कक्षा 12 हिंदी अध्याय 14 शेर, पहचान, चार हाथ, साझा महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. असगर वजाहत का जन्म कब और कहाँ हुआ?

उत्तर: असगर वजाहत का जन्म सन् 1946 में फतेहपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. असगर वजाहत ने विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई कहाँ से की?

उत्तर: उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से की।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. असगर वजाहत के किन्हीं दो कहानी-संग्रहों के नाम लिखिए।

उत्तर: दिल्ली पहुँचना है, और स्विमिंग पूल और सब कहाँ कुछ, उनके प्रमुख कहानी-संग्रह हैं।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. असगर वजाहत ने कौन-सा नुक्कड़-नाटक संग्रह लिखा?

उत्तर: असगर वजाहत ने ‘सबसे सस्ता गोश्त’ नामक नुक्कड़-नाटक संग्रह लिखा।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. इस पाठ में कितनी लघुकथाएँ दी गई हैं और उनके नाम क्या हैं?

उत्तर: इस पाठ में चार लघुकथाएँ दी गई हैं: शेर, पहचान, चार हाथ और साझा।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. कथावाचक जंगल की ओर क्यों भागा था?

उत्तर: कथावाचक शहर और आदमियों से डरकर जंगल भागा था, क्योंकि उसके सिर पर सींग निकल रहे थे और उसे डर था कि किसी दिन कसाई की नज़र उस पर पड़ जाएगी।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. लोमड़ी ने शेर के मुँह के अंदर क्या होने का दावा किया?

उत्तर: लोमड़ी ने कहा कि शेर के मुँह के अंदर रोज़गार का दफ़्तर है, वहाँ वह दरख़्वास्त देगी तो उसे नौकरी मिल जाएगी।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. उल्लू ने शेर के मुँह के भीतर जाने का क्या तर्क दिया?

उत्तर: उल्लू ने कहा कि शेर के मुँह के अंदर स्वर्ग है और यही निर्वाण (मुक्ति) पाने का एकमात्र रास्ता है।

प्रश्न 9 (1 अंक)

प्र. शेर के मुँह और रोज़गार के दफ़्तर के बीच क्या अंतर है?

उत्तर: शेर के मुँह में जानवर ‘बिना हिले-डुले, बिना चबाए’ गटक लिए जाते हैं, जबकि रोज़गार का दफ़्तर वह जगह है जहाँ दरख़्वास्त देकर नौकरी मिलती है। कथावाचक यह अंतर पहचानता है और शेर के मुँह को रोज़गार का दफ़्तर मानने से इनकार करता है: ‘वह शेर का मुँह है।’

प्रश्न 10 (1 अंक)

प्र. राजा ने जनता को पहला हुक्म क्या दिया?

उत्तर: राजा ने हुक्म दिया कि उसके राज में सब लोग अपनी आँखें बंद रखेंगे, ताकि उन्हें शांति मिलती रहे।

प्रश्न 11 (1 अंक)

प्र. खैराती, रामू और छिद्दू कौन थे?

उत्तर: खैराती, रामू और छिद्दू तीन ऐसे पात्र थे जिन्होंने एक दिन सोचा कि आँखें खोलकर देखें कि अब तक राज्य स्वर्ग हो गया होगा या नहीं।

प्रश्न 12 (1 अंक)

प्र. लोहे के हाथ फ़िट करने का क्या परिणाम निकला?

उत्तर: लोहे के हाथ फ़िट करने से मज़दूर मर गए।

प्रश्न 13 (1 अंक)

प्र. साझे की खेती के बारे में हाथी ने किसान को क्या बताया?

उत्तर: हाथी ने किसान को पट्टी पढ़ाई और कहा कि साझे की खेती से यह लाभ होगा कि जंगल के छोटे-मोटे जानवर खेत को नुकसान नहीं पहुँचा सकेंगे और खेती की अच्छी रखवाली हो जाएगी।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. असगर वजाहत की भाषा-शैली की क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर: पाठ के अनुसार असगर वजाहत की भाषा में गांभीर्य, सबल भावाभिव्यक्ति एवं व्यंग्यात्मकता है। मुहावरों तथा तद्भव शब्दों के प्रयोग से उसमें सहजता एवं सादगी आ गई है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. गधे ने शेर के मुँह में जाने का क्या कारण बताया, जबकि वह जानता था कि वह शेर का ही मुँह है?

