अध्याय 6 का निचोड़, आख़िरी वक़्त के रिवीज़न के लिए: परिभाषाएँ, नाम, तालिकाएँ, समय-रेखा और एक रिकैप। पूरी व्याख्या विस्तृत नोट्स में अलग से मौजूद है।
अलवार-नयनारवीरशैवख़ानक़ाहसिलसिलादरगाह-उर्सचिश्तीकबीरगुरु नानकमीराबाईतज़किरा
1 सारी परिभाषाएँ एक ही जगह
ये शब्द-दर-शब्द याद कीजिए
महान परंपराप्रभावी समूह (पुरोहित, शासक) द्वारा पाली जाने वाली परंपरा; रॉबर्ट रेडफ़ील्ड की शब्दावली
लघु परंपरास्थानीय प्रथा, जिसका महान परंपरा से मेल खाना ज़रूरी नहीं
सगुण भक्तिगुणों सहित किसी विशेष देवता (विष्णु, शिव, देवी) की मानवाकार पूजा
निर्गुण भक्तिएक अमूर्त, निराकार ईश्वर की पूजा
वीरशैव/लिंगायतबासवन्ना के अनुयायी, शिव को लिंग रूप में पूजते, जंगम (घुमंतू संन्यासी) का सम्मान करते
ज़िम्मीप्रकट धर्मग्रंथ का पालन करने वाला संरक्षित ग़ैर-मुस्लिम; जज़िया चुकाता था
उलेमाइस्लामी विद्वान, जो शासकों को शरिया के अंतर्गत मार्गदर्शन देते
तसव्वुफ़ (सूफ़ीवाद)सूफ़/सफ़ा/सुफ़्फ़ा से व्युत्पन्न इस्लामी रहस्यवादी परंपरा
ख़ानक़ाहसूफ़ियों की धर्मशाला, शेख़/पीर के नेतृत्व में
सिलसिलाशाब्दिक अर्थ “श्रृंखला”; पैग़ंबर तक जाने वाली अटूट आध्यात्मिक वंशावली
दरगाह/उर्सशेख़ की क़ब्र (भक्ति-केंद्र)/उसकी मृत्यु-वर्षगाँठ, ईश्वर-मिलन का प्रतीक
वली/औलिया“ईश्वर का मित्र”; बरकत (कृपा) रखने वाला, जो करामत (चमत्कार) संभव बनाती
बे-शरिया/बा-शरियाशरिया की खुली अवहेलना करने वाले (क़लंदर आदि)/शरिया का पालन करने वाले सूफ़ी
लंगर/फ़ुतूहचिश्ती ख़ानक़ाह की खुली रसोई/बिना माँगे मिलने वाला दान, जिस पर वह चलती थी
ज़ियारत/क़व्वालीदरगाह-तीर्थयात्रा/संगीत-नृत्य जो ज़िक्र-समा से दैवी परमानंद जगाता
हिंदवी/मसनवी/दखनीजनसाधारण की भाषा/लंबी रूपक-कविता (जैसे पद्मावत)/दक्कनी उर्दू-रूपांतर काव्य
संत भाषा/उलटबाँसीनिर्गुण कवियों की खास बोली/रोज़मर्रा अर्थ उलटने वाली उक्तियाँ (कबीर)
ग्रंथ/मल्फ़ूज़ात/मक़तूबात/तज़किरासूफ़ी नियमावली/संतों की बातचीत के संकलन/गुरुओं के पत्र/संतों के जीवनी-वृत्तांत
2 भक्ति: दक्षिण से उत्तर तक
| परंपरा | क्या याद रखना है |
|---|---|
| अलवार-नयनार | तमिलनाडु, लगभग छठी सदी से; विष्णु/शिव-भक्त, तमिल स्तोत्र; जाति के पार अनुयायी; रचनाएँ वेद-समान मानी गईं (नलयिरादिव्यप्रबंधम् = “तमिल वेद”) |
| महिला भक्त | अंडाल (विष्णु की प्रेयसी), कराइक्काल अम्मइयार (चरम तप, स्वयं को राक्षसी वर्णित करती हैं) |
| संकलन | नलयिरादिव्यप्रबंधम् (अलवार, 10वीं सदी); तवरम (अप्पार-संबंदर-सुंदरार, 10वीं सदी) |
| चोल संरक्षण | चिदंबरम-तंजावुर-गंगैकोंडचोलपुरम मंदिर; परांतक प्रथम (~945) का मूर्ति-प्राण-प्रतिष्ठा अभिलेख |
