Class 12 Psychology Chapter 2 Self and Personality Important Questions with Answers in Hindi

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. ‘आत्म-सम्मान’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: आत्म-सम्मान व्यक्ति का अपने ही मूल्य या मान के बारे में किया गया मूल्य-निर्णय है, चाहे व्यक्ति स्वयं को उच्च मूल्य का देखे या निम्न मूल्य का।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. आत्म-सक्षमता को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: आत्म-सक्षमता व्यक्ति का यह विश्वास है कि किसी विशेष स्थिति में सफल होने के लिए आवश्यक क्षमता या व्यवहार उसमें है, यह बंदूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत पर आधारित है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. ‘विशेषक’ (Trait) क्या है?

उत्तर: विशेषक एक अपेक्षाकृत स्थायी गुण है जिस पर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. फ्रायड के अनुसार व्यक्तित्व के तीन संरचनात्मक तत्वों के नाम बताइए।

उत्तर: इड, अहं और पराहम्।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. फ्रायड के सिद्धांत में ‘स्थिरण’ (fixation) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: स्थिरण वह स्थिति है जब किसी अवस्था में बच्चे का विकास सफलतापूर्वक हल न होने के कारण वहीं रुक जाता है।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. आत्म-प्रतिवेदन माप की कोई दो समस्याएँ बताइए।

उत्तर: सामाजिक वांछनीयता (कथनों को सामाजिक रूप से स्वीकार्य ढंग से हामी भरना) और अनुमनन (विषयवस्तु से निरपेक्ष होकर सहमत होना)।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. व्यक्तिगत अनन्यता और सामाजिक अनन्यता में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: व्यक्तिगत अनन्यता उन गुणों को कहते हैं जो व्यक्ति को दूसरों से भिन्न बनाते हैं, जैसे नाम, गुण या क्षमताएँ। सामाजिक अनन्यता व्यक्ति को किसी सामाजिक या सांस्कृतिक समूह से जोड़ने वाले पक्षों को कहते हैं, जैसे धर्म या क्षेत्र।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. आत्म के आत्मगत रूप और वस्तुगत रूप में क्या अंतर है?

उत्तर: आत्मगत रूप में आत्म कुछ करता है, स्वयं को जानने की प्रक्रिया में सक्रिय रहता है (जैसे ‘मैं नर्तक हूँ’)। वस्तुगत रूप में आत्म पर कुछ किया जाता है, वह प्रेक्षित होता है (जैसे ‘मैं ऐसा हूँ जिसे सरलता से आहत किया जा सकता है’)। आत्म की यह द्वैध स्थिति है।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. अध्याय में बताई गई आत्म-नियमन की तीन तकनीकें कौन-सी हैं?

उत्तर: (1) अपने व्यवहार का प्रेक्षण, (2) आत्म-अनुदेश, स्वयं को व्यवहार करने का निर्देश देना, और (3) आत्म-प्रबलन, सुखद परिणाम वाले व्यवहार को पुरस्कृत करना।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. व्यक्तित्व की चार विशेषताएँ बताइए जो अध्याय में दी गई हैं।

उत्तर: (1) शारीरिक और मनोवैज्ञानिक, दोनों घटक होते हैं। (2) व्यवहार में इसकी अभिव्यक्ति काफी विशिष्ट होती है। (3) इसकी मुख्य विशेषताएँ समय के साथ आसानी से नहीं बदलतीं। (4) यह गतिशील है, कुछ विशेषताएँ आंतरिक या बाह्य माँगों के कारण बदल सकती हैं।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. किताब के उदाहरणों सहित प्रमुख विशेषक और केंद्रीय विशेषक में अंतर बताइए।

