कक्षा 11 राजनीति विज्ञान बुक 2 अध्याय 5 अधिकार NCERT समाधान

NCERT की पाठ्यपुस्तक राजनीतिक सिद्धांत के अध्याय 5 «अधिकार» की प्रश्नावली के सभी 5 प्रश्न, हिंदी संस्करण की अपनी शब्दावली में, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। अध्याय के भीतर छपे प्रश्न (आओ कुछ करके सीखें, वाद-विवाद-संवाद, चिंतन-मंथन और दोनों कार्टून) अंत में हल किए गए हैं। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 अधिकार क्या हैं, वे महत्त्वपूर्ण क्यों हैं

प्र. अधिकार क्या हैं और वे महत्त्वपूर्ण क्यों हैं? अधिकारों का दावा करने के लिए उपयुक्त आधार क्या हो सकते हैं?

उत्तर: अधिकार मूल रूप से हकदारी अथवा ऐसा दावा है जिसका औचित्य सिद्ध हो। यह बताता है कि नागरिक, व्यक्ति और मनुष्य होने के नाते हम किसके हकदार हैं, ऐसी चीज़ जिसे शेष समाज एक वैध दावे के रूप में स्वीकार करे। अधिकार महत्त्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि वे उन बातों का द्योतक हैं जिन्हें हम और अन्य लोग सम्मान और गरिमा का जीवन बसर करने के लिए आवश्यक समझते हैं।
अधिकारों का दावा करने के दो मुख्य आधार हैं: पहला, गरिमा और सम्मान की ज़िंदगी, जैसे आजीविका का अधिकार या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार, जो समाज में रहने वाले तमाम लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण होने के कारण विश्वजनीन कहलाते हैं। दूसरा, हमारी बेहतरी, जैसे शिक्षा का अधिकार, जो हमारी दक्षता और प्रतिभा विकसित करने में मदद करता है। इसके विपरीत, जो कार्यकलाप हमारे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए नुक़सानदेह हैं (जैसे नशीली दवाओं का सेवन), उन्हें अधिकार नहीं माना जा सकता।

2 सार्वभौमिक अधिकार, तीन उदाहरण

प्र. किन आधारों पर यह अधिकार अपनी प्रकृति में सार्वभौमिक माने जाते हैं?

उत्तर: जो अधिकार समाज में रहने वाले सभी मनुष्यों के लिए, बिना किसी भेद के, गरिमा और सम्मान की ज़िंदगी के लिए ज़रूरी माने जाते हैं, उन्हें सार्वभौमिक कहा जाता है। इस आधार पर तीन उदाहरण, इस प्रकार समझे जा सकते हैं:
(क) जीवन का अधिकार : हर मनुष्य को जीवित रहने और सुरक्षित रहने का हक़ है, इसके बिना बाक़ी सभी अधिकार निरर्थक हो जाते हैं।
(ख) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार : यह हर व्यक्ति को सृजनात्मक और मौलिक होने का मौक़ा देता है और लोकतांत्रिक सरकार के लिए भी ज़रूरी है, क्योंकि यह विश्वासों और मतों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति की अनुमति देता है।
(ग) शिक्षा का अधिकार : यह हमारी तर्क-शक्ति विकसित करता है, उपयोगी कौशल देता है और सूझ-बूझ के साथ चयन करने में सक्षम बनाता है, इसलिए इसे सार्वभौम अधिकार माना गया है।

3 हमारे देश में सामने रखे जा रहे नए अधिकार

प्र. संक्षेप में उन नए अधिकारों की चर्चा कीजिए, जो हमारे देश में सामने रखे जा रहे हैं। उदाहरण के लिए आदिवासियों के अपने रहवास और जीने के तरीके को संरक्षित रखने तथा बच्चों के बँधुआ मज़दूरी के खिलाफ अधिकार जैसे नए अधिकारों को लिया जा सकता है।

