अध्याय 5 चिकित्सा उपागम का त्वरित पुनरावृत्ति सार: हर परिभाषा, सारणी और सूची एक ही जगह, परीक्षा से एक रात पहले के लिए।
1मूल परिभाषाएँ
सभी परिभाषाएँ एक जगह
मनश्चिकित्सासेवार्थी और चिकित्सक के बीच ऐच्छिक संबंध, सेवार्थी की मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान करने के लिए
चिकित्सात्मक मैत्रीसंविदात्मक + सीमित-अवधि संबंध, सेवार्थी और चिकित्सक के बीच
अशर्त सकारात्मक आदरचिकित्सक की सेवार्थी के प्रति निरंतर सकारात्मक भावना, चाहे सेवार्थी कुछ भी प्रकट करे
तदनुभूतिसेवार्थी की स्थिति को समझना और उसी की तरह अनुभव करना
सहानुभूतिदूसरे के कष्ट के प्रति दया और करुणा, पर उसकी तरह अनुभव नहीं कर पाना
बौद्धिक समझभावशून्य: व्यक्ति दूसरे की तरह अनुभव नहीं कर पाता और सहानुभूति भी नहीं होती
नैदानिक निरूपणउपचार में प्रयुक्त चिकित्सात्मक मॉडल के अनुरूप सेवार्थी की समस्या का निरूपण; यह एक सतत प्रक्रिया है
अन्योन्य प्रावरोध का सिद्धांतदो परस्पर विरोधी शक्तियाँ साथ हों तो कमज़ोर शक्ति अवरुद्ध हो जाती है
मूल स्कीमाबाल्यावस्था में बना विश्वास + क्रिया-प्रतिरूप तंत्र (बेक)
संज्ञानात्मक पुनःसंरचनादुश्चिंता/अवसाद घटाने के लिए दोषपूर्ण संज्ञानात्मक संरचना बदलना
आत्मसिद्धिव्यक्ति को अधिक जटिल, संतुलित, समाकलित बनने की सहज शक्ति
कैथार्सिसप्रारंभिक सत्रों में भावनात्मक बोझ हलका करना; इसके अपने स्वास्थ्य-लाभकारी गुण हैं
उद्बोधक चिकित्साफ्रेंकल की “आत्मा का उपचार” (“लॉगोस” = ग्रीक में आत्मा); लक्ष्य = सेवार्थी को परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना जीवन में अर्थवत्ता और उत्तरदायित्व बोध प्राप्त कराना (अर्थ निर्माण = जीवन-संकट में भी अर्थ खोजने की प्रक्रिया)
पुनःस्थापनलक्षण कम होने के बाद रोगी को आत्मनिर्भर व उत्पादक बनाने में मदद करना
2मनश्चिकित्सा का वर्गीकरण
1 · मनोगतिकपहले आविर्भूत
→
2 · व्यवहारदूसरे आविर्भूत
→
3 · अस्तित्वपरक“तीसरी शक्ति”: सबसे अंत में
| प्राचल | मनोगतिक | व्यवहार चिकित्सा | अस्तित्वपरक चिकित्सा |
|---|---|---|---|
| समस्या का कारण | अंतःमनोद्वंद्व | व्यवहार एवं संज्ञान का दोषपूर्ण अधिगम | अपने जीवन और अस्तित्व के अर्थ से जुड़े प्रश्न |
| कारण का प्रादुर्भाव | बाल्यावस्था की अतृप्त इच्छाएँ, अनसुलझे भय | दोषपूर्ण अनुबंधन, अधिगम, चिंतन एवं विश्वास | अकेलापन, विसंबंधन, व्यर्थता का बोध |
| मुख्य उपचार विधि | मुक्त साहचर्य, स्वप्न बताना, व्याख्या | दोषपूर्ण अनुबंधन पहचानना, विकल्प स्थापित करना | गर्मजोशी भरा, अनिर्णयात्मक वातावरण; सेवार्थी स्वयं समाधान पाता है |