उत्तर: प्रमुख विशेषक अत्यधिक सामान्यीकृत प्रवृत्तियाँ हैं जिनके इर्द-गिर्द व्यक्ति का पूरा जीवन घूमता है, जैसे गांधी की अहिंसा, हिटलर का नाज़ीवाद। केंद्रीय विशेषक कम व्यापक पर फिर भी सामान्यीकृत होते हैं, जैसे स्फूर्त, निष्कपट, मेहनती (किताब के उदाहरण), जो शंसापत्रों या नौकरी की संस्तुतियों में लिखे जाते हैं।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. कैटेल के सिद्धांत में ‘मूल विशेषक’ और ‘पृष्ठ विशेषक’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: मूल विशेषक कैटेल द्वारा कारक विश्लेषण से पहचाने गए 16 स्थिर, मूल (प्राथमिक) विशेषक हैं, जो व्यक्तित्व की आधारभूत इकाइयाँ हैं। पृष्ठ विशेषक मूल विशेषकों की अंतःक्रिया से उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. ‘सुखेप्सा-सिद्धांत’ और ‘वास्तविकता-सिद्धांत’ क्या हैं?

उत्तर: सुखेप्सा-सिद्धांत (इड द्वारा पालित) यह मानता है कि व्यक्ति सुख की खोज करता है और पीड़ा से बचता है, तात्कालिक संतुष्टि माँगता है। वास्तविकता-सिद्धांत (अहं द्वारा पालित) इड को वास्तविकता के अनुरूप, अधिक उपयुक्त तरीकों की ओर निर्देशित करता है।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. इडिपस मनोग्रंथि और इलेक्ट्रा मनोग्रंथि में अंतर बताइए।

उत्तर: इडिपस मनोग्रंथि (बालकों में) माँ के प्रति प्रेम, पिता के प्रति शत्रुता और पिता से दंड या शिश्नलोप के भय से जुड़ी है। इलेक्ट्रा मनोग्रंथि (बालिकाओं में) पिता के प्रति स्नेह और यह अवास्तविक जानने पर माँ से तादात्मीकरण से जुड़ी है। दोनों का समाधान समान-लिंग वाले माता-पिता से तादात्मीकरण द्वारा होता है।

प्रश्न 9 (2 अंक)

