कक्षा 12 हिंदी अध्याय 14 शेर, पहचान, चार हाथ, साझा NCERT समाधान

NCERT पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग 2 के अध्याय 14 शेर, पहचान, चार हाथ, साझा (असगर वजाहत) की प्रश्न-अभ्यास (14 प्रश्न, चारों लघुकथाओं से) और योग्यता-विस्तार (8 प्रश्न) के सभी प्रश्नों के पूर्ण उत्तर। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 प्रश्न-अभ्यास: शेर

प्रश्न 1

प्र. लोमड़ी स्वेच्छा से शेर के मुँह में क्यों चली जा रही थी?

उत्तर: लोमड़ी को यह भरोसा था कि शेर के मुँह के अंदर रोज़गार का दफ़्तर है। उसे लगता था कि वहाँ दरख़्वास्त देने पर उसे नौकरी मिल जाएगी। पूछे जाने पर कि उसे यह किसने बताया, उसने कहा ‘शेर ने’, यानी उसका पूरा भरोसा बिना किसी जाँच-पड़ताल के, केवल सुनी-सुनाई बात पर टिका था।

प्रश्न 2

प्र. कहानी में लेखक ने शेर को किस बात का प्रतीक बताया है?

उत्तर: पाठ के परिचय के अनुसार “शेर व्यवस्था का प्रतीक है”, यानी सत्ता का। ऊपर से देखने पर शेर अहिंसावादी, न्यायप्रिय और बुद्ध का अवतार प्रतीत होता है, जिसके पेट में जंगल के सभी जानवर किसी न किसी प्रलोभन के चलते समाते चले जा रहे हैं। परंतु जैसे ही कोई उसके मुँह में प्रवेश न करने या उस पर सवाल उठाने का साहस करता है, वह दहाड़कर अपनी असली, हिंसक शक्ल दिखा देता है। इसका तात्पर्य यह है कि सत्ता तभी तक ख़ामोश रहती है जब तक सब उसकी आज्ञा का पालन करते रहें।

प्रश्न 3

प्र. शेर के मुँह और रोज़गार के दफ़्तर के बीच क्या अंतर है?

उत्तर: शेर के मुँह में जानवर जाते हैं और शेर उन्हें “बिना हिले-डुले, बिना चबाए” गटकता जाता है; जो भीतर गया वह लौटता नहीं। रोज़गार का दफ़्तर वह जगह है जहाँ दरख़्वास्त देकर नौकरी मिलती है, जैसा लोमड़ी सोचती है। शेर का स्टाफ़ दोनों को एक बताता है और बाहर के रोज़गार दफ़्तर को “मिथ्या” कहता है, पर कथावाचक यह अंतर पहचानता है और कहता है, ‘शेर के मुँह और रोज़गार के दफ़्तर का अंतर मुझे मालूम है। मैं इसमें नहीं जाऊँगा।’

प्रश्न 4

प्र. ‘प्रमाण से अधिक महत्त्वपूर्ण है विश्वास’ कहानी के आधार पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: जब कथावाचक ने शेर के स्टाफ़ से पूछा कि शेर के पेट में रोज़गार का दफ़्तर होने का क्या प्रमाण है, तो उसे यही उत्तर मिला। इस कहानी में शेर के स्टाफ़ ने प्रमाण के बजाय विश्वास माँगा (पाठ में यह वाक्य प्रश्नवाचक है: ‘प्रमाण से अधिक महत्त्वपूर्ण है विश्वास?’), और जो बात उसके दावे के विरुद्ध थी, यानी बाहर का रोज़गार दफ़्तर, उसे ‘मिथ्या’ कहा। यह पंक्ति अंधविश्वास और सत्ता के प्रचार-तंत्र, दोनों पर करारा व्यंग्य करती है, और दिखाती है कि सत्ता किस तरह तर्क की जगह भावनात्मक भरोसे का सहारा लेकर लोगों को अपनी बात मनवाती है।

2 प्रश्न-अभ्यास: पहचान

प्रश्न 1

प्र. राजा ने जनता को हुक्म क्यों दिया कि सब लोग अपनी आँखें बंद कर लें?

उत्तर: राजा ने हुक्म दिया कि उसके राज में सब लोग अपनी आँखें बंद रखेंगे, ताकि उन्हें ‘शांति’ मिलती रहे। यह हुक्म दिखने में जनता की भलाई के लिए लगता है। पाठ के परिचय के अनुसार राजा को “बहरी, गूँगी और अंधी प्रजा पसंद आती है जो बिना कुछ बोले, बिना कुछ सुने और बिना कुछ देखे उसकी आज्ञा का पालन करती रहे”।

प्रश्न 2

प्र. आँखें बंद रखने और आँखें खोलकर देखने के क्या परिणाम निकले?

