NCERT की मनोविज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 6: “अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान” (पुनर्मुद्रण 2025-26) के अंत में दिए गए सभी 7 समीक्षात्मक प्रश्नों के पूर्ण मॉडल उत्तर। इस पुस्तक में औपचारिक “प्रश्नावली” के बजाय समीक्षात्मक प्रश्न दिए गए हैं; अंग्रेज़ी संस्करण में भी यही 7 समीक्षात्मक प्रश्न हैं (अनुवाद रूप में)। इनके बाद अध्याय के भीतर के प्रश्न दिए गए हैं: आरंभ का मानसिक अभ्यास, चित्र 6.1 और चित्र 6.3 के नीचे छपे प्रश्न, तथा क्रियाकलाप 6.1।
प्र. अभिवृत्ति को परिभाषित कीजिए। अभिवृत्ति के घटकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: अभिवृत्ति मन की एक अवस्था है: किसी विषय (अभिवृत्ति-विषय) के बारे में विचारों का एक पुंज, जिसमें एक मूल्यांकनपरक विशेषता (सकारात्मक, नकारात्मक या तटस्थ) होती है, जिसके साथ एक सांवेगिक घटक जुड़ा होता है, तथा उस विषय के प्रति एक विशेष तरीके से कार्य करने की प्रवृत्ति भी होती है। अभिवृत्ति के तीन घटक हैं, जिन्हें साथ में सं-भा-व्य घटक कहा जाता है: संज्ञानात्मक घटक विचार/विश्वास वाला पक्ष है, भावात्मक घटक सांवेगिक पक्ष है (विषय के प्रति भावना), तथा व्यवहारपरक घटक विशेष तरीके से कार्य करने की प्रवृत्ति है। ये तीनों सामान्यतः एक-दूसरे से संगत होते हैं, परंतु हमेशा नहीं: बॉक्स 6.1 के “हरा-भरा पर्यावरण” उदाहरण में, संज्ञानात्मक घटक बहुत मज़बूत हो सकता है जबकि भावात्मक तथा व्यवहारपरक घटक अपेक्षाकृत कमज़ोर बने रहें। अभिवृत्ति स्वयं में व्यवहार नहीं है, परंतु वह एक निश्चित प्रकार से व्यवहार या क्रिया करने की प्रवृत्ति को प्रकट करती है; अभिवृत्तियाँ संज्ञान के अंग हैं जो सांवेगिक घटक से युक्त होते हैं, तथा इनका बाहर से प्रेक्षण नहीं किया जा सकता।
प्र. क्या अभिवृत्तियाँ अधिगत होती हैं? वे किस प्रकार से अधिगत होती हैं, व्याख्या कीजिए?
उत्तर: हाँ, अभिवृत्तियाँ अधिकांशतः सीखी जाती हैं, स्वयं के अनुभव तथा दूसरों के साथ अंतःक्रिया से। कुछ शोध अभिवृत्तियों के कुछ सहज पक्ष को भी प्रदर्शित करते हैं, परंतु यह भी केवल अधिगम के साथ मिलकर, अप्रत्यक्ष रूप से ही प्रभाव डालता है। अभिवृत्तियाँ पाँच तरीकों से सीखी जाती हैं: (1) साहचर्य से, जैसे किसी अध्यापक को पसंद करने के कारण उसके विषय के प्रति भी अभिवृत्ति बनना; (2) पुरस्कार या दंड से, जैसे योगासन के लिए सराही गई किशोरी में योग के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति बनना; (3) प्रतिरूपण से (दूसरों के प्रेक्षण से), जैसे माता-पिता को बड़ों का सम्मान करते तथा सराहे जाते देखकर बच्चों में श्रद्धालु अभिवृत्ति बनना; (4) समूह या सांस्कृतिक मानकों से, जैसे पूजा स्थल पर रुपया-पैसा, मिठाई या फूल चढ़ाना, यह वास्तव में ऊपर के तीनों तरीकों का मेल भी हो सकता है; और (5) सूचना के प्रभाव से, दूसरों की वास्तविक उपस्थिति के बिना भी, जैसे किसी आत्मसिद्ध (self-actualised) व्यक्ति की जीवनी पढ़कर कठोर परिश्रम के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित करना।
प्र. अभिवृत्ति निर्माण को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं?
