NCERT की पाठ्यपुस्तक आरोह भाग 2 के अध्याय 9 «छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख» के अभ्यास (कविता के साथ, कविता के आसपास, कला की बात) के सभी प्रश्नों के पूरे हल। पहले ख़ुद उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 कविता के साथ
प्र. छोटे चौकोने खेत को कागज़ का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?
उत्तर: कागज़ का पन्ना भी खेत की भाँति चौकोर आकार का होता है, और जिस तरह खेत में किसान बीज बोकर फ़सल उगाता है, उसी तरह कवि भी कागज़ के इस पन्ने रूपी खेत में विचार और अभिव्यक्ति का बीज बोकर एक रचना रूपी फ़सल उगाता है। इस तरह लेखन-कर्म (कवि-कर्म) को कृषि-कर्म के समांतर, रूपक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह तुलना रचना-प्रक्रिया को बेहद सहज और मूर्त ढंग से समझाती है।
प्र. रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या हैं?
उत्तर: पाठ के अनुसार ‘अंधड़’ से आशय भावनात्मक आँधी (हलचल) से है, जो किसी अनजाने क्षण कवि के भीतर उठती है (“कोई अंधड़ कहीं से आया”)। उसके प्रभाव से किसी क्षण एक बीज बोया जाता है। ‘बीज’ रचना का प्रारंभिक विचार और अभिव्यक्ति (का बीज) है; पाठ के शब्दों में “यह बीज-रचना विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है।”
प्र. रस का अक्षयपात्र से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है?
उत्तर: ‘अक्षयपात्र’ का अर्थ है ऐसा पात्र (बर्तन) जो कभी खाली न हो, जिसमें से लगातार निकालने पर भी सामग्री कम न हो। कवि इस रूपक से साहित्य के रस (आनंद) की यह विशेषता बताते हैं कि यह रस कभी नहीं चुकता। साधारण खेत का अन्न तो कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है, पर उत्तम साहित्य कालजयी होता है, असंख्य पाठकों द्वारा असंख्य बार पढ़ा जाता है, और जितना बाँटा (लुटाया) जाता है, उतना भी कम नहीं होता (“लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती”)।
प्र. व्याख्या करें: (1) शब्द के अंकुर फूटे, पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष। (2) रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की, लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।
उत्तर (1): जैसे ही रचना का बीज (विचार) कल्पना के सहारे विकसित होकर गल जाता है, रचना के शब्द अंकुर की तरह फूटने लगते हैं। धीरे-धीरे यह रचना पल्लव-पुष्पों (कोमल पत्तों-फूलों) से विशेष रूप से लद जाती है, अर्थात् आरंभिक विचार अब भाषा में ढलकर एक समृद्ध, पूर्ण रूप ग्रहण कर लेता है।
उत्तर (2): इन पंक्तियों में रोपाई और कटाई के समय का अंतर है। रचना का बीज पल-भर में बोया जाता है (रोपाई क्षण की), पर उत्तम साहित्य कालजयी होकर अनंत काल तक असंख्य पाठकों द्वारा पढ़ा जाता है (कटाई अनंतता की)। और यह साहित्यिक रस जितना बाँटा जाता है, उतना भी कम नहीं होता।
2 कविता के आसपास
प्र. शब्दों के माध्यम से जब कवि दृश्यों, चित्रों, ध्वनि-योजना अथवा रूप-रस-गंध को हमारे ऐन्द्रिक अनुभवों में साकार कर देता है तो बिंब का निर्माण होता है। इस आधार पर प्रस्तुत कविता से बिंब की खोज करें।
उत्तर: ‘बगुलों के पंख’ कविता दृश्य-बिंब से भरपूर है। कवि आकाश में पंक्तिबद्ध (पाँती-बँधे) उड़ते सफ़ेद बगुलों को काले (कजरारे) बादलों की पृष्ठभूमि में दिखाते हैं, यह चित्रात्मक वर्णन एक स्पष्ट दृश्य-बिंब रचता है। ‘छोटा मेरा खेत’ में भी “छोटा मेरा खेत चौकोना / कागज़ का एक पन्ना”, “शब्द के अंकुर फूटे”, “झूमने लगे फल” जैसी पंक्तियाँ खेत, अंकुर और झूमते फलों का दृश्य-बिंब रचती हैं, और “अमृत धाराएँ फूटतीं” रस (स्वाद) का बिंब देती है। ‘बगुलों के पंख’ में ‘तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया’ कहकर साँझ को मानो शरीर (काया) दे दिया गया है, और पाठ के अनुसार उड़ते बगुले इसी श्वेत काया के समान लगते हैं; यह भी एक जीवंत दृश्य-बिंब है। इन बिंबों से पाठक स्वयं वह शाम का आकाश अपनी आँखों के सामने देख पाता है।
प्र. जहाँ उपमेय में उपमान का आरोप हो, रूपक कहलाता है। इस कविता में से रूपक का चुनाव करें।
उत्तर: ‘छोटा मेरा खेत’ कविता पूरी तरह एक विस्तृत रूपक पर टिकी है। कागज़ के पन्ने को सीधे ‘खेत’ कह दिया गया है, ‘खेत जैसा पन्ना’ नहीं, यही रूपक है। इसी तरह भावनात्मक आँधी को ‘अंधड़’, रचना के विचार को ‘बीज’, भाषा में ढलती रचना को ‘अंकुर’ व ‘पल्लव-पुष्प’, और पूर्ण रचना के आनंद को ‘फल’ व ‘रस’ कहा गया है। अंत में साहित्य के अक्षय आनंद को ‘रस का अक्षय पात्र’ कहा गया है। इस तरह रचना-प्रक्रिया के हर चरण को खेती के किसी न किसी रूपक में बाँध दिया गया है।
3 कला की बात
प्र. बगुलों के पंख कविता को पढ़ने पर आपके मन में कैसे चित्र उभरते हैं? उनकी किसी भी अन्य कला माध्यम में अभिव्यक्ति करें।
उत्तर: यह एक सृजनात्मक (रचनात्मक) प्रश्न है, जिसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है, विद्यार्थी अपनी कल्पना के अनुसार उत्तर दें। कविता पढ़ते ही मन में एक शांत साँझ का दृश्य उभरता है, आकाश में काले-कजरारे बादलों की चादर, और उसके ऊपर पंक्तिबद्ध उड़ते सफ़ेद बगुलों की एक कतार, जिसमें साँझ की सतेज श्वेत आभा फैली हुई है। (यह एक उदाहरण है।) इस दृश्य को विद्यार्थी चाहें तो एक जल-रंग या रेखाचित्र (स्केच) बनाकर, या कुछ पंक्तियों की अपनी कविता या गद्यांश लिखकर, या फिर किसी फ़ोटोग्राफ़ का वर्णन करके भी व्यक्त कर सकते हैं। मुख्य उद्देश्य है, कविता के दृश्य-बिंब को अपने शब्दों या किसी अन्य कला-माध्यम में उतारना।