उत्तर: आँखें बंद रखने पर पाठ के अनुसार “काम पहले की तुलना में बहुत अधिक और अच्छा हो रहा था”। परंतु जब खैराती, रामू और छिद्दू ने एक दिन आँखें खोलकर देखा, तो उन्हें पता चला कि राज्य स्वर्ग नहीं बना था, बल्कि उन्हें अपने सामने सिर्फ़ राजा ही दिखाई दिया और वे आपस में एक-दूसरे को भी नहीं देख सके। यानी आँखें खोलने पर उनका भ्रम टूट गया और असलियत सामने आ गई।

प्रश्न 3

प्र. राजा ने कौन-कौन से हुक्म निकाले? सूची बनाइए और इनके निहितार्थ लिखिए।

उत्तर: राजा ने क्रमशः ये हुक्म निकाले: (1) सब लोग अपनी आँखें बंद रखें, ताकि ‘शांति’ मिलती रहे; इसका निहितार्थ था कि जनता कुछ भी ग़लत होते हुए न देख सके। (2) कानों में पिघला हुआ सीसा डलवा लें, क्योंकि ‘सुनना जीवित रहने के लिए बिलकुल ज़रूरी नहीं है’; इसका निहितार्थ था कि जनता किसी की आवाज़, चेतावनी या विरोध सुन ही न सके। (3) होंठ सिलवा लें, क्योंकि ‘बोलना उत्पादन में सदा से बाधक रहा है’; इसका निहितार्थ था कि जनता कभी सवाल न उठा सके या विरोध में आवाज़ न उठा सके। (4) आगे भी तरह-तरह की चीज़ें कटवाने-जुड़वाने के हुक्म मिलते रहे, जिनका निहितार्थ था कि जनता की हर स्वाभाविक क्षमता को धीरे-धीरे छीना जा सकता है, बशर्ते उसे ‘प्रगति’ के नाम पर पेश किया जाए।

प्रश्न 4

प्र. जनता राज्य की स्थिति की ओर से आँखें बंद कर ले तो उसका राज्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: यदि जनता अपनी आँखें, कान और मुँह बंद कर लेती है, यानी सवाल पूछना, विरोध करना और सच देखना बंद कर देती है, तो शासक निरंकुश हो जाता है। वह मनमाने फ़ैसले लेता है और छद्म प्रगति के दावों (जैसे बढ़ता ‘उत्पादन’) से जनता को भरमाता रहता है, जबकि असल में वह उत्पादन के सभी साधनों पर अपनी पकड़ मज़बूत करता जाता है। सबसे बड़ा नुक़सान यह होता है कि जनता की आपसी एकता भी टूट जाती है, जैसा कहानी के अंत में दिखाया गया है: आँखें खुलने पर भी लोग एक-दूसरे को नहीं, सिर्फ़ शासक को देख पाते हैं। इस तरह जनता स्वयं अपने शोषण में सहभागी बन जाती है।

प्रश्न 5

प्र. खैराती, रामू और छिद्दू ने जब आँखें खोलीं तो उन्हें सामने राजा ही क्यों दिखाई दिया?

उत्तर: राजा ने जनता को अंधा-बहरा-गूँगा बनाए रखा और इस दौरान स्वयं उत्पादन के सभी साधनों पर अपनी पकड़ मज़बूत करता गया। वह लोगों के जीवन को स्वर्ग जैसा बनाने का झाँसा देकर अपना जीवन स्वर्गमय बनाता रहा। इस तरह जनता की नज़र में सिर्फ़ राजा की सत्ता ही सबसे बड़ी सच्चाई रह गई थी, इसीलिए आँखें खुलते ही उन्हें केवल राजा ही दिखाई दिया, कुछ और नहीं, यहाँ तक कि एक-दूसरे को भी नहीं।

3 प्रश्न-अभ्यास: चार हाथ

प्रश्न 1

प्र. मज़दूरों को चार हाथ देने के लिए मिल मालिक ने क्या किया और उसका क्या परिणाम निकला?

उत्तर: मिल मालिक ने पहले बड़े वैज्ञानिकों को मोटी तनख्वाह पर नौकर रखा, ताकि वे मज़दूरों के चार हाथ बनाने का उपाय खोजें। कई साल शोध के बाद वैज्ञानिकों ने कहा कि आदमी के चार हाथ होना असंभव है। नाराज़ होकर मालिक ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया और स्वयं यह काम पूरा करने में जुट गया। उसने कटे हुए हाथ मंगवाकर फ़िट करवाने चाहे, पर नहीं हो सका। फिर लकड़ी के हाथ लगवाने चाहे, पर उनसे काम नहीं हो सका। अंत में उसने लोहे के हाथ फ़िट करवा दिए, जिससे मज़दूर ही मर गए।

प्रश्न 2

प्र. चार हाथ न लग पाने पर मिल मालिक की समझ में क्या बात आई?