उत्तर: चार कारक अभिवृत्ति सीखने का संदर्भ प्रदान करते हैं: (1) परिवार एवं विद्यालय का परिवेश, प्रारंभिक वर्षों में माता-पिता एवं परिवार महत्वपूर्ण होते हैं, बाद में विद्यालय का परिवेश महत्वपूर्ण बनता है; यहाँ अधिगम साहचर्य, पुरस्कार/दंड तथा प्रतिरूपण से होता है। (2) संदर्भ समूह, ये व्यक्ति को स्वीकृत व्यवहार एवं सोचने के मानक बताते हैं; इनका प्रभाव किशोरावस्था के आरंभ में सबसे स्पष्ट होता है, जब व्यक्ति के लिए किसी समूह से जुड़ाव महसूस करना महत्वपूर्ण होता है। (3) व्यक्तिगत अनुभव, परिवार या संदर्भ समूह के बजाय सीधे व्यक्तिगत अनुभव से नाटकीय परिवर्तन हो सकता है; पुस्तक का उदाहरण सेना का एक चालक है, जो एक अभियान में मृत्यु के बहुत नज़दीक से गुज़रा जबकि उसके सभी साथी मारे जा चुके थे, नौकरी छोड़कर अपने गाँव महाराष्ट्र लौटा, और एक सक्रिय सामुदायिक नेता बना। (4) संचार-माध्यम संबद्ध प्रभाव, दृश्य-श्रव्य माध्यम, इंटरनेट तथा पाठ्यपुस्तकें पहले संज्ञानात्मक-भावात्मक घटकों को मज़बूत करती हैं और बाद में व्यवहारपरक घटक को भी प्रभावित कर सकती हैं; माध्यम उपभोक्तावादी अभिवृत्ति भी बना सकता है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा भी दे सकता है।
प्र. क्या व्यवहार सदैव व्यक्ति की अभिवृत्ति को प्रतिबिंबित करता है? एक प्रासंगिक उदाहरण देते हुए व्याख्या कीजिए।
उत्तर: नहीं, व्यवहार सदैव व्यक्ति की अभिवृत्ति को प्रतिबिंबित नहीं करता। मनोवैज्ञानिकों ने पाया है कि अभिवृत्ति और व्यवहार में संगति तब होती है जब अभिवृत्ति प्रबल और केंद्रीय हो, व्यक्ति अपनी अभिवृत्ति के प्रति सजग हो, अलग व्यवहार करने का बाह्य/समूह दबाव कम या न हो, व्यक्ति का व्यवहार दूसरों द्वारा देखा या मूल्यांकित न किया जा रहा हो, तथा व्यक्ति सोचता हो कि व्यवहार का सकारात्मक परिणाम होगा। पुस्तक का अपना उदाहरण रिचर्ड लॉ पियरे का अध्ययन है: जिस दौर में अमेरिकी लोग चीनवासियों के प्रति पूर्वाग्रहग्रस्त कहे जाते थे, लॉ पियरे ने एक चीनी दंपति से अमेरिका की यात्रा करने और विभिन्न होटलों में ठहरने के लिए कहा, और यात्रा के दौरान केवल एक बार एक होटल ने उन्हें सेवा से मना किया। कुछ समय बाद, लॉ पियरे ने उस क्षेत्र के, जहाँ दंपति ने यात्रा की थी, होटल एवं यात्री निवास के प्रबंधकों को प्रश्नावली भेजकर पूछा कि क्या वे चीनी अतिथियों को ठहराएँगे, तो बहुत अधिक प्रतिशत ने कहा कि नहीं। यह नकारात्मक अभिवृत्ति, यात्रा कर रहे दंपति के प्रति वास्तव में दिखाए गए सकारात्मक व्यवहार