उत्तर: जैसे-जैसे नए ख़तरे और चुनौतियाँ उभरती गई हैं, अधिकारों की सूची लगातार बढ़ती गई है। आम तौर पर स्वीकृत नागरिक-राजनीतिक अधिकारों के अलावा आज सूचना के अधिकार, स्वच्छ वायु के अधिकार तथा सुरक्षित पेयजल के अधिकार का दावा जताया जा रहा है। हमारे देश में सामने रखे जा रहे कुछ नए अधिकार:
(क) आदिवासियों के रहवास और जीवन-शैली को संरक्षित रखने का अधिकार : आदिवासी समुदाय अपने पारंपरिक जंगल-क्षेत्र, संसाधनों और जीवन-पद्धति की रक्षा का दावा कर रहे हैं, ताकि विकास परियोजनाओं या बाहरी हस्तक्षेप से उनकी संस्कृति और आजीविका नष्ट न हो।
(ख) बच्चों का बँधुआ मज़दूरी के विरुद्ध अधिकार : बच्चों के लिए यह दावा किया जा रहा है कि उन्हें बलपूर्वक श्रम में न धकेला जाए, बल्कि शिक्षा और सुरक्षित बचपन का अधिकार मिले।
(ग) पर्यावरण से जुड़े अधिकार : प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा की ज़रूरत के प्रति सचेत होने से स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और टिकाऊ विकास जैसे अधिकारों की माँगें पैदा हुई हैं।
(घ) आजीविका का अधिकार और बच्चों के अधिकार : युद्ध या प्राकृतिक संकट के दौरान अनेक लोग, ख़ास कर महिलाएँ, बच्चे या बीमार जिन बदलावों को झेलते हैं, उनके बारे में नई जागरूकता ने आजीविका के अधिकार, बच्चों के अधिकार और ऐसे अन्य अधिकारों की माँग भी पैदा की है।

4 राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक अधिकारों में अंतर

प्र. राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों में अंतर बताइये। हर प्रकार के अधिकार के उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर:

प्रकार क्या शामिल है उदाहरण
राजनीतिक अधिकार क़ानून के समक्ष बराबरी और राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक़, नागरिक स्वतंत्रताओं सहित वोट देना, प्रतिनिधि चुनना, चुनाव लड़ना, राजनीतिक पार्टियाँ बनाना, स्वतंत्र-निष्पक्ष न्यायिक जाँच, विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति
आर्थिक अधिकार बुनियादी ज़रूरतों (भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य) की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य के दायित्व आवास और चिकित्सा सुविधाएँ, बेरोज़गारों को न्यूनतम भत्ता, भारत की ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना
सांस्कृतिक अधिकार अपनी भाषा और संस्कृति में जीने, सीखने और उसे बनाए रखने का हक़ मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार, अपनी भाषा-संस्कृति के शिक्षण के लिए संस्थाएँ बनाने का अधिकार

राजनीतिक अधिकार सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाते हैं, आर्थिक अधिकार बुनियादी ज़रूरतों को पूरा कर बाक़ी अधिकारों को सार्थक बनाते हैं, और सांस्कृतिक अधिकार समुदायों की पहचान और परंपरा की रक्षा करते हैं।

5 अधिकार और राज्यसत्ता पर सीमाएँ

प्र. अधिकार राज्य की सत्ता पर कुछ सीमाएँ लगाते हैं। उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