प्र. व्यक्तित्व के पंच-कारक मॉडल (बृहत् पाँच कारक) के पाँच कारकों के नाम लिखिए।

उत्तर: पॉल कॉस्टा और रॉबर्ट मैक्रे के पाँच कारक (बॉक्स 2.2): (1) अनुभवों के लिए खुलापन (कल्पनाशील, जिज्ञासु, नए विचारों के लिए खुले; विपरीत में अनम्यता); (2) बहिर्मुखता (सामाजिक सक्रियता, आग्रहिता, बातूनापन; विपरीत में शर्मीले और संकोची); (3) सहमतिशीलता (सहायता, सहयोग, मैत्रीपूर्ण व्यवहार, देखभाल; विपरीत में आक्रामक और आत्म-केंद्रित); (4) तंत्रिकाताप (सांवेगिक रूप से अस्थिर, दुश्चिंतित, परेशान, चिड़चिड़े; विपरीत में सुसमायोजित); (5) अंतर्विवेकशीलता (उपलब्धि-उन्मुखता, निर्भरता, उत्तरदायित्व, कर्मठता, आत्म-नियंत्रण; विपरीत में आवेग)।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. अध्याय में बताए गए आत्म के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: अध्याय में आत्म के प्रकार व्यक्तिगत आत्म और सामाजिक आत्म (जिसे पारिवारिक या संबंधात्मक आत्म भी कहते हैं) हैं; इनका आरंभ जैविक आत्म से होता है। (1) जैविक आत्म, आत्म का सबसे पहला तत्व: एक प्रतिवर्त (जैसे भूख से रोना) से शुरू होकर आवश्यकताओं की जागरूकता में बदल जाता है; जल्द ही बच्चे की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आवश्यकताओं से आत्म के अन्य घटक उभरते हैं। (2) व्यक्तिगत आत्म, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, उत्तरदायित्व, उपलब्धि और सुख-सुविधा से जुड़ा। (3) सामाजिक आत्म (पारिवारिक या संबंधात्मक आत्म भी कहलाता है), सहयोग, एकता, संबंधन, त्याग और साझेदारी पर बल देता है, दूसरों के साथ संबंध में उभरता है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. आत्म-समूह सीमा रेखा के संदर्भ में आत्म की भारतीय अवधारणा पाश्चात्य अवधारणा से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: पाश्चात्य दृष्टिकोण में आत्म और अन्य के बीच सीमा अपेक्षाकृत स्थिर है, व्यक्ति समूह के भीतर भी अपनी वैयक्तिकता बनाए रखता है, स्पष्ट द्विभाजन के साथ (आत्म-अन्य, मनुष्य-प्रकृति, आत्मनिष्ठ-वस्तुनिष्ठ; व्यक्तिवादी संस्कृतियाँ)। भारतीय दृष्टिकोण में यह सीमा परिवर्तनीय है, एक क्षण आत्म समूचे ब्रह्मांड या अन्य में विलीन हो जाता है, दूसरे ही क्षण व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर केंद्रित हो जाता है। आत्म और समूह स्पष्ट द्विभाजन के बजाय सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व में रहते हैं (सामूहिकतावादी संस्कृतियाँ)।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. व्यक्तित्व के अध्ययन के किन्हीं चार प्ररूप उपागमों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: (1) हिप्पोक्रेट्स ने शारीरिक द्रव्यों के आधार पर लोगों को उत्साही, श्लैष्मिक, कोपशील और विवादी प्रकारों में वर्गीकृत किया। (2) चरक संहिता का त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) व्यक्ति की प्रकृति निर्धारित करता है; इसके अतिरिक्त एक अलग प्ररूप-विज्ञान त्रिगुण (सत्व, रजस, तमस) पर आधारित है, जो हर व्यक्ति में विभिन्न मात्रा में मौजूद रहते हैं। (3) शेल्डन ने शारीरिक बनावट और स्वभाव को गोलाकृतिक, आयताकृतिक और लंबाकृतिक प्ररूपों में वर्गीकृत किया। (4) युंग ने लोगों को अंतर्मुखी (अकेले रहना पसंद, संघर्ष से बचना) या बहिर्मुखी (मिलनसार, सामाजिक) में वर्गीकृत किया।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. आइज़ेंक के व्यक्तित्व के आयामों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: आइज़ेंक ने प्रस्तावित किया कि व्यक्तित्व जैविक/आनुवंशिक रूप से आधारित आयामों में सिमट सकता है: (1) तंत्रिकातापिता बनाम सांवेगिक स्थिरता, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण की मात्रा; (2) बहिर्मुखता बनाम अंतर्मुखता, सामाजिक रूप से बहिर्गामी या अंतर्मुखी होने की मात्रा; (3) मनस्तापिता बनाम सामाजिकता, बाद में जोड़ा गया, इसमें उच्च अंक वाले व्यक्ति में आक्रामक, अहं-केंद्रित और समाजविरोधी होने की प्रवृत्ति पाई जाती है। इन आयामों के मापन के लिए आइज़ेंक व्यक्तित्व प्रश्नावली (EPQ) का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. अध्याय में बताई गई पाँच अहं रक्षा युक्तियों का, एक-एक उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।

