कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 1 देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ और कब हुआ था?

उत्तर: जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी में सन् 1889 में हुआ था।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. देवसेना का गीत किस नाटक से लिया गया है?

उत्तर: देवसेना का गीत जयशंकर प्रसाद के स्कंदगुप्त नाटक से लिया गया है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. कार्नेलिया का गीत किस नाटक से लिया गया है?

उत्तर: कार्नेलिया का गीत जयशंकर प्रसाद के चंद्रगुप्त नाटक से लिया गया है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. “विहाग” शब्द का अर्थ लिखिए।

उत्तर: विहाग अर्धरात्रि में गाया जाने वाला एक राग है।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. कार्नेलिया किसकी पुत्री है?

उत्तर: कार्नेलिया सिकंदर के सेनापति सिल्यूकस की पुत्री है।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. पाठ के कवि-परिचय में दी गई जयशंकर प्रसाद की किन्हीं दो कविताओं (काव्य-रचनाओं) के नाम लिखिए।

उत्तर: कामायनी और आँसू (अन्य: झरना, लहर, कानन कुसुम, प्रेमपथिक)।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन कैसे है और उसके परिवार का क्या हुआ?

उत्तर: देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन है। हूणों के आक्रमण से आर्यावर्त संकट में आ गया था, जिसमें बंधुवर्मा सहित उसके पूरे परिवार को वीरगति प्राप्त हुई।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. देवसेना ने कौन-से दो व्रत लिए?

उत्तर: देवसेना ने अपने मृत भाई बंधुवर्मा के स्वप्नों को साकार करने का व्रत लिया, और साथ ही राष्ट्रसेवा करने का व्रत भी लिया।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. जीवन के अंतिम मोड़ पर स्कंदगुप्त और देवसेना के बीच क्या हुआ?

उत्तर: जीवन के अंतिम मोड़ पर स्कंदगुप्त देवसेना को पाना चाहता है और उससे अनुनय-विनय करता है, परंतु देवसेना उसे स्वीकार करने को तैयार नहीं होती। इस पर स्कंदगुप्त आजीवन कुँवारा रहने का व्रत ले लेता है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. कार्नेलिया कहाँ बैठी हुई है और वह क्या सोच रही है?

उत्तर: कार्नेलिया सिंधु नदी के किनारे, ग्रीक शिविर के पास, एक वृक्ष के नीचे बैठी हुई है। वह सिंधु-तट के सौंदर्य से प्रभावित होकर सोचती है कि कहीं वह भारतीय संगीत का पाठ भूल तो नहीं गई।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. “मैंने भ्रम-वश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: देवसेना कहती है कि उसने भ्रमवश (गलतफ़हमी में) जीवन-भर संचित की हुई मधुकरियों (भिक्षा) की भीख लुटा दी, यानी जीवन की संचित पूँजी भ्रम में गँवा दी। पाठ के अनुसार वह अपने यौवन के कामों को “भ्रमवश किए गए कर्मों” में रखकर पछताती है।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है?

उत्तर: देवसेना अपनी आशा को बावली (पगली) कहती है, क्योंकि उसी आशा ने उसकी सकल कमाई, यानी जीवन की पूँजी, खो दी: “मेरी आशा आह! बावली, तूने खो दी सकल कमाई।”

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. “जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: भारत इतना उदार है कि यहाँ पहुँचकर अनजान क्षितिज को भी एक सहारा मिल जाता है, यानी अनजान को भी यहाँ सहारा मिलता है। पाठ के अनुसार अनजान को भी सहारा देना और लहरों को भी किनारा देना हमारे देश की विशेषता है।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. जयशंकर प्रसाद की शिक्षा-दीक्षा के बारे में बताइए।