उत्तर: आख़िर मिल मालिक की समझ में बात आ गई: उसने मज़दूरी आधी कर दी और दुगुने मज़दूर नौकर रख लिए। इस तरह उसे बिना किसी वैज्ञानिक चमत्कार के ‘चार हाथ’ का काम मिल गया, केवल मज़दूरों का शोषण दोगुना करके। यह इस लघुकथा का सबसे व्यंग्यात्मक मोड़ है: पूँजीपति को मज़दूरों के सचमुच चार हाथ नहीं चाहिए, उसे बस दोगुना उत्पादन चाहिए, चाहे वह दोगुने मज़दूरों से आधी मज़दूरी पर ही क्यों न कराया जाए।

4 प्रश्न-अभ्यास: साझा

प्रश्न 1

प्र. साझे की खेती के बारे में हाथी ने किसान को क्या बताया?

उत्तर: किसान ने पहले मना कर दिया था कि साझे में उसका गुज़ारा कभी नहीं होता, और अकेले वह खेती नहीं कर सकता, इसलिए वह खेती करेगा ही नहीं। तब हाथी ने उसे बहुत देर तक ‘पट्टी पढ़ाई’ (बहकाने वाली शिक्षा दी) और बताया कि उसके साथ साझे की खेती करने से यह लाभ होगा कि जंगल के छोटे-मोटे जानवर खेतों को नुकसान नहीं पहुँचा सकेंगे और खेती की अच्छी रखवाली हो जाएगी।

प्रश्न 2

प्र. हाथी ने खेत की रखवाली के लिए क्या घोषणा की?

उत्तर: हाथी पूरे जंगल में घूमकर डुग्गी पीट आया कि गन्ने में उसका साझा है, इसलिए कोई भी जानवर खेत को नुकसान न पहुँचाए, नहीं तो अच्छा न होगा। इस तरह उसने अपनी ताक़त और धमकी का उपयोग करके खेत की रखवाली सुनिश्चित की, जबकि असली मेहनत किसान की थी।

प्रश्न 3

प्र. आधी-आधी फ़सल हाथी ने किस तरह बाँटी?

उत्तर: फ़सल तैयार होने पर किसान चाहता था कि गन्ना आधा-आधा बाँटा जाए। यह सुनकर हाथी बिगड़ गया और बोला, ‘अपने और पराए की बात मत करो। यह छोटी बात है। हम दोनों ने मिलकर मेहनत की थी हम दोनों उसके स्वामी हैं। आओ, हम मिलकर गन्ने खाएँ।’ इतना कहकर उसने अपनी सूँड से एक गन्ना तोड़ लिया, जिसका एक छोर उसकी सूँड में था और दूसरा किसान के मुँह में। जैसे ही किसान गन्ने के साथ हाथी के मुँह की तरफ़ खिंचने लगा, तो किसान ने गन्ना छोड़ दिया, और हाथी ने कहा, ‘देखो, हमने एक गन्ना खा लिया।’ पाठ के शब्दों में, ‘इसी तरह हाथी और आदमी के बीच साझे की खेती बँट गई।’ यानी ‘मिलकर गन्ने खाएँ’ कहकर गन्ना हाथी ने ही लिया; पाठ के परिचय के अनुसार किसान की ‘सारी कमाई हाथी के पेट में चली जाती है’।

5 योग्यता-विस्तार

ये क्रियाकलाप और विचार-आधारित प्रश्न हैं। नीचे हर प्रश्न के लिए उत्तर की दिशा दी गई है, विद्यार्थी अपने विचार जोड़कर लिखें।

शेर: प्रश्न 1

प्र. इस कहानी में हमारी व्यवस्था पर जो व्यंग्य किया गया है, उसे स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पाठ के परिचय के अनुसार शेर व्यवस्था का प्रतीक है, जिसके पेट में जंगल के सभी जानवर किसी न किसी प्रलोभन (घास, नौकरी, स्वर्ग) के चलते समाते जा रहे हैं। ऊपर से वह अहिंसावादी, न्यायप्रिय और बुद्ध का अवतार लगता है, पर जैसे ही कथावाचक उसके मुँह में जाने से इनकार करता है, वह दहाड़कर झपटता है। व्यंग्य यह है कि सत्ता तभी तक खामोश रहती है जब तक सब उसकी आज्ञा मानें; विरोध का स्वर उठते ही वह उसे कुचलने का प्रयास करती है। लेखक ने सुविधाभोगियों, छद्म क्रांतिकारियों, अहिंसावादियों और सह-अस्तित्ववादियों के ढोंग पर भी प्रहार किया है।

शेर: प्रश्न 2

प्र. यदि आपके भी सींग निकल आते तो आप क्या करते?

