इस अध्याय के 20 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकघनानंद का जीवनकाल क्या माना जाता है?
(क) सन् 1532-1602(ख) सन् 1673-1760(ग) सन् 1440-1510(घ) सन् 1798-1860 - 1 अंकघनानंद दिल्ली के किस बादशाह के दरबार में मीर मुंशी थे?
(क) शाहजहाँ(ख) औरंगज़ेब(ग) मुहम्मद शाह(घ) अकबर - 1 अंकघनानंद की प्रेमिका का नाम क्या था?
(क) नागमती(ख) पद्मावती(ग) सुजान(घ) राधा - 1 अंकघनानंद को बादशाह के दरबार से क्यों निकाला गया?
(क) युद्ध में हार जाने के कारण(ख) सुजान के प्रेम में बे-अदबी करने के कारण(ग) धन चुराने के आरोप में(घ) किसी और राज्य में चले जाने के कारण - 1 अंकवृंदावन जाकर घनानंद किस संप्रदाय में दीक्षित हुए?
(क) वल्लभ संप्रदाय(ख) निंबार्क संप्रदाय(ग) गौड़ीय संप्रदाय(घ) रामानंदी संप्रदाय - 1 अंकघनानंद को किस विशेषण से पुकारा गया है?
(क) साक्षात रसमूर्ति(ख) कविराज(ग) महाकवि(घ) भक्त-शिरोमणि - 1 अंकप्रस्तुत पुस्तक में घनानंद के कितने कवित्त दिए गए हैं?
(क) एक(ख) दो(ग) तीन(घ) दो कवित्त और एक सवैया
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): घनानंद को बादशाह के दरबार से निकाल दिया गया।
कारण (R): घनानंद सुजान के प्रेम में डूबे रहने के कारण दरबार में बे-अदबी कर बैठे, जिससे बादशाह नाराज़ हो गए।
(क) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण है(ख) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण नहीं है(ग) A सत्य, R असत्य(घ) A असत्य, R सत्य - 1 अंकअभिकथन (A): घनानंद को ‘साक्षात रसमूर्ति’ कहा जाता है।
कारण (R): उनकी रचनाओं में प्रेम का अत्यंत गंभीर, निर्मल और आवेगमय रूप व्यक्त हुआ है।
(क) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण है(ख) A सत्य, R सत्य, R सही स्पष्टीकरण नहीं है(ग) A सत्य, R असत्य(घ) A असत्य, R सत्य
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसही मिलान कीजिए,
सूची A: (A) श्लेष (B) विरोधाभास (C) पुनरुक्तिप्रकाश (D) अनुप्रास
सूची B: (i) ‘कहि कहि’, ‘गहि गहि’ (ii) ‘आनाकानी आरसी’ (iii) ‘घन आनंद’ (iv) ‘कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै’
(क) A-i, B-ii, C-iii, D-iv(ख) A-iv, B-iii, C-ii, D-i(ग) A-iii, B-iv, C-i, D-ii(घ) A-ii, B-i, C-iv, D-iii - 1 अंकसही मिलान कीजिए (शब्दार्थ),
सूची A: (A) पत्यानि (B) आनाकानी (C) कूकभरी (D) बहरायबे
सूची B: (i) पुकार भरी (ii) बहरे बनने की (iii) विश्वास करना (iv) टालने की बात
(क) A-i, B-ii, C-iii, D-iv(ख) A-iv, B-i, C-ii, D-iii(ग) A-ii, B-iii, C-iv, D-i(घ) A-iii, B-iv, C-i, D-ii
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंकनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए,
कथन (i): घनानंद रीतिबद्ध काव्यधारा के कवि हैं।
कथन (ii): वे अलंकार-शास्त्र के नियमों में कड़ाई से बंधकर लिखते थे।
सही विकल्प चुनिए।
(क) केवल कथन (i) सत्य है(ख) केवल कथन (ii) सत्य है(ग) कथन (i) और (ii) दोनों सत्य हैं(घ) कथन (i) और (ii) दोनों असत्य हैं - 1 अंकनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए,
कथन (i): कवित्त (2) में सुजान अपनी आरसी निहार रही है।
कथन (ii): वह कवि की व्याकुल दशा की ओर ध्यान दे रही है।
सही विकल्प चुनिए।
(क) केवल कथन (i) सत्य है(ख) केवल कथन (ii) सत्य है(ग) कथन (i) और (ii) दोनों सत्य हैं(घ) कथन (i) और (ii) दोनों असत्य हैं
5 सही क्रम में लगाइए
सही क्रम में लगाइए
- 1 अंकपाठ में नामित घनानंद की चार रचनाओं को पाठ में दिए गए क्रम में लगाइए,
(1) कृपाकंड निबंध
(2) सुजान सागर
(3) रसकेलि वल्ली
(4) विरह लीला
(क) 2, 4, 1, 3(ख) 1, 2, 3, 4(ग) 4, 3, 2, 1(घ) 3, 1, 4, 2
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंकरिक्त स्थान भरिए, ‘___ दिनान को अवधि आसपास परे, खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को।’
(क) थोड़े(ख) बहुत(ग) सारे(घ) कुछ
7 असंगत चुनिए
असंगत चुनिए
- 1 अंकनिम्नलिखित में से असंगत (जो घनानंद की रचना नहीं है) चुनिए।
(क) कृपाकंड निबंध(ख) विरह लीला(ग) पद्मावत(घ) सुजान सागर
8 पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश आधारित प्रश्न
पद्यांश
बहुत दिनान को अवधि आसपास परे, खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को।
कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दै दै सनमान को।।
झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास ह्वै कै, अब ना घिरत घन आनंद निदान को।
अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान, चाहत चलन ये सँदेसो लै सुजान को।।
कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दै दै सनमान को।।
झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास ह्वै कै, अब ना घिरत घन आनंद निदान को।
अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान, चाहत चलन ये सँदेसो लै सुजान को।।
- 1 अंकउपर्युक्त पद्यांश (कवित्त 1) में कवि के प्राणों की क्या दशा बताई गई है?