उत्तर: जयशंकर प्रसाद की विद्यालयी शिक्षा केवल आठवीं कक्षा तक हुई, किंतु उन्होंने स्वाध्याय के द्वारा संस्कृत, पालि, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं तथा साहित्य का गहन अध्ययन किया।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. देवसेना के जीवन की कहानी अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: • देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन है।
• हूणों के आक्रमण में बंधुवर्मा सहित परिवार के सभी लोगों को वीरगति प्राप्त होती है।
• बची हुई देवसेना राष्ट्रसेवा और भाई के स्वप्नों को साकार करने का व्रत लेती है।
• जीवन में उसे स्कंदगुप्त की चाह थी, किंतु स्कंदगुप्त मालवा के धनकुबेर की कन्या विजया का स्वप्न देखते थे।
• जीवन के अंतिम मोड़ पर स्कंदगुप्त उसे पाना चाहता है, पर देवसेना तब तक आश्रम में वृद्ध पर्णदत्त के साथ गाना गाकर भीख माँगती है और महादेवी की समाधि परिष्कृत करती है; वह स्कंदगुप्त के अनुनय-विनय पर भी तैयार नहीं होती।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. कार्नेलिया का गीत में भारत की किन विशेषताओं का वर्णन किया गया है?

उत्तर: • भारत सबको सहारा देने वाला, अनजान को भी अपनाने वाला देश है।
• यहाँ की प्रकृति (तांबे जैसी लाल आभा, हरियाली, वृक्ष) अत्यंत मनोहर है।
• पक्षी भी इसी देश को अपना प्यारा घोंसला मानते हैं।
• यह देश करुणा और उदारता से भरा है, लहरों को भी किनारा देता है।
• यहाँ की भोर (हेम कुंभ लिए उषा) और रात्रि (मदिर ऊँघते तारे) का चित्र है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?

उत्तर: • भाई बंधुवर्मा और पूरे परिवार की मृत्यु।
• जीवन में देवसेना को स्कंदगुप्त की चाह थी, किंतु स्कंदगुप्त विजया का स्वप्न देखते थे।
• जीवन के अंतिम मोड़ पर स्कंदगुप्त का देवसेना को पाने की इच्छा रखना, जब देवसेना तब तक आश्रम में जीवन बिता रही थी।
• यौवन के कामों को “भ्रमवश किए गए कर्म” मानकर पश्चाताप।
• अपनी ही आशा (जिसे वह “बावली” कहती है) का सकल कमाई खो देना।
• प्रलय जैसी नियति के आगे अपनी दुर्बलता को पहचानना, फिर भी हारने की निश्चितता के बावजूद होड़ लगाना।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत: दोनों की भाव-भूमि में क्या अंतर है?

उत्तर: • देवसेना का गीत व्यक्तिगत वेदना पर आधारित है, जबकि कार्नेलिया का गीत सार्वजनिक विषय, यानी भारत के गौरव पर आधारित है।
• देवसेना का गीत निराशा और पश्चाताप से भरा है, कार्नेलिया का गीत उल्लास और प्रशंसा से।
• देवसेना स्वयं भारतीय है, कार्नेलिया विदेशी।
• दोनों गीत खड़ी बोली के गेय, तुकांत गीत हैं।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए: “श्रमित स्वप्न की मधुमाया में, गहन-विपिन की तरु-छाया में, पथिक उनींदी श्रुति में किसने, यह विहाग की तान उठाई।”

उत्तर: • भाव: थके स्वप्न की मधुमाया और घने वन की छाया में, नींद से भरे पथिक के कान में किसी ने विहाग की तान छेड़ दी है।
• बिंब-योजना अत्यंत प्रभावी है: घना जंगल, पेड़ों की छाया, नींद से भरा कान।
• शब्दावली संस्कृतनिष्ठ और कोमल है (श्रमित, विपिन, श्रुति)।
• गेय, तुकांत गीत-शैली, भाषा खड़ी बोली।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए: “हेम कुंभ ले उषा सवेरे, भरती ढुलकाती सुख मेरे, मदिर ऊँघते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा।”

उत्तर: • भाव: सुबह की उषा सोने के कलश में सुख भरकर ढुलकाती है, और रात-भर जागकर तारे मादक भाव से ऊँघते रहते हैं।
• मानवीकरण अलंकार का सुंदर प्रयोग: उषा और तारों को मनुष्य जैसा व्यवहार करते दिखाया गया है।
• बिंब-योजना जीवंत है, प्रकृति का सजीव चित्रण।
• भाषा खड़ी बोली, गेय और तुकांत गीत-शैली।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. कविता में व्यक्त प्रकृति-चित्रों को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: • तांबे जैसी लाल आभा (तामरस) पर पेड़ों की चोटियों का नाचना।
• हरियाली पर जीवन के मंगल-कुंकुम का बिखरना।
• इंद्रधनुषी पंख फैलाए पक्षियों का अपने घोंसले की ओर उड़ना।
• करुणा से भरे बादलों का बरसना और लहरों का किनारा पाना।
• भोर में उषा का सोने के कलश से सुख ढुलकाना, रात में तारों का जागना।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. जयशंकर प्रसाद के जीवन-परिचय और साहित्यिक योगदान पर विस्तृत लेख लिखिए।