से असंगत थी। इससे स्पष्ट होता है कि अभिवृत्ति सदैव वास्तविक व्यवहार का पूर्वकथन नहीं करती। कभी-कभी व्यवहार ही अभिवृत्ति को निर्धारित करता है: बॉक्स 6.2 में एक डॉलर पाने वाले विद्यार्थियों ने अपने व्यवहार के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि प्रयोग के प्रति उनकी अभिवृत्ति सकारात्मक थी (“मैं इस थोड़े से पैसे के लिए झूठ नहीं बोलता, जिसका अर्थ है कि प्रयोग वास्तव में रोचक था”)।
प्र. पूर्वाग्रह एवं रूढ़धारणा में विभेदन कीजिए।
उत्तर: पूर्वाग्रह किसी विशिष्ट समूह के प्रति एक अभिवृत्ति है, जो प्रायः नकारात्मक होती है। रूढ़धारणा किसी विशिष्ट समूह की विशेषताओं के बारे में विचारों का एक पुंज है, जिसे उस समूह के सभी सदस्यों पर लागू माना जाता है; रूढ़धारणा वह संज्ञानात्मक आधार है जिस पर प्रायः पूर्वाग्रह टिका होता है। दूसरे शब्दों में, रूढ़धारणा समूह के बारे में (सामान्यतः अवांछित) विश्वास है, जबकि पूर्वाग्रह उस विश्वास पर बना नकारात्मक अभिवृत्ति है, जिसमें संज्ञानात्मक घटक के साथ-साथ एक भावात्मक (नापसंद/घृणा) घटक भी होता है। पूर्वाग्रह भेदभाव के रूप में, अर्थात व्यवहारपरक घटक के रूप में, रूपांतरित हो सकता है (लक्ष्य समूह के प्रति पसंदीदा समूह से कम सकारात्मक व्यवहार)।
प्र. पूर्वाग्रह भेदभाव के बिना एवं भेदभाव पूर्वाग्रह के बिना रह सकता है। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: यह सत्य है। पूर्वाग्रह (एक नकारात्मक अभिवृत्ति) केवल व्यक्ति के मन में रह सकता है, कभी असमान व्यवहार में परिवर्तित हुए बिना, इसलिए पूर्वाग्रह भेदभाव के बिना रह सकता है। इसी प्रकार, भेदभाव (समूह के प्रति असमान व्यवहार), बिना किसी वास्तविक नकारात्मक अभिवृत्ति के भी हो सकता है, जैसे (यह हमारा अपना उदाहरण है, पुस्तक का नहीं) केवल किसी पहले से चली आ रही सामाजिक प्रथा का पालन करने पर, न कि व्यक्तिगत शत्रुता के कारण, इसलिए भेदभाव पूर्वाग्रह के बिना रह सकता है। परंतु दोनों प्रायः साथ-साथ पाए जाते हैं, और जहाँ भी पूर्वाग्रह एवं भेदभाव दोनों मौजूद हों, वहाँ उसी समाज के समूहों में संघर्ष उत्पन्न होने की संभावना बहुत प्रबल रहती है। अनेक स्थितियों में भेदभावपूर्ण व्यवहार को विधिक नियमों के द्वारा प्रतिबंधित किया जा सकता है, परंतु पूर्वाग्रह के संज्ञानात्मक एवं भावात्मक घटकों को परिवर्तित करना बहुत कठिन है।
प्र. आपका मित्र बहुत अधिक अस्वास्थ्यकर भोजन करता है, आप भोजन के प्रति उसकी अभिवृत्ति में किस प्रकार से परिवर्तन लाएंगे?
