इस अध्याय के 22 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकतुलसीदास का जीवनकाल क्या है?
(क) सन् 1532-1623(ख) सन् 1497-1570(ग) सन् 1440-1518(घ) सन् 1503-1567 - 1 अंकतुलसीदास के गुरु कौन थे, जिनकी कृपा से उन्हें रामभक्ति का मार्ग मिला (ऐसा कहा जाता है)?
(क) वशिष्ठ(ख) वाल्मीकि(ग) रामानंद(घ) नरहरिदास - 1 अंकरामचरितमानस की रचना कब और कहाँ आरंभ हुई?
(क) सन् 1600 में काशी में(ख) सन् 1532 में राजापुर में(ग) सन् 1574 में अयोध्या में(घ) सन् 1623 में चित्रकूट में - 1 अंकतुलसीदास को किन दो उपाधियों से जाना जाता है?
(क) “श्रृंगार के कवि” और “वीर रस के कवि”(ख) “लोकमंगल की साधना के कवि” और “समन्वय का कवि”(ग) “प्रकृति के कवि” और “विद्रोह के कवि”(घ) “हास्य के कवि” और “करुणा के कवि” - 1 अंकगीतावली, कृष्ण गीतावली और विनयपत्रिका किस शैली की रचनाएँ हैं?
(क) दोहा शैली(ख) सवैया शैली(ग) पद शैली(घ) चौपाई शैली - 1 अंकतुलसीदास की ख्याति का आधार मानी जाने वाली चार रचनाएँ कौन-सी हैं?
(क) रामचरितमानस, दोहावली, कृष्ण गीतावली, कवितावली(ख) रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली, विनयपत्रिका(ग) गीतावली, विनयपत्रिका, दोहावली, कृष्ण गीतावली(घ) रामचरितमानस, विनयपत्रिका, दोहावली, कवितावली - 1 अंक“भरत-राम का प्रेम” अंश रामचरितमानस के किस कांड से लिया गया है?
(क) अयोध्या कांड(ख) अरण्यकांड(ग) बालकांड(घ) सुंदरकांड - 1 अंक“पद” किस ग्रंथ से लिए गए हैं?
(क) विनयपत्रिका से(ख) कवितावली से(ग) गीतावली से(घ) दोहावली से - 1 अंकदोनों पद्यांशों (“पद”) में माता कौशल्या की मनोदशा किस भाव की है?
(क) क्रोध का भाव(ख) हर्ष और उल्लास का भाव(ग) ईर्ष्या का भाव(घ) विरह-वेदना (वियोग का दुख) का भाव - 1 अंक“सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा।।” पंक्ति में वन किसने और किस रूप में गमन किया?
(क) भरत ने राजसी वेष में(ख) लक्ष्मण ने अकेले मुनि-वेष में(ग) राम ने मुनि-वेष में, लक्ष्मण और सीता के साथ(घ) दशरथ ने तपस्वी वेष में - 1 अंकपद 1 में कौशल्या सबसे पहले राम की किन वस्तुओं को निहारती (देखती) हैं?
(क) राम के वस्त्र और आभूषण(ख) राम के बाण और छोटे धनुष (बान-धनुहियाँ)(ग) राम के घोड़े और रथ(घ) राम की पुस्तकें - 1 अंक“कोह” और “खुनिस” शब्दों का समान अर्थ क्या है?