| वीरशैव/लिंगायत | बासवन्ना (1106-68), कर्नाटक; जाति-अपवित्रता-पुनर्जन्म को चुनौती; दफ़न (दाह-संस्कार नहीं); वचन साहित्य |
| उत्तर भारत में देरी | चौदहवीं सदी तक कुछ नहीं; राजपूत-कालीन ब्राह्मणों की सुरक्षित स्थिति; नाथ-जोगी-सिद्ध बिना राजकीय समर्थन के वेद-प्रश्न उठाते रहे |
| कबीर | ~14वीं-15वीं सदी; निर्गुण, संत भाषा, उलटबाँसी; कबीर बीजक/ग्रंथावली/आदि ग्रंथ साहिब से पुनर्निर्मित; जन्म-धर्म अनिश्चित |
| गुरु नानक | 1469-1539, पंजाब; निराकार “रब”; शब्द-कीर्तन (साथी मरदाना, रबाब); संगत; अंगद को उत्तराधिकारी |
| मीराबाई | ~15वीं-16वीं सदी, राजस्थान; कृष्ण-भक्ति; पत्नी-माँ भूमिका नकारी; मौखिक रूप से प्रसारित भजन |
| शंकरदेव | असम, 15वीं सदी अंत; भागवती धर्म, सत्संग/नाम कीर्तन, सत्र/नाम घर, कीर्तन-घोषा |
3 इस्लाम और सूफ़ीवाद: एक नज़र में
| विषय | क्या याद रखना है |
|---|---|
| इस्लाम का आगमन | अरब व्यापारी सदियों पहले से; 711 में मुहम्मद बिन क़ासिम की सिंध-विजय; बाद में दिल्ली सल्तनत, दक्कन सल्तनतें, मुग़ल |
| ज़िम्मी/जज़िया/पाँच स्तंभ | ज़िम्मी = संरक्षित ग़ैर-मुस्लिम, जज़िया कर देता; पाँच स्तंभ = शहादा, नमाज़/सलात, ज़कात, सौम, हज |
| समुदायों के नाम | तुरुष्क, ताजिक, पारसीक, शक/यवन (पुराने लेबल), म्लेच्छ (सबसे व्यापक, हेय शब्द) |
| खोजा/जीनन | इस्माइली (शिया) शाखा; जीनन (भक्ति-गीत) से विचार-प्रसार; बाद में खोजकी लिपि में दर्ज |
| ख़ानक़ाह संगठन | शेख़/पीर-मुर्शीद नेतृत्व, मुरीद (शिष्य), ख़लीफ़ा (उत्तराधिकारी); दीक्षा में शपथ, थिगली-वस्त्र, सिर-मुँडन |
| बे-शरिया बनाम बा-शरिया | क़लंदर-मदारी-मलंग-हैदरी (शरिया-विरोधी) बनाम चिश्ती-सुहरावर्दी-नक़्शबंदी (शरिया-पालक) |
| चिश्ती: प्रमुख शेख़ और दरगाह | मुइनुद्दीन (अजमेर, म.1235); क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी (दिल्ली, म.1235); फ़रीदुद्दीन गंज-ए-शकर (अजोधन, म.1265); निज़ामुद्दीन औलिया (दिल्ली, म.1325); नसीरुद्दीन चिराग़-ए-दहली (दिल्ली, म.1356) |
| चिश्ती जीवन | जमाअत खाना, लंगर (फ़ुतूह पर चलता), ज़ियारत, क़व्वाली (क़ौल की शुरुआत अमीर ख़ुसरो ने की) |
| सूफ़ी-राज्य संबंध | दान स्वीकार पर संचय नहीं; औक़ाफ़/इनाम; सुल्तान-उल-मशाइख़ (निज़ामुद्दीन की उपाधि); फ़तेहपुर सीकरी में शेख़ सलीम चिश्ती की दरगाह |
| धार्मिक-इतिहास स्रोत | ग्रंथ (कश्फ़-उल-महजुब), मल्फ़ूज़ात (फ़वाइद-उल-फ़ुआद), मक़तूबात (मक़तूबात-ए-इमाम रब्बानी), तज़किरा (सियर-उल-औलिया) |
4 कौन कौन है
| नाम | किसलिए याद रखें |
|---|---|
| रॉबर्ट रेडफ़ील्ड | समाजशास्त्री; “महान” और “लघु” परंपरा शब्दों के प्रणेता |
| बासवन्ना | 1106-68; कलाचुरी दरबार में ब्राह्मण मंत्री; वीरशैव/लिंगायत आंदोलन के नेता |