उत्तर: अधिकार सिर्फ़ यह नहीं बताते कि राज्य को क्या करना है, वे यह भी बताते हैं कि राज्य को क्या नहीं करना है। इस तरह अधिकार राज्यसत्ता पर अंकुश भी लगाते हैं:
(क) मनमानी गिरफ़्तारी पर रोक : किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार कहता है कि राजसत्ता महज़ अपनी मर्ज़ी से उसे गिरफ़्तार नहीं कर सकती। अगर वह किसी को सलाखों के पीछे करना चाहती है, तो उसे इस कार्रवाई को जायज़ ठहराना पड़ेगा और न्यायालय के समक्ष कारण बताना होगा। इसीलिए गिरफ़्तारी से पहले पुलिस के लिए वारंट दिखाना ज़रूरी होता है।
(ख) नागरिक स्वतंत्रता पर रोक की सीमा : राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सरकारें नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगा सकती हैं, लेकिन ऐसे प्रतिबंध स्वयं अधिकारों के लिए ख़तरा नहीं बनने चाहिए। गिरफ़्तार व्यक्ति को भी क़ानूनी सलाह और अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
(ग) क़ानूनी मान्यता पर सीमा : संविधान में दर्ज मौलिक अधिकार यह सुनिश्चित करते हैं कि अन्य क़ानून और नीतियाँ इनका सम्मान करें, यानी कोई भी सामान्य क़ानून संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता।
इस प्रकार, राज्य संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न सत्ता होते हुए भी व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता की मर्यादा का उल्लंघन किए बग़ैर काम करने के लिए बाध्य है, क्योंकि राज्य का अस्तित्व अपने लिए नहीं, बल्कि जनता के कल्याण के लिए है।

6 पाठ के बीच के प्रश्न

अध्याय के भीतर भी प्रश्न पूछे गए हैं: “आओ कुछ करके सीखें”, “वाद-विवाद-संवाद” और “चिंतन-मंथन” के बॉक्स में और दो कार्टूनों में। नीचे इन्हें किताब के क्रम में, हिंदी संस्करण के अपने शब्दों में, हल किया गया है। गतिविधियों और वाद-विवाद का कोई एक “सही” उत्तर नहीं होता; आदर्श उत्तर दिखाते हैं कि एक अच्छे उत्तर में क्या-क्या होना चाहिए।

आओ कुछ करके सीखें

प्र. पिछले कुछ महीनों के अखबारों को बाँचिए और उन जन आंदोलनों और संगठनों की सूची बनाइये जिन्होंने नए किस्म के अधिकारों की माँग की है।

उत्तर: यह अखबार पढ़ने की गतिविधि है। सूची में आंदोलन या संगठन का नाम और उसके द्वारा माँगा गया नया अधिकार लिखिए। अध्याय स्वयं बताता है कि किस तरह के दावे मिलेंगे: सूचना का अधिकार, स्वच्छ हवा का अधिकार और सुरक्षित पेयजल का अधिकार; बच्चों, अजन्मे शिशुओं और पशुओं तक के लिए अधिकार; और नए ख़तरों के चलते स्वच्छ हवा, शुद्ध जल, टिकाऊ विकास, आजीविका के अधिकार और बच्चों के अधिकार। प्रश्नावली इसमें आदिवासियों के अपने रहवास और जीने के तरीके को संरक्षित रखने तथा बच्चों के बँधुआ मज़दूरी के खिलाफ अधिकार को भी जोड़ती है। हर दावे के आगे लिखिए कि उसका आधार क्या है: सम्मान और गरिमा का जीवन, या हमारी बेहतरी।

कार्टून

प्र. “मेरे पिता ने टेलीफोन लगवाने के लिए आवेदन किया था। दो महीने से भी ज़्यादा हो गए हैं और अभी तक कुछ नहीं हुआ है। वे क्या कर सकते हैं?” “जानते हो! अब हमारे पास सूचना का अधिकार है। हम जान सकते हैं कि हमारे आवेदन का क्या हुआ। हम देरी का कारण भी जान सकते हैं।”

उत्तर: यह कार्टून अध्याय की शुरुआत में बताए गए नए अधिकारों में से एक, सूचना के अधिकार, को रोज़मर्रा के जीवन में काम करते दिखाता है। नागरिक इसके ज़रिये किसी सरकारी दफ़्तर से अपने आवेदन की स्थिति और देरी का कारण पूछ सकता है। यह अध्याय की इस बात को भी दिखाता है कि अधिकार ज़्यादातर राज्य से किए गए दावे होते हैं: अधिकार राज्य पर कुछ करने का दायित्व डालता है, यहाँ नागरिक को यह बताने का कि क्या हो रहा है और क्यों।

