती हैं?
उत्तर: नभ में पाँती-बँधे बगुलों के पंख कवि की आँखें चुराए लिए जाते हैं।
(ख) 1 अंक ‘कजरारे बादलों की छाई नभ छाया’ में कौन-सा रंग चित्रित है?
उत्तर: काजल जैसे काले (कजरारे) बादलों से छाया आकाश, यानी गहरे काले रंग का चित्रण है।
(ग) 2 अंक ‘तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया’ पंक्ति में कौन-सी काव्य-युक्ति प्रयुक्त हुई है?
उत्तर: यह एक दृश्य-बिंब है। यहाँ साँझ को शरीर (काया) वाला बताकर उसका मानवीकरण किया गया है, और पाठ के अनुसार बगुले उसी श्वेत काया के समान प्रतीत होते हैं।
(घ) 2 अंक कवि ‘उसे कोई तनिक रोक रक्खो’ क्यों कहता है?
उत्तर: दृश्य का सौंदर्य कवि को धीरे-धीरे अपनी माया में बाँधता जा रहा है; पाठ के अनुसार वह इस माया से अपने को बचाने की गुहार लगाता है, इसलिए कहता है कि उसे (इस माया को) कोई तनिक रोक रखे।