उत्तर: गधे ने कहा कि वहाँ हरी घास का एक बहुत बड़ा मैदान है, जहाँ वह आराम से रहेगा और खूब घास खाएगा। पूछे जाने पर उसने स्वीकार भी किया कि वह शेर का मुँह ज़रूर है, पर वहाँ हरी घास का मैदान है, इतना कहकर वह अंदर चला गया।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. कुत्तों के जुलूस का वर्णन कीजिए।

उत्तर: कुत्तों का एक बड़ा जुलूस था जो कभी हँसते-गाते थे और कभी विरोध में चीखते-चिल्लाते थे। उनकी बड़ी-बड़ी लाल जीभें निकली हुई थीं, पर सब दुम दबाए थे। कथावाचक के चीखकर रोकने पर भी वे नहीं रुके और उसकी बात अनसुनी करके सीधे शेर के मुँह में चले गए।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. कहानी में लेखक ने शेर को किस बात का प्रतीक बताया है?

उत्तर: पाठ के परिचय के अनुसार ‘शेर व्यवस्था का प्रतीक है’ (यानी सत्ता का)। ऊपर से देखने पर वह अहिंसावादी, न्यायप्रिय और बुद्ध का अवतार प्रतीत होता है, पर जैसे ही कथावाचक उसके मुँह में प्रवेश न करने का इरादा करता है, शेर अपनी असलियत में आ जाता है और दहाड़ता हुआ उसकी ओर झपटता है।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. राजा ने कौन-कौन से हुक्म निकाले? सूची बनाइए।

उत्तर: राजा ने क्रमशः ये हुक्म निकाले: (1) सब लोग अपनी आँखें बंद रखें, ताकि ‘शांति’ मिलती रहे; (2) कानों में पिघला हुआ सीसा डलवा लें, क्योंकि ‘सुनना जीवित रहने के लिए बिलकुल ज़रूरी नहीं है’; (3) होंठ सिलवा लें, क्योंकि ‘बोलना उत्पादन में सदा से बाधक रहा है’ (इसके बाद लोग खा भी नहीं सकते थे, पर ‘खाना भी काम करने के लिए बहुत आवश्यक नहीं माना गया’); और (4) आगे भी तरह-तरह की चीज़ें कटवाने-जुड़वाने के हुक्म मिलते रहे।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. आँखें बंद रखने और आँखें खोलकर देखने के क्या परिणाम निकले?

उत्तर: आँखें बंद रखने पर काम पहले की तुलना में बहुत अधिक और अच्छा हो रहा था। पर जब खैराती, रामू और छिद्दू ने आँखें खोलीं, तो पता चला कि राज्य स्वर्ग नहीं बना था, बल्कि उन्हें सिर्फ़ राजा ही दिखाई दिया और वे आपस में एक-दूसरे को भी नहीं देख सके।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. खैराती, रामू और छिद्दू ने जब आँखें खोलीं तो उन्हें सामने राजा ही क्यों दिखाई दिया?

उत्तर: क्योंकि राजा ने जनता को अंधा-बहरा-गूँगा बनाए रखा और स्वयं उत्पादन के सभी साधनों पर अपनी पकड़ मज़बूत करता गया। जनता की नज़र में सिर्फ़ राजा की सत्ता ही सबसे बड़ी सच्चाई रह गई थी, इसीलिए आँखें खुलते ही उन्हें केवल राजा ही दिखा, कुछ और नहीं।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. मज़दूरों को चार हाथ देने के लिए मिल मालिक ने क्या-क्या किया?

उत्तर: पहले उसने बड़े वैज्ञानिकों को मोटी तनख्वाह पर रखा, जिन्होंने कई साल शोध के बाद इसे असंभव बताया। नाराज़ होकर उसने उन्हें निकाल दिया और स्वयं कटे हुए हाथ, फिर लकड़ी के हाथ, और अंत में लोहे के हाथ मज़दूरों पर फ़िट करने की कोशिश की।

प्रश्न 9 (2 अंक)

प्र. हाथी ने खेत की रखवाली के लिए क्या घोषणा की?

