इस अध्याय के 20 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकरामचंद्र शुक्ल का जन्म किस ज़िले में हुआ था?
(क) इलाहाबाद(ख) बस्ती(ग) गोरखपुर(घ) आगरा - 1 अंकरामचंद्र शुक्ल की विधिवत शिक्षा किस स्तर तक हो पाई?
(क) प्राइमरी(ख) मैट्रिक(ग) इंटरमीडिएट(घ) स्नातक - 1 अंकरामचंद्र शुक्ल मिर्जापुर के मिशन हाई स्कूल में किस विषय के अध्यापक रहे?
(क) हिंदी(ख) संस्कृत(ग) चित्रकला(घ) इतिहास - 1 अंकसन् 1905 में रामचंद्र शुक्ल किस संस्था में सहायक संपादक नियुक्त हुए?
(क) हिंदी साहित्य सम्मेलन(ख) काशी हिंदू विश्वविद्यालय(ग) नागरी प्रचारिणी सभा, काशी(घ) इलाहाबाद विश्वविद्यालय - 1 अंक‘प्रेमघन’ का मूल (पूरा) नाम क्या था?
(क) उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी(ख) काशीप्रसाद जायसवाल(ग) बदरीनाथ गौंड़(घ) भगवानदास हालना - 1 अंक‘सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक के नायक का नाम क्या था, जिससे लेखक भ्रमित होता था?
(क) राजा हरिश्चंद्र(ख) राजा दशरथ(ग) राजा जनक(घ) राजा भोज - 1 अंकलेखक को हिंदी की किताबें कहाँ से मिला करती थीं, जब पिता जी ने भारत जीवन प्रेस की किताबें छिपानी शुरू कर दीं?
(क) स्कूल की लाइब्रेरी से(ख) पं. केदारनाथ पाठक के पुस्तकालय से(ग) बाज़ार से ख़रीदकर(घ) चौधरी साहब से उधार लेकर - 1 अंकमुसलमान सब-जज ने लेखक के बारे में क्या कहा था?
(क) इन्हें उर्दू का बड़ा शौक है(ख) यह लड़का पढ़ाई में कमज़ोर है(ग) यह लड़का शरारती लगता है(घ) इनकी सूरत देखते ही हिंदी-प्रेम से वाकिफ़ हो गया - 1 अंकवामनाचार्यगिरि की उपमा में चौधरी साहब की तुलना किससे की गई?
(क) एक राजकुमार से(ख) एक साधु से(ग) एक व्यापारी से(घ) खंभे के सहारे खड़ी मुगल घराने की स्त्री से
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): ‘निस्संदेह लोग’ नाम प्रेमघन की अपनी मंडली को दिया गया था।
कारण (R): यह नाम लेखक और उनके समवयस्क साथियों की मंडली को, उनकी विशेष हिंदी बोली के कारण, मुहल्ले वालों ने दिया था।
(क) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण है(ख) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण नहीं है(ग) A सत्य, R असत्य(घ) A असत्य, R सत्य - 1 अंकअभिकथन (A): ‘प्रेमघन की छाया-स्मृति’ एक आलोचनात्मक निबंध है।
कारण (R): इस निबंध में शुक्ल जी ने हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति अपने प्रारंभिक रुझानों का रोचक वर्णन किया है।
(क) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण है(ख) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण नहीं है(ग) A सत्य, R असत्य(घ) A असत्य, R सत्य
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसही मिलान कीजिए,
सूची I: 1. नागरी शब्द की व्युत्पत्ति 2. मीरजापुर शब्द की व्युत्पत्ति
सूची II: (i) मीर+जा+पुर = समुद्र की पुत्री का नगर (ii) नागर अपभ्रंश से विकसित शिष्ट भाषा