उत्तर: (1) दमन, दुश्चिंता उत्पन्न करने वाले विचार अचेतन में धकेल दिए जाते हैं (‘मुझे नहीं पता मैंने ऐसा क्यों किया’)। (2) प्रक्षेपण, अपने ही गुणों को दूसरों पर आरोपित करना (आक्रामक व्यक्ति दूसरों को आक्रामक समझता है)। (3) अस्वीकरण, यथार्थ को स्वीकार करने से पूर्ण इनकार (गंभीर बीमारी से इनकार)। (4) प्रतिक्रिया निर्माण, सच्ची भावनाओं के विपरीत व्यवहार अपनाना। (5) युक्तिकरण, अतार्किक व्यवहार को तर्कसंगत दिखाना (परीक्षा में निम्नस्तरीय निष्पादन के बाद नए कलम खरीदकर सोचना कि ‘वह आगे की परीक्षा में नए कलम के साथ उच्च स्तर का निष्पादन प्रदर्शित करेगा’)।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. फ्रायड की मनोलैंगिक विकास की पाँच अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: (1) मौखिक अवस्था, मुख आनंद का केंद्र है (आहार, अंगूठा चूसना)। (2) गुदीय अवस्था (2-3 वर्ष), मल-मूत्र नियंत्रण, इड और अहं के बीच संघर्ष। (3) लैंगिक अवस्था (4-5 वर्ष), जननांगों पर बल, इडिपस/इलेक्ट्रा मनोग्रंथि, समान-लिंग वाले माता-पिता से तादात्मीकरण द्वारा हल। (4) कामप्रसुप्ति अवस्था (7 वर्ष से यौवनारंभ तक), कामेच्छाएँ सापेक्ष रूप से निष्क्रिय, ऊर्जा सामाजिक/उपलब्धि संबंधी क्रियाओं में। (5) जननांगीय अवस्था, मनोलैंगिक परिपक्वता, विपरीत लिंग से सामाजिक व यौन रूप से परिपक्व तरीके से संबंध।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. बिरहोर के उदाहरण के साथ व्यक्तित्व के सांस्कृतिक उपागम की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: सांस्कृतिक उपागम व्यक्तित्व को किसी समूह की पारिस्थितिकी और संस्कृति के अनुकूलन के रूप में देखता है। किसी समूह की ‘आर्थिक अनुरक्षण प्रणाली’ (जलवायु, भू-भाग और भोजन की उपलब्धता से निर्धारित) आर्थिक क्रियाओं, बस्तियों के प्रतिरूप, सामाजिक संरचना और बाल-पालन को निर्धारित करती है। बिरहोर, झारखंड की एक घुमंतू आखेट-संग्रहण जनजाति, बच्चों को प्रारंभ से ही सीखने की पर्याप्त स्वतंत्रता देती है और उन्हें स्वतंत्र, स्वायत्त और उपलब्धि-उन्मुख बनने के लिए सामाजीकृत करती है, ठीक वे गुण जिनकी उनके जीवन-यापन के तरीके को आवश्यकता है, इसके विपरीत कृषि प्रधान समाज बच्चों को आज्ञाकारी, पोषणशील और उत्तरदायी बनने के लिए सामाजीकृत करते हैं।

प्रश्न 8 (4 अंक)

प्र. रोजर्स की ‘पूर्ण-प्रकार्यशील व्यक्ति’ की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: रोजर्स का सर्वाधिक महत्वपूर्ण विचार पूर्णतः प्रकार्यशील व्यक्ति का है: वह व्यक्ति जिसके वास्तविक आत्म और आदर्श आत्म के बीच समरूपता होती है। रोजर्स का मानना था कि संतुष्टि व्यक्तित्व विकास की अभिप्रेरक शक्ति है, लोग अपनी क्षमताओं, संभावनाओं और प्रतिभाओं को पूर्ण रूप से अभिव्यक्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने दो मान्यताएँ प्रस्तुत कीं, व्यवहार लक्ष्य-निर्देशित और सार्थक है, और लोग (जो जन्मजात अच्छे हैं) सदैव अनुकूली तथा आत्मसिद्धि वाले व्यवहार का चयन करेंगे। उन्होंने वास्तविक आत्म और आदर्श आत्म की अवधारणा प्रस्तुत की, दोनों में समरूपता होने पर व्यक्ति सामान्यतया प्रसन्न रहता है और विसंगति से प्रायः अप्रसन्नता और असंतोष उत्पन्न होते हैं। अशर्त सकारात्मक आदर, सेवार्थी-केंद्रित चिकित्सा के माध्यम से दी गई, व्यक्ति के आत्म-संप्रत्यय और आत्म-सम्मान के विकास में सहायक होती है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. फ्रायड द्वारा प्रस्तावित मनोगतिक उपागम की विवेचना कीजिए, जिसमें चेतना के तीन स्तर और व्यक्तित्व की संरचना शामिल हो।