उत्तर: हाथी पूरे जंगल में घूमकर डुग्गी पीट आया कि गन्ने में उसका साझा है, इसलिए कोई भी जानवर खेत को नुकसान न पहुँचाए, नहीं तो अच्छा न होगा।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. ‘प्रमाण से अधिक महत्त्वपूर्ण है विश्वास’ इस कथन के आधार पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: जब कथावाचक ने शेर के स्टाफ़ से पूछा कि शेर के पेट में रोज़गार का दफ़्तर होने का क्या प्रमाण है, तो उसे यही उत्तर मिला (पाठ में यह वाक्य प्रश्नवाचक है: ‘प्रमाण से अधिक महत्त्वपूर्ण है विश्वास?’)। इससे पहले स्टाफ़ ने कहा था, ‘सब ऐसा ही मानते हैं।’ इस कहानी में शेर के स्टाफ़ ने प्रमाण के बजाय विश्वास माँगा, और जो बात उसके दावे के विरुद्ध थी, यानी बाहर का रोज़गार दफ़्तर, उसे ‘मिथ्या’ कहा। पाठ के परिचय के अनुसार शेर व्यवस्था का प्रतीक है; इसलिए इस प्रसंग को सत्ता के प्रचार और अंध-विश्वास, दोनों पर व्यंग्य के रूप में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. जनता राज्य की स्थिति की ओर से आँखें बंद कर ले तो उसका राज्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: यदि जनता अपनी आँखें, कान और मुँह बंद कर लेती है, यानी सवाल पूछना, विरोध करना और सच देखना बंद कर देती है, तो शासक निरंकुश हो जाता है। वह मनमाने फ़ैसले लेता है और छद्म प्रगति के दावों (जैसे बढ़ता ‘उत्पादन’) से जनता को भरमाता रहता है। सबसे बड़ा नुक़सान यह होता है कि जनता की आपसी एकता भी टूट जाती है, जैसा कहानी के अंत में दिखाया गया है: आँखें खुलने पर भी लोग एक-दूसरे को नहीं, सिर्फ़ शासक को देख पाते हैं। इस तरह जनता स्वयं अपने शोषण में सहभागी बन जाती है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. चार हाथ न लग पाने पर मिल मालिक की समझ में क्या बात आई? इस समाधान का व्यंग्यात्मक अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: आख़िर मिल मालिक की समझ में बात आ गई: उसने मज़दूरी आधी कर दी और दुगुने मज़दूर नौकर रख लिए। इसका व्यंग्य इस तरह पढ़ा जा सकता है: पूँजीपति को मज़दूरों के सचमुच चार हाथ नहीं चाहिए, उसे बस दोगुना काम चाहिए, चाहे वह दोगुने मज़दूरों से आधी मज़दूरी पर ही क्यों न कराया जाए। पाठ के परिचय के अनुसार यह लघुकथा ‘पूँजीवादी व्यवस्था में मज़दूरों के शोषण को उजागर करती है’; मज़दूर ‘लाचारी में आधी मज़दूरी पर भी काम करने के लिए तैयार हैं’।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. आधी-आधी फ़सल हाथी ने किस तरह बाँटी? इस घटना का व्यंग्यात्मक महत्त्व बताइए।

उत्तर: किसान चाहता था कि फ़सल आधी-आधी बाँट ली जाए, पर हाथी काफ़ी बिगड़ा और बोला, ‘अपने और पराए की बात मत करो। यह छोटी बात है। हम दोनों ने मिलकर मेहनत की थी हम दोनों उसके स्वामी हैं। आओ, हम मिलकर गन्ने खाएँ।’ किसान के कुछ कहने से पहले ही हाथी ने सूँड से एक गन्ना तोड़ लिया; उसका एक छोर हाथी की सूँड में था और दूसरा आदमी के मुँह में। गन्ने के साथ-साथ आदमी हाथी के मुँह की तरफ़ खिंचने लगा तो उसने गन्ना छोड़ दिया, और हाथी ने कहा, ‘देखो, हमने एक गन्ना खा लिया।’ व्यंग्य: ‘मिलकर खाने’ की बात करने वाला ताक़तवर पक्ष उपज ख़ुद ले लेता है। पाठ के परिचय के अनुसार वह ‘किसान को साझा खेती करने का झाँसा देता है और उसकी सारी फसल हड़प लेता है’, और किसान को पता भी नहीं चलता।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. इस अध्याय की चारों लघुकथाओं में सामान्य व्यंग्य-दृष्टि क्या है, और हर एक का अपना अलग निशाना कैसे भिन्न है? विस्तार से समझाइए।

उत्तर: चारों लघुकथाएँ (शेर, पहचान, चार हाथ, साझा) पशु-प्रतीकों या काल्पनिक शासकों के माध्यम से सत्ता और शोषण-तंत्र पर एक जैसी व्यंग्य-दृष्टि अपनाती हैं: हर कहानी में कमज़ोर पक्ष को झूठे भरोसे, झाँसे या डर के सहारे नियंत्रित किया जाता है। परंतु हर एक का निशाना अलग है। शेर सत्ता के दोहरे चरित्र पर व्यंग्य करती है: सत्ता तब तक अहिंसक दिखती है जब तक कोई सवाल नहीं करता; पाठ के परिचय के अनुसार इसमें सुविधाभोगियों, छद्म क्रांतिकारियों, अहिंसावादियों और सह-अस्तित्ववादियों के ढोंग पर भी प्रहार है। पहचान तानाशाही शासन और झूठी ‘प्रगति’ पर व्यंग्य है, जहाँ जनता को अंधा-बहरा-गूँगा बनाकर उसकी आपसी एकता भी तोड़ दी जाती है। चार हाथ पूँजीवादी श्रम-शोषण को उजागर करती है, जहाँ मालिक का तरीक़ा आधी मज़दूरी पर दुगुने मज़दूर रखना निकलता है। साझा किसानों की ज़मीन और उपज पर प्रभुत्वशाली वर्ग के कब्ज़े को दिखाती है, जहाँ साझेदारी के नाम पर ताक़तवर पक्ष किसान की सारी फ़सल हड़प लेता है। इस तरह चारों कहानियाँ मिलकर सत्ता, तानाशाही, पूँजीवाद और भूमि-हड़प, चार अलग रूपों में एक ही शोषण-तंत्र को उजागर करती हैं।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
जंगल में मेरा पहला ही दिन था जब मैंने बरगद के पेड़ के नीचे एक शेर को बैठे हुए देखा। शेर का मुँह खुला हुआ था। शेर का खुला मुँह देखकर मेरा जो हाल होना था वही हुआ, यानी मैं डर के मारे एक झाड़ी के पीछे छिप गया। मैंने देखा कि झाड़ी की ओट भी गज़ब की चीज़ है। अगर झाड़ियाँ न हों तो शेर का मुँह-ही-मुँह हो और फिर उससे बच पाना बहुत कठिन हो जाए। कुछ देर के बाद मैंने देखा कि जंगल के छोटे-मोटे जानवर एक लाइन से चले आ रहे हैं और शेर के मुँह में घुसते चले जा रहे हैं। शेर बिना हिले-डुले, बिना चबाए, जानवरों को गटकता जा रहा है। यह दृश्य देखकर मैं बेहोश होते-होते बचा।