उत्तर: अध्याय में बताए गए अभिवृत्ति परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारकों का उपयोग करते हुए: मैं संदेश पर ध्यान दूँगा: न बहुत अधिक, न बहुत कम जानकारी देते हुए, तथा तार्किक अपील (अस्वास्थ्यकर भोजन महँगा है और उसमें पोषक तत्व कम हैं) या सांवेगिक अपील (अस्वास्थ्यकर भोजन आपके दिखने और महसूस करने के तरीके को प्रभावित कर सकता है) में से किसी एक को चुनूँगा, और डराने वाला संदेश नहीं दूँगा, क्योंकि पुस्तक बताती है कि बहुत अधिक भय उत्पन्न करने वाला संदेश संग्राहक को दूसरी दिशा में ले जाता है और उसका विश्वासोत्पादक प्रभाव कम हो जाता है। मैं स्रोत पर भी ध्यान दूँगा: एक विश्वसनीय, पसंद किए जाने वाले स्रोत (डॉक्टर, सम्मानित प्रशिक्षक, या मित्र का कोई आदर्श व्यक्ति) से बात कहलवाना अधिक प्रभावी रहेगा। मैं अप्रत्यक्ष तरीके (जैसे कोई लेख साझा करना) के बजाय आमने-सामने बातचीत को प्राथमिकता दूँगा, क्योंकि पुस्तक बताती है कि आमने-सामने का प्रसारण, अप्रत्यक्ष प्रसारण की तुलना में अधिक प्रभावी होता है। अंत में, मैं अपने मित्र की लक्ष्य विशेषताओं पर भी विचार करूँगा: यदि उसका व्यक्तित्व खुला और लचीला है, तो सही ढंग से की गई बातचीत काम करेगी; और यदि उसकी मौजूदा अभिवृत्ति अभी मत जैसी ही है (एक मज़बूत मूल्य नहीं बनी है), तो इसे बदलना आसान होगा, ठीक जैसा पुस्तक कहती है कि नए बन रहे मत, स्थापित मूल्यों से अधिक आसानी से बदलते हैं।
अध्याय के भीतर के प्रश्न। पुस्तक पाठ के भीतर भी प्रश्न पूछती है: आरंभ का एक मानसिक अभ्यास, दो चित्रों के शीर्षक और एक क्रियाकलाप बॉक्स। इनके उत्तर नीचे उसी क्रम में दिए गए हैं जिस क्रम में पुस्तक इन्हें छापती है।
प्र. स्वयं से आज आपने कितनी बार कहा ‘मेरी राय में —-‘ या ‘दूसरे लोग ऐसा कह सकते हैं, परंतु मैं अनुभव करता हूँ कि —-‘? ये मत आपके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर (मार्गदर्शन): खाली स्थानों में आप जो भरते हैं, वे मत हैं। कुछ मत आपके लिए साधारण महत्व के होते हैं: वे केवल सोचने के तरीके हैं, और दूसरे सहमत हों या नहीं, इससे आपको अधिक अंतर नहीं पड़ता। कुछ मत बहुत महत्वपूर्ण होते हैं: कोई उनका विरोध करे तो आप भावुक हो जाते हैं, और वे आपके व्यवहार का हिस्सा भी बन सकते हैं। जिन विचारों में सांवेगिक और क्रियात्मक घटक भी हों, वे मत से अधिक हैं: वे अभिवृत्ति हैं।
प्र. कौन सा चित्र आपको एक लैपटाप खरीदने के लिए अधिक व्यग्र करेगा, चित्र अ या चित्र ब? क्यों?
उत्तर: चित्र अ में सूट पहने एक व्यावसायिक दिखने वाला वयस्क व्यक्ति लैपटाप दिखा रहा है; चित्र ब में एक स्कूली बालक बिल्कुल वही संदेश दे रहा है। उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि खरीदार कौन है, क्योंकि यहाँ स्रोत की विशेषताएँ (विश्वसनीयता और आकर्षण) काम करती हैं। पुस्तक के अनुसार लैपटाप खरीदने की योजना बना रहे युवक, स्कूली बच्चे की तुलना में कंप्यूटर इंजीनियर जैसे विशेषज्ञ स्रोत से अधिक प्रभावित होंगे, इसलिए उनके लिए चित्र अ अधिक प्रभावी है। परंतु यदि खरीदार स्वयं स्कूल के बच्चे हैं, तो वे विज्ञापन करने वाले दूसरे स्कूली बालक से अधिक प्रभावित होंगे, इसलिए उनके लिए चित्र ब अधिक प्रभावी है।
प्र. आमने-सामने की अंतःक्रिया बनाम संचार-माध्यम का प्रसारण। कौन बेहतर कार्य करता है? क्यों?
