इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. अज्ञेय का मूल नाम क्या था?
उत्तर: अज्ञेय का मूल नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन था।
प्र. अज्ञेय का जन्म कहाँ और कब हुआ?
उत्तर: अज्ञेय का जन्म कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में सन् 1911 में हुआ।
प्र. अज्ञेय किस पत्रिका के संस्थापक संपादक थे?
उत्तर: अज्ञेय “दिनमान” के संस्थापक संपादक थे।
प्र. अज्ञेय ने किस परंपरा की शुरुआत की?
उत्तर: अज्ञेय ने तार सप्तक, दूसरा सप्तक और तीसरा सप्तक का संपादन करके सप्तक परंपरा की शुरुआत की।
प्र. “यह दीप अकेला” में दीप किसका प्रतीक है?
उत्तर: “यह दीप अकेला” में दीप अकेले व्यक्ति (व्यष्टि) का प्रतीक है।
प्र. बूँद क्षणभर के लिए किससे रंग जाती है?
उत्तर: बूँद क्षणभर के लिए ढलते सूरज की आग से रंग जाती है।
प्र. “नश्वरता” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: नश्वरता का अर्थ है नाशशीलता, यानी मिट जाने का स्वभाव।
प्र. अज्ञेय को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
उत्तर: अज्ञेय को साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती सम्मान और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिले।
प्र. अज्ञेय का बचपन कहाँ-कहाँ बीता?
उत्तर: अज्ञेय का बचपन लखनऊ, श्रीनगर और जम्मू में बीता।
प्र. अज्ञेय की यात्रा-वृत्तांत विधा की दो रचनाएँ बताइए।
उत्तर: अरे यायावर रहेगा याद और एक बूँद सहसा उछली अज्ञेय के प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत हैं।
प्र. अज्ञेय कितने समय तक जेल और नज़रबंद रहे?
उत्तर: अज्ञेय चार वर्ष जेल में रहे और दो वर्ष नज़रबंद रहे।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. अज्ञेय की शिक्षा-यात्रा के बारे में लिखिए।
उत्तर: अज्ञेय की प्रारंभिक शिक्षा अंग्रेज़ी और संस्कृत में हुई, हिंदी उन्होंने बाद में सीखी। वे आरंभ में विज्ञान के विद्यार्थी थे, बी.एससी. करने के बाद उन्होंने एम.ए. अंग्रेज़ी में प्रवेश लिया, लेकिन क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई।
प्र. अज्ञेय की पत्रकारिता से जुड़ी उपलब्धियाँ बताइए।
उत्तर: अज्ञेय “दिनमान” साप्ताहिक के संस्थापक संपादक थे, उन्होंने कुछ दिनों नवभारत टाइम्स का भी संपादन किया, और सैनिक, विशाल भारत, प्रतीक, नया प्रतीक जैसी कई साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन किया।
प्र. “यह दीप अकेला” में दीप की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
उत्तर: दीप स्नेह से भरा है, गर्व से भरा है और अपनी मस्ती में डूबा (मदमाता) है, फिर भी अकेला है। उसमें सारे गुण और सारी शक्तियाँ मौजूद हैं, उसकी अपनी व्यक्तिगत सत्ता भी कम नहीं है।
प्र. “यह दीप अकेला” में टेक और हर अंतरे की अपनी अंतिम पंक्ति का क्या संबंध है?
उत्तर: टेक (“…पर इसको भी पंक्ति को दे दो।”) पूरी कविता में चार बार, शब्द-दर-शब्द एक जैसी आती है। बदलता है हर अंतरे का अपना आख़िरी वाक्य, जो टेक से ठीक पहले आता है: पहला अंतरा “यह मैं स्वयं विसर्जित” पर, दूसरा अंतरा “शक्ति को दे दो” पर, तीसरा अंतरा “भक्ति को दे दो” पर ख़त्म होता है। इस क्रम को दीप को सौंपने की माँग के एक-एक कदम आगे बढ़ने (पंक्ति, फिर शक्ति, फिर भक्ति) के रूप में पढ़ा जा सकता है।
प्र. “मैंने देखा, एक बूँद” कविता में बूँद और सागर का क्या संबंध है?
