कक्षा 12 हिंदी, अंतरा भाग 2, अध्याय 14 (शेर, पहचान, चार हाथ, साझा, असगर वजाहत) का त्वरित पुनरीक्षण। मुख्य परिभाषाएँ, पाठ के सभी शब्दार्थ और मुख्य तथ्य एक ही जगह। पहले पूरे नोट्स पढ़ें, फिर दोहराने के लिए यह पढ़ें।
1 लेखक-परिचय एक नज़र में
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| जन्म | सन् 1946, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश |
| उच्च शिक्षा | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय |
| अध्यापन | जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय, दिल्ली |
| प्रमुख कहानी-संग्रह | दिल्ली पहुँचना है, स्विमिंग पूल और सब कहाँ कुछ, आधी बानी, मैं हिंदू हूँ |
| प्रमुख नाटक | फिरंगी लौट आए, इन्ना की आवाज़, वीरगति, समिधा, जिस लाहौर नई देख्या, अकी |
| नुक्कड़-नाटक संग्रह | सबसे सस्ता गोश्त |
| प्रमुख उपन्यास | रात में जागने वाले, पहर दोपहर तथा सात आसमान, कैसी आगि लगाई |
| भाषा-शैली | गांभीर्य, सबल भावाभिव्यक्ति, व्यंग्यात्मकता; मुहावरों-तद्भव शब्दों से सहजता |
2 परिभाषाएँ
परिभाषाएँ
लघुकथाबहुत छोटी गद्य-विधा, एक ही केंद्रीय भाव/व्यंग्य पर टिकी (सामान्य समझ, पाठ में परिभाषा नहीं)
व्यंग्यसीधी आलोचना की जगह चुटीले ढंग से चोट (सामान्य समझ, पाठ में परिभाषा नहीं)
सींग निकलनाप्रतीकात्मक: व्यवस्था से अलग रहना, बनी-बनाई लीक से हटकर चलना
पट्टी पढ़ानाबहकाने वाली शिक्षा देना
3 चारों लघुकथाओं का सार
| लघुकथा | मुख्य पात्र | सार-संदेश |
|---|---|---|
| (क) शेर | कथावाचक, शेर, गधा, लोमड़ी, उल्लू, कुत्तों का जुलूस | सत्ता तब तक अहिंसक दिखती है जब तक कोई सवाल नहीं करता; सवाल उठते ही झपट पड़ती है |
| (ख) पहचान | राजा, खैराती, रामू, छिद्दू | प्रगति के नाम पर जनता को अंधा-बहरा-गूँगा बनाकर उसकी आपसी एकता भी तोड़ी जाती है |
| (ग) चार हाथ | मिल मालिक, वैज्ञानिक, मज़दूर | मालिक का तरीक़ा: आधी मज़दूरी पर दुगुने मज़दूर रखना |
| (घ) साझा | किसान, हाथी (पूर्व साझेदार: शेर, चीता, मगरमच्छ) | साझेदारी के नाम पर ताक़तवर पक्ष किसान की सारी फ़सल हड़प लेता है |
4 शेर: मुख्य बिंदु
- कथावाचक सींग निकलने के डर से जंगल भागा (व्यवस्था से अलग रहने वाले व्यक्ति का प्रतीक)
- गधा: हरी घास का मैदान; लोमड़ी: रोज़गार का दफ़्तर; उल्लू: स्वर्ग/निर्वाण, सबका भरोसा झूठा
- कुत्तों का जुलूस कभी हँसता-गाता, कभी विरोध में चीखता-चिल्लाता रहा, पर दुम दबाए शेर के मुँह में चला गया; कथावाचक के चीखकर रोकने पर भी नहीं रुका
- शेर के स्टाफ़ का उत्तर: “प्रमाण से अधिक महत्त्वपूर्ण है विश्वास?”; बाहर का रोज़गार दफ़्तर: “मिथ्या है।”
- पाठ के परिचय के अनुसार: “सुविधाभोगियों, छद्म क्रांतिकारियों, अहिंसावादियों और सह-अस्तित्ववादियों के ढोंग पर भी प्रहार”; शेर को “अहिंसा और सह-अस्तित्ववाद का बड़ा ज़बरदस्त समर्थक” बताया गया
- कथावाचक के इनकार पर गौतम बुद्ध की मुद्रा में बैठा शेर दहाड़कर झपट पड़ा
5 पहचान: मुख्य बिंदु
- राजा के क्रमिक हुक्म: आँखें बंद रखना → कानों में सीसा डलवाना → होंठ सिलवाना
- बहाने: आँखें बंद, “शांति” के लिए; कान में सीसा, “सुनना जीवित रहने के लिए बिलकुल ज़रूरी नहीं है”; होंठ सिलना, “बोलना उत्पादन में सदा से बाधक रहा है”; खाना भी “काम करने के लिए बहुत आवश्यक नहीं माना गया”
- पाठ के परिचय के अनुसार राजा “उत्पादन के सभी साधनों पर अपनी पकड़ मज़बूत करता जाता है” और लोगों के जीवन को स्वर्ग जैसा बनाने का झाँसा देकर “अपना जीवन स्वर्गमय बनाता है”
- खैराती, रामू, छिद्दू ने आँखें खोलीं तो सिर्फ़ राजा दिखा, एक-दूसरे को नहीं
6 चार हाथ: मुख्य बिंदु
- मिल मालिक चाहता था मज़दूरों के चार हाथ हों; वैज्ञानिकों ने असंभव बताया
- कटे हाथ असफल, लकड़ी के हाथ असफल, लोहे के हाथ से मज़दूर मर गए
- मालिक का हल: मज़दूरी आधी, दुगुने मज़दूर नौकर
7 साझा: मुख्य बिंदु
- किसान पहले शेर, चीते, मगरमच्छ के साथ भी साझे की खेती कर चुका था; “साझे में उसका कभी गुज़ारा नहीं होता”
- हाथी ने पट्टी पढ़ाकर राज़ी किया, गन्ना बोया, डुग्गी पीटकर रखवाली की घोषणा की
- फ़सल बाँटने के समय हाथी बिगड़ा और “आओ, हम मिलकर गन्ने खाएँ” कहकर एक गन्ना तोड़ लिया; किसान ने गन्ना छोड़ दिया और हाथी बोला, “देखो, हमने एक गन्ना खा लिया।”
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सींग निकलना | व्यवस्था से अलग रहना, लीक से हटकर चलना |
| डुग्गी पीटना | प्रचार करना |
| पट्टी पढ़ाना | बहकाने वाली शिक्षा देना |
| निर्वाण | जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति |
| उल्लू बनाना | मूर्ख बनाना |
त्वरित पुनरावृत्ति
- असगर वजाहत (जन्म 1946, फतेहपुर): कहानी, नाटक, उपन्यास, लघुकथा; फ़िल्मों और धारावाहिकों के लिए पटकथा-लेखन
- चार अलग-अलग लघुकथाएँ, एक कहानी नहीं: शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
- शेर: सत्ता का दोहरा चरित्र; पहचान: तानाशाही और झूठी प्रगति
- चार हाथ: पूँजीवादी श्रम-शोषण; साझा: भूमि/उपज पर कब्ज़ा
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