कक्षा 11 राजनीति विज्ञान बुक 2 अध्याय 8 धर्मनिरपेक्षता MCQ / वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर सहित

इस अध्याय के 19 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, हर परीक्षा-शैली में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।

1 सीधे प्रश्न

सीधे प्रश्न
  1. 1 अंकधर्मनिरपेक्षता सबसे पहले और मुख्य रूप से किस चीज़ का विरोध करती है?
    (क) आर्थिक असमानता का(ख) अंतर-धार्मिक वर्चस्व का(ग) भाषाई भेदभाव का(घ) क्षेत्रीय असंतुलन का
  2. 1 अंकपाठ्यपुस्तक के अनुसार जब कोई धर्म संगठन में बदलता है, तो आमतौर पर उस पर कौन हावी हो जाता है?
    (क) सबसे रूढ़िवादी हिस्सा(ख) सबसे उदार हिस्सा(ग) युवा वर्ग(घ) महिलाएँ
  3. 1 अंकपाठ्यपुस्तक के अनुसार पाकिस्तान का आधिकारिक राजधर्म क्या है?
    (क) शिया इस्लाम(ख) ईसाई धर्म(ग) सुन्नी इस्लाम(घ) कोई राजधर्म नहीं है
  4. 1 अंक‘अतातुर्क’ नाम का क्या अर्थ है?
    (क) तुर्की का सम्राट(ख) तुर्की का सेनापति(ग) तुर्कों का पिता(घ) तुर्की का धर्मगुरु
  5. 1 अंकभारतीय धर्मनिरपेक्षता की पहली भिन्नता किससे जुड़ी है?
    (क) केवल अंतर-धार्मिक वर्चस्व के विरोध से(ख) हिंदुओं-मुसलमानों-ईसाइयों के भीतर वर्चस्व और बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक ख़तरे, दोनों के समान विरोध से(ग) केवल बहुसंख्यक अधिकारों से(घ) केवल आर्थिक समानता से
  6. 1 अंकअस्पृश्यता पर प्रतिबंध राज्य के किस प्रकार के जुड़ाव का उदाहरण है?
    (क) सकारात्मक जुड़ाव का(ख) धार्मिक जुड़ाव का(ग) नकारात्मक जुड़ाव (धार्मिक अत्याचार-विरोध) का(घ) कोई जुड़ाव नहीं

2 अभिकथन-कारण

अभिकथन-कारण
  1. 1 अंकअभिकथन (A): पश्चिमी मॉडल में राज्य-समर्थित धार्मिक सुधार के लिए कोई जगह नहीं है।
    कारण (R): यह विशेषता इस समझ से निकलती है कि राज्य-धर्म का अलगाव पारस्परिक निषेध का रिश्ता है।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से A की व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता(ग) A सत्य है, R असत्य है(घ) A असत्य है, R सत्य है
  2. 1 अंकअभिकथन (A): धर्म और राज्य का संबंध-विच्छेद धर्मनिरपेक्ष राज्य के लिए पर्याप्त शर्त है।
    कारण (R): कई ग़ैर-धर्मतांत्रिक राज्य भी किसी खास धर्म के साथ घनिष्ठ गठजोड़ बनाए रखते हैं, जैसे 16वीं सदी का इंग्लैंड।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से A की व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता(ग) A सत्य है, R असत्य है(घ) A असत्य है, R सत्य है
  3. 1 अंकअभिकथन (A): अतातुर्क की धर्मनिरपेक्षता संगठित धर्म से सैद्धांतिक दूरी पर आधारित थी।
    कारण (R): अतातुर्क ने खिलाफ़त को समाप्त किया और फ़ेज़ टोपी पर प्रतिबंध लगाया।

    (क) A और R दोनों सत्य हैं, और R सही ढंग से A की व्याख्या करता है(ख) A और R दोनों सत्य हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता(ग) A सत्य है, R असत्य है(घ) A असत्य है, R सत्य है