(क) 1-ii, 2-i(ख) 1-i, 2-ii(ग) दोनों (i) से जुड़े हैं(घ) दोनों (ii) से जुड़े हैं
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंकनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए,
कथन (i): चौधरी साहब की बातचीत की शैली और लेखों की शैली एक जैसी थी।
कथन (ii): चौधरी साहब की बातचीत में विलक्षण वक्रता थी।
सही विकल्प चुनिए।
(क) केवल कथन (i) सत्य है(ख) केवल कथन (ii) सत्य है(ग) कथन (i) और (ii) दोनों सत्य हैं(घ) कथन (i) और (ii) दोनों असत्य हैं
5 सही क्रम में लगाइए
सही क्रम में लगाइए
- 1 अंकनिबंध की कहानी को सही क्रम में लगाइए,
(1) समवयस्क मंडली बनना
(2) पहली झलक मिलना
(3) पिताजी का हिंदी-प्रेम
(4) भारतेंदु जी के घर का हृदय-परिचय
(क) 1, 2, 3, 4(ख) 3, 4, 2, 1(ग) 2, 3, 1, 4(घ) 3, 2, 4, 1
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंकरिक्त स्थान भरिए, गिलास गिरने पर चौधरी साहब बोले, ‘कारे बचा त ___।’
(क) नाहीं(ख) बाटे(ग) रहा(घ) होई
7 असंगत चुनिए
असंगत चुनिए
- 1 अंकनिम्नलिखित में से असंगत (जो लेखक की समवयस्क मंडली का सदस्य नहीं था) चुनिए।
(क) काशीप्रसाद जायसवाल(ख) बदरीनाथ गौंड़(ग) उमाशंकर द्विवेदी(घ) महादेवी वर्मा
8 गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
एक दिन बालकों की मंडली जोड़ी गई। जो चौधरी साहब के मकान से परिचित थे, वे अगुआ हुए। मील डेढ़ का सफर तै हुआ। पत्थर के एक बड़े मकान के सामने हम लोग जा खड़े हुए। नीचे का बरामदा खाली था। ऊपर का बरामदा सघन लताओं के जाल से आवृत था। बीच-बीच में खंभे और खुली जगह दिखाई पड़ती थी। उसी ओर देखने के लिए मुझसे कहा गया। कोई दिखाई न पड़ा। सड़क पर कई चक्कर लगे। कुछ देर पीछे एक लड़के ने उँगली से ऊपर की ओर इशारा किया। लता-प्रतान के बीच एक मूर्ति खड़ी दिखाई पड़ी। दोनों कंधों पर बाल बिखरे हुए थे। एक हाथ खंभे पर था। देखते ही देखते यह मूर्ति दृष्टि से ओझल हो गई। बस, यही पहली झाँकी थी।
- 1 अंकउपर्युक्त गद्यांश में लेखक को किसकी पहली झलक मिली?
(क) चौधरी साहब (प्रेमघन) की(ख) भारतेंदु हरिश्चंद्र की(ग) केदारनाथ पाठक की(घ) बदरीनाथ गौंड़ की
गद्यांश
एक दिन कई लोग बैठे बातचीत कर रहे थे कि इतने में एक पंडित जी आ गए। चौधरी साहब ने पूछा, ‘कहिए क्या हाल है?’ पंडित जी बोले, ‘कुछ नहीं, आज एकादशी थी, कुछ जल खाया है और चले आ रहे हैं।’ प्रश्न हुआ, ‘जल ही खाया है कि कुछ फलाहार भी पिया है?’
- 1 अंकगद्यांश में चौधरी साहब के प्रश्न में कौन-सा भाव प्रमुख है?
(क) क्रोध(ख) दुख(ग) भय(घ) व्यंग्य और हाज़िरजवाबी
9 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंककथन: ‘रामचंद्र शुक्ल का निधन हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद पर रहते हुए, काशी में हुआ।’ यह कथन सत्य है या असत्य?
(क) सत्य(ख) असत्य(ग) आंशिक रूप से सत्य(घ) पाठ में इसका उल्लेख नहीं है - 1 अंककथन: ‘काशी में चौखंभा की ओर लेखक ने भारतेंदु जी के घर से स्वयं भारतेंदु जी को निकलते देखा।’ यह कथन सत्य है या असत्य?