उत्तर: बूँद सागर के झाग से ही सहसा उछलती है और क्षणभर के लिए ढलते सूरज की आग से रंग जाती है। बूँद का सागर से अलग दिखना क्षणभर का है; पाठ के अनुसार ‘यह क्षणभंगुरता बूँद की है, समुद्र की नहीं’। फिर भी विराट के सम्मुख बूँद का यह क्षणभर का अलग दिखना नश्वरता के दाग से, नष्ट होने के बोध से मुक्ति का अहसास है।
प्र. प्रयोगवाद क्या है, संक्षेप में बताइए।
उत्तर: प्रयोगवाद हिंदी कविता की वह धारा है, जो छायावाद के बाद, सन् 1943 में अज्ञेय के संपादन में छपे “तार सप्तक” से आरंभ मानी जाती है। इसमें कवि विषय, भाषा और रूप, तीनों में नए-नए प्रयोग करते हैं और व्यक्ति के निजी अनुभव तथा बौद्धिकता को अधिक महत्त्व देते हैं।
प्र. “लघु मानव” से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: लघु मानव का अर्थ है एक साधारण, आम इंसान, जो किसी महानायक की तरह नहीं है, फिर भी अपने आप में पूरा और सार्थक है। प्रयोगवादी कविता किसी बड़े नायक की जगह इसी साधारण मनुष्य के अनुभवों को केंद्र में रखती है।
प्र. अज्ञेय की गद्य-रचनाओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: उपन्यास: शेखर: एक जीवनी, नदी के द्वीप। कहानी संग्रह: विपथगा, परंपरा। निबंध: त्रिशंकु, आत्मने पद।
प्र. “यह दीप अकेला” और “मैंने देखा, एक बूँद” की भाषा-शैली में क्या समानता है?
उत्तर: दोनों कविताएँ खड़ी बोली में लिखी गई हैं, दोनों मुक्त छंद में हैं और दोनों में कोई नाटकीय पात्र नहीं है, ये सीधे कवि की अपनी आवाज़ में लिखी गई स्वतंत्र कविताएँ हैं।
प्र. “यह दीप अकेला” में “मधु”, “गोरस” और “अंकुर” के माध्यम से दीप के कौन-से गुण दिखाए गए हैं?
उत्तर: मधु के माध्यम से दीप का युगों से संचित (“स्वयं काल की मौना का युग-संचय”) होना और उसकी मिठास, गोरस के माध्यम से उसकी पवित्रता और पोषकता (“जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत पय”), तथा अंकुर के माध्यम से उसका साहस और निर्भयता (“फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय”) दिखाई गई है।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. “यह दीप अकेला” कविता का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: • अज्ञेय एक ऐसे दीप की बात करते हैं जो स्नेह, गर्व और मस्ती से भरा है, फिर भी अकेला है।
• अहंकार का मद व्यक्ति को अपनों से अलग-थलग कर देता है।
• कवि बार-बार कहते हैं कि इस अकेले दीप को भी पंक्ति (समाज) में शामिल कर लो।
• दीप का पंक्ति में मिलना उसकी सत्ता का सार्वभौमीकरण है और उसके उद्देश्य का सर्वव्यापीकरण है।
• यही स्थिति मनुष्य की भी है, व्यक्ति (व्यष्टि) का समाज (समष्टि) में विलय होता है; समाज के साथ उसकी अंतरंगता से समाज मज़बूत होगा, राष्ट्र मज़बूत होगा।
प्र. “मैंने देखा, एक बूँद” कविता का दार्शनिक महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: • यह कविता जीवन के एक अकेले क्षण के महत्त्व को उजागर करती है।
• एक बूँद सागर के झाग से क्षणभर के लिए अलग दिखकर सूरज की आग से रंग जाती है।
• यह क्षणभंगुरता बूँद की है, सागर की नहीं।
• विराट (असीम सत्ता) के सामने बूँद का अलग दिखना, नश्वरता के दाग से, नष्ट होने के बोध से मुक्ति का अहसास है।
• इस कविता के माध्यम से कवि ने जीवन में क्षण के महत्त्व को, क्षणभंगुरता को प्रतिष्ठापित किया है।
प्र. अज्ञेय के जीवन और साहित्यिक योगदान का परिचय दीजिए।
उत्तर: • मूल नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन, जीवनकाल सन् 1911-1987, जन्म कुशीनगर में।