3 सुमेलन कीजिए

सुमेलन कीजिए
  1. 1 अंकसुमेलित करें:
    (1) मध्यकालीन यूरोप (2) पाकिस्तान (3) 16वीं सदी इंग्लैंड (4) तालिबानी राज्यसत्ता
    (i) सुन्नी इस्लाम राजधर्म (ii) पोप की राज्यसत्ता (iii) आंग्ल चर्च का पक्षपोषण, धर्मतांत्रिक नहीं (iv) हाल के समय का धर्मतांत्रिक राज्य

    (क) 1-i, 2-ii, 3-iv, 4-iii(ख) 1-ii, 2-i, 3-iii, 4-iv(ग) 1-iii, 2-iv, 3-ii, 4-i(घ) 1-iv, 2-iii, 3-i, 4-ii

4 कथन आधारित प्रश्न

कथन आधारित प्रश्न
  1. 1 अंककथन I: धर्मनिरपेक्षता अंतर-धार्मिक वर्चस्व का विरोध करती है।
    कथन II: धर्मनिरपेक्षता अंतःधार्मिक वर्चस्व का भी उतना ही विरोध करती है।

    (क) दोनों कथन सत्य हैं(ख) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ग) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(घ) दोनों कथन असत्य हैं
  2. 1 अंककथन I: नेहरू धर्म और राज्य के बीच पूर्ण संबंध-विच्छेद के पक्ष में थे।
    कथन II: नेहरू धर्मतांत्रिक राज्य के समर्थक थे।

    (क) दोनों कथन सत्य हैं(ख) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ग) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(घ) दोनों कथन असत्य हैं
  3. 1 अंककथन I: वोट-बैंक की राजनीति तब समस्या बनती है जब यह पूरे समूह को एक इकाई की तरह मतदान के लिए एकजुट करती है।
    कथन II: भारत में वोट-बैंक की राजनीति कभी-कभी अल्पसंख्यक तुष्टीकरण से भी जुड़ी है।

    (क) दोनों कथन सत्य हैं(ख) कथन I सत्य है, कथन II असत्य है(ग) कथन I असत्य है, कथन II सत्य है(घ) दोनों कथन असत्य हैं

5 सही क्रम में लगाइए

सही क्रम में लगाइए
  1. 1 अंकइन्हें अध्याय में आने वाले सही क्रम में लगाएँ:
    (i) धर्मनिरपेक्ष राज्य की अवधारणा
    (ii) धर्मनिरपेक्षता क्या है
    (iii) भारतीय मॉडल
    (iv) आलोचनाएँ

    (क) ii, i, iii, iv(ख) i, ii, iii, iv(ग) ii, iii, i, iv(घ) iv, iii, ii, i

6 रिक्त स्थान

रिक्त स्थान
  1. 1 अंकभारतीय धर्मनिरपेक्षता की केंद्रीय अवधारणा _______ कहलाती है।
    (क) पारस्परिक निषेध(ख) पूर्ण पृथक्करण(ग) राजधर्म(घ) सैद्धांतिक दूरी

7 असंगत चुनिए

असंगत चुनिए
  1. 1 अंकनिम्न में से कौन-सा भारतीय राज्य के सकारात्मक जुड़ाव का उदाहरण नहीं है?
    (क) अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को सहायता(ख) अस्पृश्यता पर प्रतिबंध(ग) धार्मिक अल्पसंख्यकों को संस्था खोलने की अनुमति(घ) शिक्षण संस्थाओं के लिए वित्तीय सहयोग

