परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: कवि परिचय, दोनों कविताओं का सार, प्रमुख पंक्तियाँ और परिभाषाएँ एक जगह। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 कवि परिचय एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| जन्म | सन् 1911, गुजरात |
| निधन | सन् 1988 |
| भाषा | मूलतः गुजराती कवि |
| हिंदी रूपांतरणकार | रघुवीर चौधरी और भोलाभाई पटेल |
| अनुवाद-कार्य | कालिदास का अभिज्ञान शाकुंतलम्, भवभूति का उत्तररामचरित (गुजराती में) |
| पत्रिका-संपादन | 1947 से ‘संस्कृति’ पत्रिका |
| अन्य पहचान | निबंधकार के रूप में गुजराती साहित्य में बेजोड़ माने जाते हैं; आज़ादी की लड़ाई से रिश्ता, उसके दौरान जेल भी गए |
2 छोटा मेरा खेत सार-रूप में
कृषि-रूपक, एक नज़र में
- खेत = कागज़ का चौकोर पन्ना
- अंधड़ = भावनात्मक आँधी (पाठ का आशय), जिसके प्रभाव से किसी क्षण बीज बोया जाता है; बीज-रचना विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है
- कल्पना = वह रसायन जिसे पीकर बीज पूरी तरह गल जाता है (निःशेष)
- अंकुर व पल्लव-पुष्प = भाषा में ढलती, समृद्ध होती रचना
- फल व रस = पूर्ण रचना और उसका आनंद
- रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की, यह रस लुटाने से भी कम नहीं होता
- खेत का अन्न कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है, पर साहित्य का रस कभी नहीं चुकता
Learn by heartपरिभाषा 1
रूपक अलंकार: उपमेय पर उपमान का ऐसा आरोप कि दोनों में भेद न रहे। ‘छोटा मेरा खेत’ में कागज़ को सीधे ‘खेत’ कह दिया गया है।
Learn by heartपरिभाषा 2
अक्षयपात्र: कभी न चुकने वाला पात्र। पाठ की पंक्ति “रस का अक्षय पात्र सदा का” में साहित्य के रस के लिए रूपक; रस लुटते रहने से भी ज़रा भी कम नहीं होता।
3 बगुलों के पंख सार-रूप में
दृश्य-बिंब, एक नज़र में
- आकाश में पंक्तिबद्ध उड़ते सफ़ेद बगुले कवि की आँखें चुराए लेते हैं
- कजरारे (काले) बादलों की पृष्ठभूमि में तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया
- दृश्य इतना नयनाभिराम है कि कवि सब कुछ भूलकर उसी में अटका-सा रह जाता है
- कवि दृश्य की माया में हौले-हौले बँधता जाता है, बचने की गुहार लगाता है
- कविता पहली पंक्ति (या उसके भाव) को दोहराकर समाप्त होती है (आवृत्ति)
Learn by heartपरिभाषा 3
बिंब: शब्दों से बना ऐसा चित्र जो दृश्य/रंग/ध्वनि को इंद्रियों में साकार कर दे। बगुलों के पंख में कजरारे बादल, सफ़ेद बगुलों और साँझ की सतेज श्वेत काया का वर्णन एक दृश्य-बिंब है।
4 दोनों कविताओं की तुलना
छोटा मेरा खेत
- 4 अंतरे, विस्तृत कृषि-रूपक
- प्रमुख अलंकार: रूपक
बगुलों के पंख
- 1 अंतरा, 8 पंक्ति, दृश्य-प्रधान
- प्रमुख तकनीक: दृश्य-बिंब (सौंदर्य का चित्रात्मक वर्णन और कवि के मन पर उसका प्रभाव)
परीक्षा से पहले यही पढ़ें
- उमाशंकर जोशी: जन्म 1911, निधन 1988, गुजराती कवि; अनुवादक: रघुवीर चौधरी और भोलाभाई पटेल
- छोटा मेरा खेत: रूपक, खेत=कागज़, अंधड़=भावनात्मक आँधी, बीज=विचार, अंकुर=शब्द, फल/रस=रचना; रस अक्षय है
- बगुलों के पंख: दृश्य-बिंब, कजरारे बादलों पर उड़ते सफ़ेद बगुले, साँझ की सतेज श्वेत काया जैसे
- दोनों कविताएँ पहली पंक्ति (या उसके भाव) के दोहराव से गोलाकार संरचना बनाती हैं
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