उत्तर: फ्रायड का मनोगतिक सिद्धांत मानव मन को चेतना के तीन स्तरों में देखता है, चेतन (जिन विचारों/क्रियाओं के प्रति हम अभी जागरूक हैं), पूर्वचेतना (जिसके प्रति हम ध्यान देने पर जागरूक होते हैं), और अचेतन (मूलप्रवृत्तिक इच्छाओं और दमित, अधिकांशतः कामिक, इच्छाओं का भंडार, जिसके प्रति लोग जागरूक नहीं होते)। व्यक्तित्व के तीन प्रमुख संरचनात्मक तत्व, इड, अहं और पराहम्, संप्रत्यय हैं, वास्तविक भौतिक संरचनाएँ नहीं, इनका अनुमान लोगों के व्यवहार के तरीकों से लगाया जा सकता है। इड सुखेप्सा-सिद्धांत पर कार्य करता है, तात्कालिक संतुष्टि की माँग करता है और नैतिकता की परवाह नहीं करता। अहं, जो इड से उत्पन्न होता है, वास्तविकता-सिद्धांत पर कार्य करता है, इड की माँगों और वास्तविकता की सीमाओं के बीच समन्वय स्थापित करता है। पराहम् व्यक्तित्व की नैतिक शाखा है, समाजीकरण के माध्यम से पैतृक प्राधिकार को आंतरिक करता है, और इड व अहं को बताता है कि कोई संतुष्टि नैतिक है या नहीं। फ्रायड का मानना था कि इड जीवन-प्रवृत्ति (कामशक्ति/लिबिडो) और मृत्यु मूलप्रवृत्ति से ऊर्जा पाता है, जिसमें फ्रायड ने पहली पर अधिक ध्यान दिया। फ्रायड के अनुसार मनुष्य के अधिकांश व्यवहार दुश्चिंता के प्रति उपयुक्त समायोजन अथवा पलायन को प्रतिबिंबित करते हैं, और अहं दुश्चिंता का किस ढंग से सामना करता है, इससे निर्धारित होता है कि लोग किस प्रकार व्यवहार करेंगे।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. व्यक्तित्व के उत्तर-फ्रायडवादी (नव-विश्लेषणात्मक) उपागमों की विवेचना कीजिए, किन्हीं चार सिद्धांतकारों को शामिल करते हुए।

उत्तर: उत्तर-फ्रायडवादी सिद्धांतकारों ने आरंभ में फ्रायड के साथ काम किया, फिर अपने-अपने सिद्धांत विकसित किए, काम-भावना और आक्रामकता को कम महत्व, और अहं तथा सामाजिक/तार्किक शक्तियों को अधिक महत्व देते हुए। कार्ल युंग के विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान ने व्यक्तित्व को व्यक्ति के भीतर की प्रतिस्पर्धी शक्तियों के रूप में देखा, और एक सामूहिक अचेतन प्रस्तावित किया जिसमें वंशागत आद्य प्ररूप (जैसे ईश्वर या धरती माता की छवि) होते हैं, जो मानव जाति के मिथकों और कलाओं में पाए जाते हैं। कैरन हार्नी ने आशावादी दृष्टिकोण अपनाया और फ्रायड द्वारा स्त्रियों को हीन मानने की धारणा को चुनौती दी, उनका मत था कि बचपन के अशांत माता-पिता-बालक संबंध (उदासीन या अनिश्चित पालन-पोषण) मूल दुश्चिंता और असंतोष उत्पन्न करते हैं। अल्फ्रेड एडलर के व्यष्टि मनोविज्ञान ने माना कि मानव व्यवहार उद्देश्यपूर्ण और लक्ष्य-निर्देशित है, और हर व्यक्ति बचपन से हीनता मनोग्रंथि रखता है जिसे दूर करना व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। एरिक फ्रॉम ने सामाजिक (जैविक नहीं) अभिविन्यास अपनाया, मनुष्य को मूलतः सामाजिक प्राणी माना जिनके चरित्र विशेषक दूसरों के साथ अनुभवों और स्वतंत्रता, न्याय व सत्य की खोज से विकसित होते हैं। एरिक एरिक्सन ने तार्किक, सचेत अहं प्रक्रियाओं पर बल दिया, विकास को आजीवन प्रक्रिया माना जिसमें अहं-अनन्यता केंद्रीय है, और वे किशोरावस्था के अनन्यता संकट की अवधारणा के लिए जाने जाते हैं।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागमों, प्ररूप, विशेषक, मनोगतिक, व्यवहारवादी, सांस्कृतिक और मानवतावादी की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।