8 गद्यांश आधारित प्रश्न

गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
धर्मनिरपेक्षता सर्वप्रथम और सर्वप्रमुख रूप से ऐसा सिद्धांत है जो अंतर-धार्मिक वर्चस्व का विरोध करता है। यह इसका केवल एक पहलू है; इसका दूसरा उतना ही महत्त्वपूर्ण पहलू अंतःधार्मिक वर्चस्व का विरोध करना है। धर्मनिरपेक्षता ऐसा नियामक सिद्धांत है जो एक ऐसा समाज बनाना चाहता है जो अंतर-धार्मिक और अंतःधार्मिक, दोनों तरह के वर्चस्वों से मुक्त हो।
  1. 1 अंकगद्यांश 1 के अनुसार धर्मनिरपेक्षता किस तरह का समाज बनाना चाहती है?
    (क) केवल एक धर्म वाला समाज(ख) अंतर-धार्मिक और अंतःधार्मिक, दोनों वर्चस्वों से मुक्त समाज(ग) पूर्णतः धर्म-रहित समाज(घ) केवल आर्थिक रूप से समान समाज
गद्यांश
जब एक विद्यार्थी ने नेहरू से पूछा कि आज़ाद भारत में धर्मनिरपेक्षता का क्या मतलब होगा, तो उन्होंने जवाब दिया: सभी धर्मों को राज्य द्वारा समान संरक्षण। वे ऐसा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र चाहते थे जो सभी धर्मों की हिफ़ाज़त करे, अन्य धर्मों की क़ीमत पर किसी एक धर्म की तरफ़दारी न करे, और स्वयं किसी धर्म को राजधर्म के तौर पर स्वीकार न करे।
  1. 1 अंकगद्यांश 2 के अनुसार नेहरू धर्मनिरपेक्ष राज्य से धर्मों के प्रति कैसा बर्ताव चाहते थे?
    (क) धर्म को राजनीति से जोड़े(ख) किसी एक धर्म को राजधर्म बनाए(ग) सभी धर्मों की हिफ़ाज़त करे, किसी की तरफ़दारी न करे और किसी धर्म को राजधर्म न बनाए(घ) सभी धर्मों को समाप्त कर दे

9 सत्य-असत्य

सत्य-असत्य
  1. 1 अंकनिम्न कथनों पर विचार कीजिए।
    (i) नेहरू स्वयं किसी धर्म का अनुसरण नहीं करते थे।
    (ii) नेहरू भारतीय धर्मनिरपेक्षता के दार्शनिक माने जाते हैं।

