इस अध्याय के 20 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकमलिक मुहम्मद जायसी का जीवनकाल क्या है?
(क) सन् 1440-1510(ख) सन् 1398-1448(ग) सन् 1492-1542(घ) सन् 1532-1602 - 1 अंकजायसी मूल रूप से किस स्थान के निवासी थे?
(क) जायस, अमेठी के निकट(ख) मगहर, गोरखपुर के निकट(ग) काशी(घ) मथुरा - 1 अंकपद्मावत में किसकी प्रेम-कथा वर्णित है?
(क) राधा-कृष्ण(ख) शीरीं-फ़रहाद(ग) नल-दमयंती(घ) पद्मावती (सिंहलद्वीप) और रत्नसेन (चित्तौड़) - 1 अंकजायसी की भाषा कौन-सी है?
(क) ब्रज भाषा(ख) खड़ी बोली(ग) ठेठ अवधी(घ) मैथिली - 1 अंक‘बारहमासा’ काव्य-शैली में क्या वर्णित किया जाता है?
(क) राजा के बारह विजय-अभियान(ख) बारह ऋतुओं के देवता(ग) बारह महीनों के क्रम में विरहिणी की मनोदशा(घ) बारह ज्योतिर्लिंगों की कथा - 1 अंकप्रस्तुत अंश पद्मावत के किस खंड से लिया गया है?
(क) चित्तौड़ आक्रमण खंड(ख) नागमती वियोग खंड(ग) सिंहलद्वीप वर्णन खंड(घ) रत्नसेन जन्म खंड - 1 अंकअगहन अंश में नागमती की विरह-अग्नि की तुलना किससे की गई है?
(क) सूर्य की तपन से(ख) दीपक की जलती बाती से(ग) जंगल की आग से(घ) बिजली की चमक से - 1 अंकमाघ अंश में ‘नैन चुवहि जस माँहुट नीरू’ पंक्ति किसका वर्णन करती है?
(क) आँसुओं का माँहुट (माघ की वर्षा) जैसा बहना(ख) बर्फ़ीली हवा का चलना(ग) सूर्य की तेज़ तपन(घ) फूलों का खिलना - 1 अंकफागुन अंश में विरह के कारण नागमती के शरीर का रंग कैसा हो गया है?
(क) पीले पत्ते (पियर पात) जैसा पीला(ख) राख जैसा धूसर(ग) बर्फ़ जैसा श्वेत(घ) ताँबे जैसा लाल
2 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसही मिलान कीजिए:
सूची A: (A) अगहन (B) पूस (C) माघ (D) फागुन
सूची B: (i) रसमूलू (शृंगार रस) का उपजना, पर नायिका का अपना शृंगार छूटा (ii) दीपक की बाती से तुलना (iii) फाग-चाँचरि और भीतरी विषाद (iv) चकई-चकवा और सचान रूपक
(क) A-i, B-ii, C-iii, D-iv(ख) A-iv, B-iii, C-ii, D-i(ग) A-iii, B-i, C-iv, D-ii(घ) A-ii, B-iv, C-i, D-iii - 1 अंकसही मिलान कीजिए:
सूची A: (A) विरोधाभास अलंकार (B) पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार (C) उपमा अलंकार (D) रूपक अलंकार
सूची B: (i) ‘बिरह सचान भँवै तन चाँड़ा’ (ii) ‘सियरि अगिनि बिरहिनि हिय जारा’ (iii) ‘अबहूँ फिरै फिरै रँग सोई’ (iv) ‘जरै बिरह ज्यों दीपक बाती’
(क) A-i, B-ii, C-iii, D-iv(ख) A-iii, B-iv, C-i, D-ii(ग) A-iv, B-i, C-ii, D-iii(घ) A-ii, B-iii, C-iv, D-i - 1 अंकसही मिलान कीजिए:
सूची A: (A) सौर-सुपेती (B) हियरै (C) भसमंतू (D) दारुन
सूची B: (i) कठिन, अधिक (ii) जाड़े के ओढ़ने-बिछाने के वस्त्र (iii) हियरा, हृदय (iv) भस्म
(क) A-i, B-ii, C-iii, D-iv(ख) A-ii, B-iii, C-iv, D-i(ग) A-iii, B-iv, C-i, D-ii(घ) A-iv, B-i, C-ii, D-iii
3 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: पाठ्यपुस्तक में बारहों महीनों का पूरा वर्णन दिया गया है।
कथन II: पाठ्यपुस्तक में बारहमासा के केवल चार महीनों के अंश दिए गए हैं।
(क) कथन I सही है, कथन II ग़लत है(ख) कथन I ग़लत है, कथन II सही है(ग) दोनों कथन सही हैं(घ) दोनों कथन ग़लत हैं
4 सही क्रम में लगाइए
सही क्रम में लगाइए
- 1 अंकमहीनों को पाठ के सही क्रम में लगाइए: (1) फागुन (2) अगहन (3) माघ (4) पूस
(क) 1, 2, 3, 4(ख) 4, 3, 2, 1(ग) 2, 4, 3, 1(घ) 2, 1, 4, 3 - 1 अंकपूस अंश की घटनाओं को सही क्रम में लगाइए: (1) चकई-चकवा से तुलना (2) सूरज का ठिठुरकर (जड़ाइ) लंका की ओर तापना (3) विरह का बाज पक्षी (सचान) जैसा रूपक (4) सारस पक्षी का बिंब (दोहा)
(क) 1, 2, 3, 4(ख) 2, 1, 3, 4(ग) 4, 3, 2, 1(घ) 3, 1, 2, 4
5 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंक‘सो धनि बिरहें जरि मुई, तेहिक ______ हम लाग।’
(क) धुआँ(ख) आग(ग) राख(घ) रंग - 1 अंक‘बिरह सचान भँवै तन चाँड़ा। जीयत खाइ मुएँ नहि ______।।’
(क) देखा(ख) जागा(ग) छाँड़ा(घ) बोला
6 पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश
अगहन देवस घटा निसि बाढ़ी। दूभर दुख सो जाइ किमि काढ़ी।।
अब धनि देवस बिरह भा राती। जरै बिरह ज्यों दीपक बाती।।
काँपा हिया जनावा सीऊ। तौ पै जाइ होइ सँग पीऊ।।
घर घर चीर रचा सब काहूँ। मोर रूप रँग लै गा नाहू।।
पलटि न बहुरा गा जो बिछोई। अबहूँ फिरै फिरै रँग सोई।।
सियरि अगिनि बिरहिनि हिय जारा। सुलगि सुलगि दगधै भै छारा।।
अब धनि देवस बिरह भा राती। जरै बिरह ज्यों दीपक बाती।।
काँपा हिया जनावा सीऊ। तौ पै जाइ होइ सँग पीऊ।।
घर घर चीर रचा सब काहूँ। मोर रूप रँग लै गा नाहू।।
पलटि न बहुरा गा जो बिछोई। अबहूँ फिरै फिरै रँग सोई।।
सियरि अगिनि बिरहिनि हिय जारा। सुलगि सुलगि दगधै भै छारा।।
- 1 अंकपद्यांश के अनुसार नागमती किसकी तरह जल रही है?
(क) सूर्य की तरह(ख) दीपक की बाती की तरह(ग) जंगल की आग की तरह(घ) बिजली की तरह - 1 अंकपद्यांश के अनुसार किसका रूप-रंग उसका पति (नाहू) अपने साथ ले गया?