उत्तर: प्ररूप उपागम व्यक्तियों को समान व्यवहार-प्रतिरूपों के आधार पर व्यापक श्रेणियों में रखते हैं (जैसे हिप्पोक्रेट्स के यूमरल, शेल्डन के शारीरिक प्ररूप, युंग का अंतर्मुखी/बहिर्मुखी वर्गीकरण)। विशेषक उपागम विशिष्ट, अपेक्षाकृत स्थिर गुणों की पहचान करते हैं जिन पर लोग भिन्न होते हैं (ऑलपोर्ट के प्रमुख/केंद्रीय/गौण विशेषक, कैटेल का 16PF, आइज़ेंक के आयाम, बृहत् पाँच कारक)। मनोगतिक उपागम (फ्रायड) व्यक्तित्व को इड, अहं और पराहम् के बीच अचेतन संघर्ष के रूप में समझाता है, जो मनोलैंगिक अवस्थाओं के माध्यम से विकसित होता है। व्यवहारवादी उपागम व्यक्तित्व को पर्यावरण के प्रति व्यक्ति की सीखी हुई अनुक्रिया मानता है, बिना आंतरिक गतिकी के संदर्भ के (पावलोव, स्किनर, बंदूरा)। सांस्कृतिक उपागम व्यक्तित्व को किसी समूह की पारिस्थितिकी और संस्कृति के अनुकूलन के रूप में देखता है (जैसे बिरहोर का उदाहरण)। मानवतावादी उपागम (रोजर्स, मैस्लो) व्यक्तियों के व्यक्तिपरक अनुभव, आत्म-संप्रत्यय और आत्मसिद्धि की ओर प्रवृत्ति पर केंद्रित है।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. व्यक्तित्व-मूल्यांकन की किन्हीं पाँच विधियों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: (1) आत्म-प्रतिवेदन माप, संरचित परीक्षण जैसे MMPI (हाथवे एवं मैकिन्ले द्वारा विकसित, 567 सही/ग़लत कथन, 10 उप-मापनी), 16PF (कैटेल) और EPQ (आइज़ेंक), जहाँ व्यक्ति सीधे अपनी भावनाओं की रिपोर्ट करता है। (2) प्रक्षेपी तकनीकें, असंरचित उद्दीपक जो अचेतन भावनाओं को उजागर करने देते हैं, जैसे रोर्शा स्याही-धब्बा परीक्षण (10 धब्बे) और TAT (30 चित्र कार्ड + 1 खाली, मॉर्गन एवं मरे)। (3) साक्षात्कार, संरचित (निश्चित प्रश्न/प्रक्रिया) या असंरचित (खुला प्रभाव-निर्माण)। (4) व्यवहारपरक निर्धारण, व्यक्ति को भली-भाँति जानने वाले लोगों द्वारा श्रेणीकरण, परिवेश प्रभाव से सावधान रहते हुए। (5) प्रेक्षण, नाम निर्देशन (सहकर्मी-मूल्यांकन) और स्थितिपरक परीक्षण (जैसे स्थितिपरक दबाव परीक्षण) व्यवहार-विश्लेषण की शेष विधियाँ पूरी करते हैं।

प्रश्न 5 (6 अंक)

