आख़िरी वक़्त की रिवीज़न के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, ज़रूरी तथ्य, तारीख़ें और तालिकाएँ। पूरी व्याख्या वाले विस्तृत नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 पूरा अध्याय एक फ़्रेम में
एक साम्राज्य की राजधानी: विजयनगर (लगभग चौदहवीं-सोलहवीं सदी)
खोजमैकेन्जी का 1800 सर्वेक्षण, यात्री-वृत्तांत, अभिलेख, 1980 के दशक का ग्रिड-मानचित्रण
राजनीतिसंगम-सुलुव-तुलुव-अराविदु, कृष्णदेव राय, अमर-नायक, 1565 तालीकोटा
नगरराजकीय-धार्मिक और शहरी केंद्र, जल-प्रणाली, दुर्गीकरण, मंदिर-स्थापत्य
| स्रोत |
क्या बताता है |
| राजकीय/नायक अभिलेख |
मंदिर-दान, अमर-नायकों की गतिविधियाँ |
| यात्री-वृत्तांत |
निकोलो दे कॉन्ती, अब्दुर रज़्ज़ाक, अफ़ानासी निकितिन, पेस, नूनिज़, बरबोसा |
| साहित्य |
कृष्णदेव राय का अमुक्तमल्यद (तेलुगु) |
| मानचित्रण सर्वेक्षण |
मैकेन्जी (1800) से 1980 के दशक की 25-वर्ग ग्रिड परियोजना तक |
2 याद रखने लायक़ आँकड़े
1336विजयनगर साम्राज्य की स्थापना
1565राक्षसी-तांगड़ी (तालीकोटा) में विजयनगर की हार
60+राजकीय केंद्र में सम्मिलित मन्दिर
| आँकड़ा |
किस बात का |
| 7 पंक्तियाँ |
अब्दुर रज़्ज़ाक द्वारा वर्णित दुर्ग की पंक्तियाँ |
| 11,000 वर्ग फीट, 40 फीट |
महानवमी डिब्बा का आधार व ऊँचाई |
| 15-20 हज़ार |
पेस के अनुसार तालाब बनाने में लगे मज़दूर |
| ~30 |
राजकीय केंद्र में राजमहल के रूप में पहचाने गए परिसर |
| 25 वर्ग |
1980 के दशक की मानचित्रण परियोजना में स्थल का विभाजन |
3 तारीख़ें एक नज़र में
| तारीख़ |
क्या हुआ |
| 1336 |
हरिहर व बुक्का द्वारा विजयनगर साम्राज्य की स्थापना |
| 1485 तक |
संगम राजवंश का शासन |
| 1485-1503 |
सुलुव राजवंश |
| 1498 |
पुर्तगालियों का पश्चिमी तट पर आगमन, घोड़ा-व्यापार में प्रवेश |
| 1503 से |
तुलुव राजवंश की शुरुआत |
| 1509-29 |
कृष्णदेव राय का शासनकाल, साम्राज्य का चरम |
| 1512 |
कृष्णदेव राय द्वारा रायचूर दोआब लेना |
| 1520 |
बीजापुर पर विजय |
| 1542 |
अराविदु राजवंश केंद्र में |
| 1565 |
राक्षसी-तांगड़ी (तालीकोटा) की लड़ाई, नगर की लूट |
| 1800 |
कॉलिन मैकेन्जी का पहला सर्वेक्षण |
| 1856 |
अलेक्ज़ेंडर ग्रीनलॉ की पहली विस्तृत तस्वीरें |
| 1876 |
जे.एफ़. फ़्लीट का मंदिर-अभिलेख दस्तावेज़ीकरण |
| 1902 |
जॉन मार्शल के अधीन औपचारिक संरक्षण |
| 1976 |
हम्पी को राष्ट्रीय महत्व का स्थल मान्यता |
| 1986 |
हम्पी यूनेस्को विश्व पुरातत्व स्थल घोषित |
4 सभी परिभाषाएँ एक जगह
| शब्द |
अर्थ |
| अमर-नायक प्रणाली |
इसके कई तत्त्व संभवतः दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए थे; अमर-नायकों को राय की ओर से क्षेत्र पर शासन का अधिकार |
| राय |
विजयनगर के शासकों की उपाधि |
| अश्वपति / नरपति / गजपति |
घोड़ों के स्वामी (दक्कन सुल्तान) / मनुष्यों के स्वामी (राय) / हाथियों के स्वामी (उड़ीसा शासक) |
| हिन्दू सूरतराणा |
अरबी ‘सुल्तान’ का संस्कृतकृत रूप, शाब्दिक अर्थ ‘हिंदू सुल्तान’ |
| कुदिरई चेट्टी |
स्थानीय घोड़ा-व्यापारी |
| राय गोपुरम |
राजकीय प्रवेश-द्वार, अक्सर केंद्रीय तीर्थ के शिखर को बौना बना देने वाला |