(क) क्रोध(ख) प्रेम(ग) हर्ष(घ) भय
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): “हारेंहूँ खेल जितावहिं मोंही” पंक्ति दर्शाती है कि राम बचपन के खेलों में भरत को जानबूझकर हरा देते थे।
कारण (R): यह पंक्ति राम के भरत के प्रति असीम स्नेह को दर्शाती है: खेल में भरत हार भी जाते, तो भी राम उन्हें ही जितवा देते थे।
(क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, R गलत है(घ) A गलत है, R सही है - 1 अंकअभिकथन (A): पद 2 में कौशल्या राम से घोड़ों की चिंता के कारण लौट आने का निवेदन करती हैं।
कारण (R): राम स्वयं इन घोड़ों को दूध पिलाकर, सहलाकर पालते थे, और अब वे राम के वियोग में दिन-प्रतिदिन मुरझा रहे हैं।
(क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, R गलत है(घ) A गलत है, R सही है
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसुमेलन कीजिए (“पद” के शब्दार्थ),
कॉलम A: 1. पनहियाँ 2. बाजि 3. झाँवरे 4. सिखी
कॉलम B: i. सीखी गई ii. जूतियाँ iii. घोड़ा iv. कुम्हलाना, मलिन होना
(क) 1-ii, 2-iii, 3-iv, 4-i(ख) 1-i, 2-ii, 3-iii, 4-iv(ग) 1-iii, 2-iv, 3-i, 4-ii(घ) 1-iv, 2-i, 3-ii, 4-iii
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: “महीं सकल अनरथ कर मूला” पंक्ति राम की प्रशंसा करती है, भरत की आत्मग्लानि से इसका कोई संबंध नहीं।
कथन II: इस पंक्ति में भरत स्वयं को समस्त अनर्थ की जड़ मानते हैं।
(क) कथन I और II दोनों सही हैं(ख) केवल कथन I सही है(ग) केवल कथन II सही है(घ) कथन I और II दोनों गलत हैं
5 सही क्रम में लगाइए
सही क्रम में लगाइए
- 1 अंक“भरत-राम का प्रेम” में इन घटनाओं को सही कालक्रम में रखिए:
A. राजा (दशरथ) की मृत्यु
B. राम का मुनि-वेष में वनगमन
C. भरत का साधु-सभा में गुरु और राम के सम्मुख कथन
(क) A, B, C(ख) C, B, A(ग) A, C, B(घ) B, A, C - 1 अंकपद 2 में भावों को उनके सही क्रम में रखिए:
A. किसी पथिक से राम को संदेश देने का निवेदन
B. घोड़ों की दुर्दशा का वर्णन
C. राम से एक बार फिर अयोध्या लौट आने का निवेदन
(क) A, B, C(ख) B, A, C(ग) C, B, A(घ) A, C, B
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंक“बचपन से राम ने कभी भरत का साथ नहीं छोड़ा, _____ में भी सदैव भरत को ही जितवाते थे।”
(क) खेल(ख) पढ़ाई(ग) युद्ध(घ) विवाद - 1 अंक“पद 1 में कौशल्या वनगमन याद आते ही ‘रहि चकि _____ सी’ होकर स्तब्ध रह जाती हैं।”
(क) सिखी(ख) झाँवरे(ग) चित्रलिखी(घ) पोखि - 1 अंक“पद 2 में घोड़ों के दिन-प्रतिदिन मुरझाने की तुलना ‘_____ कमल हिममारे’ से की गई है, यह उत्प्रेक्षा अलंकार का उदाहरण है।”
(क) जैसे(ख) मनहुँ(ग) तथा(घ) सी
7 पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश
जननी निरखति बान धनुहियाँ।
बार बार उर नैननि लावति प्रभुजू की ललित पनहियाँ।।
कबहुँ प्रथम ज्यों जाइ जगावति कहि प्रिय बचन सवारे।
‘उठहु तात! बलि मातु बदन पर, अनुज सखा सब द्वारे’।।
बार बार उर नैननि लावति प्रभुजू की ललित पनहियाँ।।
कबहुँ प्रथम ज्यों जाइ जगावति कहि प्रिय बचन सवारे।
‘उठहु तात! बलि मातु बदन पर, अनुज सखा सब द्वारे’।।
- 1 अंकऊपर दिया गया पद्यांश किस पद का आरंभिक अंश है?
