कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 10 प्रेमघन की छाया-स्मृति शॉर्ट नोट्स

कक्षा 12 हिंदी, अंतरा भाग 2, अध्याय 10 (प्रेमघन की छाया-स्मृति, रामचंद्र शुक्ल) का त्वरित पुनरीक्षण। प्रमुख परिचय, प्रमुख नामित तथ्य और सभी शब्दार्थ एक ही जगह। पहले पूरे नोट्स पढ़ें, फिर परीक्षा से एक रात पहले या सुबह यही पढ़ें।

1 लेखक-परिचय एक नज़र में

तथ्य विवरण
नाम रामचंद्र शुक्ल
जीवनकाल सन् 1884-1941
जन्मस्थान बस्ती ज़िला, अगोना गाँव, उत्तर प्रदेश
शिक्षा विधिवत शिक्षा इंटरमीडिएट तक, आगे स्वाध्याय से संस्कृत-अंग्रेज़ी-बाँग्ला-हिंदी का अध्ययन
अध्यापन मिर्जापुर मिशन हाई स्कूल में चित्रकला के अध्यापक
1905 काशी नागरी प्रचारिणी सभा में हिंदी शब्दसागर के सहायक संपादक
बाद में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक, फिर हिंदी विभाग के अध्यक्ष; काशी में ही निधन
पहचान उच्चकोटि के आलोचक, इतिहासकार, साहित्य-चिंतक
सबसे प्रसिद्ध कृति हिंदी साहित्य का इतिहास (मूलतः हिंदी शब्दसागर की भूमिका)
अन्य ग्रंथ गोस्वामी तुलसीदास, सूरदास, चिंतामणि (चार खंड), रस मीमांसा
संपादन जायसी ग्रंथावली, भ्रमरगीत सार

2 प्रेमघन-परिचय एक नज़र में

तथ्य विवरण
मूल नाम उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी
उपनाम प्रेमघन
पहचान भारतेंदु हरिश्चंद्र के मित्र, हिंदी के प्रसिद्ध कवि
निवास मिर्जापुर
सामाजिक स्थिति हिंदुस्तानी रईस, रियासत और तबीयतदारी से भरा व्यक्तित्व
निबंध में नाम चौधरी साहब / उपाध्याय जी

3 परिभाषाएँ

परिभाषाएँ
संस्मरणात्मक निबंधवह निबंध जिसमें लेखक किसी व्यक्ति या घटना से जुड़ी अपनी व्यक्तिगत यादों को सुनाता है
छाया-स्मृति(एक व्याख्या) साये-सी मन में बनी रहने वाली स्मृतियाँ; पाठ में शीर्षक की व्याख्या नहीं दी गई है

4 निबंध की कहानी, क्रम से

1पिताजी का फ़ारसी-हिंदी प्रेम, रामचरितमानस-रामचंद्रिका पढ़कर सुनाना
2हरिश्चंद्र नाम का बचपन का भ्रम (राजा बनाम भारतेंदु कवि)
3पहली झलक, लता से ढके बरामदे में एक आकृति दिखना
4भारत जीवन प्रेस की किताबें छिपाना, केदारनाथ पाठक के पुस्तकालय से पढ़ना
5भारतेंदु जी के मकान के नीचे पं. केदारनाथ पाठक से हृदय-परिचय (बारात वाली घटना), जो गहरी मैत्री बना
616 वर्ष की उम्र तक समवयस्क मंडली बनना, ‘निस्संदेह लोग’ उपनाम पड़ना
7‘पुरातत्व’ की दृष्टि से चौधरी साहब से लेखक की हैसियत में मुलाकात

5 चौधरी साहब के पाँच किस्से

किस्सा मुख्य पंक्ति / तथ्य
गिलास का किस्सा “कारे बचा त नाहीं”
वामनाचार्यगिरि का कवित्त “खंभा टेकि खड़ी जैसे नारि मुगलाने की”
एकादशी का व्यंग्य “जल ही खाया है कि कुछ फलाहार भी पिया है?”
घनचक्कर की पहेली रोज़ की दिनचर्या लिखने का मज़ाक
लैम्प का किस्सा “अरे! जब फूट जाई तबै चलत आवह”, चिमनी-ग्लोब चकनाचूर हुई, हाथ नहीं बढ़ा

6 प्रेमघन की भाषा-संबंधी व्युत्पत्तियाँ

शब्द प्रेमघन का अपना अर्थ
नागरी नागर अपभ्रंश से विकसित शिष्ट लोगों की भाषा
मीरजापुर मीर (समुद्र) + जा (पुत्री) + पुर (नगर) = लक्ष्मीपुर

7 शब्दार्थ

शब्द अर्थ
उत्कंठा लालसा, बेचैनी
आवृत ढका हुआ, घेरा हुआ
लता-प्रतान लता का फैलाव, लतातंतु
परिणत अन्य रूप में बदला हुआ, परिणाम या रूपांतर को प्राप्त
मुख्तार अधिकार प्राप्त व्यक्ति, व्यक्ति विशेष के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने का अधिकारी, एजेंट
अमला कर्मचारी मंडल
वाकिफ़ जानकार, परिचित
वक्रता टेढ़ापन, कुटिलता (यहाँ चुटीलापन के अर्थ में)
परिपाटी सिलसिला, रीति
अपभ्रंश प्राकृत भाषाओं का परवर्ती रूप, जिनसे उत्तर भारत की आधुनिक आर्य भाषाओं की उत्पत्ति मानी जाती है
चित्ताकर्षक मन को आकर्षित करने वाला
परीक्षा से एक रात पहले या सुबह यही पढ़ें
  • शुक्ल (1884-1941): बस्ती/अगोना में जन्म, 1905 में सहायक संपादक, बाद में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक/अध्यक्ष, सबसे प्रसिद्ध कृति ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’
  • ‘प्रेमघन की छाया-स्मृति’ संस्मरणात्मक निबंध है, प्रेमघन (उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी) की स्मृति में लिखा गया
  • निबंध की कहानी क्रम से, पिताजी का प्रभाव, पहली झलक, पाठक जी से हृदय-परिचय, समवयस्क मंडली, फिर चौधरी साहब से लेखक की हैसियत से मिलना
  • प्रेमघन: खासे हिंदुस्तानी रईस, वाक्पटु, रियासत और तबीयतदारी वाला व्यक्तित्व, बातचीत का ढंग लेखों के ढंग से एकदम निराला
  • पाँच किस्से याद रखें, गिलास, वामनाचार्यगिरि, एकादशी, घनचक्कर, लैम्प
  • पाठ्यपुस्तक की भूमिका के अनुसार: “उनकी भाषा में न कोई उलझाव है न जटिलता, बीच-बीच में हास्य और व्यंग्य की छौंक इस पाठ को बार-बार पढ़ने को प्रेरित करती है”