(क) नागमती का(ख) पड़ोसन का(ग) सुभागी का(घ) किसी का नहीं
7 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंकनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) जायसी का जीवनकाल सन् 1492-1542 है।
(ii) जायसी के गुरु तुलसीदास थे।
(iii) जायसी सूफ़ी प्रेममार्गी काव्यधारा के कवि हैं।
(iv) पद्मावत की भाषा ब्रज है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
(क) केवल (i) और (iii)(ख) केवल (ii) और (iv)(ग) (i), (ii) और (iii)(घ) सभी चारों
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (ग) जायसी का जीवनकाल सन् 1492 से 1542 तक माना जाता है।
- (क) जायसी अमेठी (उत्तर प्रदेश) के निकट जायस नामक स्थान के निवासी थे, इसी से इन्हें ‘जायसी’ कहा गया।
- (घ) पद्मावत में सिंहलद्वीप की राजकुमारी पद्मावती और चित्तौड़ के राजा रत्नसेन के प्रेम की कथा है।
- (ग) जायसी की भाषा ठेठ अवधी है, जो मध्यकालीन अवधी है और आज की बोलचाल की हिंदी से काफ़ी अलग है।
- (ग) बारहमासा में वर्ष के बारह महीनों के क्रम में किसी विरहिणी नायिका की मनोदशा का वर्णन होता है।
- (ख) प्रस्तुत पाठ पद्मावत के ‘नागमती वियोग खंड’ से लिया गया ‘बारहमासा’ शीर्षक अंश है।
- (ख) अगहन अंश में कहा गया है, ‘जरै बिरह ज्यों दीपक बाती’, अर्थात नायिका दीपक की बाती की तरह विरह में जल रही है।
- (क) माघ अंश की यह पंक्ति नागमती के आँसुओं के माँहुट (माघ मास की वर्षा) के जल (नीरू) की तरह बहने का वर्णन करती है।
- (क) फागुन अंश की पंक्ति ‘तन जस पियर पात भा मोरा’ के अनुसार विरह के कारण नागमती का शरीर पीले पत्ते जैसा पीला पड़ गया है।
सुमेलन कीजिए
- (घ) अगहन में दीपक-बाती तुलना (ii), पूस में चकई-चकवा और सचान रूपक (iv), माघ में रसमूलू (शृंगार रस) का उपजना पर नायिका का अपना शृंगार छूटा (i), फागुन में फाग-चाँचरि व भीतरी विषाद (iii), यानी A-ii, B-iv, C-i, D-iii, अतः सही विकल्प (घ) है।
- (घ) विरोधाभास का उदाहरण ‘सियरि अगिनि…’ (ii), पुनरुक्तिप्रकाश का उदाहरण ‘फिरै फिरै…’ (iii, एक ही शब्द एक ही अर्थ में दोहराया गया), उपमा का उदाहरण ‘जरै बिरह ज्यों दीपक बाती’ (iv, ‘ज्यों’ वाचक शब्द), रूपक का उदाहरण ‘बिरह सचान…’ (i), यानी A-ii, B-iii, C-iv, D-i, अतः सही विकल्प (घ) है।
- (ख) सौर-सुपेती का अर्थ जाड़े के ओढ़ने-बिछाने के वस्त्र (ii), हियरै का अर्थ हियरा/हृदय (iii), भसमंतू का अर्थ भस्म (iv), दारुन का अर्थ कठिन/अधिक (i), यानी A-ii, B-iii, C-iv, D-i, अतः सही विकल्प (ख) है।
कथन आधारित प्रश्न
- (ख) कथन I ग़लत है, पाठ्यपुस्तक में बारहों महीने नहीं दिए गए। कथन II सही है, पाठ में केवल चार महीनों के अंश हैं।
सही क्रम में लगाइए
- (ग) पाठ में अंशों का सही क्रम है, अगहन (2), पूस (4), माघ (3), फागुन (1), यानी 2, 4, 3, 1।
- (ख) पूस अंश में पहले सूरज का ठिठुरकर लंका की ओर तापना आता है (2), फिर चकई-चकवा से तुलना (1), फिर बाज पक्षी रूपक (3), और अंत में दोहे में सारस पक्षी का बिंब (4)।
रिक्त स्थान
- (क) अगहन अंश के दोहे की पंक्ति है, ‘तेहिक धुआँ हम लाग’, अर्थात उस स्त्री का धुआँ ही हमें लग रहा है।
- (ग) पूस अंश की पंक्ति है, ‘जीयत खाइ मुएँ नहि छाँड़ा’, अर्थात विरह-रूपी बाज जीते-जी खाता है और मरने पर भी नहीं छोड़ता।
पद्यांश आधारित प्रश्न
- (ख) पद्यांश में स्पष्ट है, ‘जरै बिरह ज्यों दीपक बाती’, अर्थात वह दीपक की बाती की तरह विरह में जल रही है।
- (क) पद्यांश में लिखा है, ‘घर घर चीर रचा सब काहूँ। मोर रूप रँग लै गा नाहू।’, अर्थात सबने वस्त्र सजा लिए, पर नागमती का रूप-रंग उसका पति (नाहू) अपने साथ ले गया।
सत्य-असत्य
- (क) (i) सही है। (ii) ग़लत है, जायसी के गुरु सैयद अशरफ़ और शेख बुरहान थे, तुलसीदास नहीं। (iii) सही है। (iv) ग़लत है, पाठ के अनुसार जायसी की भाषा ठेठ अवधी है। इसलिए सही कथन केवल (i) और (iii) हैं।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री