प्र. अरिहन्त एक गायक बनना चाहता है, इसके बावजूद कि वह चिकित्सकों के एक परिवार से संबंध रखता है। यद्यपि उसके परिवार के सदस्य दावा करते हैं कि वे उसको प्रेम करते हैं किंतु वे उसकी जीवनवृत्ति को दृढ़ता से अस्वीकार कर देते हैं। कार्ल रोजर्स की शब्दावली का उपयोग करते हुए अरिहन्त के परिवार द्वारा प्रदर्शित अभिवृत्तियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: कार्ल रोजर्स की शब्दावली में, अरिहन्त का परिवार केवल सशर्त (शर्त पर आधारित) स्वीकृति दे रहा है, वे प्रेम का दावा तो करते हैं, पर उनकी स्वीकृति इस शर्त पर निर्भर है कि अरिहन्त अपने आदर्श आत्म की आकांक्षा (गायक बनना) त्याग कर वह करे जिसे वे स्वीकार्य मानते हैं (परिवार के पेशे, चिकित्सा को अपनाना)। यह रोजर्स द्वारा आवश्यक बताई गई अशर्त सकारात्मक आदर के ठीक विपरीत है। इससे अरिहन्त के आदर्श आत्म (गायक बनने की आकांक्षा) और उसके वास्तविक आत्म के बीच एक विसंगति उत्पन्न होती है; रोजर्स के अनुसार ऐसी विसंगति के कारण प्रायः अप्रसन्नता और असंतोष की भावनाएँ उत्पन्न होती हैं।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
रोहन बचपन में अपने पिता के बहुत करीब था, पर पाँच वर्ष की आयु में माता-पिता के तलाक के बाद, उसने किसी भी पुरुष प्राधिकार व्यक्ति, जैसे शिक्षकों और कोचों के प्रति, अपनी किशोरावस्था तक तीव्र शत्रुता दिखाना शुरू कर दिया। एक स्कूल परामर्शदाता ने, फ्रायड के ढाँचे का उपयोग करते हुए, सुझाव दिया कि रोहन शायद मनोलैंगिक विकास की किसी अवस्था से सफलतापूर्वक न गुज़रा हो।

(क) 2 अंक परामर्शदाता किस अवस्था की सबसे अधिक संभावना बता रहा है, और क्यों?
उत्तर: लैंगिक अवस्था (4-5 वर्ष) की सबसे अधिक संभावना है, क्योंकि इसी अवस्था में इडिपस मनोग्रंथि घटित होती है, और इसका समाधान सामान्यतः बालक को अपने पिता के साथ माँ के संबंध को स्वीकार करने और पिता को आदर्श मानकर तादात्मीकरण करने की आवश्यकता होती है।

(ख) 2 अंक फ्रायड की शब्दावली में, रोहन के विकास में क्या हुआ हो सकता है, और इससे बाद में जीवन में क्या हो सकता है?
उत्तर: इडिपस मनोग्रंथि के अनसुलझे रहने के कारण रोहन का लैंगिक अवस्था में स्थिरण हुआ हो सकता है; किताब के अनुसार ऐसा बालक यह मान सकता है कि पुरुष सामान्यतः आक्रामक होते हैं, और निर्भरता के रूप में महिलाओं से संबंध की इच्छा विकसित कर सकता है, वह समान लिंग के माता-पिता के प्रति आक्रामकता का अनुभव करता रह सकता है, और प्रतिगमन भी एक संभावित परिणाम है।

केस स्टडी
मीरा अपने कॉलेज की वाद-विवाद टीम में चयनित नहीं हो पाई, जिसके लिए उसने कड़ी मेहनत की थी। अपनी तैयारी को अपर्याप्त मानने के बजाय, उसने अपने मित्रों से कहा, “जज साफ़ तौर पर पक्षपाती थे और ध्यान से सुन भी नहीं रहे थे।”

(क) 2 अंक मीरा कौन-सी अहं रक्षा युक्ति प्रदर्शित कर रही है?
उत्तर: युक्तिकरण, वह अपनी असफलता को अपनी अपर्याप्त तैयारी के बजाय पक्षपाती जजों पर दोष मढ़कर अधिक स्वीकार्य और तर्कसंगत दिखाने का प्रयास कर रही है।

(ख) 2 अंक फ्रायड के अनुसार, क्या मीरा को इस रक्षा युक्ति के उपयोग के प्रति सचेत होने की संभावना है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: नहीं। फ्रायड का मानना था कि रक्षा युक्तियों का उपयोग करने वाले लोग प्रायः इससे अनजान होते हैं, युक्तिकरण, अन्य रक्षा युक्तियों की तरह, अहं का दुश्चिंता से उत्पन्न असुविधाजनक भावनाओं से निपटने का तरीका है, और यह सामान्यतः व्यक्ति की सचेत जागरूकता के बिना कार्य करता है।