• प्रारंभिक शिक्षा अंग्रेज़ी-संस्कृत में, विज्ञान के विद्यार्थी रहे; क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के कारण अध्ययन बीच में छोड़ना पड़ा; चार वर्ष जेल में और दो वर्ष नज़रबंद रहे।
• “दिनमान” के संस्थापक संपादक; तार सप्तक, दूसरा सप्तक, तीसरा सप्तक के संपादक, सप्तक परंपरा के जनक।
• कविता के साथ उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तांत, निबंध, आलोचना आदि अनेक विधाओं में लेखन।
• साहित्य अकादमी, भारत भारती और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कारों से सम्मानित; संपूर्ण काव्य-संकलन “सदानीरा”।
प्र. “यह दीप अकेला” के आधार पर प्रयोगवाद और लघु मानव की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: • प्रयोगवाद छायावाद के बाद की धारा है, तार सप्तक (1943) से इसकी शुरुआत मानी जाती है, इसमें नए प्रयोग और बौद्धिकता पर बल है।
• लघु मानव का अर्थ है साधारण आम इंसान, जो किसी महानायक जैसा नहीं फिर भी अपने आप में पूरा है।
• “यह दीप अकेला” में दीप एक साधारण दीप है, महानायक नहीं, फिर भी उसमें सारे गुण और शक्तियाँ हैं।
• दीप का पंक्ति से जुड़ना दिखाता है कि व्यक्ति की समाज के साथ अंतरंगता से समाज मज़बूत होता है, राष्ट्र मज़बूत होता है।
प्र. “यह दीप अकेला” और “मैंने देखा, एक बूँद” के प्रतीकों की तुलना कीजिए।
उत्तर: • “यह दीप अकेला” में दीप व्यक्ति (व्यष्टि) का और पंक्ति समाज (समष्टि) का प्रतीक है।
• “मैंने देखा, एक बूँद” में बूँद क्षणभंगुरता का और सागर/विराट् (बहुत बड़ा, ब्रह्म) उसके सामने की विशालता का प्रतीक है; पाठ के अनुसार “यह क्षणभंगुरता बूँद की है, समुद्र की नहीं”।
• पहली कविता में प्रतीक व्यक्ति-समाज के संबंध को दिखाता है, दूसरी में प्रतीक क्षण और विराट् के संबंध को।
• दोनों ही प्रतीक अपने आप में छोटे (दीप, बूँद) हैं, फिर भी बड़े अर्थ (समाज, नश्वरता से मुक्ति) व्यक्त करते हैं।
प्र. “यह दीप अकेला” का काव्य-सौंदर्य (अलंकार, भाव और शिल्प) स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: • “यह जन है”, “यह मधु है”, “यह गोरस”, “यह अंकुर” जैसी पंक्तियों में दीप पर सीधा आरोप है, इसलिए यहाँ रूपक अलंकार है; दीप को व्यक्ति और पंक्ति को समाज के प्रतीक के रूप में रखा गया है।
• “गाता गीत” में ‘ग’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है, और “चिर-जागरूक … चिर-अखंड” में ‘चिर’ शब्द की पुनरुक्ति से पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
• भाव-सौंदर्य: कविता में आत्म-समर्पण और समाज के प्रति निष्ठा का गंभीर, चिंतनशील भाव है।
• भाषा तत्सम-प्रधान खड़ी बोली में है, छंद मुक्त छंद है, टेक की बार-बार वापसी से शैली गीति-काव्य जैसी है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. “यह दीप अकेला” कविता के आधार पर व्यष्टि और समष्टि के संबंध पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
उत्तर: • व्यष्टि का अर्थ है अकेला व्यक्ति, समष्टि का अर्थ है पूरा समाज।
• दीप में अपने आप में सब कुछ है, सारे गुण-शक्तियाँ उसमें हैं, उसकी अपनी सत्ता भी कम नहीं है।
• फिर भी पंक्ति (समाज) की तुलना में वह अकेला और एकाकी है।
• दीप का पंक्ति में मिल जाना उसकी सत्ता का सार्वभौमीकरण है, यानी उसकी ताक़त सबके लिए साझा हो जाती है।
• ठीक यही स्थिति मनुष्य की भी है, व्यक्ति सर्वशक्तिमान होते हुए भी, समाज में उसका विलय, समाज के साथ उसकी अंतरंगता से समाज मज़बूत होगा, राष्ट्र मज़बूत होगा।
• यही व्यष्टि का समष्टि में विलय है, और यह आत्मबोध का विश्वबोध में रूपांतरण भी है।