उत्तर: जीवन-परिचय: जन्म काशी में सन् 1889, मृत्यु 1937; विद्यालयी शिक्षा केवल आठवीं तक, किंतु स्वाध्याय से संस्कृत, पालि, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं तथा साहित्य का गहन अध्ययन; इतिहास, दर्शन, धर्मशास्त्र और पुरातत्त्व के प्रकांड विद्वान।
स्वभाव: सौम्य, शांत, गंभीर, परनिंदा और आत्मस्तुति दोनों से दूर।
साहित्यिक योगदान: बहुमुखी प्रतिभा; मूलतः कवि, किंतु नाटक, उपन्यास, कहानी, निबंध आदि में भी उच्चकोटि की रचनाएँ। नाटक (अजातशत्रु, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, राजश्री, ध्रुवस्वामिनी), उपन्यास (कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण)), कहानी-संग्रह (आँधी, इंद्रजाल, छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप), निबंध-संग्रह (काव्य और कला तथा अन्य निबंध), कविताएँ (झरना, आँसू, लहर, कामायनी, कानन कुसुम, प्रेमपथिक)।
साहित्य का प्रमुख स्वर: राष्ट्रीय जागरण, प्राचीन भारतीय संस्कृति के गौरव के माध्यम से।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. “देवसेना का गीत” के आधार पर देवसेना के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: पृष्ठभूमि: मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन; बंधुवर्मा सहित परिवार हूण-आक्रमण में वीरगति को प्राप्त हुआ।
त्याग और कर्तव्यनिष्ठा: राष्ट्रसेवा और भाई के स्वप्नों को साकार करने का व्रत; आश्रम में पर्णदत्त के साथ गाना गाकर भीख माँगना और महादेवी की समाधि परिष्कृत करना।
दृढ़ता: स्कंदगुप्त के बार-बार अनुनय पर भी न पिघलना।
वेदनामय आत्म-चिंतन: अपने यौवन के क्रियाकलापों को “भ्रमवश किए गए कर्मों” की श्रेणी में रखकर पश्चाताप, फिर भी हारने की निश्चितता के बावजूद प्रलय से लोहा लेते रहना; वह हार स्वीकार नहीं करती।
साहस: दुर्बलता जानते हुए भी प्रलय से होड़ लगाना।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. “कार्नेलिया का गीत” के माध्यम से प्रसाद जी ने भारत के प्रति क्या भाव व्यक्त किया है? विस्तार से लिखिए।

उत्तर: प्रसंग: विदेशी युवती कार्नेलिया के मुख से भारत की प्रशंसा कराई गई है; वह सिंधु-तट के सौंदर्य से प्रभावित होकर और भारतीय संगीत का पाठ याद करते हुए यह गीत गाती है।
प्रभाव: विदेशी पात्र के मुख से भारत की प्रशंसा सुनाई देती है, जिससे भारत की पहचान बाहर की नज़र से भी दिखती है (यह पाठक की व्याख्या है)।
बताई गई विशेषताएँ: अनजान को सहारा देना, प्राकृतिक सौंदर्य (तांबे जैसी लाल आभा, हरियाली, वृक्ष), पक्षियों का इसे अपना प्यारा घोंसला मानना, करुणा-जल भरे बादल, लहरों को किनारा, उषा का हेम कुंभ और ऊँघते तारे।
निष्कर्ष: पाठ के अनुसार इस गीत में देश की गौरवगाथा तथा प्राकृतिक सौंदर्य को भारतवर्ष की विशिष्टता और पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत: दोनों की काव्य-शैली, रस, अलंकार और भाषा की तुलना कीजिए।

