कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 6 भरत-राम का प्रेम / पद शॉर्ट नोट्स

कक्षा 12 हिंदी, अंतरा भाग 2, अध्याय 6 का त्वरित पुनरीक्षण। हर परिभाषा, हर शब्दार्थ और हर नामित तथ्य एक ही जगह, बीच का कुछ नहीं। पहले पूरे नोट्स पढ़ें, यह परीक्षा की सुबह पढ़ें।

1 कवि-परिचय एक नज़र में

तथ्य विवरण
जीवनकाल सन् 1532-1623
जन्मस्थान बाँदा ज़िले का राजापुर गाँव (वैकल्पिक मत: सोरों, एटा, विद्वानों में मतभेद)
गुरु नरहरिदास (कहा जाता है, इनकी कृपा से रामभक्ति का मार्ग मिला)
रत्नावली-कथा रत्नावली से विवाह और उनकी बातों से प्रभावित होकर गृहत्याग की कथा प्रसिद्ध है, किंतु इसका पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलता
रामचरितमानस-रचना सन् 1574 में अयोध्या में आरंभ, कुछ अंश काशी में
निधन काशी में
उपाधियाँ “लोकमंगल की साधना के कवि”, “समन्वय का कवि”
कुल कृतियाँ बारह प्रामाणिक, चार (रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली, विनयपत्रिका) ख्याति के आधार

2 रचनाएँ: छंद और भाषा के अनुसार

रचना छंद/शैली भाषा
रामचरितमानस दोहा-चौपाई छंद, हिंदी का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य अवधी
कवितावली कवित्त और सवैया छंद ब्रज (परंपरागत मान्यता, पाठ भाषा नहीं बताता)
गीतावली, कृष्ण गीतावली, विनयपत्रिका पद शैली (गेय) ब्रज (परंपरागत मान्यता)
दोहावली स्फुट (बिखरे हुए) दोहों का संकलन लागू नहीं

3 पाठ की बनावट: दो अंश

भरत-राम का प्रेम पद
स्रोत रामचरितमानस (अयोध्या कांड) गीतावली
छंद चौपाई-दोहा शैली पद-शैली (गेय)
वक्ता भरत (साधु-सभा में, गुरु और राम के निकट) माता कौशल्या (तुलसी द्वारा वर्णित)
भाव आत्मग्लानि, आत्मत्याग, भ्रातृ-प्रेम वात्सल्य, विरह-वेदना
लंबाई 3 खंड, 22 चौपाई-पंक्तियाँ + 3 दोहे 2 पद, हर एक 8 पंक्तियों का

4 भरत-राम का प्रेम: याद रखने योग्य बिंदु

खंड 1राम का स्वभाव, अपराधी पर भी क्रोध नहीं, “हारेंहूँ खेल जितावहिं मोंही”
खंड 2भाग्य और माता को दोष (“मातु मंदि”), फिर स्वयं को टोकना (“यहउ कहत मोहि आजु न सोभा”), “फरइ कि कोदव बालि सुसाली”
खंड 3“जननी कुमति जगतु सबु साखी”, “महीं सकल अनरथ कर मूला”, राम बिना जूतों के पैदल वनगमन, निषाद-प्रसंग: वज्र-सा हृदय फिर भी न फटा (भरत का आत्म-धिक्कार)

5 पद: याद रखने योग्य बिंदु

पद 1धनुष-बाण, जूतियाँ देखकर हृदय से लगाना; वनगमन याद आते ही “रहि चकि चित्रलिखी सी”
पद 2घोड़ों की दुर्दशा, “मनहुँ कमल हिममारे”; राम से लौट आने का निवेदन, पथिक से संदेश

6 अलंकार

पंक्ति अलंकार
रहि चकि चित्रलिखी सी उपमा अलंकार
लागति प्रीति सिखी सी उपमा अलंकार
तदपि दिनहिं दिन होत झाँवरे मनहुँ कमल हिममारे उत्प्रेक्षा अलंकार

7 सभी शब्दार्थ एक जगह

भरत-राम का प्रेम
ठाढ़ेखड़े होना
कोहक्रोध
मिसबहाना, माध्यम
बिसेखीविशेष
खुनिसक्रोध, अप्रसन्नता
सुचिपवित्र, शुद्ध
कोदवएक जंगली कंद मूल, मोटे चावल की किस्म
सुसालीधान
मुकुतामोती
संबुकघोंघा
उदधिसागर
अघपाप
नीकसही, ठीक
सतिभाऊशुद्ध भाव से
साखीसाक्षी
पयादेहिपैदल, नंगे पाँव
कुलिसकुलिश, वज्र
बेहूभेदन
बीछींबिच्छू
तनयपुत्र
पद
धनुहियाँबाल धनुष
पनहियाँजूतियाँ
बारदेरी
जेंइयजीमना, भोजन करना
सवारेसवेरे
चित्रलिखी-सीचित्र के समान
सिखीसीखी गई
बाजिघोड़ा
पोखिसहलाना, प्यार करना, हाथ फेरना
निपटबिल्कुल
सारदेखभाल, ध्यान
झाँवरेकुम्हलाना, मलिन होना
अंदेसोअंदेशा, चिंता
त्वरित पुनरीक्षण: परीक्षा से पहले यही पढ़ें
  • तुलसीदास (सन् 1532-1623), जन्म राजापुर (बाँदा), गुरु नरहरिदास (कहा जाता है), रत्नावली से विवाह और गृहत्याग की कथा प्रसिद्ध (पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलता), निधन काशी में
  • प्रमुख रचनाएँ (4): रामचरितमानस (दोहा-चौपाई, अवधी), कवितावली (कवित्त-सवैया), गीतावली और विनयपत्रिका (पद शैली), कुल 12 प्रामाणिक कृतियाँ
  • तुलसीदास को “लोकमंगल की साधना के कवि” और “समन्वय का कवि” कहा जाता है
  • “भरत-राम का प्रेम”: रामचरितमानस के अयोध्याकांड से, भरत की आत्मग्लानि, “हारेंहूँ खेल जितावहिं मोंही” और “महीं सकल अनरथ कर मूला” दो पंक्तियाँ ध्यान देने योग्य हैं
  • “पद”: गीतावली से, माता कौशल्या की विरह-वेदना, पद 1 में “रहि चकि चित्रलिखी सी”, पद 2 में “मनहुँ कमल हिममारे”
  • अलंकार: उपमा (चित्रलिखी सी, सिखी सी), उत्प्रेक्षा (मनहुँ कमल हिममारे)
  • भाषा और छंद में अंतर: भरत-राम का प्रेम, अवधी और चौपाई-दोहा; पद, गेय पद-शैली