| तोंदराडिप्पोडि, अप्पार | क्रमशः ब्राह्मण अलवार और नयनार; जाति-निंदा वाले पद रचे (स्रोत 1-2) |
| अंडाल, कराइक्काल अम्मइयार | प्रमुख महिला भक्त, तमिलनाडु |
| निज़ामुद्दीन औलिया | दिल्ली के प्रसिद्धतम चिश्ती शेख़ (म.1325); शिष्यों ने “सुल्तान-उल-मशाइख़” कहा; अमीर हसन सिज्ज़ी व अमीर ख़ुसरो के गुरु |
| अमीर ख़ुसरो | 1253-1325; कवि-संगीतकार; क़ौल का प्रचलन शुरू किया |
| ख़्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती | अजमेर दरगाह, “ग़रीब नवाज़”; अकबर 1580 तक 14 बार वहाँ गए |
| अबुल हसन अल हुजविरी | 1039 में बंदी बनाकर लाए गए, लाहौर में बसे; कश्फ़-उल-महजुब रचा; “दाता गंज बख़्श” |
| कबीर | ~14वीं-15वीं सदी; निर्गुण संत; रामानंद-संबंध विवादित |
| बाबा गुरु नानक | 1469-1539; सिख धर्म के प्रवर्तक; निराकार “रब”, शब्द, संगत |
| गुरु अर्जन, गुरु गोबिंद सिंह | पाँचवें गुरु (आदि ग्रंथ साहिब संकलित); दसवें गुरु (गुरु ग्रंथ साहिब + ख़ालसा पंथ) |
| मीराबाई | मारवाड़-मेवाड़ राजपूत राजकुमारी; कृष्ण-भक्त; गुरु रैदास बताए जाते हैं |
| शंकरदेव | असमिया वैष्णव धर्म के प्रवर्तक |
| मलिक मुहम्मद जायसी | पद्मावत के रचयिता (चित्तौड़ की पद्मिनी-रतनसेन कथा) |
| दरगाह क़ुली ख़ान, जहाँआरा | क्रमशः 18वीं सदी के दक्कनी आगंतुक (नसीरुद्दीन चिराग़-ए-दहली पर) और शाहजहाँ की पुत्री (1643 की अजमेर-यात्रा वृत्तांत) |
5 स्रोतों को पढ़ना: सूफ़ी परंपरा के ग्रंथ
| स्रोत का प्रकार | क्या है | उदाहरण | पढ़ते समय ध्यान रखें |
|---|---|---|---|
| प्रबंध पुस्तिका | सूफ़ी विचारों और आचारों पर ग्रंथ | अली बिन उस्मान हुजविरी (मृत्यु 1071) की कश्फ-उल-महजुब | एक लेखक की अपनी समझ; बताती है कि भारत के बाहर की परंपराओं ने भारत में सूफ़ी चिंतन को कैसे प्रभावित किया |
| मुलफुज़ात | सूफ़ी संतों की बातचीत का संग्रह | शेख निज़ामुद्दीन औलिया की बातचीत पर आधारित फवाइद-अल-फुआद | संकलन का उद्देश्य मुख्यतः उपदेशात्मक था |
| मक्तुबात | शेखों के अपने अनुयायियों और सहयोगियों को लिखे पत्रों का संकलन | शेख अहमद सरहिंदी के मक्तुबात-ए-इमाम रब्बानी | एक शेख का अपने ख़ास पाठकों के लिए लिखा दृष्टिकोण |
| तज़किरा | सूफ़ी संतों की जीवनियों का स्मरण | मीर खुर्द किरमानी का सियार-उल-औलिया | लेखक अपने सिलसिले की प्रधानता और आध्यात्मिक वंशावली की महिमा दिखाना चाहते थे; कई वर्णन अद्भुत और अविश्वसनीय हैं |
मौखिक परंपरा: कबीर और मीराबाई की रचनाएँ पहले गाई और याद रखी गईं, और उनके बहुत बाद लिखी गईं; इसलिए इतिहासकार निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि कौन-सी रचना सचमुच उनकी है। संत-चरित्र: इन्हें शब्दशः तथ्य नहीं, बल्कि यह समझने के लिए पढ़िए कि भक्त किस बात को लिखने योग्य मानते थे।