(क) 1 अंक कथावाचक ने पहले दिन जंगल में क्या देखा?
उत्तर: कथावाचक ने बरगद के पेड़ के नीचे मुँह खोले बैठे एक शेर को देखा। कुछ देर बाद जंगल के छोटे-मोटे जानवर एक लाइन से उसके मुँह में घुसते दिखे।

(ख) 2 अंक जानवरों के शेर के मुँह में जाने के तरीक़े का वर्णन कीजिए।
उत्तर: जानवर एक लाइन से चले आ रहे थे और शेर के मुँह में घुसते चले जा रहे थे। शेर बिना हिले-डुले और बिना चबाए ही उन्हें निगलता जा रहा था।

(ग) 3 अंक इस दृश्य के माध्यम से लेखक क्या व्यंग्य करना चाहता है?
उत्तर: यह दृश्य दिखाता है कि सत्ता (शेर) बिना किसी विरोध के लोगों को लगातार निगलती जाती है, और लोग स्वेच्छा से, अपने-अपने झूठे भरोसों (घास, नौकरी, स्वर्ग) के चलते, उसमें समाते जाते हैं। पाठ के परिचय के अनुसार इस कहानी में लेखक ने सुविधाभोगियों, छद्म क्रांतिकारियों, अहिंसावादियों और सह-अस्तित्ववादियों के ढोंग पर भी प्रहार किया है।

केस स्टडी
फिर हुक्म ये निकला कि लोग अपने-अपने होंठ सिलवा लें, क्योंकि बोलना उत्पादन में सदा से बाधक रहा है। लोगों ने काफ़ी सस्ती दरों पर होंठ सिलवा लिए और फिर उन्हें पता लगा कि अब वे खा भी नहीं सकते हैं। लेकिन खाना भी काम करने के लिए बहुत आवश्यक नहीं माना गया।

(क) 1 अंक राजा ने होंठ सिलवाने का हुक्म किस बहाने से दिया?
उत्तर: राजा ने कहा कि बोलना उत्पादन में सदा से बाधक रहा है, इसलिए लोग अपने होंठ सिलवा लें।

(ख) 2 अंक होंठ सिलवाने के बाद लोगों को किस समस्या का सामना करना पड़ा, और उस समस्या के बारे में क्या माना गया?
उत्तर: होंठ सिलवाने के बाद लोगों को पता चला कि वे अब खा भी नहीं सकते। पर ‘खाना भी काम करने के लिए बहुत आवश्यक नहीं माना गया’, यानी इस समस्या को भी अनदेखा कर दिया गया।

(ग) 3 अंक यह प्रसंग तानाशाही सत्ता की किस प्रवृत्ति को उजागर करता है?
उत्तर: यह प्रसंग दिखाता है कि तानाशाही सत्ता हर छीनी गई क्षमता के लिए अलग बहाना देती है: बोलने को ‘उत्पादन में सदा से बाधक’ बताकर छीन लेती है, सुनने को ‘जीवित रहने के लिए बिलकुल ज़रूरी नहीं’ कहकर, और जब होंठ सिलने से खाना भी छिन जाता है, तो खाने को ‘काम करने के लिए बहुत आवश्यक नहीं’ मानकर उसे भी अनदेखा कर देती है। यह दिखाता है कि झूठी प्रगति के नाम पर जनता के मूल अधिकार किस तरह क्रमशः छीने जा सकते हैं, और जनता किस तरह इसे स्वीकार करती चली जाती है।