अध्याय 6: अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान का त्वरित पुनरावृत्ति सार। विस्तृत व्याख्या तथा उदाहरणों के लिए पूर्ण नोट्स अलग से पढ़ें।
CBSE 2026-27 पाठ्यक्रम में यूनिट VI के केवल ये विषय हैं: परिचय, सामाजिक व्यवहार की व्याख्या करना, अभिवृत्ति की प्रकृति एवं घटक, अभिवृत्ति निर्माण एवं परिवर्तन, पूर्वाग्रह एवं भेदभाव, पूर्वाग्रह नियंत्रण की युक्तियाँ। पुस्तक में सामाजिक संज्ञान, स्कीमा, प्रभाव-निर्माण या समाजोपकारी व्यवहार पर कोई अलग खंड नहीं छपा है। रूढ़धारणा का विचार “पूर्वाग्रह एवं भेदभाव” के अंदर आता है, जो पाठ्यक्रम में है।
1अभिवृत्ति: प्रकृति एवं घटक
| सं-भा-व्य घटक | अर्थ |
|---|---|
| संज्ञानात्मक | विचार/विश्वास |
| भावात्मक | सांवेगिक प्रतिक्रिया |
| व्यवहारपरक | कार्य करने की प्रवृत्ति |
| विशेषता | अर्थ |
|---|---|
| कर्षण-शक्ति | सकारात्मक / नकारात्मक / तटस्थ |
| चरम-सीमा | तटस्थता से दूरी |
| सरलता/जटिलता | कम बनाम अधिक सदस्य अभिवृत्तियाँ |
| केंद्रिकता | अन्य अभिवृत्तियों पर प्रभाव |
2अभिवृत्ति निर्माण एवं परिवर्तन
| अभिवृत्ति अधिगम की 5 प्रक्रियाएँ |
|---|
| साहचर्य |
| पुरस्कार या दंड |
| प्रतिरूपण (दूसरों का प्रेक्षण) |
| समूह/सांस्कृतिक मानक |
| सूचना के प्रभाव से |
| अभिवृत्ति निर्माण के 4 संदर्भ कारक |
|---|
| परिवार एवं विद्यालय का परिवेश |
| संदर्भ समूह |
| व्यक्तिगत अनुभव (सेना का चालक → महाराष्ट्र) |
| संचार-माध्यम संबद्ध प्रभाव |
| संप्रत्यय | प्रस्तावक | मुख्य विचार |
|---|---|---|
| संतुलन | फ्रिट्ज हाइडर | असंतुलन दूर करने के लिए पी-ओ-एक्स त्रिकोण बदलता है (दहेज उदाहरण) |
| संज्ञानात्मक विसंवादिता | लियॉन फेस्टिगर | विसंवादी विचार परिवर्तन को मजबूर करते हैं (बॉक्स 6.2, 1 बनाम 20 डॉलर) |
| द्विस्तरीय संप्रत्यय | एस.एम. मोहसिन | लक्ष्य पहले तादात्म्य बनाता है, फिर स्रोत के व्यवहार परिवर्तन का अनुकरण करता है |
| अभिवृत्ति परिवर्तन तय करने वाले 4 कारक |
|---|
| पहले से विद्यमान अभिवृत्ति की विशेषता (कर्षण-शक्ति, चरम-सीमा, जटिलता, केंद्रिकता); परिवर्तन सर्वसम (पहले की दिशा में ही) या विसंगत (विपरीत दिशा में) हो सकता है |
| स्रोत की विशेषताएँ (विश्वसनीयता, आकर्षकता; चित्र 6.1 लैपटाप विज्ञापन; कार के प्रचार में विशेषज्ञ के स्थान पर लोकप्रिय हस्ती) |
| संदेश की विशेषताएँ (पर्याप्त सूचना, न बहुत अधिक न बहुत कम; तार्किक/सांवेगिक अपील; संदेश द्वारा उद्दीप्त अभिप्रेरक; बहुत अधिक भय वाले संदेश का विश्वासोत्पादक प्रभाव कम हो जाता है; आमने-सामने का प्रसारण अधिक प्रभावी) |
| लक्ष्य की विशेषताएँ (अनुनयता, पूर्वाग्रह, आत्म-सम्मान, बुद्धि) |
संज्ञानात्मक संगति: अभिवृत्ति या अभिवृत्ति तंत्र के दो घटकों, पक्षों या तत्वों को एक दिशा में होना चाहिए; संतुलन एवं संज्ञानात्मक विसंवादिता दोनों इसके उदाहरण हैं।