(क) वे व्याकुल होकर देह छोड़ने को तैयार हैं(ख) वे प्रसन्न होकर नाच रहे हैं(ग) वे गहरी नींद में सो गए हैं(घ) वे सुजान से मिलकर संतुष्ट हैं - 1 अंकउपर्युक्त पद्यांश (कवित्त 1) में ‘घन आनंद’ शब्द में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा(ख) रूपक(ग) श्लेष(घ) अतिशयोक्ति
9 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंककथन: ‘घनानंद ने वृंदावन जाने के बाद अपनी रचनाओं में कभी सुजान का नाम प्रयोग नहीं किया।’ यह कथन सत्य है या असत्य?
(क) सत्य(ख) असत्य(ग) आंशिक रूप से सत्य(घ) पाठ में इसका कोई उल्लेख नहीं है - 1 अंककथन: ‘घनानंद वृंदावन जाकर भक्त के रूप में जीवन-निर्वाह करने लगे।’ यह कथन सत्य है या असत्य?
(क) पाठ में इसका कोई उल्लेख नहीं है(ख) असत्य(ग) आंशिक रूप से सत्य(घ) सत्य
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (ख) घनानंद का जीवनकाल सन् 1673 से 1760 तक माना जाता है।
- (ग) घनानंद दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह के दरबार में मीर मुंशी थे।
- (ग) पाठ के अनुसार, “कहते हैं कि सुजान नाम की एक स्त्री से उनका अटूट प्रेम था”।
- (ख) सुजान के प्रेम में डूबे रहने के कारण घनानंद दरबार में बे-अदबी कर बैठे, जिससे नाराज़ बादशाह ने उन्हें दरबार से निकाल दिया।
- (ख) वृंदावन जाकर घनानंद निंबार्क संप्रदाय में दीक्षित होकर भक्त के रूप में जीवन-निर्वाह करने लगे।
- (क) घनानंद को ‘साक्षात रसमूर्ति’ कहा गया है, क्योंकि उनकी रचनाओं में प्रेम का अत्यंत गंभीर, निर्मल और आवेगमय रूप व्यक्त हुआ है।
- (ख) प्रस्तुत पुस्तक में घनानंद के केवल दो कवित्त दिए गए हैं, कोई सवैया इसमें नहीं है।
अभिकथन-कारण
- (क) A सत्य है, घनानंद को दरबार से निकाला गया। R सत्य है और A का कारण भी बताता है: पाठ के अनुसार बे-अदबी से नाराज़ होकर बादशाह ने उन्हें दरबार से निकाल दिया।
- (क) A सत्य है और R सत्य है, R, A का सही कारण भी बताता है, यही गुण उन्हें साक्षात रसमूर्ति बनाता है।
सुमेलन कीजिए
- (ग) श्लेष का उदाहरण ‘घन आनंद’ (iii) है, विरोधाभास का ‘कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै’ (iv), पुनरुक्तिप्रकाश का ‘कहि कहि’, ‘गहि गहि’ (i), और अनुप्रास का ‘आनाकानी आरसी’ (ii)।
- (घ) किताब की अपनी शब्दार्थ-सूची के अनुसार, पत्यानि का अर्थ विश्वास करना (iii), आनाकानी का टालने की बात (iv), कूकभरी का पुकार भरी (i), और बहरायबे का बहरे बनने की (ii) है।
कथन आधारित प्रश्न
- (घ) कथन (i) असत्य है, घनानंद रीतिबद्ध नहीं, रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि हैं। कथन (ii) असत्य है, वे अलंकार-शास्त्र के बंधे नियमों को छोड़कर सीधे भाव व्यक्त करते थे। दोनों कथन असत्य हैं।
- (क) कथन (i) सत्य है, सुजान आरसी निहार रही है। कथन (ii) असत्य है, कवि तो यही शिकायत करता है कि उसकी चकित दशा देखकर भी सुजान की दृष्टि उस ओर नहीं मुड़ती।
सही क्रम में लगाइए
- (क) पाठ में क्रम है, सुजान सागर, विरह लीला, कृपाकंड निबंध, रसकेलि वल्ली, यानी सही क्रम-संख्या 2, 4, 1, 3 है।
रिक्त स्थान
- (ख) कवित्त (1) की पहली पंक्ति है, ‘बहुत दिनान को अवधि आसपास परे’।
असंगत चुनिए
- (ग) पद्मावत मलिक मुहम्मद जायसी की रचना है, शेष तीनों घनानंद की अपनी रचनाएँ हैं।
पद्यांश आधारित प्रश्न
- (क) पद्यांश के अनुसार कवि के प्राण बहुत दिनों से व्याकुल होकर देह छोड़ जाने को तैयार बैठे हैं।
- (ग) ‘घन आनंद’ में श्लेष अलंकार है, बादल का सुख और कवि का अपना नाम, दोनों अर्थ एक साथ निकलते हैं।
सत्य-असत्य
- (ख) यह कथन असत्य है, पाठ के अनुसार घनानंद सुजान को भूल नहीं पाए और अपनी रचनाओं में सुजान के नाम का प्रतीकात्मक प्रयोग करते रहे।
- (घ) यह कथन सत्य है। पाठ में है: “वे वृंदावन चले गए और निंबार्क संप्रदाय में दीक्षित होकर भक्त के रूप में जीवन-निर्वाह करने लगे।”
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री