6 समय-रेखा: प्रमुख धार्मिक शिक्षक
लगभग 500-800अप्पार, संबंदर, सुंदरमूर्ति (तमिलनाडु)
लगभग 800-900नम्मालवार, मणिक्कवाचकर, अंडाल, तोंदराडिप्पोडि (तमिलनाडु)
लगभग 1000-1100अल हुजविरी/दाता गंज बख़्श (पंजाब); रामानुजाचार्य (तमिलनाडु)
लगभग 1100-1200बासवन्ना (कर्नाटक)
लगभग 1200-1300ज्ञानदेव, मुक्ताबाई (महाराष्ट्र); ख़्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (राजस्थान); फ़रीदुद्दीन गंज-ए-शकर, बहाउद्दीन ज़करिया (पंजाब); क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी (दिल्ली)
लगभग 1300-1400लाल देद (कश्मीर); निज़ामुद्दीन औलिया (दिल्ली); रामानंद (उत्तर प्रदेश); चोखामेला (महाराष्ट्र)
लगभग 1400-1500कबीर, रैदास, सूरदास (उत्तर प्रदेश); बाबा गुरु नानक (पंजाब); शंकरदेव (असम); तुकाराम (महाराष्ट्र)
लगभग 1500-1600श्री चैतन्य (बंगाल); मीराबाई (राजस्थान); मलिक मुहम्मद जायसी, तुलसीदास (उत्तर प्रदेश)
लगभग 1600-1700शेख़ अहमद सरहिंदी (हरियाणा); मियाँ मीर (पंजाब)
फटाफट रिवीज़न : परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें
- “हिंदू” धर्म इस काल में समन्वय से बना: ब्राह्मणीय विचार बाहर फैले, स्थानीय पंथ (जगन्नाथ, देवी-पत्थर) भीतर आत्मसात हुए, पर वास्तविक संघर्ष भी बना रहा
- अलवार-नयनार (~छठी सदी से) ने जाति के पार भक्ति फैलाई, बाद में चोलों से भारी संरक्षण पाया; बासवन्ना के लिंगायतों ने जाति-अपवित्रता-पुनर्जन्म को सीधे नकारा और दफ़नाने की प्रथा अपनाई
- उत्तर भारतीय भक्ति चौदहवीं सदी तक पीछे रही; इस्लाम शासकों (711 से सिंध में) और सामान्य धर्म-परिवर्तन दोनों से आया, ज़िम्मी/जज़िया/म्लेच्छ जैसे शब्द एक लचीली, विकसित होती शब्दावली दिखाते हैं
- सूफ़ी संगठन: शेख़/पीर के नेतृत्व में ख़ानक़ाह, सिलसिला आध्यात्मिक श्रृंखला, मृत्यु के बाद दरगाह-उर्स; चिश्ती सबसे अधिक स्थानीय रूप से अनुकूलित सिलसिला था (समा, हिंदवी, क्षेत्रीय काव्य)
- सूफ़ियों और सुल्तानों को एक-दूसरे की ज़रूरत थी: सूफ़ियों की लोकप्रिय सत्ता ने शासकों को वैधता दी जो ग़ैर-मुस्लिम बहुसंख्या पर शरिया आसानी से लागू नहीं कर सकते थे
- कबीर, गुरु नानक और मीराबाई सभी निर्गुण/व्यक्तिगत भक्ति के प्रचारक थे जो हिंदू-मुस्लिम और जाति की सीमाओं को काटते थे; तीनों मुख्यतः मौखिक रूप से प्रसारित, बाद में संकलित ग्रंथों से बचे हैं
- इस इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए कई प्रकार के स्रोत चाहिए, ग्रंथ, मल्फ़ूज़ात, मक़तूबात, तज़किरा, हर एक को विधा, लेखक और पाठक-वर्ग पर ध्यान देते हुए पढ़ना ज़रूरी है
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री