| चिकित्सात्मक संबंध | चिकित्सक द्वंद्वों की व्याख्या करता है | चिकित्सक अनुकूली प्रतिरूप पहचानता है | चिकित्सक केवल गर्मजोशी भरा, तदनुभूतिक संबंध देता है |
| सेवार्थी को मुख्य लाभ | संवेगात्मक अंतर्दृष्टि | अनुकूली व्यवहार/चिंतन प्रतिरूप | व्यक्तिगत संवृद्धि |
| उपचार की अवधि | क्लासिकी मनोविश्लेषण: कई वर्ष; आधुनिक रूपांतर 10-15 सत्र | कुछ महीनों में पूरी | कुछ महीनों में पूरी |
3व्यवहार चिकित्सा: तकनीकें
सिद्धांत: भाव-प्रबोधन स्तर कम करना; प्राचीन या क्रियाप्रसूत अनुबंधन से व्यवहार बदलना; आवश्यकता हो तो प्रतिस्थानिक अधिगम। व्यवहार परिष्करण की दो मुख्य तकनीकें: निषेधात्मक प्रबलन तथा विमुखी अनुबंधन।
व्यवहारात्मक तकनीकें
निषेधात्मक प्रबलनपीड़ादायक उद्दीपक से बचना/भागना
विमुखी अनुबंधनअवांछित अनुक्रिया + बार-बार विमुखी परिणाम
सकारात्मक प्रबलनदुर्लभ अनुकूली व्यवहार बढ़ाने पुरस्कार
टोकन अर्थव्यवस्थाटोकन संगृहीत कर किसी पुरस्कार से बदले जाते हैं
विभेदक प्रबलनवांछित बढ़ाना + अवांछित घटाना, एक साथ: (क) वांछित को सकारात्मक + अवांछित को निषेधात्मक प्रबलन, या (ख) वांछित को सकारात्मक प्रबलन + अवांछित की उपेक्षा (कम कष्टकर, समान रूप से प्रभावी)
विश्रांति की विधियाँप्रगामी पेशीय विश्रांति और ध्यान; दुश्चिंता को पूर्ववर्ती कारक के रूप में कम करती हैं
क्रमिक विसंवेदनीकरणवोल्प; पदानुक्रम कम→अधिक भय; अन्योन्य प्रावरोध
मॉडलिंगभूमिका-प्रतिरूप/चिकित्सक को देखकर, प्रतिस्थानिक अधिगम से सीखना
4संज्ञानात्मक चिकित्सा
| चिकित्सक | चिकित्सा | केंद्रीय विचार |
|---|---|---|
| अल्बर्ट एलिस | RET | पू.वि.प. विश्लेषण: पूर्ववर्ती घटना → अविवेकी विश्वास → परिणाम |
| आरन बेक | संज्ञानात्मक चिकित्सा | मूल स्कीमा → निर्णायक घटना → नकारात्मक स्वचालित विचार → संज्ञानात्मक विकृतियाँ (अपक्रियात्मक संज्ञानात्मक संरचना) → पुनःसंरचना |
| (विविध) | CBT | जैव-मनोसामाजिक उपागम: विश्रांति + व्यवहार/संज्ञानात्मक तकनीकें + पर्यावरण-परिवर्तन; आज सबसे लोकप्रिय |
| चिकित्सक | चिकित्सा | नामित तकनीक/विचार |
|---|---|---|
| विक्टर फ्रेंकल | उद्बोधक चिकित्सा | अर्थ निर्माण; आध्यात्मिक अचेतन; अस्तित्व दुश्चिंता; अन्यारोपण हतोत्साहित |
| कार्ल रोज़र्स | सेवार्थी-केंद्रित चिकित्सा | तदनुभूति, अशर्त सकारात्मक आदर, परावर्तन |
| फ्रेडरिक व लॉरा पर्ल्स | गेस्टाल्ट चिकित्सा | आत्म-जागरूकता/आत्म-स्वीकृति; कल्पनाओं को अभिव्यक्त करना; समूहों में भी संभव |
6स्वास्थ्य-लाभ कारक एवं नैतिक सिद्धांत
1
तकनीक
चिकित्सक द्वारा अपनाई व परिपालित
2
चिकित्सात्मक मैत्री
उपलब्धता, गर्मजोशी, तदनुभूति
3
कैथार्सिस