    (क) केवल (i) सत्य है(ख) दोनों सत्य हैं(ग) केवल (ii) सत्य है(घ) दोनों असत्य हैं
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
  1. (ख) धर्मनिरपेक्षता सर्वप्रथम और सर्वप्रमुख रूप से अंतर-धार्मिक वर्चस्व (एक धर्म का दूसरे धर्म पर वर्चस्व) का विरोध करने वाला सिद्धांत है।
  2. (क) जब कोई धर्म एक संगठन में बदलता है तो आमतौर पर उसका सर्वाधिक रूढ़िवादी हिस्सा उस पर हावी हो जाता है, जो असहमति बर्दाश्त नहीं करता।
  3. (ग) पाठ्यपुस्तक कहती है कि आज सुन्नी इस्लाम पाकिस्तान का आधिकारिक राजधर्म है।
  4. (ग) मुस्तफ़ा कमाल ने अपना नाम बदलकर कमाल अतातुर्क रख लिया, जिसका अर्थ है ‘तुर्कों का पिता’।
  5. (ख) पहली भिन्नता यह है कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों के भीतर के वर्चस्व, तथा बहुसंख्यक द्वारा अल्पसंख्यक पर संभावित ख़तरे, दोनों का समान रूप से विरोध करती है।
  6. (ग) अस्पृश्यता पर प्रतिबंध राज्य के नकारात्मक जुड़ाव का उदाहरण है, यानी धार्मिक अत्याचार का विरोध करने वाला हस्तक्षेप।
अभिकथन-कारण
  1. (क) A और R दोनों सत्य हैं। पारस्परिक निषेध के तहत राज्य धर्म के मामलों से पूरी तरह अलग रहता है, इसलिए धार्मिक सुधार का मामला भी उसकी पहुँच से बाहर ही रहता है, यही A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. (घ) A असत्य है, धर्म-राज्य का संबंध-विच्छेद ज़रूरी तो है पर पर्याप्त नहीं। R सत्य है और यही दिखाता है कि केवल संबंध-विच्छेद पर्याप्त क्यों नहीं है।
  3. (घ) A असत्य है, अतातुर्क की धर्मनिरपेक्षता सैद्धांतिक दूरी नहीं बल्कि धर्म में सक्रिय हस्तक्षेप और दमन पर आधारित थी। R सत्य है, ये दोनों घटनाएँ वास्तव में हुईं, इसीलिए A असत्य होते हुए भी R सत्य है।
सुमेलन कीजिए
  1. (ख) मध्यकालीन यूरोप में पोप की राज्यसत्ता थी (ii); पाकिस्तान में सुन्नी इस्लाम राजधर्म है (i); 16वीं सदी इंग्लैंड आंग्ल चर्च का पक्षपोषण करता था पर धर्मतांत्रिक नहीं था (iii); तालिबानी राज्यसत्ता पाठ्यपुस्तक में हाल के समय के धर्मतांत्रिक राज्य का उदाहरण है (iv)।
कथन आधारित प्रश्न
  1. (क) दोनों कथन सत्य हैं। धर्मनिरपेक्षता अंतर-धार्मिक वर्चस्व का पहला और मुख्य विरोध करती है, और अंतःधार्मिक वर्चस्व का उतना ही महत्त्वपूर्ण दूसरा विरोध भी करती है।
  2. (घ) दोनों कथन असत्य हैं। नेहरू न तो पूर्ण संबंध-विच्छेद के पक्ष में थे (वे सामाजिक सुधार के लिए हस्तक्षेप के समर्थक थे), न ही वे धर्मतांत्रिक राज्य के समर्थक थे।
  3. (क) दोनों कथन सत्य हैं। समूह को एक अखंड इकाई बना देने से चुनावी राजनीति विकृत होती है, और भारत में यह अल्पसंख्यक तुष्टीकरण से भी जुड़ी पाई गई है।
सही क्रम में लगाइए
  1. (क) अध्याय पहले धर्मनिरपेक्षता क्या है (ii) समझाता है, फिर धर्मनिरपेक्ष राज्य (i), फिर पश्चिमी मॉडल के बाद भारतीय मॉडल (iii), और अंत में आलोचनाएँ (iv)।
रिक्त स्थान
  1. (घ) भारतीय धर्मनिरपेक्षता की केंद्रीय अवधारणा सैद्धांतिक दूरी है, जो पश्चिमी पारस्परिक निषेध से भिन्न है।
असंगत चुनिए
  1. (ख) अस्पृश्यता पर प्रतिबंध राज्य के नकारात्मक जुड़ाव (धार्मिक अत्याचार-विरोध) का उदाहरण है, बाक़ी तीनों सकारात्मक जुड़ाव (सहयोग) के उदाहरण हैं।
गद्यांश आधारित प्रश्न
  1. (ख) गद्यांश स्पष्ट करता है कि धर्मनिरपेक्षता एक ऐसा समाज बनाना चाहती है जो अंतर-धार्मिक और अंतःधार्मिक, दोनों तरह के वर्चस्वों से मुक्त हो।
  2. (ग) गद्यांश 2 के अनुसार नेहरू ऐसा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र चाहते थे जो सभी धर्मों की हिफ़ाज़त करे, अन्य धर्मों की क़ीमत पर किसी एक धर्म की तरफ़दारी न करे, और स्वयं किसी धर्म को राजधर्म के तौर पर स्वीकार न करे।
सत्य-असत्य
  1. (ख) दोनों कथन सत्य हैं। नेहरू स्वयं किसी धर्म का अनुसरण नहीं करते थे और ईश्वर में विश्वास नहीं रखते थे, और उन्हें भारतीय धर्मनिरपेक्षता का दार्शनिक माना जाता है।