(क) पद 2(ख) पद 1(ग) भरत-राम का प्रेम खंड 3(घ) भरत-राम का प्रेम खंड 2
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (क) तुलसीदास का जीवनकाल सन् 1532 से 1623 तक माना जाता है।
- (घ) कहा जाता है कि गुरु नरहरिदास की कृपा से तुलसीदास को रामभक्ति का मार्ग मिला।
- (ग) सन् 1574 में अयोध्या में तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना आरंभ की, कुछ अंश काशी में लिखा।
- (ख) तुलसीदास को “लोकमंगल की साधना के कवि” कहा जाता है, और उन्हें “समन्वय का कवि” भी कहते हैं।
- (ग) गीतावली, कृष्ण गीतावली तथा विनयपत्रिका पद शैली की रचनाएँ हैं।
- (ख) रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली और विनयपत्रिका, यही चार रचनाएँ तुलसीदास की ख्याति के आधार हैं।
- (क) पाठ्यपुस्तक में प्रस्तुत चौपाई और दोहों को रामचरितमानस के अयोध्या कांड से लिया गया है।
- (ग) पाठ के अगले अंश में गीतावली से दो पद दिए गए हैं।
- (घ) दोनों पदों में राम के वनगमन के बाद माता कौशल्या के हृदय की विरह-वेदना का वर्णन है।
- (ग) यह सुनकर रघुनाथ (राम) ने मुनि का वेष धारण कर, लक्ष्मण और सीता के साथ वन को गमन किया।
- (ख) पद 1 का आरंभ ही “जननी निरखति बान धनुहियाँ” से होता है, अर्थात माता सबसे पहले राम के बाण और छोटे धनुष को निहारती हैं।
- (क) शब्दार्थ तालिका के अनुसार “कोह” का अर्थ क्रोध है और “खुनिस” का अर्थ क्रोध, अप्रसन्नता है; दोनों का समान अर्थ क्रोध है।
अभिकथन-कारण
- (घ) A गलत है, राम भरत को हराते नहीं थे; खेल में भरत हार भी जाते, तो भी राम उन्हें ही जितवा देते थे। पाठ्यपुस्तक के अनुसार राम “बचपन से ही भरत को खेल में भी सहयोग देते रहते थे और उनका मन कभी नहीं तोड़ते थे।” R सही है।
- (क) दोनों कथन सही हैं। पाठ्यपुस्तक इन्हें “राम के वियोग में दुखी अश्व” कहती है और कौशल्या “ए बर बाजि बिलोकि आपने” कहकर इन्हीं को देखने के लिए राम को बुलाती हैं; घोड़ों की यह दशा कौशल्या के निवेदन का प्रमुख कारण है, इसलिए R, A की व्याख्या करता है।
सुमेलन कीजिए
- (क) पनहियाँ = जूतियाँ, बाजि = घोड़ा, झाँवरे = कुम्हलाना/मलिन होना, सिखी = सीखी गई।
कथन आधारित प्रश्न
- (ग) कथन I गलत है, यह पंक्ति भरत की गहरी आत्मग्लानि दर्शाती है। कथन II सही है।
सही क्रम में लगाइए
- (घ) कथा के अनुसार पहले राम मुनि-वेष में वन गए (“सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा”), फिर राजा दशरथ ने मरकर प्रेम का प्रण निभाया (“भूपति मरन पेम पनु राखी”), और बाद में भरत ने साधु-सभा में यह कथन कहा। पद्य में राजा की मृत्यु का उल्लेख वनगमन से पहले आता है, इसलिए यह क्रम पंक्तियों के क्रम से नहीं, कथा से तय होता है।
- (ग) पहले कौशल्या राम से लौट आने का निवेदन करती हैं, फिर घोड़ों की दुर्दशा का वर्णन करती हैं, अंत में किसी पथिक से संदेश देने का निवेदन करती हैं।
रिक्त स्थान
- (क) पंक्ति “हारेंहूँ खेल जितावहिं मोंही” के अनुसार, खेल में हार भी जाने पर राम भरत को ही जितवा देते थे।
- (ग) पंक्ति है “कबहुँ समुझि वनगमन राम को रहि चकि चित्रलिखी सी”, अर्थात चित्र में खींची-सी स्तब्ध रह जाना।
- (ख) पंक्ति है “तदपि दिनहिं दिन होत झाँवरे मनहुँ कमल हिममारे”, “मनहुँ” (मानो) वाचक शब्द से उत्प्रेक्षा अलंकार बनता है।
पद्यांश आधारित प्रश्न
- (ख) यह पंक्तियाँ गीतावली से संकलित “पद 1” की आरंभिक पंक्तियाँ हैं।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री