3अभिवृत्ति-व्यवहार संबंध
- अभिवृत्ति प्रबल एवं केंद्रीय हो
- व्यक्ति अपनी अभिवृत्ति के प्रति सजग हो
- अलग व्यवहार का बाह्य दबाव कम/न हो
- व्यवहार दूसरों द्वारा देखा/मूल्यांकित न हो
- व्यक्ति सकारात्मक परिणाम की अपेक्षा रखता हो
लॉ पियरे का अध्ययन: चीनी दंपति को अमेरिका की यात्रा में केवल एक बार सेवा से मना किया गया, परंतु बाद में उसी क्षेत्र के होटल एवं यात्री निवास के प्रबंधकों ने प्रश्नावली में बहुत अधिक प्रतिशत में “नहीं” कहा: अभिवृत्ति सदैव व्यवहार का पूर्वकथन नहीं करती।
कभी-कभी व्यवहार ही अभिवृत्ति को निर्धारित करता है: बॉक्स 6.2 में एक डॉलर पाने वाले विद्यार्थियों ने अपने झूठ के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि प्रयोग उन्हें पसंद आया था।
4पूर्वाग्रह एवं भेदभाव
पूर्वाग्रह भेदभाव के बिना और भेदभाव पूर्वाग्रह के बिना भी हो सकता है; फिर भी दोनों प्रायः साथ-साथ होते हैं, और तब समूहों में अंतर्द्वंद्व उत्पन्न होने की बहुत अधिक संभावना होती है।
| पूर्वाग्रह के 5 स्रोत |
|---|
| अधिगम (साहचर्य, पुरस्कार/दंड, प्रतिरूपण, मानक) → “पूर्वाग्रहग्रस्त व्यक्तित्व” विकसित हो सकता है |
| प्रबल सामाजिक अनन्यता / अंतःसमूह अभिनति |
| बलि का बकरा बनाना: बहुसंख्यक समूह अपनी समस्याओं के लिए कमज़ोर अल्पसंख्यक बाह्य समूह को दोषी ठहराता है |
| सत्य का आधार तत्व: “जो सब कहते हैं उसमें कुछ सत्य अवश्य होगा”; कुछ उदाहरण ही पर्याप्त माने जाते हैं |
| स्वतः साधक भविष्योक्ति: लक्ष्य समूह ऐसा व्यवहार करता है जो नकारात्मक प्रत्याशाओं की पुष्टि करता है |
5पूर्वाग्रह नियंत्रण की युक्तियाँ
- पूर्वाग्रह सीखने के अवसर कम करना
- पहले से मौजूद पूर्वाग्रहग्रस्त अभिवृत्तियों को बदलना
- अंतःसमूह-आधारित संकुचित सामाजिक अनन्यता को कम महत्व देना
- पीड़ितों में स्वतः साधक भविष्योक्ति को हतोत्साहित करना
तरीके: शिक्षा एवं सूचना का प्रसार; अंतःसमूह संपर्क बढ़ाना (तभी सफल जब संदर्भ सहयोगी हो, अंतःक्रिया घनिष्ठ हो, और दोनों समूह शक्ति या प्रतिष्ठा में भिन्न न हों); समूह अनन्यता के बजाय व्यक्तिगत अनन्यता को महत्व देना।
- अभिवृत्ति = अभिवृत्ति-विषय + मूल्यांकन + भावना + क्रिया की प्रवृत्ति
- सं-भा-व्य: संज्ञानात्मक, भावात्मक, व्यवहारपरक; 4 विशेषताएँ: कर्षण-शक्ति, चरम-सीमा, जटिलता, केंद्रिकता
- 5 अधिगम प्रक्रियाओं से निर्मित, 4 संदर्भ कारकों से आकार लेती है
- संतुलन (हाइडर), विसंवादिता (फेस्टिगर), द्विस्तरीय संप्रत्यय (मोहसिन) से बदलती है; 4 कारकों पर निर्भर
- अभिवृत्ति ≠ हमेशा व्यवहार: लॉ पियरे का अध्ययन; कभी-कभी व्यवहार ही अभिवृत्ति तय करता है
- पूर्वाग्रह (अभिवृत्ति) + रूढ़धारणा (संज्ञानात्मक) + भेदभाव (व्यवहार); 5 स्रोत
- पूर्वाग्रह नियंत्रण: शिक्षा, सहयोगी समान-स्तर संपर्क, व्यक्तिगत अनन्यता