आओ कुछ करके सीखें

प्र. पिछले कुछ दिनों के अखबारों को देखिए और अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की तलाश कीजिए। सरकार और समाज के लोगों को अधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर: यह अखबार पढ़ने की गतिविधि है। हर मामले में लिखिए कि कौन-सा अधिकार टूटा (जैसे जीवन, स्वतंत्रता, स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जाँच, विचारों की अभिव्यक्ति, निजता, या अस्पृश्यता पर रोक) और किसने तोड़ा। सरकार को क्या करना चाहिए: अध्याय के अनुसार अधिकार राज्य पर कुछ करने का दायित्व डालते हैं (दूसरों से नुकसान पहुँचने से बचाने वाले कानून बनाना और नुकसान पहुँचाने वालों को दंड देना) और कुछ न करने का भी (मर्ज़ी से गिरफ़्तारी नहीं, न्यायालय के समक्ष कारण बताना, वारंट दिखाना)। समाज के लोगों को क्या करना चाहिए: अपने अधिकारों पर लगने वाले नियंत्रणों के प्रति चौकस रहना, पीड़ितों का साथ देना, और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना, क्योंकि मेरे अधिकार सब के लिए बराबर और एक ही अधिकार के सिद्धांत से सीमाबद्ध हैं।

वाद-विवाद-संवाद

प्र. संस्कृति के अधिकार का मतलब है कि किसी को भी ऐसी फिल्म बनाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए जो किसी की धार्मिक या सांस्कृतिक आस्थाओं को चोट पहुँचाए।

उत्तर: पक्ष में तर्क: सांस्कृतिक दावों को अच्छे जीवन के लिए ज़रूरी माना जा रहा है, और अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए मैं दूसरों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकता, इसलिए किसी समुदाय की आस्था का अपमान करने वाली फिल्म उसकी गरिमा को चोट पहुँचा सकती है। विपक्ष में तर्क: अध्याय के अनुसार सांस्कृतिक अधिकार का अर्थ है अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार और अपनी भाषा और संस्कृति के शिक्षण के लिए संस्थाएँ बनाने का अधिकार; यह अपनी संस्कृति को जीने का अधिकार है, दूसरों को अपने विचार व्यक्त करने से रोकने का नहीं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमें सृजनात्मक और मौलिक होने का अवसर देती है और लोकतांत्रिक सरकार के लिए भी ज़रूरी है। संतुलित उत्तर यह कह सकता है कि अधिकार कभी संपूर्ण-सर्वोच्च नहीं होते और टकराव की स्थिति में उन्हें संतुलित करना होता है, इसलिए केवल वही अभिव्यक्ति रोकी जाए जो हिंसा भड़काए या दूसरों के अधिकार छीने, न कि हर वह बात जो किसी को बुरी लगे। अपनी राय कारण के साथ लिखिए।

चिंतन-मंथन

प्र. समूह या समुदाय विशेष को दिए गए निम्न अधिकारों में से कौन-से न्यायोचित हैं? चर्चा कीजिए।