उत्तर: आमने-सामने की अंतःक्रिया बेहतर कार्य करती है। पुस्तक के अनुसार संदेश का आमने-सामने प्रसारण, पत्रों, पर्चों या जनसंचार माध्यमों जैसे अप्रत्यक्ष प्रसारण की तुलना में प्रायः अधिक प्रभावी होता है। छोटे बच्चों के लिए ओ.आर.एस. के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति तब अधिक प्रभावी ढंग से बनती है जब सामाजिक कार्यकर्ता एवं चिकित्सक लोगों से प्रत्यक्ष बातचीत करते हैं, न कि केवल रेडियो पर इसके लाभ बताते हैं। दूरदर्शन और इंटरनेट आमने-सामने की अंतःक्रिया के समान हैं, परंतु उसका विकल्प नहीं।
प्र. एक समाचारपत्र या पत्रिका से एक ऐसा विज्ञापन काटिए जिसमें कुछ विशिष्ट हो और वह आपका ध्यान आकर्षित करता हो। विज्ञापन के बारे में निम्नलिखित विवरण लिखें एवं अपनी कक्षा में प्रस्तुत करें: विज्ञापन का विषय (उदाहरणार्थ, क्या विज्ञापन उपभोक्ता वस्तु, किसी खाद्य पदार्थ, एक कंपनी, स्वास्थ्य संबंधी विषय, एक राष्ट्रीय विषय आदि के बारे में है); विज्ञापन के अच्छे एवं खराब परिणाम; इसमें एक तार्किक अपील है अथवा एक सांवेगिक अपील है; क्या इसमें एक लोकप्रिय हस्ती है, एक विशेषज्ञ स्रोत, या बहुत पसंदीदा व्यक्ति।
उत्तर (मार्गदर्शन): विज्ञापन आपकी अपनी पसंद का होगा, इसलिए इसका कोई एक तय उत्तर नहीं है। इसका विश्लेषण अध्याय के अभिवृत्ति परिवर्तन के कारकों से कीजिए। विषय: बताइए कि विज्ञापन किस बारे में है। परिणाम: अच्छा परिणाम उपयोगी जानकारी हो सकता है (जैसे किसी स्वास्थ्य उत्पाद के बारे में); खराब परिणाम उपभोक्तावादी अभिवृत्ति बनाना हो सकता है, यानी ऐसी चीज़ खरीदने की इच्छा जिसकी ज़रूरत नहीं। अपील: यदि विज्ञापन पैसे या ईंधन की बचत जैसे तथ्य देता है तो वह तार्किक अपील है, और यदि परिवार की देखभाल जैसी भावनाओं को छूता है तो सांवेगिक अपील। स्रोत: देखिए कि संदेश किसी विशेषज्ञ (विश्वसनीयता) से आ रहा है या किसी लोकप्रिय फ़िल्मी सितारे या खिलाड़ी (आकर्षण) से।
परियोजना विचार। अध्याय के अंत में दिए गए दो परियोजना विचार (अवशिष्ट प्रबंधन सर्वेक्षण और अंतर्वैयक्तिक मूल्यांकन अभ्यास) खुले क्रियाकलाप हैं, इसलिए इनके उत्तर यहाँ नहीं दिए गए हैं।
प्रश्न 1, 3 और 4 में “विवेचना” या “व्याख्या” करने को कहा गया है: इनके उत्तर स्पष्ट उप-शीर्षकों (घटक, कारक, या शर्तें) में लिखें, न कि एक ही लंबे पैराग्राफ में, जैसे ऊपर के मॉडल उत्तर संरचित हैं।