उत्तर: शिल्प: दोनों “गीत के शिल्प” में रचे गेय, तुकांत गीत हैं (देवसेना: विदाई/लुटाई/…; कार्नेलिया: हमारा/सहारा/…); पाठ में छंद का नाम नहीं दिया गया।
भाषा: दोनों खड़ी बोली में, संस्कृतनिष्ठ शब्दावली के साथ।
रस/भाव: पाठ रस का नाम नहीं देता; देवसेना के गीत में वेदना प्रधान है (करुण रस कहा जा सकता है), कार्नेलिया के गीत में भारत-गौरव और प्रकृति-सौंदर्य की प्रशंसा का भाव।
अलंकार: दोनों में मानवीकरण, रूपक और उपमा (“आँसू-से गिरते थे”, “लघु सुरधनु से पंख”); कार्नेलिया के गीत में अनुप्रास भी।
विषय: देवसेना का गीत व्यक्तिगत वेदना पर, कार्नेलिया का गीत देश के गौरव-गान पर आधारित है।

प्रश्न 5 (6 अंक)

प्र. जयशंकर प्रसाद के नाटकों के आधार पर स्कंदगुप्त और चंद्रगुप्त नाटकों के पात्रों और घटनाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: स्कंदगुप्त नाटक (पाठ में दिए प्रसंग के अनुसार), पात्र: देवसेना, बंधुवर्मा, विजया, पर्णदत्त, स्कंदगुप्त; महादेवी की समाधि का उल्लेख। घटनाएँ: हूण-आक्रमण, बंधुवर्मा सहित परिवार की वीरगति, देवसेना का व्रत, स्कंदगुप्त का विजया का स्वप्न, अंत में देवसेना का इनकार और स्कंदगुप्त का आजीवन कुँवारा रहने का व्रत।
चंद्रगुप्त नाटक, पात्र: कार्नेलिया, सिल्यूकस (सिकंदर का सेनापति)। प्रसंग: सिंधु-तट पर ग्रीक शिविर के पास वृक्ष के नीचे बैठी कार्नेलिया का भारत-गुणगान।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन है। हूणों के आक्रमण से आर्यावर्त संकट में है। बंधुवर्मा सहित उस परिवार के सभी लोगों को वीरगति प्राप्त हुई। बची हुई देवसेना भाई के स्वप्नों को साकार करने के लिए और राष्ट्रसेवा का व्रत लिए हुए है।

(क) 1 अंक देवसेना किसकी बहन है?
उत्तर: देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन है।

(ख) 1 अंक आर्यावर्त किसके आक्रमण से संकट में था?
उत्तर: आर्यावर्त हूणों के आक्रमण से संकट में था।

(ग) 2 अंक देवसेना ने कौन-से व्रत लिए?
उत्तर: देवसेना ने भाई के स्वप्नों को साकार करने का व्रत और राष्ट्रसेवा का व्रत लिया।

(घ) 2 अंक बंधुवर्मा और उसके परिवार का क्या हुआ?
उत्तर: बंधुवर्मा सहित उसके पूरे परिवार को हूणों से हुए युद्ध में वीरगति प्राप्त हुई।

केस स्टडी
कार्नेलिया सिकंदर के सेनापति सिल्यूकस की बेटी है। सिंधु के किनारे ग्रीक शिविर के पास वृक्ष के नीचे बैठी हुई है। कहती है—”सिंधु का यह मनोहर तट जैसे मेरी आँखों के सामने एक नया चित्रपट उपस्थित कर रहा है। … यह कितना निसर्ग सुंदर है, कितना रमणीय है? हाँ वह! आज वह भारतीय संगीत का पाठ देखूँ भूल तो नहीं गई?”

(क) 1 अंक कार्नेलिया किसकी पुत्री है?
उत्तर: कार्नेलिया सिल्यूकस की पुत्री है, जो सिकंदर का सेनापति था।

(ख) 1 अंक कार्नेलिया कहाँ बैठी हुई है?
उत्तर: कार्नेलिया सिंधु नदी के किनारे, ग्रीक शिविर के पास, वृक्ष के नीचे बैठी हुई है।

(ग) 2 अंक कार्नेलिया को किस बात की आशंका होती है?
उत्तर: उसे आशंका होती है कि कहीं वह भारतीय संगीत का पाठ भूल तो नहीं गई।

(घ) 2 अंक कार्नेलिया प्रकृति के सौंदर्य से प्रभावित होकर क्या करती है?
उत्तर: वह प्रभावित होकर भारत की प्रशंसा में एक गीत गाने लगती है।