  • एक शहर में जैन समुदाय के लोगों ने अपना विद्यालय खोला और उसमें केवल अपने समुदाय के छात्र-छात्राओं को ही प्रवेश दिया। आंशिक रूप से न्यायोचित। अपनी भाषा और संस्कृति के शिक्षण के लिए संस्थाएँ बनाना मान्य सांस्कृतिक अधिकार है। पर केवल अपने समुदाय के छात्रों को प्रवेश देने से दूसरे बच्चों की शिक्षा तक पहुँच सीमित होती है, जो एक सार्वभौम अधिकार है, इसलिए यह दावा बहस का विषय है।
  • हिमाचल प्रदेश में वहाँ के स्थायी निवासियों के अलावा बाकी लोग ज़मीन या अन्य अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते। इसका बचाव किया जा सकता है। यह बाहरी लोगों द्वारा ज़मीन ख़रीद लिए जाने से स्थानीय लोगों की ज़मीन, आजीविका और संस्कृति की रक्षा करता है, कुछ वैसे ही जैसे आदिवासी अपने रहवास की रक्षा का दावा करते हैं। आलोचक कहते हैं कि इससे बाक़ी नागरिकों की स्वतंत्रता सीमित होती है।
  • एक सह शिक्षा विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने एक सर्कुलर जारी किया कि कोई भी छात्रा किसी भी प्रकार का पश्चिमी परिधान नहीं पहनेगी। न्यायोचित नहीं। यह किसी समूह का अधिकार नहीं, बल्कि केवल छात्राओं पर लागू होने वाला, उनकी पसंद की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध है। अगर मैं नहीं चाहता कि दूसरे मेरी पसंद, जैसे मेरे पहनावे, में दख़ल दें, तो मुझे भी दूसरों को अपनी पसंद चुनने के लिए स्वतंत्र छोड़ना होगा।
  • हरियाणा की एक पंचायत ने निर्णय दिया कि अलग-अलग जातियों के जिस लड़के और लड़की ने शादी कर ली थी, वे अब गाँव में नहीं रहेंगे। न्यायोचित नहीं। यह दंपती के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है और जाति के आधार पर उनसे असमान बरताव करता है; कोई समूह ऐसा “अधिकार” नहीं माँग सकता जो व्यक्तियों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित करे।
कार्टून

प्र. “क्या कल तुमने टी.वी. पर ताज़ा तरीन स्टिंग ऑपरेशन देखा? प्रसिद्ध सिने तारिका और नामी अधिकारी के बीच की बातचीत पर मुझे तो यकीन ही नहीं हुआ।” “यह टी.वी. पर सनसनी फैलाने का सस्ता तरीका है। इसके अलावा यह उनके निजता के अधिकार का अतिक्रमण भी है।”

उत्तर: यह कार्टून अधिकारों के साथ आने वाली तीसरी ज़िम्मेदारी को दिखाता है: टकराव की स्थिति में हमें अपने अधिकारों को संतुलित करना होता है। मीडिया की अभिव्यक्ति की आज़ादी किसी के निजता के अधिकार का उल्लंघन करने तक नहीं जाती, ठीक वैसे ही जैसे अध्याय के उदाहरण में अपने घर में नहाते हुए किसी व्यक्ति की उसकी इजाज़त के बिना तस्वीर लेकर इंटरनेट पर डालना उसके गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन होगा। अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए मैं दूसरों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकता।

वाद-विवाद-संवाद

प्र. किसी व्यक्ति के अधिकार वहाँ खत्म हो जाते हैं, जहाँ दूसरे व्यक्ति की नाक शुरू होती है।

उत्तर: पक्ष में तर्क: यह उक्ति अध्याय की इस बात का सार है कि मेरे अधिकार सब के लिए बराबर और एक ही अधिकार के सिद्धांत से सीमाबद्ध हैं; मैं स्वतंत्र भाषण के अधिकार का इस्तेमाल अपने पड़ोसी की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने में नहीं कर सकता, और अगर मैं चाहता हूँ कि मेरी पसंद का सम्मान हो तो मुझे दूसरों की पसंद का भी सम्मान करना होगा। विपक्ष में, या इसमें जोड़ते हुए: मेरे अधिकार और दूसरे की “नाक” के बीच की रेखा हमेशा साफ़ नहीं होती, कभी-कभी अधिकार टकराते हैं (जैसे अभिव्यक्ति और गोपनीयता) और उन्हें संतुलित करना पड़ता है, और दूसरों की सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंध ख़ुद अधिकारों के लिए ख़तरा बन सकते हैं, इसलिए नागरिकों को चौकस रहना होता है। अधिकार कभी संपूर्ण-सर्वोच्च नहीं हो सकते, पर बिना ठोस कारण उनमें कटौती भी नहीं होनी चाहिए। अपनी राय कारण के साथ लिखिए।