| मंडप |
मंदिर का विस्तृत स्तंभ-कक्ष |
| महानवमी |
‘महान नौवाँ दिन’; दस-दिवसीय शरद उत्सव, दशहरा/दुर्गा पूजा/नवरात्री के समान |
5 विरुपाक्ष बनाम विट्ठल मंदिर
|
विरुपाक्ष मंदिर |
विट्ठल मंदिर |
| देवता |
विरुपाक्ष (शिव का रूप), साम्राज्य का संरक्षक देवता |
विट्ठल, सामान्यतः महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विष्णु का रूप |
| आयु |
मूल तीर्थ नौवीं-दसवीं सदी का |
इस देवता की पूजा विजयनगर शासकों ने कर्नाटक में आरंभ की |
| विशेष अभिलक्षण |
कृष्णदेव राय का राज्यारोहण-हॉल, पूर्वी गोपुरम |
पत्थर के रथ के आकार का तीर्थ, गोपुरम से निकलती रथ-गली |
| क्या दर्शाता है |
स्थानीय संरक्षक-पंथ का साम्राज्यिक विस्तार |
क्षेत्रीय परंपराओं का जान-बूझकर साम्राज्यिक संस्कृति में समावेश |
6 नगर के तीन क्षेत्र
| क्षेत्र |
प्रमुख अभिलक्षण |
| धार्मिक केंद्र |
विरुपाक्ष मंदिर, पम्पादेवी के पूजास्थल, विजयनगर-पूर्व जैन मंदिर |
| राजकीय केंद्र |
60+ मंदिर, ~30 राजमहल-परिसर, महानवमी डिब्बा, कमल महल, हज़ार राम मंदिर |
| शहरी केंद्र |
बाज़ार, मुस्लिम व्यापारी-मोहल्ला, सामान्य आवास (लगभग कुछ नहीं बचा) |
7 फटाफट पुनरावृत्ति · परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें
विजयनगर, नगर और साम्राज्य दोनों के लिए नाम, हरिहर-बुक्का ने 1336 में स्थापित किया; समकालीन लोग इसे कर्नाटक साम्राज्यमु कहते थे। चार राजवंशों ने बारी-बारी शासन किया: संगम, सुलुव, तुलुव (कृष्णदेव राय का चरम, 1509-29, जिसने रायचूर दोआब, उड़ीसा और बीजापुर पर विजय पाई), और अराविदु (1542 से); तालीकोटा (1565) के बाद अराविदु ने पेनुकोण्डा और बाद में चन्द्रगिरी से शासन किया। राक्षसी-तांगड़ी/तालीकोटा (1565) रामराय की अपनी बदलती गठबंधन-नीति से हुआ, न कि किसी स्थायी हिंदू-मुस्लिम धार्मिक युद्ध-स्थिति से; कृष्णदेव राय ने स्वयं सल्तनतों के भीतर दावेदारों का समर्थन किया था। अमर-नायक प्रणाली, जिसके कई तत्त्व संभवतः दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए थे, ने सैन्य सेवा और राजस्व संग्रह को जोड़ा; इसका स्वतंत्र नायक-राज्यों में टूटना साम्राज्य के केंद्र को कमज़ोर करता गया। नगर ने अपनी दीवारों (अब्दुर रज़्ज़ाक की सात दुर्ग-पंक्तियों) के भीतर कृषि-भूमि को दुर्गीकृत किया, महँगा पर घेराबंदी-रोधी विकल्प। तीन क्षेत्र: धार्मिक केंद्र (विरुपाक्ष, पम्पादेवी), राजकीय केंद्र (60+ मंदिर, महानवमी डिब्बा, कमल महल), शहरी केंद्र (बाज़ार, अधिकतर खोया हुआ)। राय गोपुरम साम्राज्यिक पैमाने तक बढ़े; महानवमी डिब्बा का सटीक अनुष्ठानिक प्रयोग आज भी वास्तव में विवादित है। पुनर्निर्माण में अभिलेख, यात्री-वृत्तांत (पेस, नूनिज़, अब्दुर रज़्ज़ाक, निकितिन) और 1980 के दशक से एक गहन 25-वर्ग ग्रिड मानचित्रण सर्वेक्षण प्रयुक्त हुए, और 1986 में हम्पी को यूनेस्को विश्व पुरातत्व स्थल घोषित किया गया। इमारतें रक्षा, तकनीक और प्रतीकवाद के बारे में प्रश्नों का उत्तर देती हैं, पर सामान्य लोगों के जीवंत अनुभव या नगर बनाने वाले श्रमिकों के बारे में नहीं।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री