(क) सत्य(ख) असत्य(ग) आंशिक रूप से सत्य(घ) पाठ में इसका उल्लेख नहीं है
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (ख) रामचंद्र शुक्ल का जन्म बस्ती ज़िले के अगोना गाँव में हुआ था।
- (ग) रामचंद्र शुक्ल की विधिवत शिक्षा इंटरमीडिएट तक ही हो पाई थी।
- (ग) रामचंद्र शुक्ल कुछ समय मिर्जापुर के मिशन हाई स्कूल में चित्रकला के अध्यापक रहे।
- (ग) सन् 1905 में रामचंद्र शुक्ल काशी नागरी प्रचारिणी सभा में हिंदी शब्दसागर के निर्माण-कार्य में सहायक संपादक नियुक्त हुए।
- (क) ‘प्रेमघन’ उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी का उपनाम था।
- (क) बचपन में लेखक ‘सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक के नायक राजा हरिश्चंद्र और कवि भारतेंदु हरिश्चंद्र में भेद नहीं कर पाता था।
- (ख) पं. केदारनाथ जी पाठक ने एक हिंदी पुस्तकालय खोला था, लेखक वहाँ से किताबें ला-लाकर पढ़ता था।
- (घ) सब-जज ने कहा, ‘आपको बताने की ज़रूरत नहीं, मैं तो इनकी सूरत देखते ही इस बात से वाकिफ़ हो गया’ (कि इन्हें हिंदी का शौक है)।
- (घ) वामनजी ने चौधरी साहब को कंधों पर बाल छिटकाए खंभे के सहारे खड़ा देखकर कवित्त पूरा किया, ‘खंभा टेकि खड़ी जैसे नारि मुगलाने की’, यानी खंभा टेककर खड़ी मुगल घराने की नारी से उपमा दी।
अभिकथन-कारण
- (घ) A असत्य है, यह नाम प्रेमघन की नहीं बल्कि लेखक और उनके साथियों की मंडली को दिया गया था। R सत्य है और सही तथ्य बताता है, इसलिए उत्तर (घ) है।
- (घ) A असत्य है, पाठ के परिचय में इसे संस्मरणात्मक निबंध कहा गया है, आलोचनात्मक नहीं। R सत्य है, परिचय के अनुसार इसमें शुक्ल जी ने हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति अपने प्रारंभिक रुझानों का बड़ा रोचक वर्णन किया है, इसलिए उत्तर (घ) है।
सुमेलन कीजिए
- (क) नागरी की व्युत्पत्ति ‘नागर अपभ्रंश से विकसित शिष्ट भाषा’ (ii) है, और मीरजापुर की व्युत्पत्ति ‘मीर+जा+पुर = समुद्र की पुत्री का नगर’ (i) है।
कथन आधारित प्रश्न
- (ख) कथन (i) असत्य है, दोनों शैलियाँ एकदम अलग थीं। कथन (ii) सत्य है, निबंध में स्पष्ट कहा गया है कि उनकी बातचीत में विलक्षण वक्रता थी।
सही क्रम में लगाइए
- (घ) सही क्रम है, पहले पिताजी का हिंदी-प्रेम, फिर पहली झलक, फिर भारतेंदु जी के घर का हृदय-परिचय, और अंत में समवयस्क मंडली बनना।
रिक्त स्थान
- (क) पाठ की मूल पंक्ति है, ‘कारे बचा त नाहीं’। गिलास गिरने पर चौधरी साहब के मुँह से यही निकलता था।
असंगत चुनिए
- (घ) पाठ में समवयस्क मंडली के मुख्य सदस्यों के रूप में काशीप्रसाद जायसवाल, भगवानदास हालना, बदरीनाथ गौंड़ और उमाशंकर द्विवेदी के नाम आते हैं; महादेवी वर्मा का नाम पाठ में नहीं है। इसलिए असंगत विकल्प (घ) है।
गद्यांश आधारित प्रश्न
- (क) गद्यांश के अनुसार यह लेखक को चौधरी साहब (प्रेमघन) की पहली झलक मिलने का वर्णन है।
- (घ) चौधरी साहब का प्रश्न ‘जल ही खाया है कि कुछ फलाहार भी पिया है?’ खाया-पिया की अदला-बदली से बना व्यंग्य है, जो उनकी हाज़िरजवाबी दिखाता है।
सत्य-असत्य
- (क) यह कथन सत्य है, निबंध की भूमिका के अनुसार शुक्ल जी हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद पर कार्य करते हुए काशी में ही चल बसे।
- (ख) यह कथन असत्य है। पाठ के अनुसार उस घर में से “पं. केदारनाथ जी पाठक निकलते दिखाई पड़े”, और बातों-बातों में मालूम हुआ कि वह भारतेंदु जी का घर था। पाठ में लेखक की भारतेंदु जी से किसी प्रत्यक्ष भेंट का वर्णन नहीं है।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री