• टेक स्वयं अपरिवर्तित रहती है; हर अंतरे का अपना अंतिम वाक्य (“यह मैं स्वयं विसर्जित”, “इसको भी शक्ति को दे दो”, “इसको भक्ति को दे दो”) इस विलय की माँग को एक क्रम में आगे ले जाता है।
प्र. “मैंने देखा, एक बूँद” कविता में क्षणभंगुरता और जीवन के महत्त्व को विस्तार से समझाइए।
उत्तर: • कवि ने एक बूँद को समुद्र के झाग से सहसा उछलते हुए देखा।
• यह बूँद क्षणभर के लिए ढलते सूरज की आग से रंग जाती है।
• पाठ के अनुसार “यह क्षणभंगुरता बूँद की है, समुद्र की नहीं”।
• क्षणभर का यह दृश्य देखकर कवि को एक दार्शनिक तत्व भी दीखने लग जाता है।
• विराट् (बहुत बड़ा, ब्रह्म) के सम्मुख बूँद का समुद्र से अलग दिखना नश्वरता के दाग से, नष्ट होने के बोध से मुक्ति का अहसास है।
• इस कविता के माध्यम से कवि ने जीवन में क्षण के महत्त्व को, क्षणभंगुरता को प्रतिष्ठापित किया है।
• यही इस कविता का मूल भाव है: जीवन में क्षण का महत्त्व और क्षणभंगुरता।
प्र. अज्ञेय के जीवन-परिचय और उनकी साहित्यिक विशेषताओं का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर: जीवन-परिचय:
• मूल नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन, कलम-नाम अज्ञेय, जीवनकाल सन् 1911-1987।
• जन्म कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में, बचपन लखनऊ, श्रीनगर और जम्मू में बीता।
• प्रारंभिक शिक्षा अंग्रेज़ी-संस्कृत में, विज्ञान के विद्यार्थी रहे, बी.एससी. के बाद एम.ए. अंग्रेज़ी में प्रवेश लिया।
• क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के कारण अध्ययन बीच में छोड़ना पड़ा; वे चार वर्ष जेल में और दो वर्ष नज़रबंद रहे।
साहित्यिक विशेषताएँ:
• “दिनमान” के संस्थापक संपादक; तार सप्तक, दूसरा सप्तक, तीसरा सप्तक के संपादन से सप्तक परंपरा की शुरुआत की।
• कविता के साथ उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तांत, निबंध, आलोचना आदि अनेक विधाओं में लेखन किया।
• प्रकृति-प्रेम और मानव-मन के अंतर्द्वंद्वों के कवि माने जाते हैं, व्यक्ति की स्वतंत्रता और बौद्धिकता दोनों पर बल दिया।
• साहित्य अकादमी, भारत भारती और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कारों से सम्मानित; संपूर्ण काव्य-संकलन “सदानीरा”।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक दीप को कवि ने कैसा बताया है?
उत्तर: कवि ने दीप को स्नेह भरा, गर्व भरा और मदमाता, किंतु अकेला बताया है।
(ख) 1 अंक अहंकार का मद क्या करता है?
उत्तर: अहंकार का मद हमें अपनों से अलग कर देता है।
(ग) 2 अंक कवि दीप के बारे में क्या सलाह देते हैं और क्यों?
उत्तर: कवि कहते हैं कि इस अकेले दीप को भी पंक्ति में शामिल कर लेना चाहिए, क्योंकि इससे उसकी महत्ता और सार्थकता बढ़ जाएगी।
(घ) 2 अंक इस गद्यांश का व्यष्टि-समष्टि से क्या संबंध है?
उत्तर: गद्यांश के अनुसार दीप का पंक्ति में विलय व्यष्टि (व्यक्ति) का समष्टि (समाज) में विलय है और आत्मबोध का विश्वबोध में रूपांतरण।
(क) 1 अंक किसकी क्षणभंगुरता का वर्णन है?
उत्तर: बूँद की क्षणभंगुरता का वर्णन है, समुद्र की नहीं।
(ख) 1 अंक बूँद क्षणभर के लिए किससे रंग जाती है?
उत्तर: बूँद क्षणभर के लिए ढलते सूरज की आग से रंग जाती है।
(ग) 2 अंक विराट के सामने बूँद का अलग दिखना क्या अर्थ रखता है?
उत्तर: विराट के सामने बूँद का अलग दिखना नश्वरता के दाग़ से और नष्ट होने के बोध से मुक्ति का अहसास है।
(घ) 2 अंक इस कविता के माध्यम से कवि ने क्या प्रतिष्ठापित किया है?
उत्तर: कवि ने जीवन में क्षण के महत्त्व को, क्षणभंगुरता को प्रतिष्ठापित किया है।