उत्तर: (विद्यार्थी अपने विचार लिखें।) शब्दार्थ के अनुसार ‘सींग निकलना’ का अर्थ है व्यवस्था से अलग रहना, बनी-बनाई लीक से अलग चलना। उत्तर में लिखा जा सकता है कि ऐसी स्थिति में हम भीड़ के साथ आँख मूँदकर नहीं चलेंगे, हर दावे का प्रमाण माँगेंगे और कथावाचक की तरह ग़लत बात का साहस से विरोध करेंगे।

पहचान: प्रश्न 1

प्र. गांधी जी के तीनों बंदर आँख, कान, मुँह बंद करते थे किंतु उनका उद्देश्य अलग था कि वे बुरा न देखेंगे, न सुनेंगे, न बोलेंगे। यहाँ राजा ने अपने लाभ के लिए या राज्य की प्रगति के लिए ऐसा किया। दोनों की तुलना कीजिए।

उत्तर: गांधी जी के तीनों बंदर स्वयं अपनी इच्छा से बुराई से बचने का संदेश देते हैं; उनका उद्देश्य नैतिक सुधार है। ‘पहचान’ में राजा जनता की आँखें, कान और मुँह हुक्म देकर बंद करवाता है, ताकि जनता कुछ देख, सुन या बोल न सके और वह प्रगति के बहाने अपनी पकड़ मज़बूत करता रहे। एक ओर आत्म-संयम है, दूसरी ओर सत्ता द्वारा थोपा गया दमन।

पहचान: प्रश्न 2

प्र. भारतेंदु हरिश्चंद्र का ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ नाटक देखिए और उस राजा से ‘पहचान’ के राजा की तुलना कीजिए।

उत्तर: (यह नाटक देखने/पढ़ने के बाद किया जाने वाला कार्य है।) तुलना में यह देखा जा सकता है कि दोनों राजाओं की मनमानी का बोझ प्रजा पर पड़ता है। ‘पहचान’ का राजा चालाकी से प्रगति और उत्पादन के नाम पर प्रजा को अंधा, बहरा और गूँगा बना देता है; विद्यार्थी नाटक के राजा के व्यवहार से इसकी समानताएँ और अंतर लिखें।

चार हाथ: प्रश्न 1

प्र. आप यदि मिल मालिक होते तो उत्पादन दो गुना करने के लिए क्या करते?

उत्तर: (विद्यार्थी अपने विचार लिखें।) उत्तर में मज़दूरों के शोषण के बिना उत्पादन बढ़ाने के उपाय लिखे जा सकते हैं, जैसे बेहतर मशीनें, मज़दूरों का प्रशिक्षण, उचित मज़दूरी और सुरक्षित कार्य-स्थितियाँ, ताकि मज़दूर मन लगाकर काम करें। कहानी के मिल मालिक की तरह मज़दूरी आधी करके दुगुने मज़दूर रखना शोषण है, समाधान नहीं।

साझा: प्रश्न 1

प्र. ‘पंचतंत्र की कथाएँ’ भी पढ़िए।

उत्तर: (यह पठन-कार्य है।) पंचतंत्र की कथाओं में भी पशु-पात्रों के माध्यम से नीति और व्यवहार की बातें कही गई हैं। पढ़ते समय विद्यार्थी देखें कि ‘साझा’ की तरह वहाँ भी बलवान और चालाक पात्र कैसे कमज़ोर को छलते हैं।

साझा: प्रश्न 2

प्र. ‘भेड़ और भेड़िए’ हरिशंकर परसाई की रचना पढ़िए।

उत्तर: (यह पठन-कार्य है।) विद्यार्थी यह रचना पढ़कर देखें कि परसाई जी भी पशु-प्रतीकों के माध्यम से व्यवस्था पर व्यंग्य करते हैं, और उसकी तुलना इस पाठ की लघुकथाओं से करें।

साझा: प्रश्न 3

प्र. कहानी और लघुकथा में अंतर जानिए।

उत्तर: कहानी में अपेक्षाकृत अधिक पात्र, घटनाएँ और विस्तार होता है, जबकि लघुकथा आकार में बहुत छोटी होती है, एक ही केंद्रीय भाव या व्यंग्य पर टिकी होती है और उसका अंत प्रायः चौंकाने वाला या सीधा प्रहार करने वाला होता है। इस पाठ की शेर, पहचान, चार हाथ और साझा लघुकथाएँ हैं।