प्रारंभिक सत्रों में भावनात्मक बोझ हलका करना
4
अविशिष्ट कारक
रोगी चर + चिकित्सक चर
✓ हर चिकित्सक को यह करना चाहिए
- सुविज्ञ सहमति लेनी चाहिए
- गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए
- व्यक्तिगत कष्ट कम करना लक्ष्य होना चाहिए
- संबंध की अखंडता बनाए रखनी चाहिए
- मानव अधिकार व गरिमा का आदर करना चाहिए
- व्यावसायिक सक्षमता होनी चाहिए
✗ इनका उल्लंघन न करें
- बिना व्यावसायिक प्रशिक्षण अभ्यास न करें
- गोपनीयता न तोड़ें
- सेवार्थी के विश्वास का अनुचित लाभ न उठाएँ
7वैकल्पिक चिकित्सा
| चिकित्सा | मुख्य शोध निष्कर्ष |
|---|---|
| योग (पातंजलि का योग सूत्र) | आसन + प्राणायाम; अनिद्रा का उपचार योग से किया गया है; कुशल शिक्षक और प्रतिदिन 30 मिनट का अभ्यास लाभ बढ़ाता है |
| विपश्यना/सतर्कता-आधारित ध्यान | कोई नियत वस्तु नहीं; अवसाद के दोहराव को रोक सकता है |
| सुदर्शन क्रिया योग (SKY) | NIMHANS, भारत: अवसाद कम करता है; PTSD, दबाव, दबाव-संबंधी चिकित्सा रोग, मादक द्रव्यों के दुरुपयोग में उपयोग |
| कुंडलिनी योग | UCSD, अमेरिका: मनोग्रहित-बाध्यता विकार (OCD) में प्रभावी |
8मानसिक रोगियों का पुनःस्थापन
कम तीव्र विकार
- सामान्यीकृत दुश्चिंता, प्रतिक्रियात्मक अवसाद, दुर्भीति
- लक्षण-कमी = बेहतर जीवन-गुणवत्ता
गंभीर विकार (जैसे मनोविदलता)
- नकारात्मक लक्षण बने रह सकते हैं
- लक्षणों में कमी का जीवन की गुणवत्ता में सुधार से संबंधित होना आवश्यक नहीं
1
व्यावसायिक चिकित्सा
मोमबत्ती/कागज़ की थैली बनाना, बुनाई
2
सामाजिक कौशल प्रशिक्षण
भूमिका-निर्वाह, अनुकरण, अनुदेश
3
संज्ञानात्मक पुनःप्रशिक्षण
अवधान, स्मृति, अधिशासी प्रकार्य
4
व्यावसायिक प्रशिक्षण
उत्पादक रोज़गार के लिए कौशल
त्वरित पुनरावृत्ति
- मनोगतिक चिकित्सा का पुस्तक में अलग अनुभाग नहीं है, पर छह-प्राचल तुलना में यह शामिल है; दवा/बायोमेडिकल उपचार पर अलग खंड नहीं है; पुस्तक वैकल्पिक चिकित्सा को ‘पारंपरिक औषध-उपचार’ की वैकल्पिक संभावनाएँ कहती है
- मनोवैज्ञानिक कष्ट से पीड़ित वयस्कों के लिए प्रधान पद्धति व्यक्तिगत मनश्चिकित्सा है; चिकित्सक को व्यावसायिक प्रशिक्षण आवश्यक है
- तदनुभूति, सहानुभूति और बौद्धिक समझ का भेद (ऊपर परिभाषाएँ)
- वोल्प → क्रमिक विसंवेदनीकरण; एलिस → RET; बेक → मूल स्कीमा; फ्रेंकल → उद्बोधक चिकित्सा; रोज़र्स → सेवार्थी-केंद्रित; पर्ल्स → गेस्टाल्ट
- CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम: यूनिट V के 70 में से 9 अंक (सिद्धांत); 30 अंकों का प्रैक्टिकल अलग है और यहाँ शामिल नहीं
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री